7 बातें जिनकी आपको किसी के आगे सफ़ाई पेश नहीं करनी है

14 अगस्त, 2018
भले ही आपके लिए यह बड़ी बात न हो कि दूसरे क्या सोचते हैं, फिर भी अपनी ज़िन्दगी और अपने फैसलों से जुड़ी बातों के सन्दर्भ में अपना पक्ष दूसरों के सामने रखने की कोई ज़रूरत नहीं है।
 

आपके ज्यादातर फैसलों पर हमेशा ही कोई न कोई सवाल उठाएगाउनकी जांच-परख करेगा। इस तथ्य के बावजूद आपको इस जिरह या आलोचना को लेकर फिक्रमंद होने की कोई ज़रूरत नहीं है। आखिर हर आदमी जो आपकी आलोचना करता हो, उसके आगे अपने कार्यों के बारे में सफ़ाई पेश करने की ज़रूरत नहीं है।

सच्चे अर्थों में कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे के कार्यों का मूल्यांकन नहीं कर सकता: इसे ही आज़ादी कहते हैं।

हालांकि, कभी-कभी हमें लगता है, वे कर सकते हैं। जब परिवार या दोस्त हमसे ऐसे स्पष्टीकरण की मांग करते हैं तो हम इसके लिए अपने को जवाबदेह महसूस करते हैं। दरअसल तब भी हम वास्तव में इनमें से किसी भी व्यक्ति के सामने अपनी सफ़ाई पेश करने के लिए बाध्य नहीं हैं।

जब तक आप किसी सीमा को पार नहीं करते, अपने कार्यों से किसी को नुकसान नहीं पहुँचाते, या किसी अन्य व्यक्ति के लिए खतरा न बनें, आप अपने कार्यों का विवरण देने के लिए कहीं भी जवाबदेह नहीं हैं, न ही किसी के सामने आपको अपनी सफ़ाई पेश करने की ज़रूरत है।

 जीवन के 7 पहलू जिनके लिए आपको अपनी सफ़ाई पेश नहीं करना चाहिए

1. अपने रंग-रूप के लिए आपको कहीं कोई स्पष्टीकरण नहीं देना है

आप थोड़े दुबले-पतले हैं या कुछ बड़े, ये बातें इनमें शामिल हैं। यदि आप आप खिलाड़ी हैं, खेल खेलते हैं, या अपने वजन की तुलना में बहुत कम या बहुत ज्यादा खाते हैं, इन भौतिक पहलुओं के बारे में किसी को भी सफ़ाई पेश नहीं करनी है। ऐसी आलोचनाओं या जिरह को भूल जाइए।

महत्वपूर्ण यह है कि आप अपने शरीर को लेकर अच्छा और सहज महसूस करते हैं या नहीं। इसे बनाए रखने या बदलने के लिए वह सब करें जिसकी आप ज़रूरत समझते हैं।

सफ़ाई पेश करने की ज़रूरत

2.  आप अपना पोषण कैसे करते हैं

यदि आप शाकाहारी होने, मिठाई या कुछ और नहीं खाने का फैसला करते हैं … तो कोई भी इसे लेकर आपके बारे में फैसला नहीं सुना सकता या आपके सही आहार को लेकर सफ़ाई की तलब नहीं कर सकता।

 

यह आपका निजी निर्णय है। आप किसी भी कारण से अपने मनचाहे ढंग से खाने का फैसला ले सकते हैं। आपके आस-पास मौजूद लोगों को इस सच्चाई को कबूल करना होगा, भले ही वे इससे सहमत हों, या न हों।

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3.  आपकी सेक्सुअलिटी, यदि आप वयस्क हैं

यह फैसला आपका है कि कैसे, कब और किसके साथ आप रहना, उनसे रिश्ते कायम करना चाहते हैं।

चाहे आप एक पुरुष हों या स्त्री, आप तय करते हैं कि आपको अकेले रहना है, शादी करनी है या नहीं, बच्चों को दुनिया में ला सकते हैं या नहीं। इसका वास्ता उन फैसलों से है जिन्हें आप अपने भीतर लेते हैं। किसी को भी इन पर सवाल करने, इनमें हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।

अगर वे देखते हैं कि आप पीड़ित हैं या दुखी हैं, तो वे सलाह ज़रूर दे सकते हैं। लेकिन अपने अलग विचारों के आधार पर आपका न्याय करने या आपकी आलोचना करने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है।

शादी और बच्चों को लेकर आपकी राय या प्राथमिकताओं के बारे में किसी के भी आगे अपनी सफ़ाई पेश करने के लिए आप मजबूर नहीं हैं।

सफ़ाई पेश करने की ज़रूरत नहीं: करियर

4.  आपके करियर या काम की लाइन

जीवन के इस क्षेत्र में भी, आपको पैसे कमाने के अपने तरीके से जुड़े अपने फैसले का ब्यौरा देने की आवश्यकता नहीं है। इसमें यह भी शामिल है कि आप किस विषय के स्कूल में दाखिला लेते हैं, या आपकी उम्र ज्यादा होने के बावजूद एक विशिष्ट रोज़गार में बने हुए हैं।

