बचपन का तनाव : वजह जब खुद माता-पिता हों

जून 5, 2019
माता-पिता की तेज-रफ़्तार ज़िन्दगी, कामयाबी की ललक और ऊँची अपेक्षाएं उनके बच्चों में स्ट्रेस में डाल सकती हैं।

आज हममें से कई लोग बहुत तेज-तर्रार ज़िन्दगी जी रहे हैं। ज़िन्दगी की कामयाबी हमसे अनियंत्रित माँगे कर सकती है। जीवन की यह तेज रफ़्तार अक्सर हमारे बच्चों पर असर डालती है और बचपन का तनाव पैदा कर सकती है।

आपकी ज़िन्दगी की तेज रफ़्तार आपके बच्चे पर बहुत अधिक दबाव डाल सकती है। माता-पिता अपने बच्चों से अपेक्षा करते हैं कि वे जल्दी अकेले सोना शुरू करें, उनकी पॉटी-ट्रेनिंग हो जाए, वे अपनी भावनाओं को नियंत्रित करना सीखें, बातें करें और स्कूल के मुताबिक़ खुद को ढालने में सक्षम हों।

इस फास्ट लाइफ के बीच माता-पिता की मांग होती है कि अपने बिजी स्कूल शिड्यूल के बीच भी बच्चों को अच्छे ग्रेड मिले, अच्छे पारस्परिक रिश्ते बनें और उनका प्रदर्शन शानदार हो। बचपन का तनाव एक शरीर प्रतिक्रिया है जो उस समय होती है जब बच्चे से इतनी डिमांड की जाती है जिसे वह पूरा नहीं कर सकता।

बचपन का तनाव क्या है?

बचपन का तनाव क्या है?

कई बच्चों को इतनी भारी अपेक्षाओं के बीच जीना पड़ता है कि उसकी इंटेंसिटी और लम्बी अवधि उनके मानसिक संतुलन को बिगाड़ सकती है। बच्चों को उस दबाव का सामना करने के लिए एक असाधारण प्रयास करना पड़ता है। फिर भी ज्यादातर बच्चे उन अपेक्षाओं को पूरा नहीं कर सकते हैं और वे स्ट्रेस का शिकार हो जाते हैं।

बचपन का तनाव विभिन्न कारकों के कारण हो सकता है। कुछ तो निश्चित रूप से बहुत अस्वाभाविक होते हैं। मसलन किसी प्राकृतिक आपदा, सशस्त्र संघर्ष या माता-पिता की मृत्यु जैसी ट्रेजेडी से गुजरना या यौन शोषण का शिकार होना।

हालांकि दूसरे मामलों में बचपन का तनाव स्ट्रेस भरी रूटीन या रोजमर्रा की जिंदगी के उस असंतुलन से पैदा हो सकता है जो भावनात्मक संकट या परेशानी पैदा करते हैं। स्ट्रेस में जीने वाले माता-पिता अपने बच्चों को भी उसी स्ट्रेस में पालते हैं।

इसे भी पढ़ें : अपने माता-पिता को क्षमा करें; क्योंकि उन्होंने अपना सबसे बेहतरीन किया है, जो वे कर सकते थे

बचपन का तनाव : लक्षण

बचपन जीवन का एक ऐसा स्टेज है जिसमें कई बदलाव होते हैं। बच्चे उनके अनुकूल अपने को ढालने में सक्षम हैं; वे विकास के प्रत्येक चरण को सफलता से पार कर लेते हैं। हालांकि कभी-कभी माता-पिता बनाए गए अतिरिक्त दबाव के कारण आखिरकार वे तनाव महसूस कर सकते हैं।

पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में तनाव के लक्षण:

  • लगातार चिड़चिड़ापन
  • बार-बार रोना
  • बेचैनी कम करने के लिए हमेशा अपने माता-पिता की बाहों में रहने की चाहत
  • बोलने में कठिनाई
  • अतीत के बचपन की आदतों को दोबारा रोह्राना, जैसे कि बिस्तर गीला करना या उंगली चूसना
  • अतिरंजित भय (अंधेरा, जानवरों और माता-पिता से अलग होने का भय…)

पांच साल से बड़ी उम्र वाले बच्चों में तनाव के लक्षण :

  • चिड़चिड़ापन, मूडी होना, और अकारण रोना। वे आक्रामक व्यवहार भी दिखा सकते हैं
  • उनकी दैनिक दिनचर्या की गतिविधियों में उदासीनता और प्रेरणा की कमी
  • थकान, आलस्य या लापरवाही दिखाना
  • सिरदर्द और शारीरिक परेशानी के बारे में शिकायत करना
  • बिना किसी शारीरिक कारण के बीमार दिखना
  • एकाग्रता में कमी
  • उदासीन व्यवहार
  • बुरे सपने और बेड-वेटिंग
  • पढ़ाई-लिखाई की आदतों या ग्रेड में परिवर्तन
  • खाने की आदतों में बदलाव या समस्याएं

क्या माँ-बाप की तेज-रफ़्तार ज़िन्दगी बच्चे के तनाव का कारण है?

