जोड़ों के दर्द के 7 संभावित कारण

08 मार्च, 2019
आपके जोड़े आपके शरीर के वे अहम अंग हैं, जो चलने-फिरने में आपकी मदद करते हैं। उनमें होने वाले दर्द के संभावित कारणों के बारे में जानने के लिए पढ़ें हमारे इस लेख को।

हमारे जोड़े हमारे शरीर के लोकोमोटर सिस्टम का हिस्सा होते हैं। उन्हीं की बदौलत हम चल-फिर पाते हैं। लेकिन कभी-कभी उनमें दर्द भी हो सकता है। सबसे पहले तो आपको यह समझ लेना चाहिए कि उस दर्द का कोई एक कारण नहीं होता। दरअसल जोड़ों के दर्द की कई वजहें हो सकती हैं

आज के इस लेख में हम जोड़ों के दर्द के सबसे आम कारणों के बारे में आपको बताने जा रहे हैं।

जोड़ों के दर्द के सात सामान्य कारण

1. संक्रमण

जोड़ों के दर्द के पीछे संक्रमण का हाथ हो सकता है

जोड़ों के दर्द के यह सबसे आम कारणों में से एक होता है।

अगर आपने अपने किसी ज़ख्म की ठीक से सफ़ाई नहीं की थी तो हो सकता है कि स्टैफिलोकोकस ऑरियस  या स्ट्रेप्टोकोकस  जैसे बैक्टीरिया उसमें घर कर चुके हों

शुरू-शुरू में तो आपको दर्द होता है फिर उस संक्रमण की वजह से आप बुखार और सिहरन की चपेट में आने लगते हैं। ऐसे में मेडिकल सहायता ज़रूरी हो जाती है। बैक्टीरिया का मुकाबला करने के लिए आपका डॉक्टर अक्सर आपको एंटीबायोटिक इंजेक्शन दे देता है।

किसी विशेषज्ञ की मदद लेना अहम होता है। अगर आप ऐसा नहीं करते तो आपका संक्रमण बद से बदतर होकर आपके शरीर के बाकी अंगों में भी फ़ैल सकता है। ऐसे में आपको जानलेवा सेप्सिस भी हो सकता है।

दूसरी तरफ़, यहाँ अच्छी बात यह है कि वक़्त रहते डॉक्टर के पास चले जाने पर वह मेडिकल उपचार काफ़ी आसान व किफायती होता है

2. गठिया (Gout)

बहुत ज़्यादा प्रोटीन का सेवन कर लेने पर उससे छुटकारा पाने के लिए आपके शरीर की मेटाबोलिक प्रक्रिया यूरिक एसिड बनाने लगती है।

बदकिस्मती से, प्रोटीन का काफ़ी मात्रा में सेवन कर लेने पर आपका शरीर उसे ठीक से हटा नहीं पाता। दूसरे शब्दों में कहें तो प्रोटीन आपके शरीर में जमा होता जाता है, जिससे आपके जोड़ों में सूजन पैदा हो जाती है। जोड़ों के दर्द का यह भी एक कारण होता है।

इस अवस्था को गठिया कहा जाता है। इसके ये लक्षण होते हैं:

  • प्रभावित जगह में गरम महसूस होना
  • सूजन
  • स्पर्श के प्रति संवेदनशीलता
  • प्रभावित जगह का लाल हो जाना

यहाँ यह समझ लेना ज़रूरी है कि इस अवस्था के लिए प्रोटीन की उच्च मात्रा ही ज़िम्मेदार नहीं होती। हाँ, वह गठिये की प्रमुख वजहों में से एक ज़रूर होती है।

गठिया के अन्य कारणों में शराब का सेवन, भारी मात्रा में चीनी का सेवन व मोटापा शामिल हैं।

इस समस्या से बचने के लिए आपको अच्छी ख़ुराक लेनी चाहिए व एक स्वस्थ जीवन-शैली अपनानी चाहिए

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3. लाइम रोग (Lyme Disease)

लाइम रोग भी जोड़ों के दर्द के कारणों में से एक होता है। किसी संक्रमित चिचड़ी द्वारा काट लिए जाने पर आप इस संक्रामक बीमारी से ग्रस्त हो सकते हैं

यह रोग हमें तब होता है, जब कोई चिचड़ी हमारा खून निकाल लेती है। नतीजतन वह हमारे शरीर में अपने बैक्टीरिया छोड़ देती है।

इसके निम्नलिखित लक्षण होते हैं:

  • चकत्ते
  • बुखार
  • बदन दर्द
  • गर्दन में अकड़न
  • थकान

अगर आपको संदेह है कि आप भी इसी समस्या से ग्रस्त हैं तो अपनी परेशानी की सही जांच करवाने के लिए किसी डॉक्टर के पास जाएँ।

खुशकिस्मती से, एंटीबायोटिक उपचार से संक्रमण का नाश भी किया जा सकता है व उसे आपके शरीर के बाकी जोड़ों और अंदरूनी अंगों तक फैलने से रोका भी जा सकता है।

4. ल्यूपस (Lupus)

जोड़ों के दर्द की एक वजह ल्यूपस भी हो सकता है

ऑटोइम्यून बीमारियों की श्रेणी में आने वाला ल्यूपस भी जोड़ों के दर्द के कारणों में से एक होता है।

