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विटिलिगो क्या है? कारण और इलाज के बारे में जानें

3 मिनट
विटिलिगो क्या है? विटिलिगो कोई बहुत नुकसान वाली बीमारी नहीं माना जाता है। पर यह इससे पीड़ित लोगों के लिए यह सामाजिक और मनोवैज्ञानिक समस्या का कारण हो सकता है।
विटिलिगो क्या है? कारण और इलाज के बारे में जानें
प्रकाशित: 27 अप्रैल, 2020 12:42

विटिलिगो एक क्रोनिक बीमारी है जो त्वचा को एक असामान्य पिगमेंटेशन देती है। यह त्वचा पर विभिन्न आकार वाला सफ़ेद हिस्सा बनाती है। आमतौर पर ये त्वचा के काले हिस्सों या घर्षण वाले अंगों में होती हैं। चेहरे, अंडरआर्म्स, होंठ, जननांग और हाथों आदि में विटिलिगो होने की आशंका ज्यादा होती है।

यह रोग 1 से 2 प्रतिशत लोगों को प्रभावित करता है। आम तौर पर यह 20 से 30 साल की उम्र वाले लोगों पर हमला करता है या 50 साल से ज्यादा उम्र वाले लोगों को। हालांकि यह जीवन के किसी भी स्टेज में हो सकता है और पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा प्रचलित है।

विटिलिगो इन्फेस्क्शस नहीं है। यह अप्रत्याशित रूप से उभरता है, लेकिन इह धीरे-धीरे प्रोग्रेस करता है। इस बीमारी के कुछ पीड़ित ऐसे ही होते हैं जो दोबारा पिगमेंटेशन देखते हैं। जिन दुर्लभ मामलों में यह होता है, लगभग हमेशा ही बच्चों में होता है।

विटिलिगो क्या है? विटिलिगो का कारण

अब तक विज्ञान ने इस बीमारी के कारण को इग्नोर किया है। एक्सपर्ट का मानना ​​है कि यह एक ऑटोइम्यून बीमारी हो सकती है, लेकिन इसकी पुष्टि करने वाले सबूत अपर्याप्त हैं। इसके अलावा जीन फैक्टर से इसका एक पॉजिटिव संबंध है। विटिलिगो वाले हर पांच में से एक व्यक्ति का कोई न रिश्तेदार इस कंडीशन का होता है।

सबसे मान्य धारणा यह है कि पिगमेंटेशन की क्षति इसलिए होती है क्योंकि मेलानोसाइट्स ऑटो-डिस्ट्रक्शन की प्रक्रियाओं को विकसित करता है। इससे जुड़े दूसरे फैक्टर भी हैं, जैसे कि सनबर्न और भावनात्मक स्ट्रेस।

पिगमेंटेशन की क्षति का लेवल अलग-अलग रोगियों में अलग-अलग होता है। कई बार यह तेजी से शुरू होता है और फिर अचानक रुक जाता है और इस फैक्टर को नजरअंदाज कर दिया जाता है। ज्यादातर मामलों में क्लिनिकल इवोल्यूशन होता है: रोग में एक्टिव पीरियड और स्टेब्लिटी के पीरियड अदल-बदल कर आटे हैं।

इसे भी पढ़ें : त्वचा के डार्क स्पॉट्स को कैसे चमकाएं

विटिलिगो के लक्षण

विटिलिगो के लक्षण
विटिलिगो के मुख्य लक्षण त्वचा पर सफेद हिस्सों का होना है। वे मुख्य रूप से उन अंगों में दिखाई देते हैं जिन पर धूप पड़ती है। जैसा कि पहले बताया गया है, वे म्यूकस मेम्ब्रेन और घर्षण वाले अंगों में भी उभरते हैं।

समय के साथ इन धब्बों की संख्या बढ़ती जाती है। हालांकि, यह पूरी तरह से अप्रत्याशित है और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में अलग-अलग होता है। बेशक, यह उन लोगों पर ज्यादा ध्यान देने योग्य है जिनकी स्किन गहरे रंग की है। हल्की त्वचा वाले लोग इन्हें सिर्फ तभी देखते हैं जब उनकी त्वचा लाल होती है या उनमें दाने उभरते हैं।

भले ही स्कैल्प विटिलिगो से प्रभावित नहीं दिखता, लेकिन समय से पहले बालों का ग्रे होना आम है। किसी भी मामले में इस बीमारी को बेनाइन माना जाता है क्योंकि इससे शरीर को कोई गंभीर नुकसान नहीं होता। मुख्य समस्या सौंदर्य और मनोवैज्ञानिक होती है।

इसे भी आजमायें : 6 लक्षण त्वचा कैंसर के जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए

