एंग्ज़ायटी अटैक के लक्षण जिन्हें अक्सर लोग नहीं समझ पाते

मई 25, 2018
एंग्ज़ायटी अटैक को संभाल पाना मुश्किल होता है। ये बहुत घातक होते हैं। लेकिन याद रखिए, ये गुज़र जाएंगे और हमेशा नहीं रहने वाले हैं।

एंग्ज़ायटी अटैक कभी भी हो सकता है। यह सच है कि एंग्ज़ायटी अटैक के लक्षण बहुत ही कम लोगों को ही ठीक से समझ आते हैं। इसलिए इससे पीड़ित लोगों की मायूसी ज़्यादा बढ़ सकती है।

एंग्ज़ायटी से जुड़ीं  परेशानियों को डायग्नोस्टिक मैन्युअल ऑफ़ मेंटल डिसऑर्डर (डीएसएम-वी) में शामिल किया गया है। एंग्ज़ायटी अटैक के लक्षण और इनसे जुड़ी गड़बड़ियाँ अचानक या नियमित दोनों तरह से हो सकती हैं।

तनावपूर्ण परिस्तिथियां, भावनात्मक आघात, स्ट्रेस भी एंग्ज़ायटी अटैक को आमंत्रित कर सकते हैं।

एंग्ज़ायटी अटैक के समय ऐसा लगता है जैसे आपकी मृत्यु होने वाली हो, दिल फटने वाला हो। ये तकलीफें तब और ज़्यादा बढ़ जाती है जब आपके इर्द-गिर्द मौजूद लोगों को आपकी समस्या के बारे में मालूम न हो। वे आप पर बुरी तरह से बरस पड़ सकते हैं, “कुछ भी गलत नहीं है,” “तुम बिना बात के कुछ ज़्यादा ही परेशान हो रहे हो”, ” शांत हो जाओ, बुरा सोचने लायक कुछ भी नहीं है।”

आज हम इस आम समस्या के बारे में बात करेंगे। हम एंग्ज़ायटी अटैक से निपटने के कुछ मूल तरीकों के बारे में बताएंगे।

एंग्ज़ायटी अटैक: जब आपको लगे आपका दिल फटने वाला है

यहाँ एक बात स्पष्ट कर दें। इंसान के जीवन में एंग्ज़ायटी यानी बेचैनी का कुछ महत्व है। यह अक्सर अहम भूमिका निभाती है।

  • एंग्ज़ायटी हमें ख़तरे के बारे में सचेत कर देती है। यह हमें खतरे से बचने में मदद करती है।
  • आम एंग्ज़ायटी को अगर ठीक ढंग से संभाला जाए तो यह ज़्यादा असरदार तरीके से जीवन को जीने के लिए प्रेरित करती है।
  • समस्या तब होती है जब बेचैनी असहनीय स्तर तक बढ़कर एंग्ज़ायटी अटैक का रूप ले लेती है।
  • इस बेचैनी को हमारा दिमाग एक वास्तविक खतरा समझ लेता है और इससे बचना चाहता है। इससे हमारी शारीरिक प्रक्रियाओं में कई बदलाव होने लगते हैं। दिल की धड़कन तेज़ हो जाती है। ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। शरीर में एड्रेनलिन लेवल बढ़ जता है।

हमारा दिमाग और शरीर हमें इससे बचने के लिए कहता है। उस समय हमारे मन में नकारात्मक विचार चल रहे होते हैं। इससे परिस्थिति और ख़राब हो जाती है।

एंग्ज़ायटी अटैक के लक्षण

एंग्ज़ायटी अटैक के लक्षण

एंग्ज़ायटी की समस्या कई तरह के कारकों और निजी परिस्थितियों से जुड़ी होती है।

कुछ लोगों को हवाई उड़ान से डर लगता है। कुछ लोग भीड़ से डरते हैं जिसे ऐगरफोबिया कहते हैं। कुछ को मकड़ियों से डर लगता है। कुछ लोग पानी से डरते हैं। ये सब बेचैनी की वजह बनते हैं। इसके अलावा कुछ लोगों को अपनी व्यक्तिगत समस्याओं के कारण ऐसी भयानक घटनाएं झेलनी पड़ती हैं।

इस तरह एंग्ज़ायटी अटैक के कई कारण हो सकते हैं। हालांकि एंग्ज़ायटी अटैक के लक्षण एक जैसे होते हैं। इन्हें आसानी से पहचाना जा सकता है।

एंग्ज़ायटी अटैक के लक्षण: भावनात्मक

  • आशंका या बहुत ज़्यादा अनियंत्रित डर।
  • एकाग्रचित्त होने में परेशानी।
  • चिंता महसूस होना।
  • बहुत बुरे विचार आना। हमेशा ख़राब नतीजों की उम्मीद रखना।
  • नकारात्मक सोच या घबराहट।
  • सुरंग में होने का ख़याल, हमेशा सोचना कि सबकुछ अँधेरे में है और यह गलत दिशा में ही जाएगा।

