क्ले पर्सन सिंड्रोम: तब तक देना जब तक आपके पास कुछ भी नहीं बचता

अगर आपने अपने अंदर "क्ले पर्सन" की खोज की है, तो अब इसे बाहर निकालने का समय है। आप स्वार्थी नहीं हैं। आप अपने प्रति उदार हो रहे हैं।
क्ले पर्सन सिंड्रोम: तब तक देना जब तक आपके पास कुछ भी नहीं बचता

आखिरी अपडेट: 30 दिसम्बर, 2018

एक क्ले पर्सन (clay person) हमेशा मदद करना चाहता है। क्या आपको किसी व्यक्ति की जरूरत है जो आपको एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में सहायता करे? कोई ऐसा जो आपकी बातें सुने? वह वहां मौजूद होगा।

इस प्रकार का व्यक्ति दूसरों की जरूरतें पूरी पूरा करने के लिए अपनी आवश्यकताओं को ताक पर रख देता है। नतीजा यह होता है कि वे बीमार हो सकते हैं, क्योंकि वे खुद को अपने बारे में सोचने और देखभाल करने से रोकते हैं। 

हमारी आशा के विपरीत क्ले पर्सन सिंड्रोम अपेक्षाकृत ज्यादा लोगों को प्रभावित करता है। बड़ी समस्या यह है कि यह पूरी तरह स्वीकार किया जाने वाला सामाजिक व्यवहार है।

इस आर्टिकल में, हम इस प्रकार के व्यक्ति के बारे में कुछ और सीखेंगे।

नरम व्यवहार या “क्ले” व्यक्तित्व वाले लोगों की समस्या यह है कि वे दूसरों को इतना अधिक देते हैं कि वे खुद को और अपने स्वयं के कल्याण को भूल जाते हैं। इसे क्ले पर्सन सिंड्रोम (Clay Person Syndrome) कहा जाता है।

ऐसी उदारता जो तकलीफ देती है

जो लोग इस कैटेगरी में आते हैं वे अत्यधिक उदार होते हैं। वे सिर्फ देने के बारे में सोचते हैं, लेने के बारे में नहीं।

क्ले पर्सन सिंड्रोम : मदद

लेकिन यह बहुत खतरनाक है। हर कोई अच्छा नहीं होता है। ऐसे जहरीले लोग भी हैं जो आपके साथ चालबाज़ी करने, झूठ बोलने और अपनी सारी ऊर्जा को निचोड़कर ख़तम करने की तलाश में होते हैं।

उदारता एक बुरी बात नहीं है। हालांकि, जब आपका फायदा उठाने वाले किसी को उदारता मिलती है, तो यह इतना अच्छा नहीं है

सबसे पहले, आपको अपने बारे में सोचना चाहिए, भले ही हमें सिखाया गया है कि ऐसा करना “स्वार्थीपन” की निशानी है।

जब हम खुद का ख्याल रखते हैं, तो हम दूसरों की मदद कर सकते हैं। लेकिन जितना संभव हो सके खुद को बचाने के लिए सीमाएं स्थापित करने की जरूरत है।

क्ले पर्सन एक गुलाम है

जो लोग इस समस्या के शिकार हैं वे सभी के गुलाम बन जाते हैं। उन्हें परिस्थितियों से कोई फर्क नहीं पड़ता। वे अपने ही मर्जी पर चलते हैं।

क्ले पर्सन सिंड्रोम : दोस्ती

वे पूरी तरह से नकारात्मक होते हैं। वे उन परिस्थितियों, अनुरोधों और मांगों के हिसाब से चलते हैं जो दूसरे लोग उनसे करते हैं।

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि इससे उन्हें बुरा लगता है। वे हर किसी की समस्याओं को हल करने के लिए तैयार हैं, भले ही इस प्रक्रिया में वे पीड़ित हों।

एक नौकर की तरह अभिनय करने पर क्ले पर्सन सहानुभूति और अंतर्ज्ञान विकसित करने की कोशिश करता है, यह जानने के लिए कि दूसरे क्या चाहते हैं

लेकिन इसके विपरीत, अगर वह दिन आता है जब उन्हें किसी के साथ की ज़रूरत हो या किसी से मदद की जरूरत हो, तो वे इसे हासिल नहीं कर पाते।

ये अच्छे लोग हैं जो दूसरों को इतना अधिक देते हैं कि दूसरों के द्वारा इस्तेमाल किये जाते हैं, दुर्व्यवहार के शिकार होते हैं, और कमतर आंके जाते हैं।

