महज 3 मिनट में खुद को दोबारा प्यार करने के लिए 3 वाक्य

24 फ़रवरी, 2019
खुद को प्यार करना सीखिए। आखिरकार, यह आपकी खुद को ठीक रखने का सबसे अच्छा तरीका है। जो लोग आपको प्यार करते हैं, वे भी आपको समझेंगे।

आत्म-प्रेम पर बात करने की ज़रूरत इसलिए है कि कभी-कभी हम अपना आत्म-विश्वास दूसरों के हवाले कर देते हैं। हम भूल जाते हैं कि हम किस लायक हैं और हम किस चीज के हक़दार हैं

यह सच है, इस मनोवैज्ञानिक घटना की जड़ें बचपन और अतीत के उन अनुभवों में होती हैं जो हमारे व्यक्तित्व को गढ़ते हैं।

हालाँकि आपको यह समझना चाहिए, हम जिस आत्म-प्रेम की बात कर रहे हैं उस पर प्रतिदिन ध्यान देना चाहिए। इसकी कभी उपेक्षा नहीं होनी चाहिए।

आत्म-प्रेम नार्सिसिस्ट (आत्मकामी) या खुदगर्ज़ बनना नहीं है। बिलकुल भी नहीं।

यह कुशल, बुद्धिमान और अंतर्ज्ञानी होना है, अपनी सीमाओं, अपने अधिकारों को जानना है, दूसरों के अधिकारों के बारे में भी ।

कल्पना कीजिये कि आपका आत्म-प्रेम एक नाजुक क्रिस्टल है। आप जितना ही इसे पॉलिश करेंगे, यह उतना ही सुंदर होगा और उतना ही आपको इन्सपायर करेगा।

हालाँकि, इस बेशकीमती खजाने के साथ आपको दो बातों की सावधानी बरतनी चाहिए: इसे दूसरों के हवाले न करें, और इसे टूटने न दें

आज हम आपको 3 वाक्यों पर सोचने के लिए प्रेरित करना और उस बेशकीमती खजाने की देखभाल करने में मदद करना चाहते हैं।

1. “मैं जिसका हकदार हूँ, उसके लिए खुद को अनुमति देना खुदगर्ज़ होना नहीं है; यह अपने आत्म-प्रेम की रक्षा करना है”

यह कहना बेतुका लग सकता है कि, “आपको खुद से प्यार करना होगा, वरना कोई अन्य आपका सम्मान नहीं करेगा।” हालांकि जब आप वाकई कदम उठाते हैं और अपना थोड़ा खयाल रखना शुरू करते हैं, तो कुछ ऐसा होता है: लोग आपसे यह कहना शुरू कर सकते हैं कि आप बदल गए हैं या आप थोड़ा स्वार्थी हो गए हैं

सबसे पहले, आपको यह समझना चाहिए कि आत्म-प्रेम और स्वार्थ के बीच कई क़दमों का फासला है जिसे एक मेच्योर और संतुलित व्यक्ति को कभी नहीं तय करना चाहिए।

अपनी कद्र करना ऐसी चीज है, जो अक्सर उपेक्षित हो जाती है।

“नहीं, मुझे नहीं लगता कि आपके साथ घूमने जा पाऊँगा, क्योंकि मुझे आज दोपहर थोड़ा अकेले रहने की जरूरत है, मुझे टहलने और कुछ चीजों के बारे में थोड़ा सोचने की जरूरत है,” आपका ऐसा कहना कुछ लोगों को अजीब लग सकता है, और अपमानजनक भी। हालाँकि, अपने आप को इस बात की अनुमति देना जिसकी आपको ज़रूरत हैं कभी भी स्वार्थ नहीं होता है।

वास्तव में, जो कोई भी इसे उस तरह से देखे, वह कोई अच्छा दोस्त नहीं है। सबसे अच्छे दोस्त और निकटतम परिवार के सदस्य वे हैं जो आपके फैसलों को समझने और सम्मान करने के साथ-साथ आपसे सहानुभूति रखने में सक्षम हैं।

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2. “अपनी गरिमा, अपनी पहचान और अपनी अनमोल अस्मिता की सुरक्षा करने के लिए मुझे सीमाएं तय करने की ज़रूरत है”

जो व्यक्ति अपने और नुकसान पहुंचा पाने वालों के बीच एक सुरक्षात्मक देवर बनाए बिना जीवन से गुजरता है, वह जीवन और भाग्य पर अपने लिए कुछ भी सौगात सौंप देता है, भले ही वह अच्छा हो या बुरा।

तो … क्या हो, अगर आप चुनाव करने वाला बनें या यदि समझदार होने का फैसला करें और सिर्फ अच्छे को स्वीकार करें?

ऐसा करना स्वार्थ नहीं होगा। यह वास्तव में अच्छे मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य की ओर एक अच्छा कदम है और सीधे आपके शारीरिक संतुलन को प्रभावित करेगा।

उन लोगों के खिलाफ दीवार और बाड़ा लगाने में संकोच न करें जो आपके पास दुर्व्यवहार और हेरफेर के इरादे से आते हैं।

यदि आप सीमाएं तय करना शुरू करते हैं तो अपने जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना बहुत आसान हो सकता है।

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3. “मेरा आत्म-प्रेम अनमोल है और इसमें कोई छूट नहीं दी जा सकती”

आत्म-प्रेम सिर्फ आत्म-सुरक्षा से भी ज्यादा कुछ है और यह जानना भी कि मेंरे और आपके बीच सीमा कहाँ है।

आत्म-प्रेम आपकी गरिमा है, वह अदृश्य और अनोखी अस्मिता है जो उसे बनाता है जो आप हैं और यह कि आप खुद को कैसे देखते हैं। यह आपके अंदर की ताकत है जिससे आप कठिन बातों का सामना करते हैं, अपने सपनों को हासिल करते हैं, और अपने लायक एक वास्तविकता बनाते हैं।

इनमें से कुछ भी आसान नहीं है। आपको यह समझना चाहिए कि आत्म-प्रेम का अर्थ निरंतर विकास भी है। कभी-कभी यह कमजोर, बीमार या गिर जता है।

अक्सर आप इसे भूल सकते हैं, क्योंकि इसके लिए नए ज्ञान, नई मित्रता, दृष्टिकोण और तजुर्बों की ज़रूरत होती है।

समझ लीजिये कि आपके आत्म-प्रेम की कोई कीमत नहीं है। यह अनमोल है।

इसे किसी को ऑफर न करें; यह निहायत ही आपका है। दूसरों को वह दीजिये जो आप खुद को देते हैं: सम्मान, प्रेम, बुद्धिमता, सह-अस्तित्व और सद्भाव।

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