एक्यूट पैंक्रियटाइटिस : लक्षण, कारण और ट्रीटमेंट

20 फ़रवरी, 2020
ज्यादातर मामलों में एक्यूट पैंक्रियटाइटिस का इलाज किया जा सकता है और लक्षणों से राहत मिल सकती है। हालांकि जब यह ज्यादा जटिल हो जाए या स्थिति बहुत गंभीर हो, तो हालात बहुत खतरनाक हो जाते हैं। इसलिए मेडिकल ट्रीटमेंट लेना बहुत जरूरी होता है।

एक्यूट पैंक्रियटाइटिस अग्न्याशय या पैंक्रियाज में अचानक होने वाली सूजन है। आमतौर पर दर्द का एपिसोड खत्म होने के बाद इस ग्लैंड का कामकाज दोबारा बहाल हो जाता है। इस तरह के एपिसोड 50 से 70 साल की उम्र वाले लोगों में ज्यादा होते हैं

अच्छी सेहत वाला कोई इंसान भी एक्यूट पैंक्रियटाइटिस के एपिसोड का शिकार हो सकता है। हालांकि सबसे आम मामलों में यह उन लोगों में देखा जाता है जिनका स्वास्थ्य ऐसी हालत में हो जो उन्हें इस समस्या से पीड़ित होने का पूर्वाभास दे। मुख्य रूप से सबसे आम रिस्क फैक्टर गॉल स्टोन (पित्ताशय में मिनरल जमा होना) है। एक अन्य कारक जो एक्यूट पैंक्रियटाइटिस का कारण बन सकता है वह है भारी मात्रा में या बहुत नियमित रूप से शराब पीना। पोषण संबंधी गलत आदतें भी इसकी शुरुआत का कारण बन सकती हैं।

एक्यूट पैंक्रियटाइटिस क्या है?

एक्यूट पैंक्रियटाइटिस लक्षण, कारण और ट्रीटमेंट

पैंक्रियटाइटिस या अग्नाशयशोथ अग्न्याशय की सूजन है। अग्न्याशय पेट के पीछे, पेट के ऊपरी भाग में स्थित एक ग्लैंड है। यह ऐसे एंजाइम पैदा करता है, जो पाचन में योगदान करता है। यह वे हार्मोन भी पैदा करता है जो चीनी या ग्लूकोज की प्रोसेसिंग को रेगुलेट करने में मदद करते हैं।
पैंक्रियटाइटिस दो तरह की होती है।

  • एक्यूट पैंक्रियटाइटिस अचानक उभरता है और सिर्फ कुछ दिनों तक रहता है।
  • क्रोनिक पैंक्रियटाइटिस छह महीने से ज्यादा रह सकती है।

एक्यूट पैंक्रियटाइटिस गंभीर, मध्यम या हल्का हो सकती है। यह क्लासिफिकेशन शरीर के दूसरे अंगों पर पड़ने वाले इसके प्रभावों और इससे जुड़ी जटिलताओं पर निर्भर करता है। सामान्यतया अगर पैंक्रियटाइटिस हल्की या मध्यम तीव्रता वाली हो तो आमतौर पर इसके कोई घातक परिणाम नहीं होते। हालांकि अगर यह गंभीर है, तो मौत का खतरा ज्यादा होता है।

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कारण

एक्यूट पैंक्रियटाइटिस के मुख्य कारण नीचे हैं:

