मायस्थेनिया ग्रेविस के बारे में सभी बातें जानें

26 जनवरी, 2020
मायस्थेनिया ग्रेविस आमतौर पर दूसरी चीजों के साथ मरीज के अपना चेहरे का भाव खोने का कारण बनता है। इस आर्टिकल में इस बीमारी के बारे में जानें।

मायस्थेनिया ग्रेविस (Myasthenia Gravis) एक ऑटो इम्यून रोग है जो वालंटियरी मसल्स की कमजोरी के कारण बनता है। इस बीमारी में मरीज की रोग प्रतिरोधी क्षमता उसकी उन मांसपेशियों के रिसेप्टर पर हमला करने लगती है  जो उन्हें हिलने-डुलने की सहूलियत देती हैं। इसका मतलब यह हुआ कि यह नर्व और मांसपेशियों के बीच के संबंध में रुकावट डालता है, उन्हें ठीक से काम करने नहीं देता।

मायस्थेनिया ग्रेविस शब्द लैटिन से आया है। इसका अर्थ है “मांसपेशियों में भारी कमजोरी।” यह करीब 5000 लोगों में से 1 को प्रभावित करता है। यह किसी भी उम्र में हो सकता है, पर महिलाओं में 40 वर्ष की आयु से पहले और पुरुषों में 50 साल की उम्र के बाद ज्यादा आम है।

यह बहुत ही जटिल बीमारी है और मरीज को बुरी तरह से अक्षम कर देता है। इसका अभी भी कोई इलाज नहीं है। हालांकि, कुछ इलाज लक्षणों को राहत देने में मदद ज़रूर करते हैं। यहाँ हम आपको इस बीमारी के बारे में जानने योग्य तमाम बातें बताएँगे।

मायस्थेनिया ग्रेविस के बारे में

इस बीमारी को समझने के लिए हमें सबसे पहले यह जानने की जरूरत है कि आपके मसल्स कैसे काम करते हैं।

मांसपेशियों नर्व के जरिये केमिकल सिग्नल पातें हैं। आम तौर पर जब हम एक स्वैच्छिक गति (voluntary movement) करते हैं, तो नर्व के सिरों से इन पदार्थों का स्राव किया जाता है। ये तत्व मसल रिसेप्टर्स में काम करते हैं और मनचाही ताकत और सटीकता के साथ गति या मूवमेंट होता है।

हालांकि मायस्थेनिया ग्रेविस इम्यून सिस्टम को प्रभावित करता है और इन मसल रिसेप्टर्स पर हमला करता है। यह केमिकल को मांसपेशियों को एक्टिवेट करने की सहूलियत नहीं देता है, जिससे कमजोरी और थकान होती है। मूवमेंट के बाद मांसपेशियों में होने वाली यह कमजोरी ज्यादा बिगड़ जाती है। मायस्थेनिया ग्रेविस आमतौर पर मांसपेशियों को प्रभावित करता है जैसे कि चेहरे के भाव, चबाने या निगलने को नियंत्रित करने वाली। यह रेस्पिरेटरी मसल्स को भी प्रभावित कर सकता है।

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लक्षण

हमने ऊपर बताया है, मांसपेशियों में कमजोरी इसका मुख्य लक्षण है। यह कमजोरी बिगड़ जाती है क्योंकि एक ही मांसपेशी बार-बार इस्तेमाल की जाती है और आराम करने पर सुधार होता है। दुर्भाग्य से लक्षण आमतौर पर वक्त बीतने पर बिगड़ जाते हैं और बीमारी का शिकार होने के कुछ सालों के भीतर वे काफी गंभीर हो सकते हैं।

हालांकि यह कई मसल ग्रुप को प्रभावित कर सकता है, जैसे :

  • आँख की मांसपेशियाँ। ज्यादातर लोग जो मायस्थेनिया ग्रेविस से पीड़ित हैं, उन्हें नज़र की समस्याएं हैं हो सकती है जैसे कि डबल विजन। वे झूलती हुई पलकों से भी पीड़ित हो सकते हैं।
  • कई रोगियों को बोलने में भी कठिनाई होती है। उनके नाक से भी आवाज़ आती है और नरम आवाज़ की समस्या भी होती है।
  • निगलने की प्रक्रिया। यह बीमारी चबाने या निगलने जैसी सरल मूवमेंट को प्रभावित करती है। इसका मतलब यह है कि भोजन को खाते या पीते समय दम घुटने का खतरा होता है।
  • चेहरे का भाव। मायस्थेनिया ग्रेविस के मरीज अक्सर सामान्य रूप से नहीं मुस्कुरा पाते।
  • इसके अलावा दूसरे अंगों या गर्दन में भी कमजोरी दिख सकती है। ऐसा होने पर रोगी की अपनी गर्दन स्वाभाविक अवस्था में रखने की क्षमता को बदल जाती है, यही वजह है कि उनका सिर बग़ल में लुढक जाता है।

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मायस्थेनिया ग्रेविस की डायग्नोसिस


मायस्थेनिया ग्रेविस की डायग्नोसिस करने के लिए सबसे पहले डॉक्टर को सभी लक्षणों और रोगी की मेडिकल हिस्ट्री को जानना होगा। फिर, उन्हें पूरी तरह से बॉडी टेस्ट करना चाहिए। डायग्नोसिस की पुष्टि करने के लिए कई अतिरिक्त टेस्ट की भी ज़रूरत होती है। उदाहरण के लिए डॉक्टर संभवतः मांसपेशियों की ताकत और स्वर, सजगता और दूसरी चीजों के बीच कोआर्डिनेशन की परख करने के लिए एक न्यूरोलॉजिकल टेस्ट करेंगे।

ब्लड टेस्ट बहुत उपयोगी जानकारी प्रदान करता है। जैसा कि हमने पहले ही बताया है, यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है। यही वजह है कि आमतौर पर रोगी के खून में कुछ विशिष्ट एंटीबॉडी पाए जाते हैं। डॉक्टर दूसरे टेस्ट का भी सहारा लेते हैं, जैसे:

  • आइस टेस्ट, यह तब उपयोगी होता है जब रोगी के आँखों की पलक ढुलकती है। डॉक्टर लगभग दो मिनट तक पलकों पर एक आइस पैक रखता है और फिर उस अंग में होने वाली हलचल का विश्लेषण करता है।
  • रेपिटेटिव नर्व इम्पल्स। यह टेस्ट नसों को इलेक्ट्रिक इम्पल्स भेजता है यह देखने के लिए कि वे मांसपेशियों को उत्तेजित कर पा रहे हैं या नहीं।

निष्कर्ष

मायस्थेनिया ग्रेविस एक जटिल बीमारी है जिसकी विशेषता मांसपेशियों की कमजोरी है। यह शरीर के कई अंगों जैसे कि आँखों, हाथ-पैरों या रेस्पिरेटरी मसल को प्रभावित कर सकता है

यह एक गंभीर बीमारी है जो रोगी की जान को खतरे में डाल सकती है। इसका अभी भी कोई इलाज नहीं है। इसलिए किसी भी लक्षण का संदेह होने पर डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है जिससे वे उन पर काबू पाने के लिए सबसे उचित इलाज लिख सकें।

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