अवसाद (डिप्रेशन) : जिसकी 5 बातों को आप तो जानते हैं, बाहरी लोग नहीं जानते

22 फ़रवरी, 2019
उन तमाम पूर्व धारणाओं को भूल जाइए जो अवसाद या डिप्रेशन के बारे में आपने बनायी थी। यह समझ लीजिये कि जो व्यक्ति उदास है, अवसाद में है, यह उसकी अपनी पसंद नहीं है; यह एक मानसिक बीमारी है।

‘हां, आप अवसाद में हैं ‘ आपके मनोविज्ञानी या मनोचिकित्सक ने एक समय जो शब्द कहे हैं, वे संभवतः एक निदान कि पुष्टि करते हैं। वह यह  कि आपने आखिरकार जब मदद मांगी, तो उससे बहुत पहले से ही आप इसे जानते थे। जैसे-जैसे वे ज्यादा से ज्यादा भारी हो गए, आप अवसाद के संकेतों की पहचान करने में पहले से ही सक्षम थे।

अवसाद की दर लगातार बढ़ती रहती है। हमारा समाज जितना अधिक सामाजिक और तकनीकी रूप से प्रगति कर रहा है, हम आनंद से उतनी ही दूर हो रहे हैं।

वास्तव में, अवसाद झेल रहे लोगों की एक आम शिकायत है कि मानसिक बीमारियों को कैसे इतना तुच्छ समझा जाता है

इसका निदान और इलाज ठीक उसी तरह महत्वपूर्ण है जैसे कि डॉक्टर आपसे बता रहे थे कि आपको उच्च रक्तचाप या गठिया है।

कभी-कभी हम सभी जो अपने व्यक्तिगत अंधकार पूर्ण दुनिया या ब्लैक होल से बाहर निकलने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं वे अनिवार्य तौर पर एक ऐसे सामाजिक ढांचे का सामना करते हैं, जो अभी भी अवसाद को एक साधारण समस्या के रूप में देखता है, मानो फार्मेसी की ट्रिप में ही इसे हल कर लेंगे।

असल में बात यह है कि हम एक ऐसे विषय पर बात कर रहे हैं जो जितना नाजुक है उतना ही जटिल भी। हम आपको आमंत्रित करते हैं, आइये इस विषय पर साथ-साथ सोचें। अगर आपने कभी अवसाद पर अध्ययन किया हो तो इन 5 पहलुओं से आप सुपरिचित होंगे।

1. मैंने हार नहीं मानी है, मैं कमजोर नहीं हूँ

अवसाद (डिप्रेशन)

एक‌‌ बात जिसे अवसाद से पीड़ित व्यक्ति समझता है, लेकिन जिसे यह नहीं है, वह नहीं समझ पाता कि यह मानसिक विकार आपको इसलिए नहीं होता कि आपने हार मान ली या जीवन का सामना नहीं किया है।

  • कुछ बातें जानने की जरूरत है कि जो लोग ‌अवसाद‌ग्रस्त हैं वे इसके लिए खुद को दोषी ठहराते हैं
  • अगर आप उसे ‘जाने दो ‘ कह कर बाध्य करते हैं कि यह उसका ही दोष है, तो आप उसके अपराध को कुरेदते हैं।
  • किसी व्यक्ति की निजी परिस्थितियां चिंता और अवसाद से भरी हों या उत्प्रेरक की तरह काम करती हों तो लक्षण और भी खराब हो जाते हैं।
  • यह एक मानसिक विकार है जो तनावपूर्ण वातावरण की अनुचित प्रतिक्रिया के कारण अपने आप उत्पन्न नहीं होता। यह समय के साथ बनता है।

ज़्यादातर मामलों में डिप्रेशन के विभिन्न कारण होते हैं।

यहाँ तक कि यह किसी न्यूरोट्रांसमीटर की कमी के कारण बायोलॉजिकल भी हो सकता है।

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2. नहीं, मैं एक महीने में बेहतर नहीं हो सकता, और मेरा इलाज अब सिर्फ प्रार्थना है

