आप जो महसूस करते हैं, उसे करने की व्यक्तिगत आज़ादी

17 अक्टूबर, 2018
जब तक आप अपने चारों ओर लोगों का सम्मान करते हैं, तब तक जो चाहें उसे करने के मनोभाव की आलोचना नहीं की जानी चाहिए – आपकी ज़िन्दगी में जो महत्वपूर्ण है, वह है आपका व्यक्तिगत विकास।

व्यक्तिगत आज़ादी ऐसी चीज है जिसका अनुभव हर कोई अपनी ज़िन्दगी में नहीं कर पायेगा।

“जो जी में आये करो” वाला रवैया आत्म-सजग होने का संकेत देता है, और इसे हमेशा सम्मान, बौद्धिकता और मूल्यों के साथ किया जाना चाहिए।

आप जानते हैं, यह हमेशा आसान नहीं होता। कभी-कभी आपकी ज़िम्मेदारियां आपको धीरे-धीरे अपने शिकंजे में ले लेती हैं और आपकी खुशियाँ छीन लेती हैं, जिससे जीवन और भी मुश्किल हो जाता है।

इस कारण आपको अपनी प्रायोरिटी तय करना अहम है। वे लोग जो आपको तकलीफ देते हैं, और आपकी आजादी छीन लेते हैं, उनके लिए आप जिम्मेदार नहीं हैं। जो बोझ आप उठाते हैं और आपके पैरों में जो बेड़ियाँ जकड़ी हैं, वे आपके निजी विकास में बड़ी बाधा हो सकती हैं।

आज हम आपको इस पर सोच-विचार के लिए आमंत्रित करते हैं।

जो मैं महसूस करता हूँ, वह मेरे दिल की आवाज़ है

जीवन भर आप किसी चीज को छिपा सकते हैं, और सोच सकते हैं कि यह किसी तरह आपकी दुनिया में संतुलन बनाए रखता है।

आपकी चाहतें और जरूरतें खामोश रहती हैं क्योंकि आप समझते है कि वे आपके पार्टनर या आपके परिवार के साथ फिट नहीं होंगे।

आप शब्दों को छिपाते हैं, क्योंकि आप दूसरों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते।

आप अपनी ख्वाहिशों को सस्पेंड करते हैं, और अपने आपको समझाते हैं कि यह “समय नहीं है” या “बहुत देर हो चुकी है”, या” वे मेरा मजाक उड़ायेंगे।”

आप कह सकते हैं एक तरह से के अपने भीतर की दुनिया के मुकाबले बाहर हम ज्यादा फोकस्ड जीवन जीते हैं। यही कारण है, आपको कुछ सहज चीजें अपने जेहन में रखनी चाहियें।

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उसे करने की व्यक्तिगत आज़ादी

आपकी ज़रूरतें दूसरों की ज़रूरतों के सामंजस्य में होनी चाहिए

अपनी निजी मिटाने की चाहत के मामले में कोई भी स्वार्थी नहीं होता, और अपने व्यक्तित्व के अनुसार अपनी आस्था के मुताबिक़ स्वतंत्र रूप से कार्य करता है। सम्मान और संतुलन की सीमाओं के भीतर आप जो चाहते हैं उसे करने में समर्थ होना चाहिए।

  • अगर आप अकेले या किसी दोस्त के साथ वीकेंड ट्रिप पर जाना चाहते हैं, तो आपके परिवार और न आपके साथी को इसे गलत तरीके से नहीं लेना चाहिए। खुशियों की नींव भरोसे और सम्मान की बुनियाद पर डाली जाती हैं।

इंसान होने के लिए व्यक्तिगत आज़ादी ज़रूरी है और मानव का एक आवश्यक लक्ष्य है। यह महत्वपूर्ण है कि आप इसे अपने साधनों से ही प्राप्त करें।

  • आपको यह चुनने की व्यक्तिगत आज़ादी होनी चाहिए कि आप क्या करते हैं और क्या करना नहीं चाहते।
  • आपको यह तय करने के लिए आज़ाद होना चाहिए कि आप व्यक्तिगत और पेशे के मामले में क्या चाहते हैं
  • कम्यूनिकेट करनी की आजादी सबसे ऊपर है, क्योंकि आपकी सफलता आप जो महसूस करते हैं, सोचते हैं और करते हैं उसके ही अनुरूप होती है।

