गैस्ट्राइटिस का मुकाबला करें इन प्राकृतिक नुस्खों के साथ

06 दिसम्बर, 2018
गैस्ट्राइटिस से लड़ाई करते हुए, कुछ खाद्यों से बचना सबसे अच्छा है। खास कर उन खाद्यों से जो इस रोग को और इसके सिम्पटम्स को भड़का सकते हैं। कुछ प्राकृतिक सामग्रियाँ भी हैं जो आपके सिम्पटम्स को शांत करने में मदद कर सकती हैं। इस लेख में ज्यादा जानकारी हासिल कीजिए।

गैस्ट्राइटिस एक सूजन है जो पेट की लाइनिंग में होती है। इसके सबसे आम सिम्पटम्स में ऊपरी पेट में दर्द, उबकाई आना और बदहजमी शामिल हैं। इस पर निर्भर करते हुए कि आप किस तरह के गैस्ट्राइटिस से पीड़ित हैं, आप गैस्ट्राइटिस से लड़ाई कर सकते हैं और इसे खत्म कर सकते हैं।

हम घर से भी गैस्ट्राइटिस से लड़ाई कर सकते हैं। फिर भी, यदि हम इलाज रोक दें या हम इसके पैथोलॉजी का खयाल न करें तो हम अल्सर से भुगतने की स्थिति में पहुँच सकते हैं। इतना ही नहीं, हम पेट के कैंसर से भी ग्रस्त हो सकते हैं। 

गैस्ट्राइटिस के प्रकार

  • एक्यूट गैस्ट्राइटिस : एक्यूट गैस्ट्राइटिस में पेट में दर्द हो सकता है या यह फूल सकता है। पर, यह ज्यादा समय तक नहीं रहता और साधारणतः कुछ दिनों में कम हो जाता है।
  • क्रॉनिक गैस्ट्राइटिस : क्रॉनिक गैस्ट्राइटिस ज्यादा समय तक चलता है। किसी व्यक्ति को क्रॉनिक गैस्ट्राइटिस हो जाता है और वह समझ भी नहीं पाता, क्योंकि सिम्पटम्स “हल्के” होते हैं और गंभीर नहीं होते।

गैस्ट्राइटिस के लक्षण क्या हैं?

एक्यूट और क्रॉनिक गैस्ट्राइटिस के सिम्पटम्स एक ही तरह के होते हैं :

  • पेट में दर्द
  • उल्टी होना और उबकाई आना
  • डकार आना
  • वजन कम हो जाना
  • भूख नहीं लगना
  • बदहजमी
  • काला स्टूल
  • खाने के बाद पेट भरा महसूस होना

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गैस्ट्राइटिस का कारण क्या है?

गैस्ट्राइटिस का मुख्य कारण पेट के लाइनिंग की सूजन है। इसीलिए इस अवस्था के कारणों को समझना बहुत जरूरी है।

एक्यूट गैस्ट्राइटिस के कारण ये हैं :

  • ज्यादा दवाएँ खाना, जैसे कि ऐंटीइन्फ्लैमेटरी दवाएँ
  • बैक्टीरियल इन्फेक्शन्स
  • हद से ज्यादा अल्कोहल पीना
  • पाचन से जुड़ी बीमारियाँ, जैसे क्रॉन्स डिज़ीज या कोलाइटिस
  • रीनल इनसफिशिएंसी या गुर्दे की कार्यक्षमता में कमी

क्रॉनिक गैस्ट्राइटिस के कारणों में शामिल हैं :

  • लंबी अवधि के लिए दवाओँ का इस्तेमाल
  • हद से ज्यादा अल्कोहल पीना (अल्कोहलिज्म)
  • बैक्टीरियल इन्फेक्शन
  • रीनल इनसफिशिएंसी
  • वायरल इन्फेक्शन से कमजोर हो गया इम्यून सिस्टम
  • बाइल या पित्त का का उतार
  • क्रॉनिक गंभीर तनाव

दोनों में से किसी भी प्रकार के गैस्ट्राइटिस को रोकने के लिए हद से ज्यादा अल्कोहल पीने से बचना, धूम्रपान छोड़ना और ज्यादा मात्रा में नैचुरल पानी पीना अनिवार्य है। हमें अपने स्ट्रेस लेवेल्स को नियंत्रित करना सीखना पड़ेगा। और ऐंटीइन्फ्लैमेटरी ऐनाल्जेसिक दवाइयों का इस्तेमाल भी सीमित करना पड़ेगा।