विटिलिगो की टाइप

विटिलिगो दो तरह का होता है: नॉनफ्रैगमेंटेड, या टाइप A और फ्रैगमेंटेड या टाइप B। टाइप ए ज्यादा आम होता है और मुख्य रूप से जेनेटिक फैक्टर से होता है। शरीर में इसकी वितरण प्रक्रिया के अनुसार चार सब टाइप हैं।
  • लोकलाइज़ । स्पॉट कुछ कम होते हैं और विशिष्ट क्षेत्र में दीखते हैं।
  • वे हाथों पर और चेहरे के छिद्रों के आसपास उभरते हैं।
  • पैरों और हाथों में असावधानी दिखाई देती है।
  • जेनेरेलाइज़। स्पॉट रैंडम तरीके से होता है और शरीर के मुख्य अंगों में होता है। यह विटिलिगो का सबसे आम रूप है।

टाइप B विटिलिगो कम आम है। यह आमतौर पर कम उम्र में, बच्चों में और युवा लोगों में दिखाई देता है। यह लगभग हमेशा धब्बों के तेजी से बढ़ने से शुरू होता है, लेकिन फिर धीमा हो जाता है। आमतौर पर एक साल के बाद।

डायग्नोसिस

आम तरीका है कि डायग्नोसिस करने के लिए कोई डॉक्टर एक फिजिकल टेस्ट करने के साथ-साथ एक डायग्नोस्टिक हिस्ट्री की जाँच करता है। इसमें धब्बों का विस्तृत निरीक्षण भी शामिल है कि क्या यह इस बीमारी से जुड़ा है। साथ ही, वे मरीज की फैमिली हिस्ट्री और सामान्य स्थिति के बारे में पूछते हैं।

संदेह होने पर या अगर लक्षण दूसरी बीमारियों की ओर इशारा करें तो डॉक्टर निम्नलिखित जैसे अतिरिक्त टेस्ट का आदेश देगा:

  • त्वचा की बायोप्सी
  • यूवी लैम्प एग्जाम
  • ब्लड टेस्ट
  • आई टेस्ट

वर्तमान में, शोधकर्ता विटिलिगो के बारे में रिसर्च कर रहे हैं। वे मूल रूप से तीन बातों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। पहला, इस स्थिति के कारण होने वाले स्ट्रेस और ट्रॉमा की घटनाओं को निर्धारित करना। दूसरा विटिलिगो पर जेनेटिक के असर को स्थापित करना है। अंत में, वे नए ट्रीटमेंट विकसित करने के लिए लैब में चूहों के साथ प्रयोग कर रहे हैं।

विटिलिगो एक क्रोनिक बीमारी है जो त्वचा को एक असामान्य पिगमेंटेशन देती है। यह त्वचा पर विभिन्न आकार वाला सफ़ेद हिस्सा बनाती है। आमतौर पर ये त्वचा के काले हिस्सों या घर्षण वाले अंगों में होती हैं। चेहरे, अंडरआर्म्स, होंठ, जननांग और हाथों आदि में विटिलिगो होने की आशंका ज्यादा होती है।

यह रोग 1 से 2 प्रतिशत लोगों को प्रभावित करता है। आम तौर पर यह 20 से 30 साल की उम्र वाले लोगों पर हमला करता है या 50 साल से ज्यादा उम्र वाले लोगों को। हालांकि यह जीवन के किसी भी स्टेज में हो सकता है और पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा प्रचलित है।

विटिलिगो इन्फेस्क्शस नहीं है। यह अप्रत्याशित रूप से उभरता है, लेकिन इह धीरे-धीरे प्रोग्रेस करता है। इस बीमारी के कुछ पीड़ित ऐसे ही होते हैं जो दोबारा पिगमेंटेशन देखते हैं। जिन दुर्लभ मामलों में यह होता है, लगभग हमेशा ही बच्चों में होता है।

विटिलिगो क्या है? विटिलिगो का कारण

अब तक विज्ञान ने इस बीमारी के कारण को इग्नोर किया है। एक्सपर्ट का मानना ​​है कि यह एक ऑटोइम्यून बीमारी हो सकती है, लेकिन इसकी पुष्टि करने वाले सबूत अपर्याप्त हैं। इसके अलावा जीन फैक्टर से इसका एक पॉजिटिव संबंध है। विटिलिगो वाले हर पांच में से एक व्यक्ति का कोई न रिश्तेदार इस कंडीशन का होता है।

सबसे मान्य धारणा यह है कि पिगमेंटेशन की क्षति इसलिए होती है क्योंकि मेलानोसाइट्स ऑटो-डिस्ट्रक्शन की प्रक्रियाओं को विकसित करता है। इससे जुड़े दूसरे फैक्टर भी हैं, जैसे कि सनबर्न और भावनात्मक स्ट्रेस।

पिगमेंटेशन की क्षति का लेवल अलग-अलग रोगियों में अलग-अलग होता है। कई बार यह तेजी से शुरू होता है और फिर अचानक रुक जाता है और इस फैक्टर को नजरअंदाज कर दिया जाता है। ज्यादातर मामलों में क्लिनिकल इवोल्यूशन होता है: रोग में एक्टिव पीरियड और स्टेब्लिटी के पीरियड अदल-बदल कर आटे हैं।

