अगॉरफोबिया के लक्षण क्या हैं?

अगॉरफोबिया जीवन में कुछ बुनियादी स्थितियों में एंग्जायटी क्राइसिस पैदा करता है, और मनोवैज्ञानिक और शारीरिक दोनों तरह के लक्षणों का कारण हो सकता है। इस आर्टिकल में हम इसके बारे में बताएंगे।
अगॉरफोबिया के लक्षण क्या हैं?

आखिरी अपडेट: 30 नवंबर, 2020

अगॉरफोबिया के लक्षणों काब्यौरा देने के लिए कई अलग-अलग संस्थाओं ने  काम किया है। हालाँकि, उन्होंने यह पाया है कि यह बहुत जटिल रोग है जिसे हर व्यक्ति अलग-अलग तरीकों से अनुभव कर सकता है। अगर हमें इसे क्लासिफाई करना हो तो हम इसे एंग्जायटी समस्या के रूप में क्लासिफाई करेंगे।

इससे पीड़ित लोग उन स्थानों या स्थितियों को लेकर एंग्जायटी या अतिरंजित भय महसूस करते हैं जिनमें वे खुद को असहाय, फंसा हुआ या शर्मिंदा महसूस करते हैं। उदाहरण के लिए इसमें खुली जगहें, बहुत भीड़-भाड़ वाली जगहें और यहाँ तक कि पब्लिक प्लेसेज हो सकते हैं।

समस्या यह है कि अगॉरफोबिया के लक्षण बहुत अलग-अलग ह सकते हैं और फोबिया कभी-कभी एक-दूसरे पर ओवरलैप करते हैं। इस लेख में हम सबसे आम लक्षणों की व्याख्या करेंगे।

डीएसएम-वी के अनुसार अगॉरफोबिया के लक्षण

DSM-V  मनोरोगों का डायग्नोस्टिक और स्टेटिस्टिटिकल मैनुअल है जिसे 2013 में अपडेट किया गया था। यह वह डिवाइस है जिसका इस्तेमाल मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सक आमतौर पर विभिन्न बीमारियों और स्थितियों की पहचान करने के लिए करते हैं। इस मैनुअल के अनुसार अगॉरफोबिया के सबसे निरंतरता वाले लक्षण निम्नलिखित हैं:

  • उन जगहों पर एंग्जायटी महसूस करना जहां रहना मुश्किल या शर्मनाक हो सकता है। ये लोग आमतौर पर एंग्जायटी अटैक से डरते हैं, और इससे भी बुरी बात है कि ऐसी जगह पर जहां वे किसी भी तरह की मदद नहीं पा सकते। इस तरह घर के बाहर भीड़-भाड़ वाले स्थान उन्हें सबसे ज्यादा परेशान करते हैं, जैसे की पब्लिक ट्रांस[पोर्ट या सुपरमार्केट।
  • इस डर का मतलब यह है कि उपेक्षा वाले व्यवहार का पैटर्न अक्सर विकसित होने लगते हैं। उदाहरण के लिए अगर कोई बस में ट्रेवल करते समय एंग्जायटी महसूस करता है, तो वह पूरी तरह बसों से बचेगा। इस तरह वह बस पर एंग्जायटी अटैक के खौफ से अपनी आदतें बदल लेगा।
  • अगॉरफोबिया के निश्चित डायग्नोसिस में सक्षम होने के लिए एंग्जायटी अटैक लगातार होना चाहिए या कम से कम उनमें से एक को बहुत गहन एंग्जायटी या डार्क की वजह बनना चाहिए। हमारा मतलब है कि व्यक्ति दूसरे अटैक से पीड़ित होने से डरता है, और इस कारण अपना व्यवहार बदल लेता है।

यहाँ हमें इस बात पर भी जोर देना चाहिए कि एक सटीक डायग्नोसिस स्थापित करने के लिए दूसरी मानसिक समस्याओं को अलग रखा जाना चाहिए। कारण यह है कि कुछ विशिष्ट फ़ोबिया, जैसे कि सोशल फ़ोबिया के मामले में अक्सर अगॉरफोबिया  का भ्एरम होता है।


