अच्छे लोग दूसरों के गुप्त इरादों पर कभी शक नहीं करते

23 मई, 2018
हमें दूसरों के गलत कार्यों की वजह से अपने जीवन में बदलाव नहीं आने देना चाहिए। हमें उनके कारण सभी लोगों पर विश्वास नहीं खोना चाहिए। अच्छे लोग गलतियों के लिए अपने को दोष देते हैं। लेकिन दोषी उन लोगों को मानना चाहिए जिन्होंने उनका फायदा उठाया है।

कभी-कभी हम मासूमियत में गलतियां करते हैं। अच्छे लोग अक्सर ऐसा करते हैं। हमारा फायदा उठाने की कोशिश कर रहे लोगों की ‘दरियादिली’ के पीछे छिपे हुए इरादों या योजना, मुखौटेबंद स्वार्थ और झूठ को हम नहीं पहचान पाते। 

सामान्य रिश्तों में छल करना और धोखा देना एक आम बात है।

इसलिए कोई भी कदम उठाने से पहले उसकी अच्छाई और बुराई के बारे में ठीक से सोच लेना चाहिए। लेकिन अच्छे लोग यह बात नहीं मानते हैं। उन्हें हर चीज में अच्छाई नज़र आती है।

एक सज्जन व्यक्ति सबमें अच्छाई देखता है। यदि कोई एक गाल पर थप्पड़ मारता है तो वह दूसरा गाल आगे कर देता है। वह सबको दोबारा मौका देता है, सब पर विश्वास करता है।

आइये ज़रा इस पर विचार करें।

गुप्त द्वेष और मुखौटेबंद स्वार्थ

हाल में एक मनोविज्ञानी और शोधकर्ता, होवार्ड गार्डनर की एक टिप्पणी ने दुनिया को चौंका दिया था।

हार्वर्ड के प्रोफेसर और मानव बुद्धि के इस विशेषज्ञ का कहना है, बुरे लोग कभी अच्छे प्रोफेशनल नहीं बनते हैं। उन्हें सफलता मिल सकती है लेकिन उत्कृष्टता नहीं।

गार्डनर के अनुसार अच्छे लोग मान्यता चाहते हैं। वे दूसरों की भलाई और लाभ के लिए काम करके इसे प्राप्त करते हैं। अपने विशाल दृष्टिकोण और भावना के कारण वे अच्छे प्रोफेशनल बनते हैं।

निजी और सामाजिक परिस्थितियों में भी यही होता है। व्यक्तिगत श्रेष्ठता दूसरों की भलाई और आपसी सम्मान को सही मर्यादा देकर ही हासिल की जा सकती है।

जिन लोगों में इस भावनात्मक खुलेपन का अभाव होता है, जो स्वार्थी होते है और सिर्फ अपने लाभ के बारे में सोचते हैं, वे लोगों को एक दूसरे के करीब नहीं लाते हैं और न ही संबंधों को सुदृढ़ करते हैं।

अच्छे लोगों की एक और समस्या होती है। उनकी अपनी नीयत अच्छी होती है। वे अक्सर दूसरों के गलत इरादों को नहीं समझ पाते हैं।

अच्छे लोग अकसर निराश होते हैं

गुप्त चालें

मेसाचुसेट्स यूनिवर्सिटी के रॉबर्ट फेल्डमैन ने अनेक वैज्ञानिक अध्ययन आयोजित किये हैं। उनके अनुसार सामान्य रूप से 60% लोग रोजाना 3 झूठ बोलते हैं।

  • इसमें छोटे-मोटे झूठ, अतिशयोक्ति और स्वार्थी हितों के लिए बोला गया गंभीर झूठ शामिल है। इससे पता चलता है कि छोटे और बड़े झूठ होते हैं। बड़े झूठ सबसे ज्यादा हानिकारक होते हैं।
  • कुछ लोग छल से अपनी गुप्त चाल को सफल करने में संकोच नहीं करते हैं।
  • इंसानी व्यवहार के विशेषज्ञ बताते हैं कि हम सब किसी न किसी तरह से अपने आसपास के सब लोगों की भलाई करना चाहते हैं। यह हम आमतौर पर दूसरों के प्रति सम्मान और मान्यता व्यक्त करके करते हैं। हम दूसरों को प्यार और स्नेह देते हैं। उनके साथ दोस्ती करते हैं। ये सब चीजें मुफ्त और स्वेच्छा से दी जाती हैं।

जिन लोगों के मन में द्वेष होता है या जो लोग स्वार्थी होते हैं, वे दूसरों का फायदा उठाकर अपना काम बनाते हैं।

उनकी वास्तविक भावनाओं और उनके आचरण में बहुत अंतर होता है। ज्यादातर अच्छे लोग इस फर्क को पहचान नहीं पाते हैं।

अच्छे लोग यह अपेक्षा नहीं करते हैं कि दूसरों के इरादे स्वार्थपूर्ण हो सकते हैं

अच्छे लोग सबके ऊपर विश्वास करते हैं। सबका सम्मान करते हैं। वे परोपकारी होते हैं। संभव है कि निम्नलिखित बातों की वजह से वे दूसरों के स्वार्थपूर्ण इरादों के बारे में नहीं सोचते हैं:

  • दूसरे लोगों का द्वेषपूर्ण और स्वार्थी व्यवहार छिपा हुआ होता है और दिखाई नहीं देता है।
  • अच्छे लोग सबके प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हैं। वे दूसरों की भावनाओं से परिचित होते हैं। उनके सुख-दुःख, चिंताओं और जरूरतों के बारे में जानते हैं। उनके मन में दूसरों के लिए हमदर्दी होती है।
  • सामान्य रूप से मनुष्य के दिमाग में द्वेष और स्वार्थ के लिए सहानुभूति नहीं होती है। इसलिए अच्छे लोग इनको पहचान नहीं पाते हैं।
  • जब एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति का फायदा उठाना चाहता है तो वह सूक्ष्म रूप से हेरफेर करता है। अपने जाल में फंसाने के लिए पहले वह दूसरे व्यक्ति से दोस्ती करता है। उसके मन में अपने लिए सकारात्मक भावनाओं को जगाता है।

यह वास्तव में एक बहुत ही जटिल प्रक्रिया है।

अच्छे लोग परोपकारी होते हैं

निराशा

  • अच्छे लोग सोचते हैं कि व्यक्ति के इरादे बुरे नहीं हो सकते हैं। इसलिए अक्सर अच्छे लोगों को निराश होना पड़ता है।
  • दूसरों के गलत व्यवहार से अच्छे लोगों को दुःख होता। उनको अपने ऊपर गुस्सा आता है। वे अपनी अनुभवहीनता को दोष देते हैं।
  • हमें इस प्रकार के हानिकारक विचारों से अपने को दुःख नहीं देना चाहिए। उसकी जगह हमें उस घटना को नए अनुभव का माध्यम समझना चाहिए।

निराशा मिलने पर हमारी ऑंखें खुलनी चाहिए। लेकिन हमारे मन को संकुचित नहीं होना चाहिए। अगर हम ऐसा होने देंगे तो हम अपने वास्तविक रूप को खो देंगे। यह नहीं होना चाहिए।

दूसरों के व्यवहार को आपको वह बनने पर मजबूर मत करने दीजिये जो आप नहीं हैं।