शोर आपके मूड पर कैसा असर डालता है

30 अगस्त, 2020
शोर आपके मूड और श्रवण तंत्र पर कैसे असर डालता है। शोर के असर से मूड खराब होने से लेकर बहरापन तक आ सकता है। अधिक जानकारी के लिए पढ़ें!
 

हाल के वर्षों में विज्ञान ने जो कुछ पता लगाया है, उसके अनुसार शोर मूड को प्रभावित करता है। सबसे पहले हमें ध्यान देना चाहिए कि बहुत ज्यादा शोर से बहरापन पैदा होता है और यह समस्या कई मनोवैज्ञानिक समस्याओं को पैदा करती है।

दूसरे अपने दम पर शोर मस्तिष्क में एक आक्रामक उत्तेजना पैदा करता है। घंटियाँ, सींग, सायरन और जैसे रिंग अलार्म की घंटी शरीर को सतर्क करती है। नतीजे में तनाव में बढ़ोतरी होती है, मुख्य समस्या में से एक है मूड पर असर।

इसके अलावा अतिरिक्त ध्वनियाँ मस्तिष्क को ओवरस्टिम्यूलेट करती हैं। शोर लगभग हमेशा तमाम डेली एक्टिविटी में मौजूद होता है। यह आपके मस्तिष्क को एक साथ कई पहलुओं पर ध्यान केंद्रित कराता है और इस तरह मानसिक प्रदर्शन को प्रभावित करता है। यह दूसरा तरीका है जिससे शोर मूड पर असर डालता है।

शोर आपके मूड पर कैसा असर डालता है

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसा नॉइज़ लेवल 65 डेसिबल से अधिक नहीं होना चाहिए। इस लेवल से ज्यादा होने से लोगों के सामाजिक व्यवहार पर नेगेटिव असर पड़ता है। विशेष रूप से यह एंग्जायटी, चिड़चिड़ापन और असहायता की भावनाओं को बढ़ाता है।

इसी तरह उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार दस में से सात लोग इस बात की पुष्टि करते हैं कि शोर उन्हें ध्यान केंद्रित करने की सहूलियत नहीं देता है। शोर अटेंशन की अवधि को प्रभावित करता है और लॉन्ग टर्म में सीखने और मेमोरी प्रॉब्लम को भी जन्म दे सकता है। परिवेश में बहुत शोर होने पर ज्यादातर लोग मूडी महसूस करते हैं।

आराम पर नेगेटिव असर भी शोर से होता है। सोते रहने के लिए लोगों को शांत वातावरण चाहिए। यदि वातावरण में आवाज़ें ज्यादा हैं तो अनिद्रा आती है या आराम में रुकावट होती है। इसके कई मनोवैज्ञानिक और शारीरिक नतीजे होते हैं।

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श्रवण अंग

 

जिस तरह से शोर मूड को प्रभावित करता है उससे श्रवण यंत्र का सम्बन्ध है। विज्ञान ने यह स्थापित किया है कि किसी घर, किसी इमारत या किसी भी निर्माण में मौजूद ध्वनिक गुण सीधे लोगों की भावनाओं पर असर डालते हैं।

इस मामले में एक्सपर्ट बताते हैं कि जिस तरह से एक संरचना का निर्माण किया जाता है वह इसके ध्वनिक गुणों को निर्धारित करता है। और ये गुण, लोगों के मूड को सीधे प्रभावित करते हैं। श्रवण आर्किटेक्चर किसी जगह की डिजाइन और इसमें लगी सामग्री से जुडी होती है।

इस के विद्वानों में से एक ट्रेवर कॉक्स, जो ब्रिटेन के मैनचेस्टर में सलफोर्ड विश्वविद्यालय में एक ध्वनिक इंजीनियर हैं, बताते हैं कि तुर्की में मौजूद हेजिया सोफिया जैसी संरचनाएं एक ऐसी ध्वनिक सौंदर्य हैं, कि जब आप इनके अन्दर कदम रखते हैं, आपको शांति और आध्यात्मिकता की भावना महसूस होती है।

इस बारे में एक अध्ययन से पता चला है कि 110 हर्ट्ज के टोन को थोड़े समय सुनने से स्पीच सेंटर में गतिविधियां कम हो जाती है और अमूर्तता और रचनात्मकता से जुड़े मस्तिष्क के क्षेत्रों की गतिविधियों  बढ़ जाती है।

संगीत, शोर और मूड

ध्वनियों का प्रभाव इतना अहम है कि इस विषय में संगीत-आधारित अध्ययन और चिकित्सा को समर्पित पूरा का पूरा एक विज्ञान है। इस संबंध में यूनिवर्सिटी ऑफ बारी (इटली) और हेलसिंकी (फिनलैंड) विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक अध्ययन ने संकेत दिया कि संगीत भावनाओं की बायोकेमिस्ट्री को बदलता है।

जर्नल नेचर में प्रकाशित होने वाले अध्ययन से संकेत मिलता है कि संगीतमय उत्तेजना से डोपामाइन रिसेप्टर्स में बदलाव देखे गए थे। यह अध्ययन वह पहला दृष्टिकोण है जो मूड की गड़बड़ियों के लिए नॉन-फार्माकोलॉजिकल इलाज की तलाश करना चाहता है।

वास्तव में, अल्जाइमर या पार्किंसंस रोगियों में म्यूजिक थेरेपी का उपयोग किया जा रहा है, जिसके अच्छे परिणाम मिले हैं। इसलिए यदि संगीत में वह ताकत है तो यह स्पष्ट है कि शोर दूसरे तरह से मूड को भी प्रभावित करता है।

 

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रोकथाम और सिफारिशें

बड़े शहरों में ध्वनि प्रदूषण की समस्या है। आदर्श रूप से, सभी को अपनी डेली लाइफ में नॉइज़ लेवल को कम करने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए। स्वैच्छिक क्रियाएं जैसे कि जरूरी न हो तो हॉर्न न बजाना, तेज संगीत से बचना या बहुत तेज बोलने से बचना सही मायने में मददगार होते हैं।

इसके अलावा, लोगों के लिए यह जरूरी है कि जब शोर वाले वातावरण में शोर को नियंत्रित करना असंभव हो, तो श्रवण सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करें। इसी तरह नियमित रूप से शोर-शराबे से मुक्त स्थानों पर जाना महत्वपूर्ण है।

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