तेज़ दिमाग पाने के लिए इन 7 टिप्स को आज़माएँ

20 दिसम्बर, 2018

कुछ लोग जिम में कई घंटे कसरत करते हैं तो कुछ अपना वज़न कम करने के लिए तरह-तरह की डाइट्स करते हैं। लेकिन अपने मन की कसरत के लिए थोड़ा-सा वक़्त निकालने वाले लोग गिने-चुने ही होते हैं। जी हाँ, आपके शरीर के बाकी अंगों की ही तरह आपके दिमाग को भी कसरत की ज़रूरत होती है!

अगर आप भी एक चुस्त दिमाग पाना चाहते हैं तो यह लेख ख़ास आपके लिए ही है! आज हम कुछ ऐसी ही अच्छी आदतों के बारे में बताकर आपको कुछ आसान टिप्स देने जा रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप एक चुस्त दिमाग पा सकते हैं।

दिमाग का सामान्य “बुढ़ापा”

एक चुस्त दिमाग पाने की तरकीबें

हमारे शरीर ही की तरह, हमारा दिमाग भी बूढ़ा हो जाता है। यह एक लाज़मी प्रक्रिया तो होती है, पर इसे धीमा करने के कुछ उपाय आप आज़मा सकते हैं। बीतता वक़्त हमारे मन पर एक छाप छोड़ जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता कि अपनी आखिरी सांस तक हम अपनी मानसिक सतर्कता को बरक़रार नहीं रख सकते।

यहाँ आपको यह समझना चाहिए कि कॉग्निटिव एजिंग (संज्ञानात्मक बुढ़ापा) की प्रक्रिया हमारे पैदा होते ही शुरू हो जाती है। बीते कल के मुकाबले हमारी मानसिक क्षमता धीरे-धीरे कम होती जाती है। इसे अच्छे-बुरे के तराज़ू पर न तोलकर एक सामान्य प्रक्रिया के तौर पर देखा जाना चाहिए।

हालांकि हम सभी का दिमाग बूढ़ा तो होता, वह कितनी धीरे-धीरे बूढ़ा होगा, यह हमारे अपने हाथों में होता है। याददाश्त, प्रोसेसिंग की गति, निर्णय क्षमता, अभ्यास और बुद्धि हमारे दिमाग के कॉग्निटिव पहलू का ही हिस्सा होते हैं।

अपने कॉग्निटिव स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए हमें शुरू से ही उसका ध्यान रखना चाहिए।

एक चुस्त दिमाग कैसे पाएं?

अपने दिमाग को ज़्यादा तेज़ी से बिगड़ने से रोकने के लिए आपको कम उम्र से ही उसे प्रशिक्षित कर उसका ध्यान रखना चाहिए। ऐसे में, इन दिलचस्प टिप्स को नज़रंदाज़ न करें:

नींद लें

एक चुस्त दिमाग पाने के लिए अच्छी नींद लें

रोज़मर्रा की भाग-दौड़ के बाद सिर्फ़ हमारा शरीर ही नहीं थकता। अपनी बैटरी को रिचार्ज कर अगले दिन के लिए सतर्क और तैयार रहने के लिए हमारे दिमाग को भी आराम की ज़रूरत होती है।

अगर आप बेचैन, परेशान या तनाव में हैं तो कुछ देर सो लेना आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। अपनी चिंताओं या ज़िम्मेदारियों के बोझ तले अगर आप घुटन महसूस कर रहे हैं तो भी इस आसान से उपाय को आप आज़माकर देख सकते हैं। आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए आराम बेहद लाभकारी होता है।

रात को 7 से 8 घंटे की नींद लेने से आप कोई राजा-महाराजा नहीं बन जाते – इतना आराम तो आपके दिमाग की बुनियादी ज़रूरत होती है। लंच के बाद अगर आप बीस मिनट की झपकी ले सकें तो वह आपके दिमाग के लिए सोने पे सुहागा होगा।

कसरत करें

हमारे मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए शारीरिक श्रम से बेहतर और कुछ नहीं होता। वह इसलिए कि हमारी हृदय गति में सुधार लाकर वह हमारे रक्त प्रवाह में भी सुधार ले आता है।

हमारे दिमाग को पर्याप्त मात्रा और परिस्थितियों में खून मिलने पर हमारे न्यूरॉन्स अपना काम बेहतर ढंग से कर पाते हैं। और तो और, हल्की-फुल्की कसरत से आपके दिमाग के टिशू को ऑक्सीजन मिल जाती है व वह खराब होने से बचा रहता है।

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संतुलित आहार का सेवन करें

संतुलित आहार का सेवन कर एक चुस्त दिमाग पाएं

बैंगनी फल और सब्ज़ियाँ (अंगूर, ब्लूबेरीज़, बैंगन, चुकंदर आदि) डीमेंशिया (पागलपन) से बचने के सबसे बेहतरीन विकल्प होते हैं।

उनमें एंथोसाइनिन नाम का एक कमाल का इन्ग्रीडिएंट होता है, जो हमारे खून के प्रवाह और दिमाग तक ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद करता है। वह लाल फलों (ब्लैकबेरीज़, स्ट्रॉबेरीज़, चेरी, आदि) में भी पाया जाता है।

आपको ओमेगा 3 फैटी एसिड्स (जिसमें ज़्यादातर मछली ही आती है) और फलियों, ग्रीन टी और नट्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट खूबियों से युक्त खान-पान का सेवन करना चाहिए।

ज़्यादा मात्रा में फैट्स और शुगर्स के सेवन से बचें, क्योंकि वे मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर और बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल का सबब बनते हैं। ये सभी अवस्थायें आपके दिमाग पर बुरा असर डालती हैं।

