जाने अपने शिशु को ठोस आहार कैसे देना शुरू करना चाहिए

बच्चे के छह महीने का होने पर उनकी डाइट में एक अहम बदलाव होता है। यह उनके लिए ठोस खाद्य खाना शुरू करने का वक्त होता है। हालांकि शिशुओं के लिए ठोस खाना शुरू करना पैरेंट के लिए चैलेंजिंग होता है, लेकिन उनका शरीर इसके लिए तैयार होता है।
जाने अपने शिशु को ठोस आहार कैसे देना शुरू करना चाहिए

आखिरी अपडेट: 11 जनवरी, 2021

शिशु को ठोस आहार देना बड़ा नाजुक मामला होता है। इसे धीरे-धीरे करने की जरूरत होती है, क्योंकि बच्चा अभी कुछ ही महीने का होता है।

प्रेग्नेंसी में प्लेसेंटा भ्रूण के पोषण में एक भूमिका निभाता है। इसलिए जन्म के बाद बच्चे के पाचन तंत्र को इसके अनुकूल होना चाहिए। इसलिए नवजात शिशु सभी तरह का भोजन बर्दाश्त नहीं कर पाता है।

इस आर्टिकल में हम शिशुओं को ठोस आहार शुरू कराने के बारे में बताएंगे, कैसे जानें कि आपका शिशु इसके लिए तैयार है या नहीं, सिफारिश योग्त खाद्य पदार्थ और कुछ आम दिशा-निर्देश जिन पर आपको ध्यान देना चाहिए।

ठोस आहार शुरू कराना : कैसे जानें कि आपका शिशु इसके लिए तैयार है

शिशुओं को जीवन के शुरुआती महीनों में विशेष रूप से स्तनपान कराया जाना चाहिए। बच्चे के छह महीने के होने पर आप उसे ठोस आहार देना शुरु कर सकती हैं। हालांकि शिशुओं को दो साल की उम्र तक स्तनपान कराना जारी रख सकती हैं, जबकि वे साथ ही दूसरे खाद्य भी खा सकते हैं।

उम्र के अलावा दूसरी बातें जिन पर आपको ध्यान देना चाहिए वे हैं हाईट और वजन है। बच्चे के लगभग चार महीने के होने पर वे जन्म के वजन के दोगुना हो जाते हैं। कुछ मामलों में ठोस आहार को शुरू करने की जरूरत का मूल्यांकन किया जा सकता है, और कुछ विशिष्ट अपवाद के मामलों में पेडियाट्रिक सहायता ली जा सकती है।

दूसरे पहलुओं पर गौर करने के लिए बच्चों के शरीर के विभिन्न संकेत होते हैं। निम्नलिखित संकेत बताते हैं कि बच्चा ठोस आहार को सहन करने के लिए तैयार है। उदाहरण के लिए वे:

  • सिर सीधी रख कर बैठे रह सकते हैं
  • वे अपने आसपास के भोजन में दिलचस्पी दिखाते हैं
  • भोजन लेने के लिए वे मुंह खोलते हैं
  • चबाने वाले इशारे या गतिविधियाँ करते हैं

ठोस खाद्य शुरू कराने का यह स्टेज बच्चे के विकास में महत्वपूर्ण है और एक बड़ा बदलाव है।

और जानने के लिए पढ़ें: शिशु का दूध छुड़ाना: उसे खिलाने की शुरूआत कैसे करें

इस स्टेज के लिए इन खाद्यों की सिफारिश की जाती है

इस नए स्टेज को शुरू करने के लिए आप अपने बच्चे की डाइट में कई तरह के भोजन शामिल कर सकते हैं। इनमें कुछ की सिफारिश दूसरे  के मुकाबले ज्यादा की जाती हैं। उनमें से कुछ हैं:

  • अनाज (Cereals): चावल, जई, मक्का या जौ विटामिन और मिनरल से भरपूर खाद्य हैं। इसके अलावा वे फाइबर के अहम स्रोत हैं।
  • सब्जियां : वे कई अलग-अलग पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, यहां तक ​​कि प्रोटीन से भी। आप उनसे बेबी फूड बना सकते हैं।
  • फल : वे अपने आप में काफी स्वादिष्ट होते हैं। आपको ताजे फल ही चुनना चाहिए, न कि डिब्बाबंद।
  • पशु मूल वाले खाद्य : मीट और फिश प्रोटीन, विटामिन A, आयरन, जिंक, फॉस्फोरस और कैल्शियम से भरपूर होते हैं। अंडे के मामले में फ़ूड लर्जी के कारण एक्सपर्ट तब तक इंतजार करने की सलाह देते हैं जब तक कि बच्चे को इसके एक छोटे हिस्से से उनकी सहनशीलता का टेस्ट करने के लिए कम से कम उसके एक साल होने का इंतज़ार करें।
  • लेग्युम : ये नॉन एनीमल प्रोटीन का सबसे अच्छा स्रोत हैं।

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बच्चों को ठोस आहार देना : इसे कैसे करना है

जब ठोस आहार देने की बात आती है तो यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि बच्चा नए खाद्य पदार्थों को अस्वीकार न करे। हालांकि यह शुरुआत में हो सकता है।

