शरीर में सेरोटोनिन की कमी के 9 हैरान करने वाले प्रभाव

घबराहट और डिप्रेशन के अलावा भी सेरोटोनिन लेवल में कमी हमें कई संकेत भेजती है जिसे हमें संभवतः इस न्यूरोट्रांसमीटर से जुड़े होने के रूप में अनदेखा नहीं करना चाहिए, और न ही पूरी तरह से खारिज करना चाहिए।
शरीर में सेरोटोनिन की कमी के 9 हैरान करने वाले प्रभाव

आखिरी अपडेट: 03 जुलाई, 2018

सेरोटोनिन  शरीर में मौजूद एक रासायनिक पदार्थ है जो हमें खुश रखता है। आम तौर पर यह हमें सबकुछ ठीक होने का एहसास देता है। इसलिए सेरोटोनिन की कमी के प्रभाव हैरान करते हैं।
हालांकि, इसका काम हमें एक संतोषजनक अनुभव देने तक ही सीमित नहीं है।
मस्तिष्क के भीतर एक न्यूरोट्रांसमीटर के रूप में कार्य करने के अलावा, सेरोटोनिन जिसे 5-हाइड्रोक्साइट्रिप्टामाइन (5-एचटी) भी कहा जाता है, रक्त प्रवाह में मौजूद होने पर एक हार्मोन के रूप में भी काम कर सकता है।
सेरोटोनिन शारीरिक और मनोवैज्ञानिक कार्यों की एक बड़ी रेंज को प्रभावित करता है। वास्तव में, यह हमारे बोन मेटाबोलिज्म, यकृत के पुनर्जन्म और यहां तक कि हमारे शरीर के सेलुलर डिवीजन को नियंत्रित करने में एक बड़ी भूमिका निभाता है।
हमारे शरीर के भीतर पाए जाने वाले रासायनिक तत्त्व वाकई बहुत ही दिलचस्प हैं।
उदाहरण के लिए, 5-एचटी की बदौलत, हमारी सामान्य सेहत में योगदान देने वाली प्रक्रियाओं के सामग्रिक रूप में चुस्त-दुरुस्त होने का भरोसा दिलाने वाले आंतरिक संतुलन पर हम भरोसा कर सकते हैं।
यहाँ हम बताना चाहते हैं कि सेरोटोनिन लेवल आपके शरीर को कैसे प्रभावित कर सकता है।
इन लक्षणों को ध्यान में रखना उचित है। कई बार, वे अन्य समस्याओं से जुड़े होते हैं जबकि वास्तव में, वे न्यूरोट्रांसमीटर और हार्मोन के एक सरल असंतुलन से पैदा होते हैं।

1. सेरोटोनिन की कमी पाचन समस्याओं का कारण बनती है

यह संभव है कि आपने पहले कभी पेरीस्टैल्सिस (peristalsis) के बारे में नहीं सुना हो। यह शब्द मांसपेशी की सिकुड़न के सन्दर्भ में उपयोग किया जाता है, जो हमारे पूरे पाचन तंत्र में एक बहुत ही निश्चित लक्ष्य के साथ कार्य करता है। यह लक्ष्य है, पाचन तंत्र में प्रभावी रूप से भोजन और तरल पदार्थ को स्थानांतरित करना।
जब सेरोटोनिन की कमी होती है, तो हमारी कोशिकाएं कैल्शियम का पर्याप्त उत्पादन करना बंद कर देती हैं।
कम कैल्शियम के कारण पाचन तंत्र की मांसपेशियों के कार्यक्षमता में गिरावट आती है। वे ठीक तरह से सिकुड़ना बंद कर देती हैं। इसकी वजह से हमारी पाचन प्रक्रिया बहुत भारी और बहुत धीमी हो जाती है।

2. कम सेरोटोनिन और संवेदनशील आंतें (Irritable Intestine)

सेरोटोनिन की कमी: आईबीएस
सेरोटिन के बारे में यह एक दिलचस्प तथ्य है: लगभग 95% सेरोटोनिन का उत्पादन और संग्रहण आंतों में होता है। इस न्यूरोट्रांसमीटर में कमी से आंतों की कार्यप्रणाली में बदलाव आता है।
  • इससे बार बार कब्ज़ की समस्या हो सकती है।
  • इसके अलावा, पाचन तंत्र की मांसपेशियों में क्षय के कारण, “इर्रिटेबल बॉवेल सिंड्रोम” (आईबीएस) से पीड़ित होना भी बहुत आम बात है।
इसलिए, इन परिस्थितियों में यह पुष्टि करने के लिए कि वास्तव में आपकी समस्या कम सेरोटोनिन स्तर से संबंधित है या नहीं, आपके डॉक्टर का खून की जांच का आदेश देना और लक्षणों का पूरा मूल्यांकन करना एक अच्छा विचार है।