अपनी सेहत का ध्यान रखें

साल में कम से कम एक बार डॉक्टर के पास जाकर आपको खून, पेशाब और इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम टेस्ट्स जैसे सामान्य टेस्ट्स सहित आपके डॉक्टर द्वारा सुझाए गए अन्य टेस्ट्स भी करवा लेने चाहिए।

साथ ही, अपनी दवाइयों पर भी ख़ास ध्यान दें क्योंकि एक-साथ लिए जाने पर कुछ दवायें आपकी कॉग्निटिव प्रणाली को नुकसान पहुंचाती हैं: अवसादरोधी दवायें, ट्रैंक्विलाइज़र्स, ऐन्टीहिस्टमीन्स या मूत्राशय की दवाइयां उनके कुछ उदहारण हैं।

ऐसे उत्पादों के झांसे में न आएं, जो आपकी मानसिक क्षमताओं में सुधार लाने का दावा करते हैं। वे विटामिन सप्लीमेंट्स आपके शारीरिक स्वास्थ्य के लिए तो लाभकारी हो सकते हैं, मगर दिमाग के लिए उनके फायदों की अभी तक कोई पुष्टि नहीं हो सकी है।

अगर आपका डॉक्टर इसकी इजाज़त दे दे, तो उन्हें लेने में हर्ज़ भी कोई नहीं है, लेकिन उनसे किसी करिश्माई नतीजे की उम्मीद रखना बेकार होगा।

सेहतमंद शौक पालें

सेहतमंद आदतों की मदद से एक चुस्त दिमाग पाएं

सुडोकू या शब्दों वाली पहेलियों के अलावा किसी पिकनिक पर जाने, बगीचे में बैठकर ताश खेलने, पार्क में बैठकर पहेलियाँ हल करने या किसी मैदान में बैठकर कोई किताब पढ़ने जैसी सेहतमंद आदतों को भी आप अपना सकते हैं।

ऐसा करके आप न सिर्फ़ अपने मन की कसरत कर लेंगे, बल्कि प्रकृति के भी संपर्क में रहेंगे। इसके लिए आपका तन (और मन) आपका शुक्रगुज़ार होगा!

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रोज़ाना कुछ नया सीखें

आपकी स्टूडेंट लाइफ भले ही काफ़ी पहले ख़त्म हो गयी हो, लेकिन अपनी पुरानी किताबों और कॉपियों पर दुबारा एक नज़र मारना कोई बुरा ख्याल नहीं होगा।

हो सकता है आप किसी और कॉलेज न जाना चाहें या फ़िर अपने व्यस्त जीवन में किसी कोर्स को करने का वक़्त न निकाल सकें। लेकिन किसी वैज्ञानिक खोज के बारे में कोई जर्नल, अपने पसंदीदा शहर के बारे में कोई सफ़रनामा, या प्राकृतिक नुस्खों के बारे में कोई लेख तो आप पढ़ ही सकते हैं न?

लगातार सीखते रहकर अपने दिमाग के सामने चुनौतियाँ पेश करते रहना बहुत ज़रूरी होता है। जिज्ञासू होकर अपने आपसे आप ऐसे सवाल भी पूछ सकते हैं, जिनके बारे में या तो आपको थोड़ी जांच-पड़ताल करनी चाहिए या उनका जवाब खोज निकालना चाहिए।

उदहारण के तौर पर, आप खुद से यह सवाल कर सकते हैं कि उत्तरी रोशनी आख़िर कैसे उभरती है। या फ़िर ईरान में कौनसी भाषा बोली जाती है? हेक्टोपास्कल्स क्या होते हैं? हो सकता है स्कूल में पढ़ी कुछ बातें अब आपको याद न हों। यहाँ हमारे कहने का मतलब बस इतना है कि ज़रूरी जानकारी को खोजने में आपको झिझकना नहीं चाहिए!

आप चाहें तो कोई भाषा भी सीख सकते हैं। किन्हीं शब्दों की पहचान न कर पाने पर या किसी परिचित भाषा में उन्हें अनुवादित करने के लिए हमारे दिमाग को कुछ अलग करना पड़ता है। भाषायें सिर्फ़ सैर-सपाटे में ही हमारे काम नहीं आती – दूसरी संस्कृतियों और जीवन-शैलियों को समझने का वे एक रास्ता भी होती हैं… और आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी वे बेहद उपयोगी होती हैं!

मिलनसार बनें

उम्र के एक पड़ाव के बाद पारिवारिक जिम्मेदारियों के बोझ तले दबकर आपका खाली समय कम होता जाता है। हालांकि यह एक अच्छी बात होती है, पर अलग-अलग जगहों पर अन्य लोगों से संपर्क बनाना भी आपके लिए ज़रूरी होता है

उदहारण के तौर पर दोस्तों के साथ लंच पर जाना, अपने भाई-बहनों के साथ डिनर के लिए जाना, रास्ते में नये-नये लोगों से मिलना, आदि ऐसा करने के कुछ तरीके हैं। ऐसा करके आप तरोताज़ा, ज़िंदादिल और खुशहाल महसूस करेंगे।

लेकिन इन सब बातों से आपके दिमाग का भला क्या फायदा होगा? जब हम खुश होते हैं तो हमारे शरीर में ऐसे हॉर्मोन्स बनते हैं, जो हमारे तन और मन के लिए लाभकारी होते हैं। अपने जीवन के तनाव और दुःख को दरकिनार कर हम अपनी सेहत में सुधार ला सकते हैं।

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