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विटिलिगो के लक्षण

विटिलिगो के लक्षण
विटिलिगो के मुख्य लक्षण त्वचा पर सफेद हिस्सों का होना है। वे मुख्य रूप से उन अंगों में दिखाई देते हैं जिन पर धूप पड़ती है। जैसा कि पहले बताया गया है, वे म्यूकस मेम्ब्रेन और घर्षण वाले अंगों में भी उभरते हैं।

समय के साथ इन धब्बों की संख्या बढ़ती जाती है। हालांकि, यह पूरी तरह से अप्रत्याशित है और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में अलग-अलग होता है। बेशक, यह उन लोगों पर ज्यादा ध्यान देने योग्य है जिनकी स्किन गहरे रंग की है। हल्की त्वचा वाले लोग इन्हें सिर्फ तभी देखते हैं जब उनकी त्वचा लाल होती है या उनमें दाने उभरते हैं।

भले ही स्कैल्प विटिलिगो से प्रभावित नहीं दिखता, लेकिन समय से पहले बालों का ग्रे होना आम है। किसी भी मामले में इस बीमारी को बेनाइन माना जाता है क्योंकि इससे शरीर को कोई गंभीर नुकसान नहीं होता। मुख्य समस्या सौंदर्य और मनोवैज्ञानिक होती है।

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विटिलिगो की टाइप

विटिलिगो दो तरह का होता है: नॉनफ्रैगमेंटेड, या टाइप A और फ्रैगमेंटेड या टाइप B। टाइप ए ज्यादा आम होता है और मुख्य रूप से जेनेटिक फैक्टर से होता है। शरीर में इसकी वितरण प्रक्रिया के अनुसार चार सब टाइप हैं।
  • लोकलाइज़ । स्पॉट कुछ कम होते हैं और विशिष्ट क्षेत्र में दीखते हैं।
  • वे हाथों पर और चेहरे के छिद्रों के आसपास उभरते हैं।
  • पैरों और हाथों में असावधानी दिखाई देती है।
  • जेनेरेलाइज़। स्पॉट रैंडम तरीके से होता है और शरीर के मुख्य अंगों में होता है। यह विटिलिगो का सबसे आम रूप है।

टाइप B विटिलिगो कम आम है। यह आमतौर पर कम उम्र में, बच्चों में और युवा लोगों में दिखाई देता है। यह लगभग हमेशा धब्बों के तेजी से बढ़ने से शुरू होता है, लेकिन फिर धीमा हो जाता है। आमतौर पर एक साल के बाद।

डायग्नोसिस

आम तरीका है कि डायग्नोसिस करने के लिए कोई डॉक्टर एक फिजिकल टेस्ट करने के साथ-साथ एक डायग्नोस्टिक हिस्ट्री की जाँच करता है। इसमें धब्बों का विस्तृत निरीक्षण भी शामिल है कि क्या यह इस बीमारी से जुड़ा है। साथ ही, वे मरीज की फैमिली हिस्ट्री और सामान्य स्थिति के बारे में पूछते हैं।

संदेह होने पर या अगर लक्षण दूसरी बीमारियों की ओर इशारा करें तो डॉक्टर निम्नलिखित जैसे अतिरिक्त टेस्ट का आदेश देगा:

  • त्वचा की बायोप्सी
  • यूवी लैम्प एग्जाम
  • ब्लड टेस्ट
  • आई टेस्ट

वर्तमान में, शोधकर्ता विटिलिगो के बारे में रिसर्च कर रहे हैं। वे मूल रूप से तीन बातों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। पहला, इस स्थिति के कारण होने वाले स्ट्रेस और ट्रॉमा की घटनाओं को निर्धारित करना। दूसरा विटिलिगो पर जेनेटिक के असर को स्थापित करना है। अंत में, वे नए ट्रीटमेंट विकसित करने के लिए लैब में चूहों के साथ प्रयोग कर रहे हैं।



  • Richmond, J. M., & Harris, J. E. (2017). Vitiligo. In Clinical and Basic Immunodermatology: Second Edition. https://doi.org/10.1007/978-3-319-29785-9_28
  • Ezzedine, K., Whitton, M., & Pinart, M. (2016). Interventions for vitiligo. JAMA – Journal of the American Medical Association. https://doi.org/10.1001/jama.2016.12399
  • Gawkrodger, D. J., Ormerod, A. D., Shaw, L., Mauri-Sole, I., Whitton, M. E., Watts, M. J., … Young, K. (2011). Vitiligo: Guidelines for the Diagnosis and Management of Vitiligo. In British Association of Dermatologists’ Management Guidelines. https://doi.org/10.1002/9781444329865.ch1
  • Iannella, G., Greco, A., Didona, D., Didona, B., Granata, G., Manno, A., … Magliulo, G. (2016). Vitiligo: Pathogenesis, clinical variants and treatment approaches. Autoimmunity Reviews. https://doi.org/10.1016/j.autrev.2015.12.006

यह पाठ केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए प्रदान किया जाता है और किसी पेशेवर के साथ परामर्श की जगह नहीं लेता है। संदेह होने पर, अपने विशेषज्ञ से परामर्श करें।