पेशाब में नाइट्राइट की मौजूदगी का क्या मतलब है?

पेशाब में नाइट्राइट की मौजूदगी मूत्र पथ के संक्रमण (urinary tract infection) का संकेत है। वैसे तो डॉक्टर हमेशा इस टेस्ट का अनुरोध नहीं करते हैं, लेकिन वे अपनी डायग्नेनोसिस के लिए वे इसकी सिफारिश कर सकते हैं। इस आर्टिकल में आप इसके बारे में सब जानेंगे।
पेशाब में नाइट्राइट की मौजूदगी का क्या मतलब है?

आखिरी अपडेट: 01 अप्रैल, 2020

पेशाब में नाइट्राइट होने का संकेत डॉक्टर को यूरिनरी ट्रैक्ट के संक्रमण की डायग्नोसिस करने में मदद करते हैं। आम तौर पर इंसान के पेशाब में नाइट्राइट नहीं होना चाहिए। उनकी मौजूदगी असामान्य बात है।

मूत्र वह तरल पदार्थ है जिसे शरीर अपने बेकार कचरे को बाहर निकालने के लिए किडनी के जरिये पैदा करता है। मूत्र के बाहर निकालने से खून को फ़िल्टर करना संभव होता है।

नाइट्रेट उन पदार्थों में से हैं जिन्हें मूत्र के रास्ते बाहर निकाला जाता है। वैसे तो वे नाइट्राइट की तरह लगते हैं, लेकिन दोनों  एक नहीं हैं। पेशाब में मौजूद नाइट्रेट का मुकाबला बैक्टीरिया से होने पर वे नाइट्राइट में बदल जाते हैं। इसलिए नाइट्राइट टेस्ट यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) से जुड़ा हुआ है।

हालाँकि नाइट्राइट सिर्फ बैक्टीरिया के कारण ही मौजूद नहीं होते। फ़ूड इंडस्ट्री में पोटैशियम नाइट्राइट या सोडियम नाइट्राइट जैसे तत्व इस्तेमाल किये जाते हैं। उदाहरण के लिए वे मांस के लाल रंग को कृत्रिम रूप से बेहतर बनाने के लिए इसका इस्तेमाल हैं।

दूसरी ओर सब्जियों में आमतौर पर नाइट्रेट होते हैं। हरी सब्जियां, बीट और मूली नाइट्रेट से समृद्ध होते हैं। इसलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) रोजाना शरीर के प्रति किलोग्राम 3.7 मिलीग्राम वजन की सब्जी की डेली लिमिट से ज्यादा खाने की सलाह नहीं देता।

शरीर सीधे नाइट्रेट का इस्तेमाल नहीं कर सकता है और इसे पेशाब के साथ निकाल देता है। हालांकि जैसाकि ऊपर बताया गया हैं, कुछ बैक्टीरिया इसे नाइट्राइट बनाने के लिए ले सकते हैं। वैसे सभी बैक्टीरिया में यह क्षमता नहीं होती है। फिर भी सबसे आम बैक्टीरिया जो यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन का कारण बनते हैं, उनमें से कुछ का जिक्र हम यहाँ नीचे करेंगे। इसमें शामिल हैं:

डॉक्टर नाइट्राइट टेस्ट के लिए कब कहते हैं?

यूरिनरी ट्रैक्ट के इन्फेक्शन के लक्षण में डॉक्टर को उनकी मौजूदगी का संदेह होता है। इस तरह जब रोगी कुछ क्लासिक लक्षणों के बारे में बताता है तो डॉक्टर अपनी डायग्नोसिस का रूख सिस्टिटाइटिस (cystitis) की ओर करते हैं। इन लक्षणों में शामिल हैं:

  • डिसुरिया (Dysuria) या पेशाब करने में कठिनाई
  • दर्दनाक या जलन भरा पेशाब
  • पेशाब का असामान्य रंग
  • पॉल्यूरिया (Polyuria) या हर समय पेशाब करने की तलब
  • बुखार

इस स्थिति के साथ सामना होने पर डॉक्टर यूरिन नाइट्राइट टेस्ट का अनुरोध कर सकते हैं। हालांकि वह शायद कम्पलीट यूरिन एग्जामिनेशन का अनुरोध भी करें सिर्फ नाइट्राइट टेस्ट का नहीं। इसके अलावा वे एक यूरिन नाइट्राइट टेस्ट को ल्यूकोसाइट एस्टरेज़ यूरिन टेस्ट के साथ भी करा सकते हैं। दोनों के पॉजिटिव रिजल्ट यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन की ऊँची संभावना को जताते हैं।