  • पित्ताशय की पथरी (Gallstone) : यह स्थिति लगभग 40% मामलों में देखी जाती है। हालांकि यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है कि यह कैसे होता है, पर पत्थर पैंक्रियाटिक डक्ट में रुकावट डालते हैं जिससे एंजाइम बनाने वाली प्रक्रिया को नुकसान होता है। इससे इस अंग में टिशू के नष्ट होने का खतरा होता है।
  • शराब : यह लगभग 30% मामलों में देखा जाता है। सिस्टमेटिक रूप से शराब पीना, भले ही उसकी मात्रा जितनी भी कम हो, कुछ वर्षों बाद क्रोनिक पैंक्रियटाइटिस की ओर ले जाता है। हालांकि यह सभी शराब पीने वालों में नहीं होता। दूसरे हेल्थ फैक्टर भी इसके उभरने का कारण बनते हैं।
  • दूसरे फैक्टर : कैटआयोनिक ट्रिपसिनोजेनिक जीन (cationic trypsinogen gene) में एक जेनेटिक म्यूटेशन का पता चला है जो इसके 80% वाहकों में एक्यूट पैंक्रियटाइटिस का कारण बनता है। ईआरसीपी (endoscopic retrograde cholangiopancreatography -ERCP)) कराने वाले लोगों में 5-10% मामलों में यह इस प्रक्रिया से जुड़े कॉम्प्लिकेशन के रूप में भी दिखाई देता है।

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एक्यूट पैंक्रियटाइटिस (Acute Pancreatitis) के लक्षण


एक्यूट पैंक्रियटाइटिस का विशिष्ट लक्षण पेट में होने वाला तेज दर्द है। यह 95% से ज्यादा मामलों में मौजूद होता है। इसकी तीव्रता मध्यम से तीव्र होती है, और ऐसा लगता है जैसे पीठ में आर-पार कोई खंजर घुस गया हो। इस दर्द को थोड़ा कम करने का एकमात्र तरीका एकदम स्थिर रहना होता है। यह दर्द अचानक और एक बार में उभरता है।

इस तरह के एपिसोड वाले 80 से 90 प्रतिशत लोगों में नॉजिया और उल्टी भी होती है। सबसे पहले वे भोजन को उगलते है और फिर पित्त या पानी की। पेट में खिंचाव और बुखार का अनुभव करना भी आम है

कुछ मामलों में दूसरे लक्षण भी दिखाई देते हैं जिनमें रेस्पिरेटरी या किडनी फेल्योर के अलावा हार्ट फेल्योर, निम्न रक्तचाप और मानसिक गड़बड़ी हो सकती हैं। हल्की पैंक्रियटाइटिस के मामले में दर्द बहुत कम होता है और दूसरे लक्षणों पर ध्यान जाना मुश्किल हो सकता है।

इलाज

आमतौर पर इस तरह के एपिसोड का इलाज अस्पताल में किया जाता है। सबसे पहले रोगी को कम से कम एक से दो दिन उपवास करना चाहिए। सूजन कम होने पर लिक्विड डाइट शुरू होता है और फिर सॉफ्ट फ़ूड वाली डाइट दी जाती है। डिहाइड्रेशन रोकने के लिए पेन किलर और इंट्राविनस फ्लूइड भी दिए जाते हैं।

शुरुआती इलाज के बाद रोगी अपने पैंक्रियटाइटिस के कारणों के आधार पर विशिष्ट ट्रीटमेंट लेगा। इसमें बाइल डक्ट की रुकावट खोलने के प्रोसिड्योर, गॉल ब्लैडर की सर्जरी, पैंक्रियाज की सर्जरी या एल्कोहलिजम का इलाज हो सकता है।

यह ज़रूरी है कि ठीक होने के बाद मरीज कम फैट वाले और ज्यादा तरल वाले डाइट का सख्ती से पालन करे। इसी तरह शराब पीना बंद करना और तंबाकू से बचना भी जरूरी है

प्रोग्नोसिस इसके एपिसोड की गंभीरता पर निर्भर करती है। अगर रोगी 60 वर्ष से ज्यादा की उम्र वाला है, दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं हैं, मोटापे से ग्रस्त है, हाइपोवोल्मिया या खून की कमी (hypovolemia) के लक्षण हैं, प्रणालीगत सूजन वाली सिंड्रोम ( systemic inflammatory response syndrome (SRIS) हैं, प्लेयुरल बहाव या मानसिक लक्षणों में बदलाव के संकेत दिख रहे हैं तो दृष्टिकोण कुछ कम आशावादी होगा।

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