और तो और, ठीक से इलाज न किए जाने पर वह आपके सभी जोड़ों को प्रभावित भी कर सकता है

यह इस बीमारी का एक अनूठा नतीजा होता है, क्योंकि हमारा इम्यून सिस्टम हमारे शरीर के अलग-अलग अंगों पर इस तरह धावा बोलने लगता है, जैसे वे कोई बाहरी हानिकारक एजेंट हों। इसे संक्षेप में कहें तो ल्यूपस आपके जोड़ों, त्वचा, खून, गुर्दों, दिल, फेफड़ों व शरीर के अन्य अंगों पर असर डाल सकता है।

इस बीमारी से पीड़ित लोगों को ये परेशानियाँ भी हो सकती हैं:

  • चकत्ते
  • बालों का झड़ना
  • मुंह के छाले
  • श्वास की परेशानियाँ
  • याददाश्त की परेशानियाँ

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5. गोनोरिया (Gonorrhea)

गोनोरिया हमारे जननांगों को प्रभावित करने वाला एक यौन संक्रमित रोग होता है। इसकी वजह से हम गोनोकोकल आर्थराइटिस नाम की बीमारी की चपेट में आ जाते हैं।

अगर आप इस रोग से पीड़ित हैं व आपके जोड़ों में दर्द रहता है तो आपको अपने डॉक्टर से यह पूछ लेना चाहिए कि कहीं आपको अपने इलाज को बदलने की ज़रूरत तो नहीं है।

अगर आप निश्चित तौर पर यह नहीं जानते कि आपको यह बीमारी है या नहीं या फ़िर अभी हाल ही में आप ने सावधानी बरते बगैर ही किसी के साथ यौन संबंध बनाए थे तो आपको इन लक्षणों की ओर ध्यान देना चाहिए:

  • बुखार
  • पेट के निचले हिस्से और जोड़ों में दर्द
  • सूजन की वजह से हाथों और कलाइयों में दर्द
  • पेशाब करते वक़्त जलन महसूस होना
  • चकत्ते पड़ना

6. रूमेटाइड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis)

रूमेटाइड आर्थराइटिस भी जोड़ों के दर्द के कारणों में से एक होता है। दरअसल यह एक ऑटोइम्यून आर्थराइटिस रोग होता है। मुख्य रूप से इसमें आपके जोड़ों में सूजन व मॉर्निंग स्टिफनेस (सुबह-सुबह होने वाली अकड़न) हो जाती है

बुखार, थकान और वज़न का कम हो जाना इसके कुछ अन्य लक्षण होते हैं।

शुरू-शुरू में रूमेटाइड आर्थराइटिस के छोटे-मोटे लक्षण ही होते हैं। मगर वक़्त बीतने के साथ-साथ वह आपके हाथों में विकृतियाँ पैदा कर सकता है

इसके अलावा, लंबे समय तक चलने वाले उसके इलाज में आपको इन दौरों से गुज़रना पड़ता है:

  • फिजियोथेरेपी
  • दवाइयां
  • एक्सरसाइज
  • सर्जरी

इसके उपचार का सबसे बेहतरीन विकल्प होता है शुरू से ही इसका इलाज चालू करवा देना ताकि उसके प्रभाव कम से कम असुविधाजनक हों

7. बार-बार की जाने वाली हरकतें

कई बार जोड़ों के दर्द के पीछे कई और कारण भी हो सकते हैं

यह भी मुमकिन है कि जोड़ों के दर्द के उपर्युक्त कारणों से आपका कोई लेना-देना ही न हो।

ऐसे में आपको अपनी हरकतों पर ध्यान देना चाहिए। ऐसा करके आप यह जान सकेंगे कि आप ऐसी कौनसी हरकतें कर रहे हैं, जिनसे प्रभावित अंग में दर्द या असहजता पैदा हो रही है।

कभी-कभी कुछ हरकतों के हम इतने आदी हो जाते हैं कि उनकी तरफ हमारा ध्यान ही नहीं जाता। और तो और, अपनी सेहत-संबंधी समस्याओं को लेकर हमारा शक शायद ही कभी उन पर जाता हो।

लगातार की जाने वाली हरकतों की वजह से आपको ये रोग हो सकते हैं:

  • टेंडिनाइटिस (Tendinitis): इस अवस्था में आपकी मांसपेशियों को हड्डी से जोड़ने वाले टेंडन में सूजन हो जाती है। नतीजतन आप प्रभावित जोड़े को ठीक से हिला नहीं पाते।
  • लिगामेंट की सूजन: आपके लिगामेंट्स आपके शरीर के लोकोमोटर सिस्टम का हिस्सा होते हैं। इसीलिए उन्हें पहुँचने वाले नुकसान से आपके जोड़ों की हरकतों पर भी असर पड़ सकता है।

अगर अपने जोड़ों के दर्द की तरफ़ आपका ध्यान गया है तो हमारी सलाह है कि इसके कारण और समाधान का पता लगाने के लिए आपको अपने डॉक्टर से अपनी जांच करवा लेनी चाहिए

शुरुआत में आपको लग सकता है कि आपको कुछ नहीं होगा। लेकिन वक़्त के साथ-साथ आपकी समस्यायें बद से बदतर होती जाएंगी व रोज़मर्रा के आपके जीवन को वे प्रभावित भी कर सकती हैं।