डिप्रेशन से पीड़ित लोगों के लिए स्टीफन हॉकिंग का संदेश

12 सितम्बर, 2018
अपनी शारीरिक सीमाओं के बावजूद स्टीफन हॉकिंग समस्याओं का सफलतापूर्वक मुकाबला करने और आगे बढ़ने की ताकत की मिसाल थे। उन्होंने अपनी शारीरिक दशा को अपनी मानसिक स्थिति पर हावी नहीं होने दिया।

स्टीफन हॉकिंग हमारे समय के सबसे प्रशंसनीय पुरुषों में से एक थे। वे न सिर्फ़ सबसे बुद्धिमान लोगों में से एक है बल्कि विजय और ज़िन्दगी की एक मिसाल भी थे। उन्होंने जो लोग डिप्रेशन में हैं, उनको एक संदेश दिया है।

उनका जन्म 8 जनवरी, 1942 में ऑक्सफोर्ड, इंग्लैंड में हुआ था। वे थियरिटिकल फिजिक्स में अपनी खोज़ के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं।

बचपन में उनका सपना गणित पढ़ने का था। लेकिन जीवन के विभिन्न कारणों की वजह से जब वे विश्वविद्यालय पहुंचे तो उन्होंने इसकी जगह नेचुरल साइंस पढ़ने का फैसला किया।

कैम्ब्रिज में अपने पहले वर्ष के दौरान, युवा हॉकिंग जब मात्र 21 वर्ष के थे, एमियोट्रोफिक लेटेरल स्क्लेरोसिस (एएलएस) नाम की बीमारी के लक्षणों को महसूस करना शुरू किया। इसने हमेशा के लिए उनके जीवन को बदल दिया।

उस समय डॉक्टरों ने अनुमान लगाया कि उनका अधिकतम जीवन अगले ढाई साल तक जारी रहेगा लेकिन हॉकिंग ने इन अपेक्षाओं को पार कर लिया और विज्ञान में सबसे अहम लोगों में से एक बन गये।

अपनी शारीरिक स्थिति के बावजूद हॉकिंग ने दुनिया भर में  सैकड़ों भाषण दिए हैं। उन्होंने लाखों डॉक्यूमेंट्री और किताबों में अपना ज्ञान शेयर किया है जो कई नयी स्टडी में काम आया है।

लेकिन ब्रह्मांड कैसे काम करता है, इनके बारे में जानने के अलावा वे ज़िन्दगी और उसके सबसे कठिन चरण जिसका अनुभव इंसान कर सकते हैं, के बारे में भी जानते थे।

एक सम्मेलन में उन्होंने डिप्रेशन के बारे में बात की थी और अपने जीवन के आधार पर स्पष्ट उदाहरणों के साथ दिलचस्प निष्कर्ष निकाले।

स्टीफन हॉकिंग डिप्रेशन से पीड़ित लोगों को एक सुंदर संदेश देते हैं

स्टीफन हॉकिंग बढती उम्र के बावजूद सिखाने, शोध करने और पूरी दुनिया के साथ सुंदर, चिंतनशील संदेश शेयर करने का काम करते रहे थे।

विभिन्न अवसरों पर उन्होंने बताया कि बीमारी की डायग्नोसिस ने ज़िन्दगी से उनकी अपेक्षाओं को शून्य में बदल दिया था। लेकिन अब उन्हें एहसास होता है कि तब से उनके जीवन का हर पहलू फायदेमंद रहा है।

उन्होंने अपने पूरे जीवन को वैज्ञानिक अध्ययन और ब्रह्मांड से जुड़े सवालों के जवाब की खोज में समर्पित किया।

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वे बोल नहीं सकते हैं और न ही हिल सकते हैं। वे व्हीलचेयर का इस्तेमाल करते हैं। इन सबके बावजूद उन्होंने पूरी दुनिया के साथ संवाद करने और लोगों को प्रेरित करने का एक तरीका ढूंढ लिया।