हो सकता है ज़िन्दगी से जुड़े अपने निजी चुनाव से आपने अपने परिवार के सदस्यों या दोस्तों को निराश किया हो, और यह बहुत कठिन फैसला रहा हो। हो सकता है, कई लोगों की नजर में यह गलत निर्णय रहा हो।

इन परिस्थितियों में भी यह अहम है कि वह निर्णय आपके भीतर से निकला हो

5.  आपकी धार्मिक मान्यता या आस्था

आपकी आस्था चाहे जो भी हो, अपने धार्मिक मान्यताओं और आदर्शों का स्पष्टीकरण देने के लिए आप किसी के आगे जवाबदेह नहीं हैं। इसके विपरीत अज्ञेयवादी, या नास्तिक होने, या विशेष रूप से किसी संगठित धर्म का पालन नहीं करने का निर्णय भी आपका अपना ही है।

 

दुनिया को देखने के आपके तरीके को उन्हें स्वीकार करना चाहिए और इस पर संदेह या सवाल नहीं खड़ा करना चाहिए। अगर वे ऐसा करते हैं, तो यह आपकी समस्या नहीं है।

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6.  संबंधों की आपकी धारणा

आप किसी के साथ रहने के विचार से सहमत हो सकते हैं, या असहमत हो सकते हैं, और अकेले रहने का फैसला भी कर सकते हैं। आप विवाह संस्था के पक्के अनुयायी हो सकते हैं और इसके साथ असहमति भी रख सकते हैं …

हम सभी की दुनिया की अलग-अलग धारणाएं और जीवन जीने के तरीके हैं। हम कैसे तय कर सकते हैं कि सही कौन सा है और गलत क्या है?

क्या सही है और क्या गलत, यह तय करने का कौन सा मानदंड हो सकता है? व्यक्ति अपने विवेक से जो तय करता है या महसूस करता है वह उनका रास्ता होता है। उसमें हासिल होने वाले अच्छे-बुरे, सुख-दुःख की पूरी ज़िम्मेदारी उसकी ही होती है। आपके फैसले के लिए जहाँ कोई दूसरा जिम्मेदार नहीं है, वहीं हर जगह उसकी सफ़ाई देने के लिए आप भी जवाबदेह नहीं हैं।

7.  यदि आप अकेले वक्त बिताना पसंद करेंगे

कैसे समय बिताएं इसकी सफ़ाई पेश करने की ज़रूरत

अगर अकेले रहने में आपको खुशी मिलती है, तो ऐसा क्यों है यह बताने के लिए आपको किसी के आगे कोई सफ़ाई पेश करने की आवश्यकता नहीं है। इसका मतलब यह नहीं है कि आप असामाजिक, स्वार्थी, या दुनिया से अलग हैं।

आप अपने साथ अकेले सहज आनंद से रह सकते हैं। आप अपना निजी स्पेस पसंद करते हैं, संगीत सुनना पसंद करते हैं, या कोई किताब पढ़ना पसंद करते हैं, यह आपका स्वाभाविक स्पेस है।

यह तथ्य कि आप अपने लिए वक्त लेना पसंद करते हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि आप उदास या परेशान हैं, या आपको अन्य लोगों के साथ मिलने-जुलने या बातचीत करने में कोई समस्या है।

बात सिर्फ इतनी है कि आप अकेले के लमहों का मजा लेते हैं, और दिल चाहने पर मित्रों और परिवार से जी भर कर खूब बातें भी करते हैं।

 

यह महत्वपूर्ण है कि आप कैसा जीवन जियें इसका निर्णय आप खुद लेना चाहते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि आप वास्तव में अपनी जीवनशैली और निर्णय लेने के इस रूप में विश्वास करते हैं।

इससे फर्क नहीं पड़ता कि कोई क्या सोचता है या विश्वास करता है।

अपने जीवन समुद्र से आपको ही गुजरना होगा है। अंत में इसमें आप ही होंगे, कोई और नहीं। आप गलतियां करेंगे और आपको कामयाबी भी मिलेगी। अपने आस-पास के लोगों की सलाह को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ेंगे, लेकिन आखिर अपनी नाव की तकदीर का फैसला आपके ही हाथों में होगा।

सिर्फ आप जानते हैं कि आपके लिए क्या अच्छा है और आपकी खुशी के लिए क्या जरूरी है, कोई और नहीं।

अपने निर्णय लेना और किसी को बिना सफ़ाई दिए अपना रास्ता बनाना यह दिखाता है, आप आत्म-सम्मान से भरे व्यक्ति हैं और आपमें महान आत्मविश्वास है। यह दिखाता है कि आप वसूलों वाले इंसान हैं और अपने आपमें आपकी आस्था है।

 इस जीवन में खुद से और दूसरों से प्यार करने में सक्षम होने के लिए आत्म प्रेम जरूरी है।

 

Greene, J., & Haidt, J. (2002). How (and where) does moral judgment work? Trends in Cognitive Sciences. http://doi.org/10.1016/S1364-6613(02)02011-9