पैनिक अटैक अगॉरफोबिया के उभरने का एक रूप है।

इसे भी पढ़ें : एंग्जायटी अटैक: इससे उबरने के लिए ज़रूरी सुझाव

अगॉरफोबिया के लक्षणों के कुछ उदाहरण

अगॉरफोबिया के लक्षण, जैसा कि हमने पहले ही बताया है, लोगों में अलग-अलग हो सकते हैं। यह रोग अक्सर खुले स्थानों में होने का डर पैदा करता है, खासकर जब कोई अकेला हो। हालांकि, यह बंद स्थानों में भी हो सकता है, जैसे कि थिएटर या मूवी थिएटर में।

अगॉरफोबिया की एक और विशेषता है, शर्मनाक स्थिति में होने का डर। पीड़ित व्यक्ति डरते हैं कि क्या होगा अगर वे जमीन पर गिर गए या दूअरों के सामने एंग्जायटी का दौरा पड़ा। यह डर काफी चरम और बहुत तेज होता है।

यहाँ समस्या यह है कि यह सब व्यक्ति के जीवन के हर एक क्षेत्र को प्रभावित करता है। जैसा कि हमने पहले ही बताया है, बचने का व्यवहार तब धीरे-धीरे तेज होने लगता है।

उदाहरण के लिए, वे काम पर जाने के लिए या छुट्टियों में कहीं जाने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट लेने से डरते हैं, तो बचने की मानसिकता यात तय करनी शुरू कर देगी कि वे कैसे एक्ट और रियेक्ट करते हैं और वे ऐसी गतिविधियों से बचना चाहेंगे।

आप में रुचि हो सकती है: अकेलेपन से नहीं डरने वालों की पर्सनालिटी कैसी होती है?

अगॉरफोबिया के बारे में दूसरे विचार

प्रोफेशनल फार्मेसी जर्नल में प्रकाशित एक लेख के अनुसार अगॉरफोबिया के लक्षण आमतौर पर देर से किशोरावस्था या शुरुआती वयस्कता में दिखाई देते हैं। इन लोगों में से अधिकांश अपने घरों में अधिक से अधिक दुबके रहते हैं, और सिर्फ बहुत जरूरी कामों के लिए बाहर जाते हैं।

अगॉरफोबिया पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक दिखाई देता है। दुर्भाग्य से यह आमतौर पर डिप्रेशन के लक्षणों, जुनून भरे विचारों और सामाजिक भय के साथ होता है।

यदि इस बीमारी का समय पर इलाज नहीं किया जाये तो यह क्रोनिक हो जाती है और व्यक्ति बहुत अक्षम हो जाता है। हमें इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि आखिरकार यह एक पैनिक डिसऑर्डर है।

जर्नल ऑफ साइकोपैथोलॉजी एंड क्लिनिकल साइकोलॉजी  के एक लेख में बताया गया है कि जब कोई संकट होता है, तो हृदय गति तेज हो जाती है और व्यक्ति को घुटन की अनुभूति हो सकती है। पसीना बढ़ता है, और छाती पर दबाव और असुविधा महसूस होती है।

बहुत चरम मामलों में इससे चक्कर आना और बेहोशी हो सकती है। अनुभव की गई एंग्जायटी व्यक्ति को यह महसूस कराती है कि उन्होंने अपना कंट्रोल खो दिया है, और इससे मृत्यु भय भी पैदा हो सकता है।


अगॉरफोबिया में कई तरह के लक्षण होते हैं जिनमें कुछ जगहों से बचने वाला व्यवहार शामिल है।

आपको क्या याद रखना चाहिए

हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि अगॉरफोबिया एक जटिल रोग है जो कई अलग-अलग तरीकों से उभरता है। मरीज विशिष्ट परिस्थितियों से डरते हैं, जैसे कि सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना या उन स्थानों पर जाना जहां उन्हें लगता है कि संकट की स्थिति में उन्हें मदद नहीं मिली है।

इस वजह से यह आवश्यक है कि उन्हें उचित मनोवैज्ञानिक सहायता और ट्रीटमेंट मिले। यदि नहीं, तो रोग पुराना हो सकता है और अपनी सामान्य दिनचर्या पूरी करने से रोक सकता है।




यह पाठ केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए प्रदान किया जाता है और किसी पेशेवर के साथ परामर्श की जगह नहीं लेता है। संदेह होने पर, अपने विशेषज्ञ से परामर्श करें।