अगर आपको लगता है, इन तीन प्रमुख पहलुओं के बीच विसंगति है, तो अंत में आप बहुत कम आत्म-विश्वास पाते हैं।

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आप जो महसूस करते हैं, उसे पूरे सम्मान और प्रबुद्धता के साथ करें, और आलोचना को नजरअंदाज करें।

सीमाएं कहां हैं और आपकी प्रायोरिटी क्या है, इस ओर से सजग रहते हुए यदि आप वह करते हैं जो आप चाहते हैं, तो आपको कुछ भी रोक नहीं सकता

  • आप जानते हैं, आपके बच्चे, अगर वे हैं, सबसे पहले आते हैं, और आप अपने परिवार की जिम्मेदारियों से अवगत हैं। लेकिन इन्हें आपके व्यक्तिगत विकास में बाधक नहीं होनी चाहिए।
  • दरअसल अहम चीज यह जानना है कि ऐसा सही संतुलन कैसे पाया जाय जहाँ आपके ऊपर कुछ भी पूरी तरह से हावी न हो। आपको हर काम पूरे जुनून और और आनंद के साथ करना चाहिए, यह जानते हुए कि आपकी हर कोशिश मूल्यवान है।

अपनी व्यक्तिगत आज़ादी का प्रयोग करना महत्वपूर्ण है

1.  अपनी प्रायोरिटी तय करें

हमने पहले इसकी ओर इशारा किया था। आपकी प्राथमिकताएं ज़िन्दगी के वे पहलू हैं जिन्हें आप नहीं छोड़ सकते। लेकिन आपको कुछ अहम बातों को ध्यान में रखना चाहिए।

  • प्रायोरिटी आपकी ज़िन्दगी पर पूरी तरह से हावी नहीं हो सकती हैं। जीवन सिर्फ काम करना नहीं है। जिंदगी पूरी तरह आपके जीवनसाथी या बच्चों के इर्द-गिर्द ही नहीं घूमता है (आपको उनकी आजादी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को भी बढ़ावा देना चाहिए)।

आपकी ढेर सारी प्रायोरिटी नहीं होनी चाहिए, और आमतौर पर केवल वे तीन ही होती हैं: परिवार, कार्य और व्यक्तिगत विकास (जो इस लेख का केन्द्रीय विषय है)।

2.  जागरूकता बढ़ाना: अपने बारे में सोचना भर स्वार्थ नहीं है

आप चाहें मानें या न मानें, यह ऐसी चीज है जिससे लोग जूझते हैं:  अब दूसरों को आपकी ज़रूरत होती है, तो आप अपने बारे में कैसे सोचते हैं?

  • यह सही दृष्टिकोण नहीं है। एक सोच यह है: मैं अपना ख़याल रखता हूं और अपनी खुशी और कल्याण की तलाश करता हूं ताकि दूसरों को अपना बेहतरीन दे सकूं।

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3.  अपनी आलोचना का खरा मूल्यांकन करें

आपका परिवार आपमें अचानक हुए बदलाव से हैरान हो सकता है। आपने हाल ही में उस ऑनलाइन पाठ्यक्रम के लिए साइनअप क्यों किया है? आप अचानक एक लंबी ट्रिप पर कैसे जा रहे हैं? आपने अचानक अपने पति को छोड़ने का फैसला क्यों किया है?

  • दूसरे लोग क्या सोचते हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। आपको केवल अपने को समझाने की ज़रूरत है। हर किसी को अपनी खुशी का आर्किटेक्ट होने का अधिकार है। आप जो चाहते हैं, सोचते हैं और करते हैं, उनके बीच एक संतुलन कायम करने जरूरत है।

हर किसी की जिन्दगी में एक समय आता है जब वे यह बात कह उठते हैं: “मैं जो महसूस करता हूं, वह करता हूँ और मुझे कोई पछतावा नहीं है।” यह परिपक्वता और आजादी की दिशा में एक कदम बढ़ाना है, जहां आप दूसरों और अपने आप के लिए सम्मान से भरकर काम करते हैं।

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  • Wilson, R. S. (2004). Doing what You Think Vs. Doing what You Feel: Using Affect to Evaluate the Quality of Structured Risk Management Decisions (Doctoral dissertation, The Ohio State University).