दरअसल आपको कम मात्रा में भोजन देना चाहिए। याद रखें, वयस्कों के मुकाबले बच्चे बहुत कम खाना खाते हैं। बदलाव के अनुसार एडजस्ट करने के लिए आपको उसके डाइजेस्टिव सिस्टम को पर्याप्त समय देने की जरूरत है। इस तरह अगर वे ज्यादा खाना न खाएं तो निराश न हों।

दूसरे, स्तनपान या फार्मूला के साथ वैकल्पिक रूप से ठोस खाद्य पदार्थ देना आसान होता है। इसका मतलब है अपने बच्चे को बोतल से दूध पिलाना या उन्हें स्तनपान कराना, फिर उन्हें एक चम्मच भोजन देना और फिर और दूध देना। इस तरह वे ठोस आहार के आदी हो जाएंगे।

इस प्रक्रिया के दौरान, बच्चा भोजन के साथ खेल सकता है। कभी-कभी यह उनके मुंह के अलावा कहीं भी, उनके चेहरे, हाथों, बिब या फर्श पर बिखर सकता है।

बच्चे को इसके लिए डांटें नहीं, क्योंकि इससे वे अगली बार भोजन को अस्वीकार कर सकते हैं। इसके विपरीत आपको उन्हें प्यार से बोलना होगा, उन्हें खाने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। यदि बच्चा रोता है या अपना मुंह नहीं खोलना चाहता, तो इसके लिए आग्रह करने के बजाय इंतजार करना सबसे अच्छा है।

ठोस आहार खाना शुरू करने पर शिशुओं में होने वाले बदलाव

जब आप ठोस आहार देना शुरू करेंगी तो आप अपने बच्चे में कई बदलाव देख सकती हैं। उनका मल ज्यादा ठोस होगा और उसकी रंगत  और गंध भी बदल जाएगी। इसी तरह मूत्र भी ज्यादा गाढ़ा होगा।

हालाँकि कभी मल में भोजन के अवांछित टुकड़े हो सकते हैं, लेकिन इसमें खतरे वाली कोई बात नहीं। बाउल मूवमेंट भी अलग हो सकता है, यह कम बार हो सकता है। पर यह कब्ज का संकेत नहीं है।

दूसरी ओर आप देखेंगी कि, बच्चा जैसे ही ठोस आहार लेगा उसकी भूख बढ़ेगी और ज्यादा खाना खायेगा। धीरे-धीरे वे बोतल की फीड कम करेंगे या ब्रेस्टफीडिंग भी रोक देंगे।

आम सिफारिशें

यहाँ कुछ आसान सिफारिशें दी गई हैं, जिनके आधार पर आपको अपने बच्चे को ठोस आहार देना शुरू करना चाहिए:

  • वे खाद्य पदार्थ जो वे अपने हाथों से खा सकते हैं। आमतौर पर इस लेवल पर आपको ही अपने बच्चे को खिलाना है। फिर भी आपको बच्चे को अपने हाथों भोजन लेने की इजाजत देनी चाहिए और यदि वे चाहें तो इसे खुद खाएं। बस यह सुनिश्चित करें कि वे बड़ी बाईट न लें।
  • दूसरे खाद्य आजमाना। अपने बच्चे को एक साथ कई अलग-अलग खाद्य न दें। दूसरे शब्दों में, उन्हें एक वक्त में एक ही भोजन देना सबसे अच्छा है। इस तरह आपको पता चल जाएगा कि उन्हें कौन से खाद्य ज्यादा पसंद हैं। आज एक अनाज आजमायें; कल एक सब्जी या प्यूरी।
  • फलों का जूस। फलों का जूस बना सकती हैं जिसे आप अपने बच्चे को बोतल से देंगी,लेकिन तभी अगर फल ताजा हो। बच्चे के जूस में चीनी नहीं मिलानी चाहिए।

शिशुओं के लिए शुरुआत में अपने भोजन के साथ खेलना आम बात है, इसलिए आपको इससे फिक्रमंद नहीं होना चाहिए।

सभी तरह का ठोस आहार शिशुओं के लिए अच्छा नहीं होता

कुछ पैरेंट चिंतित हो सकते हैं यदि उनका बच्चा शुरुआत में ज्यादा ठोस भोजन नहीं करता है। लेकिन एक बच्चे के लिए पहले से चार औंस खाने के लिए यह पूरी तरह से ठीक है ताकि वे अनुकूलित कर सकें।

कुछ खाद्य पदार्थ जिन्हें आप अपने बच्चे को खिलाने से बचना चाहिए, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ, ठंड में कटौती, संरक्षण, पॉपकॉर्न, और अन्य खाद्य पदार्थ हैं जिन पर वे चोक हो सकते हैं। दुर्घटनाओं से बचने के लिए काटने के आकार का मूल्यांकन करना आवश्यक है।

हमेशा खाद्य पदार्थों को प्यूरी या मैश करने की कोशिश करें ताकि वे आसानी से उन्हें निगल सकें। अपने बच्चे को पूरा कुछ न दें। अंत में, वे नमक या सीज़निंग न जोड़ें, क्योंकि वे अपने तालू के लिए आवश्यक नहीं हैं। वास्तव में, वे पुरानी बीमारियों के जोखिम को भी बढ़ा सकते हैं।

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