पिछली जनवरी में लंदन के रॉयल इंस्टीट्यूशन की एक चर्चा में हॉकिंग ने ब्लैक होल की तुलना डिप्रेशन से की और यह स्पष्ट किया कि उन दोनों से बचना नामुमकिन नहीं है।

“इस सम्मेलन का संदेश यह है कि ब्लैक होल इतने काले नहीं होते हैं जितना कि उन्हें समझा जाता है। वे अनंत जेल नहीं हैं जैसा कि हम पहले सोचते थे।

ब्लैक होल में से चीजें बाहर निकल सकती हैं और संभवत: किसी दूसरे ब्रह्मांड में जा सकती हैं। इसलिए अगर आपको लगता है कि आप ब्लैक होल में हैं तो हार न मानें; आप बाहर निकल सकते हैं।”

अपनी अक्षमता के बारे में उनके विचार

अपनी विकलांगता के संदर्भ में उन्होंने आगे कहा:

“पीड़ित को हमेशा, अगर वह चाहे तो, अपने जीवन को समाप्त करने का अधिकार होता है। लेकिन मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ी गलती है। जीवन चाहें कितना भी बुरा हो उसमें हमेशा कुछ ऐसा होता है जो आप कर सकते हैं और सफल हो सकते हैं।

जीवन है, तो आशा है।

यदि आप अक्षम हैं तो शायद यह आपकी गलती नहीं है। लेकिन दुनिया को दोष देना या उससे दया की उम्मीद करना ठीक नहीं है।

आपको एक पॉजिटिव एटीच्यूड रखना चाहिए और जो भी परिस्थिति मिलती है उसमें से सबसे ज्यादा लेना चाहिए; अगर आपको कोई शारीरिक अक्षमता है तो आप अपने को मनोवैज्ञानिक पंगु न बनने दें।”

स्टीफन हॉकिंग ने वैज्ञानिक दिमागों को प्रेरित करने का काम जारी रखा। साथ ही वे ऐसे लोगों को भी प्रेरणा और संदेश देते रहे जिनको अपने जीवन में किसी न किसी तरह से बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है।

हॉकिंग शारीरिक अक्षमता वाले लोगों के लिए विज्ञान को एक महान क्षेत्र मानते हैं, क्योंकि यह मुख्य रूप से दिमाग को विकसित करता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे में शारीरिक कार्य का सवाल नहीं उठता है लेकिन सैद्धांतिक कार्य आदर्श है।

उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने प्रियजनों, सहयोगियों और छात्रों की मदद से बहुत कुछ हासिल किया।

“मुझे लगता है, आम तौर पर लोग मदद करना चाहते हैं लेकिन आपको उन्हें यह महसूस कराने की जरूरत है कि आपकी मदद करने के उनके प्रयास मायने रखते हैं।”

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स्टीफन की बेटी लूसी हॉकिंग ने अपने पिता के बारे में उनके जीवनकाल में कहा था:

“उनकी आगे बढ़ते रहने की एक बहुत ही ईर्ष्यापूर्ण इच्छा है, और उनके पास अपनी सारी ताकत, अपनी सारी ऊर्जा, अपनी सारी मानसिक एकाग्रता को अपने आगे बढ़ने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक साथ शामिल करने की क्षमता है।

लेकिन न केवल आगे बढ़ने और जीवित रहने के लिए बल्कि श्रेष्ठ होने के लिए भी। वे असाधारण काम कर रहे हैं – वे किताबें लिखते हैं, सम्मेलनों में भाग लेते हैं, न्यूरोडिजेनरेटिव बीमारियों और अन्य अक्षमताओं वाले लोगों को प्रेरित करते हैं।”

पिछले कुछ हफ्तों में, स्टीफन हॉकिंग के शब्दों को दुनिया भर में डिप्रेशन और इसकी सीमाओं से पीड़ित लोगों के लिए एक संदेश के रूप में शेयर किया गया है।

  • Larsen, K. (2005). Stephen Hawking: a biography. Greenwood Publishing Group.
  • Ferguson, K. (2011). Stephen Hawking: His life and work. Random House.