गैस्ट्राइटिस से लड़ाई कीजिए इन प्राकृतिक नुस्खों के साथ

1.पेट की गड़बड़ियों का इलाज करने के लिए – अदरक

इसे हम किसी अर्क के समान पी सकते हैं, या अपनी रेसिपी के मसाले या सामग्री के समान खा सकते हैं। हमारे स्वास्थ्य के लिए, इस चमत्कारी पौधे के निरोगकारी गुणों को जानना अहम है, विशेष रूप से गैस्ट्राइटिस से लड़ाई करने के लिए।

गैस्ट्राइटिस से लड़ाई में अदरक

  • अदरक ऐंटीइन्फ्लैमेटरी है।
  • यह  ऐंटीबैक्टीरियल है, इसलिए यह हेलिकोबैक्टर पाइलोरी हटाने में मदद करता है। यह पैथोलॉजी कई बीमारियों और सिम्पटम्स का कारण है।
  • पेट के ऐसिड के जरूरत से ज्यादा उत्पादन को बेअसर करता है। यह बहुत मददगार साबित होता है क्योंकि इससे गैस्ट्रिक अल्सर रोक दिया जाता है।
  • हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है।
  • पाचन प्रक्रिया को उकसाता है, जो पेट के काम के लिए फायदेमंद है।

2.अनफ्लेवर्ड जिलेटिन

उपवास के समय एक कप अनफ्लेवर्ड जिलेटिन खाना  ऐसिडिटी और गैस्ट्राइटिस से लड़ाई में मदद करता है। ठोस जिलेटिन खाने पर हार्टबर्न से छुटकारा मिलता है।

सामग्री

  • दो बड़े चम्मच अनफ्लेवर्ड जिलेटिन के (30 ग्राम)
  • 1 कप पानी (250 मिलिलीटर)

तैयारी

  • हम पानी के कप में दो बड़े चम्मच अनफ्लेवर्ड जिलेटिन के डाल देंगे और अच्छी तरह से मिलाएँगे।
  • इसके असर को बढ़ाने के लिए हम इसे दिन में दो या तीन बार पीएँगे।

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3. पार्सले या अजमोद स्मूदी

इस नुस्खे की खूबी यह है कि सिम्पटम्स थोड़ा-थोड़ा करते हुए कम होंगे। पार्सले में पोटैशियम, कैल्शियम और फॉस्फोरस मौजूद हैं। यह एक बहुत अच्छा डाइयूरेटिक भी है और पेट की दूसरी बीमारियों को दूर करने में असरदार है।

गैस्ट्राइटिस से लड़ाई में पार्स्ले स्मूदी

  • 2 डंठलें पार्स्ले की
  • 2 कप पानी (500 मिलिलीटर)
  • 3 आइस क्यूब्स

तैयारी

  • हम पार्स्ले की 2 डंठलें पानी और आइस क्यूब्स के साथ ब्लेंडर में डाल देंगे।
  • हम 3 से 4 मिनट के लिए प्रोसेस करेंगे, जब तक एक स्मूद घोल न बन जाए, और ब्लेंडर बंद कर देंगे।
  • छाने बिना, एक गिलास में डालिए, और इस स्मूदी को पी लीजिए।

फिर, बेहतर असर के लिए दिन में  2 या 3 गिलास पीने की सलाह दी जाती है।

4.मधुमक्खियों का शहद

गैस्ट्राइटिस से लड़ाई के दौरान, मधुमक्खियों का शहद खाना पेट की ऐसिडिटी कम करने में मदद करता है क्योंकि पेट की दीवारें प्राकृतिक रूप से ठीक होती हैं। गैस्ट्रिक अल्सर्स में इसका असर निरोगकारी होता है। इसके अलावा यह उन पैथोजेनिक माइक्रोऑर्गैनिज्मस को हटाने में भी मदद करता है जो यह बीमारी पैदा करते हैं।

कैसे इस्तेमाल करेंगे

  • खाली पेट, एक चम्मच शहद (25 ग्राम) खाइए।

आपको डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

हालांकि, साधारणतः ये ज्यादा जटिलताएँ नहीं लाते, गैस्ट्राइटिस ले लड़ाई करते समय आपके लिए डॉ से ऐप्वाइंटमेन्ट लेना अहम है यदि आपको यह सिम्पटम्स होते हैं :

  • पेट या उदर के ऊपरी हिस्से में दर्द, जो नहीं जाता।
  • काले स्टूल्स
  • रक्त या कॉफी ग्राउंड्स जैसे दिखाई देने वाले पदार्थ की उल्टी होना।