ल्यूकोसाइट एस्टेरेज (Leukocyte esterase) ऐसा एंजाइम है जिसे न्यूट्रोफिल, बेसोफिल, ईएसिनोफिल और मोनोसाइट्स पैदा करते हैं। ये श्वेत रक्त कोशिकाएं हैं। इस तरह इनडायरेक्ट रूप से पॉजिटिव टेस्ट संक्रमण के कारण श्वेत रक्त कोशिकाओं की मौजूदगी को दर्शाता है।

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मूत्र में नाइट्राइट की मौजूदगी यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन की ओर इशारा करते हैं।

 पेशाब में नाइट्राइट का टेस्ट कैसे किया जाता है

जब डॉक्टर नाइट्राइट समेत कम्पलीट यूरिन एग्जामिनेशन का अनुरोध करता है, तो रोगी को एक स्टेरलाइज़  कंटेनर में यूरिन सैम्पल एकत्र करना होता है। कंटेनर यह सुनिश्चित करने के लिए स्टेरलाइज़ होना चाहिए कि बायोकेमिस्ट को विश्वसनीय रिजल्ट मिलेगा

रोगी को यूरिन के पहले फ्लो को छोड़ देना चाहिए और फिर दूसरे पार्ट को इकट्ठा करना चाहिए। अगर रोगी कई घंटों तक पेशाब किये बिना रहने के बाद सैम्पल को ले तो यह ज्यादा विश्वसनीय होगा। उदाहरण के लिए सुबह जब वे सोकर उठते हैं, उसी वक्त यह सबसे अच्छा रहेगा।

फिर बायोकेमिस्ट विश्लेषण करने के लिए मूत्र में एक टेस्ट स्ट्रिप डालता है। टेस्ट स्ट्रिप में ऐसे पदार्थ होते हैं जो उस समय रंग बदलते हैं जब उन्हें वह चीज मिल जाती जिसे उन्हें मापना हो। आमतौर पर टेस्ट स्ट्रिप किसी एक तत्व को नहीं मापते, इसके बजाय प्रक्रिया को ज्यादा असरदार बनाने के लिए उनमें कई रीएजेंट होते हैं। एक अकेला टेस्ट स्ट्रिप नाइट्राइट, ग्लूकोज, एस्टरेज़ और प्रोटीन का पता लगा सकती है।

वैसे तो यह ब्रांड पर निर्भर है, पर आम तौर पर यूरिन नाइट्राइट रीएजेंट टार्गेट केमिकल का पता चलने पर गुलाबी हो जाते हैं। प्रत्येक टेस्ट स्ट्रिप निर्माता इसके लेबल पर रंगों और उनकी व्याख्या को निर्दिष्ट तौर पर लिखता है।

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आम तौर पर यूरिन नाइट्राइट रीएजेंट टार्गेट केमिअक्ल का पता चलने पर गुलाबी हो जाते हैं।

टेस्ट रिजल्ट की व्याख्या डॉक्टर कैसे करते हैं

क्या होगा अगर रोगी के पेशाब में नाइट्राइट टेस्ट पॉजिटिव हो?

बता दें कि पेशाब के दौरान जलन और बुखार के कारण मरीज अपने डॉक्टर से मिलने का फैसला करता है। इससे डॉक्टर यूरिन एनालिसिस का अनुरोध करता है और लैब रिपोर्ट बताती है कि रोगी का नाइट्राइट टेस्ट पॉजिटिव है। पॉजिटिव टेस्ट यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन का सुझाव देता है। अगर इसके साथ रोगी ल्यूकोसाइट एस्टेरेज (leukocyte esterase) के लिए पॉजिटिव रिजल्ट देता है, तो यह डायग्नोसिस कन्फर्म है।

फिर डॉक्टर यूरिन कल्चर का वेट किए बिना एक एंटीबायोटिक ट्रीटमेंट का संकेत दे सकता है। हालाँकि कल्चर के रिजल्ट आने के बाद वे एंटीबायोटिक बदला सकते हैं। अंत में यूरिन कल्चर यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन की डायग्नोसिस की पुष्टि कर सकता है। इससे उस एंटीबायोटिक की टाइप भी निर्दिष्ट हो जायेगी जिसे डॉक्टर को लिखना चाहिए।




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