3. कमजोर इम्यून सिस्टम

यदि आप ऐसी स्थिति में हैं कि मांसपेशियों की कमजोरी, चरम थकान, मनोदशा का ठीक न होना, और सामान्य से अधिक संक्रमण या ठंड का शिकार हो रहे हैं, तो डॉक्टर से संपर्क करने में कतई संकोच न करें।
ऐसा इसलिए, कि कम सेरोटोनिन भी आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को अप्रभावी और बहुत कमजोर बना सकता है।

4. आपके बायोलॉजिकल क्लॉक में परिवर्तन

सेरोटोनिन की कमी: बायोलॉजिकल क्लॉक में बदलाव
कम सेरोटोनिन लेवल आपकी सर्केडियन रिद्म को भी बदल सकता है। यहाँ तक कि, इससे जुड़ा एक आम लक्षण है, रात के बजाए दिन के दौरान ज्यादा नींद का अनुभव करना।
  • वास्तव में, रोजमर्रा के उनींदेपन को डिप्रेशन का आम लक्षण भी कहा जाता है।
  • यह ज्ञात है कि एंडोजेनस डिप्रेशन सेरोटोनिन लेवल में कमी के कारण होते हैं।

5. नमकीन खाने की तृष्णा

यह तथ्य बिना किसी संदेह के बहुत ही दिलचस्प है: जो लोग शरीर में सेरोटोनिन की कमी से ग्रस्त हैं, उनमें सोडियम की अधिक आवश्यकता होती है। इसलिए उनमें नमकीन खाद्य पदार्थों को खाने की ज्यादा ललक होती है।
फिर भी, हम इस लक्षण को 5-एचटी की मात्रा में कमी का पूर्ण संकेत नहीं मान सकते हैं। अन्य कारक भी मौजूद होंगे, जैसे कि: हर समय निराश होना, थकावट होना, पाचन समस्याएं आदि।

6. डिप्रेशन

सेरोटोनिन की कमी: डिप्रेशन
जैसा कि हमने पहले कहा था, सेरोटोनिन लेवल का घटना हमारी मनोदशा में गिरावट से जुड़ा हुआ है।
  • वास्तव में, कम सेरोटोनिन के स्तर और अवसाद के विकास के बीच एक सीधा संपर्क है।
  • यह सब सेरोटोनिन या सेरोटोनिन को नियंत्रित करने में सक्षम एमिनो एसिड ट्रायप्टोफैन (tryptophan) को प्राप्त करने वाले रिसेप्टर की कमी के साथ होता है
कई अवसरों पर, यदि अवसाद बहुत गंभीर नहीं है, तो आहार में बदलाव करने और किसी स्पोर्ट्स में शामिल होने जैसी सरल चीज़ें भी हमारी मनोदशा को सुधार सकती है।
हालांकि, अधिकांश मामलों में सेरोटोनिन लेवल को बहाल करने के लिए निर्धारित दवाओं का सहारा लेना आवश्यक हो जाता है।

7. अधिक एंग्जायटी

हमारे शरीर में कम से कम 14 अलग-अलग सेरोटोनिन रिसेप्टर हैं, और 5-HT1A उनमें सबसे महत्वपूर्ण है।
अगर हमारे जीवन में यह रिसेप्टर दोषपूर्ण हो जाता है, तो हम तुरंत अधिक संवेदनशीलता, दिल डूबने की स्थिति, चिंता और घबराहट महसूस करेंगे।
यह बहुत ही महत्वपूर्ण तथ्य है जिसे यह समझने के लिए ध्यान में रखना चाहिए कि कई बार चिंता और डिप्रेशन, दोनों ही रासायनिक असंतुलन के कारण होते हैं।

8. माइग्रेन

सेरोटोनिन की कमी: माइग्रेन
माइग्रेन का होना और इस समस्या के बढ़ने में भी सेरोटोनिन का स्तर महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस प्रकार कमजोर कर देने वाले सिरदर्द का कारण ट्रायप्टोफैन की कमी होती है, जो सेरोटोनिन की कमी का पूर्वसूचक है, क्योंकि यह इसके पर्याप्त उत्पादन के लिए मध्यस्थता करता है।

9. याद्दाशत से जुड़ी छोटी-छोटी समस्याएं

ध्यान देने में कठिनाई, थकान, विशिष्ट तथ्यों पर फोकस करने में परेशानी और सूचनाओं को याद रखने में कठिनाई का होना भी सेरोटोनिन की कमी से जुड़ा है।
यह लक्षण उन लोगों में बहुत आम है जो डिप्रेशन से पीड़ित हैं। साथ ही, यह समस्या फार्मेसी से मिलने वाले ट्रीटमेंट के साथ ही बड़े प्रभावी ढंग से सुधरती है।
निष्कर्ष यही है, कि सेरोटोनिन लेवल शरीर की तमाम प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप करता है। वास्तव में, 9 समस्याएं जो इस ब्लॉग में बताई गयी हैं, ये तो सिर्फ 9 उदाहरण हैं।
इसलिए, यह ज़रूरी है कि किसी किस्म की परेशानी होने पर, भले ही वह शारीरिक हो या भावनात्मक, किसी डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
अच्छी डाइट, एक्सरसाइज और पर्याप्त दवायें हमारी सेहत को वापस ला सकती हैं।