एंग्ज़ायटी अटैक के लक्षण: शारीरिक

  • दिल की बढ़ी हुई धड़कन।
  • बढ़ा  हुआ ब्लड प्रेशर।
  • पसीना आना।
  • पेट में दर्द और उल्टी आना।
  • बार-बार पेशाब आना या दस्त होना।
  • बहुत तेज़ सांस लेना और ऐसा महसूस करना जैसे आपको दिल का दौरा पड़ने वाला है।
  • काँपना और देह में खिंचाव होना।
  • मांसपेशियों का खिंचाव।
  • सिरदर्द होना।
  • अत्यधिक थकान और कमज़ोरी।
एंग्ज़ायटी अटैक से कैसे बचें

एंग्ज़ायटी अटैक उदासी से जुड़ा है

यदि एंग्ज़ायटी अटैक के लक्षण बहुत ही जल्दी-जल्दी आ रहे हों, तो ये काफी हद तक संभव है कि व्यक्ति किसी गहरी अंदरूनी उदासी का शिकार है।

  • अक्सर बेचैनी और उदासी असहायता और कमज़ोरी से पैदा होती हैं: ऐसा तब होता है, जब हम बहुत परेशान होते हैं और खुद पर से काबू खो बैठते हैं।
  • बेचैनी और उदासी दो अलग-अलग तरह की परेशानियां हैं। कई बार एक का होना दूसरे का लक्षण हो सकता है। इस बारे में निश्चित होने के लिए आपको अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए।

एंग्ज़ायटी अटैक से कैसे निपटें 

एंग्ज़ायटी अटैक से निपटने के लिए हमें सबसे पहले भावनात्मक सच्चाइयों का सामना करना आना चाहिए। डर या चिंता के कारण और परिस्थिति को तर्कशील नजरिये से देखना चाहिए।

  • हर चीज़ जो आपको परेशान कर रही है उसे अलग-अलग देखें। बेचैनी की हर वजह को तर्कशील मन से तब तक ढूँढ़ें जब तक आप उसको खत्म न कर दें

एंग्ज़ायटी अटैक के शिकार व्यक्ति की मदद करना

एंग्ज़ायटी अटैकक के लक्षण वाले लोगों के प्रति सहानुभूति रखें। वह व्यक्ति पागल नहीं है, उसे आपके मदद की जरूरत है। आपको शांत होकर उसे समझना चाहिए

  • उनसे पूछिए कि उन्हें कैसा लग रहा है उन्हें ऐसी जगह ले जाएं जहाँ वे खुली हवा में सांस ले पाएं
  • उनकी कसी हुए बेल्ट और कसे हुए कपड़ों को ढीला करें
  • यदि पीड़ित व्यक्ति बहुत तेज़ तेज़ सांस ले रहें हो तो उसे सांस अन्दर खींचने और बाहर छोड़ने को कहिए बिलकुल ऐसे जैसे मोमबत्ती को बुझाने की कोशिश कर रहे हों। ऐसा करते समय उनके होंठ सिकुड़े हुए होने चाहिए
  • इस बात को दोहराते रहिए, “आपको दिल का दौरा नहीं पड़ रहा है”, ” मैं हूँ यहाँ आपकी मदद के लिए और सब कुछ ठीक हो जाएगा।” (आराम से और धीरे-धीरे बोलिए)
  • पीड़ित व्यक्ति को एक हाथ पेट पर और दूसरा दिल पर रखने को कहें। उन्हें अपनी सांस को काबू में करना है।
एंग्ज़ायटी अटैक

यदि एंग्ज़ायटी अटैक के लक्षण दूर नहीं होते हैं और पीड़ित की धड़कन तेज़ हो तो डॉक्टर को बुलाएं। ऐसा उस समय जरूर करें जब व्यक्ति को दिल से सम्बंधित कोई बीमारी हो, वह डायबिटीज या मोटापे से ग्रस्त हो

  • NHS. (2016). Generalised anxiety disorder in adults. NHS Choices, 2018(May 2014), 2014–2015. https://doi.org/10.1523/JNEUROSCI.1495-09.2009
  • Reiman, E. M., Fusselman, M. J., Fox, P. T., & Raichle, M. E. (1989). Neuroanatomical correlates of anticipatory anxiety. Science243(4894), 1071–1074. https://doi.org/10.1126/science.2784226
  • Li, AW, y Goldsmith, CAW (2012, marzo). Los efectos del yoga sobre la ansiedad y el estrés. Revisión de Medicina Alternativa. https://doi.org/10.1016/j.jinsphys.2011.01.005
  • Carlos, R., Lima, M. A., & A, M. (2014). El manual diagnóstico y estadístico de los trastornos mentales de la asociación psiquiátrica norteamericana. una aproximación crítica a su quinta edición (DSM-5). Gaceta Médica De Caracas, 122, 208-218.
  • Mathews A. Why worry? The cognitive function of anxiety. Behav Res Ther. 1990;
  • Na, H. R., Kang, E. H., Lee, J. H., & Yu, B. H. (2011). The genetic basis of panic disorder. Journal of Korean medical science, 26(6), 701–710. https://doi.org/10.3346/jkms.2011.26.6.701
  • Siracusano A, Niolu C, Sacchetti L, Ribolsi M. Depression and anxiety. In: Neuropsychiatric Dysfunction in Multiple Sclerosis. 2012.