अवसाद (डिप्रेशन) : मैंने हार नहीं मानी है

लोगों की एक और गलत धारणा है कि इन मनोवैज्ञानिक प्रक्रियाओं को केवल कुछ गोलियां के साथ ही हल किया जा सकता है।

  • दवा से ही इस समस्या का स्वयं समाधान नहीं हो जाता।
  • हमारा समाज ऊँचे कोलेस्ट्रॉल और कम पॉजिटिव है। इनमें से कोई भी एक गोली निगल लेने से ठीक नहीं होता।
  • हम ऐसी किसी बीमारी की बात नहीं कर रहे जिसका इलाज होते ही कुछ महीनों में खत्म हो जाती है।
  • अवसाद आमतौर पर बारम्बार होनेवाली बीमारी है। इसका मतलब है कि आपको एक समुचित मनोवैज्ञानिक योजना बनानी पड़ेगी ताकि आप स्थितियों को संभालने के लिए तकनीक का जीवन में नियमित प्रयोग कर सकें।

यही कारण है कि इसमें आपके परिवार और दोस्तों का सहारा चाहिए

अगर वे वही पुरानी बातें दुहराते रहें ‘कैसे हैं आप? चिंता न करें, आप अगले महीने तक इस पर काबू पा लेंगे’  तो वे बस आपकी चिंता को ही बढ़ाएंगे।

3. मैं अवसाद में हूं, इसका कारण उदासी नहीं है

मैं अवसाद में हूं, इसका कारण उदासी नहीं है

डिप्रेशन से उदासी को जोड़ना एक पारंपरिक गलती है। हमें ज़रूरत है कुछ बातों को स्पष्ट कर लेने की।

  • उदासी एक मनोभाव है जो नकारात्मक परिस्थितियों की अनुभूति पर आधारित है : जैसे – किसी प्रिय व्यक्ति को खो देना, हम जो चीज चाह रहे होते हैं, वैसा न होना।
  • उदासी आती-जाती रहती है। यह खुशी, घृणा, क्रोध की तरह है।
  • लेकिन अवसाद एक बीमारी है और यह दुख के रूप में बार-बार उपजे विचारों को मजबूर करता है। लेकिन आत्मघाती कल्पनाओं, चीजों में रुचि की कमी, डर, अपराधबोध जैसी बातों से भी बचाता है।
  • यह एक बहुत ही जटिल और निजी उलझन है, जहां अंधेरे में सिर्फ एक ही रास्ता है – उदासी

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4. मैं अकेला रहना चाहता हूं, लेकिन मैं नहीं चाहता कि तुम चले जाओ

अवसाद में हूं

अवसाद का एक दूसरा पहलू भी है। बहुत से लोग इस परस्पर विरोधी भाव को नहीं समझ पाते कि एक ही वक़्त में वे अकेले भी रहना चाहते हैं और दूसरों का साथ भी चाहते हैं।

यह मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक वास्तविकता कुछ भी नहीं है जो इस रोग से पीड़ित व्यक्ति जोर से कहेगा।

अतः ऐसे व्यक्ति के आसपास रहनेवालों के लिए यह जरूरी है कि वे सहज, ग्रहणशील, सहायक और गैर-आलोचनात्मक रहकर उनकी मदद करें।

5. यह सब मेरे दिमाग में नहीं है

अवसाद : depression

हमें यकीन है कि अब भी बहुत से लोग हैं ज्जिन्हें थकावट, पुराने तनाव या लगातार अनिद्रा का अनुभव नहीं हैं जो धीरे-धीरे अवसाद को बढ़ा सकते हैं।

  • यह सिर्फ आपके सिर में नहीं है। कभी-कभी यह रोग थके हुए शरीर, रासायनिक तौर पर असंतुलित दिमाग, या फिर फाइब्रोमायेल्जिया जैसे विकारों में भी होता है।

जब आपका शरीर पीड़ित हो तो आपका दिमाग भी पीड़ित होता है। इसे आप भूल नहीं सकते। इन बातों का आप ख्याल रखें तो आप अवसाद से ग्रसित लोगों के साथ अधिक हमदर्दी के साथ पेश आने के काबिल हो जाएंगे।