अपनी अंतरात्मा दूसरों की राय से ज्यादा अहमियत रखती है

26 अक्टूबर, 2018
किसी भी दूसरी चीज से आपकी अपनी अंतरात्मा अधिक अहमियत रखती है। भरपूर सुख पाने के लिए यह जरूरी है। अपनी मान्यताओं से मार्गदर्शन लें और अन्याय से बचें।

अक्सर कहा जाता है, अपनी साफ़-सुथरी अंतरात्मा से बेहतर सुकून और कुछ भी नहीं है। यह विचार जितना सरल है उतना ही सच है। आपकी अपनी अंतरात्मा ही वह मनोवैज्ञानिक रचना है जो आपको अपनी और अपने आसपास की दुनिया की समझ देती है। हमेशा इसका तालमेल और संतुलन बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए।

आप साधारण तालमेल की एक स्थिति हासिल कर लेते हैं। तब हर चीज जो आप कहते हैं या करते हैं वह आपकी मूलभूत मान्यताओं से तालमेल रखती है। इसका मतलब है, दूसरों के विचारों और दबावों की तुलना में आपकी अपनी अंतरात्मा अधिक अहमियत रखती है।

आप यह जरूर जानते होंगे, अपनी अंतरात्मा साफ रखने के लिए कभी-कभी व्यक्तिगत लड़ाइयाँ लड़नी पड़ती हैं। यह आपको कुछ विशेष वातावरण और सोशल ग्रुप से दूर ले जाएँगी।

आत्मा के इस अंतरंग और शक्तिशाली भाग के लिए आपको अलग-अलग स्तरों से होकर गुज़रना पड़ेगा। इससे आप धीरे-धीरे समझने लगेंगे कि क्या ज्यादा अहम है और क्या कम।

हमारी गुजारिश है, आज आप इस पर चिंतन करें।

साफ अंतरात्मा की ताकत

कुछ लोगों की अपनी अंतरात्मा साफ नहीं होती। कुछ लोग रात को अच्छी नींद नहीं ले पाते क्योंकि उनकी अपनी अंतरात्मा शांत नहीं है।

उन्हें माफ नहीं किया गया है। उन्होंने गलत काम किए हैं। जब उनसे कुछ मांग की गई तब उन्होंने घुटने टेक दिए हैं या भाग गए हैं। बेशक, ये लोग इस गहरी और कभी-कभी पेचीदा बेचैनी से भुगतेंगे।

चेतना का जटिल पर दिलचस्प विचार

विलियम जेम्स चेतना के अध्ययन में प्रधान विशेषज्ञों में से एक थे। वे उन्नीसवीं सदी के अंतिम भाग में यह प्रमुख दार्शनिक और मनोविज्ञानी थे। विलियम जेम्स हेनरी जेम्स के भाई थे। उन्होंने इस धारणा को स्थापित किया कि हमारी चेतना को तीन अवयवों में बांटा जा सकता है।

इम्पिरिकल इगो

यहाँ हम उन सभी पहलुओं को पाते हैं जिन्हें हम अपना बताते हैं। यहीं आत्मसम्मान पैदा होता है। इनके साथ यह भी कि हम क्या हैं, हम क्या पसंद करते हैं और हम किनसे बचते हैं क्योंकि ये हमें दर्द देते हैं।

प्योर इगो

यह ज्यादा आध्यात्मिक और अंतरंग आयाम है। यह हम क्या हैं का अधिक गहरा भाग है और कभी-कभी हमें इसकी पूरी जानकारी नहीं होती।

यह एक प्रवृत्ति है जो जब कुछ हुआ होता है तो हमसे कहती है, “यह ठीक नहीं है।” तब इस पर हमें अवश्य रिएक्ट करना चाहिए।

चेंजिंग इगो

यहाँ आप अपने जीवन चक्र में बदलाव पाते हैं। ये कभी-कभी आपके व्यक्तित्व और चेतना में कुछ विशेष पहलुओं को जोड़ने के लिए कुछ नए उपाय आपके सामने लाते हैं।