क्ले पर्सन सिंड्रोम का इलाज : अपने अंदरूनी “खुद” से दोबारा जुड़ना

आप खुद को एक क्ले पर्सन बने रहने से रोक सकते हैं। इसके लिए आपको एक कठिन यात्रा शुरू करनी होगी: अपने भीतर मौजूद “खुद” से जुड़ना होगा।

आपके अपने खुद ने अपना रास्ता खो दिया है। क्योंकि आपने इसे अलग कर दिया है और इस पर ध्यान देना बंद कर दिया है। यही वह चीज़ है जिस पर आपको अब ध्यान देने की आवश्यकता है।

आपने देखा है, आपका जीवन आपका न होकर औरों का होने लगता है। आप सिर्फ तभी खुश हैं अगर हर कोई खुश है और आप खुद के लिए खुश होने में सक्षम नहीं हैं।

क्या आपको यह उचित लगता है?

क्ले पर्सन सिंड्रोम: योग

हमेशा दूसरों पर निर्भर करना, अपने बजाय हर किसी के लिए सबकुछ करना, किसी के लिए जरूरत से ज्यादा अच्छा करना और उदार होना सकारात्मक या हेल्दी बात नहीं है।

अपने अंदर झाँकें और उस व्यक्ति को ढूंढें जिसने अपना रास्ता खो दिया है, वह जिसके पास कभी आशा, सपने, इच्छाएँ और लक्ष्य हुआ करते थे। यह व्यक्ति गायब नहीं हुआ है; वह अभी छिपा हुआ है। उसे ढूंढने के लिए अपने अंदर झाँक कर देखें।

आप वास्तव में क्या चाहते हैं?

अपने आपको दूसरों के लिए कुर्बान कर देना आपको खुश नहीं करता। दूसरों की जरूरतों को अपने से ऊपर रखकर आपको कुछ भी नहीं मिलता है। भले ही आप इस बात पर विश्वास नहीं करते, पर दिल की गहराई में यह दर्द देता है।

इसे स्वीकार करें।

ये चीज़ें आपको खोखला करती जा रही हैं

यह बेहद जरूरी है। एक बार जब आप इस विकार को पीछे छोड़ना शुरू कर देते हैं, तो आपको कुछ सरल युक्तियों का पालन करना चाहिए:

  • अगर कोई आपसे सहायता मांगता है, तो जवाब देने से पहले अपना समय लें। उसी समय जल्दबाज़ी में “हाँ” न कहें। ऐसा करने की जरूरत नहीं है। उस पर विचार करें और सुनिश्चित करें कि आप क्या इसे करना चाहते हैं? इसे कर सकते हैं या नहीं।
  • क्या आप “न” कहना चाहते हैं? तो फिर “न” कहें। यह स्वीकार करें कि दूसरों के पूछे गए सब काम करना अच्छा नहीं है, खासकर अगर यह आपके मूल्यों और सिद्धांतों के खिलाफ जाता है या फिर अगर आप इसे करना नहीं चाहते हैं।
  • आप स्वार्थी नहीं हैं। आप वास्तव में खुद से प्यार और खुद का सम्मान कर रहे हैं।
  • अपने अपराधबोध को छोड़ दें। आप इस वजह से लज्जित महसूस कर सकते हैं, लेकिन इसे गंभीरता से न लें। अपराध की यह भावना आपको उसी जगह वापस ले जाने की कोशिश करेगी जहां आप थे और आगे बढ़ने से आपको रोकेगी।
  • अपना ख्याल रखें और खुद को समय दें। अपने लिए वह सब करें जो आपने दूसरों के लिए किया था। अब आप सबसे महत्वपूर्ण हैं, आपकी खुद की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अगर आप अपने बारे में चिंता नहीं करते हैं, तो कौन करेगा?
    क्ले पर्सन सिंड्रोम: आज़ादी

अगर आपने अपने अंदर के क्ले पर्सन को खोज लिया है, तो अब इसे जाने देने और अपने जीवन को पुनः प्राप्त करने का समय है।

हम सभी को खुद को प्राथमिकता देना सीखना है।

आप स्वार्थी नहीं बन रहे हैं। आप अपने साथ उदार हो रहे हैं।



  • Romi Arellano, Manuel J. Cuando digo no, me siento culpable. Nuevas ediciones de bolsillo, 2003.
  • Fensterheim, Herbert y Jean Baer. No diga sí cuando quiera decir no. Ediciones Grijalbo. 2003.
  • Castanyer, Olga. La asertividad. Expresión de una sana autoestima. Bilbao: Descleé de Brouwer, 1996. pp. 348
  • Shelton, N., & Burton, S. (2004). Asertividad. Haga oír su voz sin gritar. FC Editorial.