फ्लेक्सिटेरियनिज्म के फायदों को जानिये

आज हम फ्लेक्सिटेरियनिज्म के फायदों के बारे में बताना चाहते हैं। यह शब्द एक ऐसी लाइफस्टाइल की ओर इशारा करता है जिसमें मुख्य रूप से सब्जियां खाने की सलाह होती है। हालांकि समय-समय पर फ्लेक्सिटेरियन मीट भी खायेंगे।
फ्लेक्सिटेरियनिज्म के फायदों को जानिये

आखिरी अपडेट: 11 दिसम्बर, 2020

क्या आपने फ्लेक्सिटेरियनिज्म के बारे में सुना है? वेजिटेरीयनिज़्म वेगन लाइफ स्टाइल ने समाज को बल दिया है, पर अब ऐसे लोगों का समूह बढ़ रहा है जिन्हें हम फ्लेक्सिटेरियन मान सकते हैं। क्या आप इस शब्द से परिचित हैं? क्या आप फ्लेक्सिटेरियनिज्म के फायदों के बारे में जानना चाहेंगे?

यह शब्द हाल ही में प्रचलित हुआ है। विशेष रूप से यह डाइट को लेकर फ्लेक्सिबल होने की बात करता है। तो आप पहले से ही इस ग्रुप के लोगों से जुड़े हो सकते हैं, यहां तक ​​कि इसे जाने बिना भी। नीचे लेख में इस बारे में ज्यादा जानकारी हासिल करें।

फ्लेक्सिटेरियनिज्म क्या है?

फ्लेक्सिटेरियन वे लोग हैं जो शाकाहारी भोजन पर अपने खाने के पैटर्न को रखते हैं, लेकिन कभी-कभी मांस भी खाते हैं। इसका मतलब है, वे मछली, सी फ़ूड और चिकन भी खाते हैं।

जैसे-जैसे शाकाहार बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इस लाइफस्टाइल को शुरू करने वाले कुछ लोग पहले फ्लेक्सिटेरियन बनते हैं। इस तरह वे धीरे-धीरे मांस खाना बंद करते हैंऔर आखिरकार भविष्य में इसे पूरी तरह से खत्म कर देते हैं।

इसके अलावा हम इस ग्रुप में उन लोगों को शामिल कर सकते हैं जो मांसप्रेमी नहीं हैं और बस ख़ास मौकों पर इसे खाने का फैसला करते हैं। या उदाहरण के लिए जो लोग मछली और समुद्री खाद्यों को खाते हैं, लेकिन बीफ नहीं।

यहाँ साफ़ बता दें कि यह वेजीटेरियन डाइट के भीतर कोई सब-ग्रुप नहीं है। वेजीटेरियन लोगों के पास किसी भी परिस्थिति में मांस न खाने का ठोस नैतिक कारण होता है। हालाँकि फ्लेक्सिटेरियन लोगों के लिए मांस खाना उनकी जीवन शैली में कोई समस्याजनक नहीं है और इसलिए वे इस बारे में कोई अपराधबोध महसूस नहीं करते हैं।

फ्लेक्सिटेरियनिज्म क्या है?

फ्लेक्सिटेरियनिज्म वेजीटेरियन के भीतर कोई सबग्रुप नहीं है, बल्कि एक विशेष जीवन शैली है।

इसे भी देखें: अगर आप मीट छोड़ना चाहते हैं, तो जानिये पौष्टिक भोजन कैसे खाएं

फ्लेक्सिटेरियनिज्म के क्या फायदे हैं?

कई अध्ययनों ने इशारा किया है कि सब्जियों में मौजूद न्यूट्रिशन सेहत से जुड़े कई तरह के फायदे देता है। बेशक यह पोषक तत्वों से संतुलित डाइट के रूप में हर आदमी की जरूरत के अनुसार होना चाहिए। इसी तरह ये असर तभी होंगे जब व्यक्ति अल्कोहल और सिगरेट जैसे प्रोसेस्ड, फ्राइड और नुकसानदेह पदार्थों का सेवन सीमित कर देते हैं।

नीचे हम शरीर पर फ्लेक्सिटेरियनिज्म के पॉजिटिव असर के बारे में विस्तार से बताएंगे।