पैरेंट की ज़िंदगी की स्पीड, टाइट शेड्यूल जो उन्हें नौकरी के साथ व्यक्तिगत और पारिवारिक ज़िन्दगी को संतुलित करने का पर्याप्त समय नहीं देता, बच्चों के जीवन और उनकी सेहत को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।

जिन माता-पिता की लाइफस्टाइल तेज होती है, वे न केवल अपने बच्चों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास के नेचुरल साइकल को प्रभावित कर सकते हैं, बल्कि बच्चे की ख़ास जरूरतों को अधूरा छोड़ सकते हैं।

ये माता-पिता अक्सर किसी पेरेंटिंग मॉडल का अनुसरण करते हैं और अपने बच्चों से उनके अनुकूल होने की उम्मीद करते हैं। बच्चे को अपने पाचन या भावनाओं को नियंत्रित करने के लिए जितनी नींद के साइकल की ज़रूरत होती है, वे उसे भी तेज कर देना चाहते हैं।

इसके अलावा उन तनावों का जिक्र क्या करना जो उन्हें स्कूल जाने से होता है। टाइट प्रोग्राम, स्कूल से घर के बीच लंबी दूरी की यात्रा, स्कूल में विफलता, स्कूल में दूसरों की बदमाशियों या उत्पीड़न की आशंका, माता-पिता की उच्च अपेक्षाएं और होमवर्क, ये सब इकट्ठे बचपन के तनाव की ओर ले जाते हैं।

इसे भी पढ़ें : अपने बच्चे को प्यार से सिखायें, डर और पाबंदियों के जरिये नहीं

बचपन का तनाव : अपने बच्चों की मदद कैसे करें

बचपन का तनाव : अपने बच्चों की मदद कैसे करें

पहली सिफारिश स्ट्रेस की इंटेंसिटी घटाना है। माता-पिता को अपने बच्चों पर वयस्कों की ओर से आने वाले तनाव का असर नहीं होने देना चाहिए।

बचपन का तनाव न केवल एक बच्चे के पूरे स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है, बल्कि उसे असमय परिपक्वता में भी बदल सकता है। कुछ हृदय रोग और डायबिटीज के सहकार वयस्क लोग इसे बचपन के दौरान होने वाले तनाव से जोड़ कर भी देखते हैं।

तनाव को रोकने और राहत देने की मूल सिफारिशें हैं:

जब चिंता या तनाव की बात आती है, तो अपने बच्चे को आत्म-नियंत्रण का सबसे अच्छा उदाहरण दें। आप वह रोल मॉडल हैं जिसे आपका बच्चा अपनाएगा। ऐसे में वे उस स्ट्रेस का मुकाबला कैसे करेंगे जो उन्हें प्रभावित करते हैं और जो आपकी ओर से आते हैं।

धैर्य, खुशी, शांति, सौम्यता वाले व्यवहार को अपनाएँ। ये दृष्टिकोण आपके बच्चे को तनाव से बचने के लिए ज्यादा रिसोर्स देते हैं।

अपने बच्चों के साथ वक्त बिताएं और उन्हें उनके परिवार और रोजमर्रा की जिंदगी में आने वाली समस्याओं का हल दिखाएँ। इस तरह आप कठिनाइयों का सामना करने के लिए यथार्थवादी और आशावादी दृष्टिकोण को बढ़ावा दे सकते हैं।

अपने बच्चे की राय सुनें और उन्हें स्वीकार करें। यदि आपके बच्चे में पहले से ही तनाव के लक्षण हैं, तो कम्युनिकेशन चैनल खोलना ज़रूरी है।

पता करें कि स्कूल की एक्टिविटी और होमवर्क के बारे में उनकी क्या राय है।

प्रत्येक बच्चे की विशेष ज़रूरतों का सम्मान करें। अपने भाई-बहनों और दूसरे बच्चों के साथ तुलना करने से बचें। उनकी क्षमता और कौशल को अहमियत दें।

अंतिम सिफारिशें

आपका बच्चा अनमोल है। उन्हें यह महसूस न होने दें कि वे जीवन में सिर्फ तभी सम्मानित, मूल्यवान या प्रिय होंगे अगर उनका प्रदर्शन उत्कृष्ट हो। आपका प्यार और सम्मान कई तरह से उसमें अच्छी प्रतिक्रिया करता है।

इसके अलावा अपने बच्चे से ज्यादा अपेक्षा करने से बचें जिसे वह पूरा नहीं कर सकता। अपने बच्चे के बारे में जानें और उसका सम्मान करें जो कि वह है, और उसके बचपन के तनाव का स्रोत न बनें।

Meadows, J. (2017). Stress. In Spirit and Capital in an Age of Inequality. https://doi.org/10.4324/9781315413532

Thompson, R. A. (2014). Stress and child development. Future of Children. https://doi.org/10.1353/foc.2014.0004