कभी न भूलें कि लोग प्रतिदिन विकसित होते हैं और इसे अनुभव करना ही सीखना है।

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अपनी अंतरात्मा - चेतना और अंतरिक्ष

चेतना इन्हीं पहलुओं का एक सुंदर संयोग है।

आपकी मान्यताओं की अपनी प्रणाली है जो समय के साथ बदल सकती है। पर आपके पास एक तरह का “अंदरूनी कम्पास” भी है। यह आपको कुछ परिस्थितियों को बताने में मदद करता है, उदाहरण के लिए, जिन्हें आप अनुचित मानते हैं।

अपनी अंतरात्मा की आवाज नहीं सुनने के खतरे

विलियम जेम्स के कारण हम जानते हैं, चेतना एक ऐसी चीज है जिसकी जड़ें आपके अस्तित्व में हैं। यह आपको बदलने और सीखने की अनुमति देती और मार्ग-दर्शन करती है। चेतना गलत और सही में अंतर समझने में आपको सक्षम बनाती है।

इस पर शायद आपको अचरज होगा कि क्यों कुछ लोग बिना अपनी अंतरात्मा की आवाज सुने काम करते हैं।

यहाँ कुछ संभावित कारण हैं:

  • कुछ लोग बाहरी दुनिया पर ज्यादा ध्यान देते हैं। वे अपनी नहीं सुनते, बल्कि लोग क्या कहते हैं या दूसरों को खुश करने की जरूरत से मार्गदर्शन लेते हैं।
  • कुछ लोगों की अपनी अंतरात्मा की अहमियत बाहरी कारणों की तुलना में कम होती है। इसके कारण लापरवाही, बेचैनी, सुख का अभाव और आत्म-सम्मान के साथ समस्याएँ होती हैं।
  • दूसरी ओर, कुछ लोग बिना दूसरों का लिहाज किए शुद्ध स्वार्थी ढंग से सिर्फ अपने लाभ पर ध्यान देते हैं।
  • आप जानते हैं, चेतना आपकी अपनी मान्यताओं से बनती है। यह लगभग आपका “स्वाभाविक” गुण है जो आपको बताता है कि क्या सही और क्या गलत है।
  • हालांकि कुछ ऐसे भी लोग हैं जो अपनी अंतरात्मा की न सुनते हैं और न ही इस पर ध्यान देते हैं। उन्हें केवल अपनी भलाई की तलाश है। वे मान्यताओं पर विचार नहीं करते और यह नहीं समझते कि बड़ाई और सम्मान क्या है।
अपनी अंतरात्मा - 3-तितलियाँ-फूल

अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनना सीखिए

प्रतिदिन अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनने से अधिक गुणकारी और संपन्न और कुछ भी नहीं है।

इसे मान लेना संभव है कि आपने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुन ली है। आपका जीवन सुंदर तालमेल में चल रहा है। जीवन में आपके काम आपकी मान्यताओं से मेल खाते हैं।

पर कभी-कभी लोगों की राय आपको रोक कर रख सकती है। ठीक उसी तरह जैसे दकियानूसी ज्ञान और वह चीजें जिनकी लोग आपसे अपेक्षा करते हैं।

इसलिए ये आसान टिप्स याद रखने की कोशिश कीजिए:

  • यदि आपकी अपनी अंतरात्मा आपसे जाने के लिए कहती है, तब नहीं रुकिए।
  • यदि यह आपसे बोलने और सच कहने के लिए कहती है, तब झूठ मत बोलिए।
  • यदि यह आपसे अपनी रक्षा करने के लिए कहती है, तब मत भागिए।
  • यदि यह आपसे रुकने और मदद करने के लिए कहती है, तब नहीं जाइए।
  • यदि यह आपसे खतरा मोल लेने के लिए कहती है, तब डरिए नहीं।
  • Angell, J. R. (1911). William James. Psychological Review. https://doi.org/10.1037/h0067307
  • Gale, R. M. (2005). The Philosophy of William James: An Introduction. Review of Metaphysics.