कार्डियोवैस्कुलर रोगों को रोकता है

हृदय रोग एक गंभीर वैश्विक पब्लिक हेल्थ समस्या है। दरअसल यह औद्योगिक देशों में मृत्यु का प्रमुख कारण है। यह आर्टरी में सेचुरेटेड फैट और कोलेस्ट्रॉल जैसे पोषक तत्वों के जमा होने का नतीजा है जो रेड मीट और मीट प्रोडक्ट में खूब होते हैं।

इस अर्थ में सबूत बताते हैं कि पौधों पर आधारित डाइट पैटर्न, जैसे कि फ्लेक्सिटेरियनिज्म, लोगों को नॉन इन्फेक्शस रोगों से बचने में मदद करता है। अस्वास्थ्यकर फैट का सेवन न करने से हमें फायदा तो होता ही है, साथ ही उनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इन्फ्लेमेटरी कम्पाउंड आर्टरी की सेहत को बेहतर बनाने में सक्षम हैं।

मोटापे और डायबिटीज से मुकाबला

मोटापा और टाइप 2 डायबिटीज मेटाबॉलिक गडबडियों से पैदा होते हैं। “Flexitarianism: A review of the literature” शीर्षक लेख में बताये गए आंकड़ों के अनुसार यह डाइट पैटर्न इन रोगों से पीड़ित होने का जोखिम घटाता है।

दरअसल इस स्टडी से पता चला है कि मांसाहारी लोगों के मुकाबले वेजीटेरियन और फ्लेक्सिटेरियन लोगों में बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) नार्मल रेंज में रहता है। पर्याप्त BMI सबसे अहम अंगों की क्रोनिक रोगों से सुरक्षा का फैक्टर बनता है।

यह भी पढ़ें: न्यूट्रिएंट कम किए बिना वेजिटेरियन डाइट अपनाएं

आंतों के रोगों को रोकता है

क्रोहन रोग और कोलन रेक्टल कैंसर रेड मीट, सॉसेज और फैटी प्रोडक्ट के अत्यधिक सेवन से जुड़े हैं। इसलिए इस तरह की डाइट का असर इनके खिलाफ प्रतिरोध का होता है।

इसी तरह नेचुरल फ़ूड खाने से भी पाचन तंत्र की संरचना स्वस्थ रहती है और माइक्रोबायोटा का बैलेंस बना रहता है। इस तरह यह आंतों की कैंडिडिआसिस और डायवर्टिकुला के गठन को कम करता है, जो कि आंतों की दीवार पर बनने वाले बैग या फैलाव होते हैं और जिनमें सूजन आ सकती है।

किडनी और गॉल स्टोन को रोकता है

आम तौर पर प्रोटीन ज्यादा खाने से, विशेष रूप से पशु प्रोटीन, मूत्र के रास्ते कैल्शियम, यूरिक एसिड और ऑक्सालिक एसिड बाहर निकलता है। ये पदार्थ किडनी स्टोन बनाने में मूलभूत घटक हैं।

इसके अलावा वे अस्वास्थ्यकर कोलेस्ट्रॉल और फैट के रेगुलर सेवन से जुड़े हुए हैं, जो कि मीट डाइट में विशिष्ट रूप से होते हैं। इस बारे में मांस सेवन कम करके किडनी की हिफाजत की जा सकती है।


मीट प्रोटीन से किडनी स्टोन ज्यादा बनता है।

फ्लेक्सिटेरियनिज्म: निषकर्ष

जैसा कि आपने देखा होगा, फ्लेक्सिटेरियनिज्म के फायदे बहुत हैं। यह पौधों पर आधारित है, जिनमें डाइटरी फाइबर, एंटी इन्फ्लेमेटरी और एंटीऑक्सिडेंट का योगदान ज्यादा है। इसलिए यह वेस्टर्न डाइट में दिखाई देने वाली विशिष्ट बीमारियों को रोकने में मदद करता है।

हालांकि, यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि किसी भी डाइट की तरह, पोषक तत्वों में उचित संतुलन होना और हर आदमी के लिए डाइट को अनुकूलित करना महत्वपूर्ण है। इसलिए अगर आप इस तरह का आहार शुरू करना चाहते हैं, तो आपको पहले इस विषय पर सलाह लेने के लिए एक न्यूट्रिशनिस्ट से सलाह लेनी चाहिए।

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