फैटी लीवर की चेतावनी देने वाले 6 संकेत

जुलाई 24, 2018
फैटी लीवर रोग का मोटापे, हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर से करीबी रिश्ता होता है। हालांकि इस बीमारी का पता लगाना मुश्किल है, इसके कुछ लक्षण इस रोग की तरफ इशारा करते हैं।

वैज्ञानिक रूप से हेपाटिक स्टिअटोसिस के नाम से जानी जाने वाली इस बीमारी को आमतौर पर फैटी लीवर रोग के नाम से जाना जाता है। यह शराब के अत्यधिक सेवन, डायबिटीज जैसे मेटाबोलिक सिंड्रोम या हाइपरटेंशन के कारण हो सकता है। इस बीमारी के प्रमुख संकेतों के बारे में जानने के लिए पढ़ना जारी रखें।

फैटी लीवर रोग क्या होता है (What is fatty liver disease)?

हेपाटिक कोशिकाओं में फैट जमा हो जाने से हमें फैटी लीवर रोग हो सकता है। इस अवस्था का मोटापे, हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर से करीबी रिश्ता होता है। कई मामलों में एडिपोस कोशिका में चरबी भर जाती है, जो अत्यधिक चरबी को आसपास के अंगों में ट्रांसफर कर देता है।

हमें यह समझना चाहिए कि हमारे लीवर के कई ज़रूरी काम होते हैं: प्रोटीन बनाना, फैट मेटाबोलिज्म को नियंत्रित करना, खून से से जहरीले तत्वों को निकाल बाहर करना, एमिनो एसिड की मात्रा को नियंत्रित करना। अपनी जिम्मेदारियां निभाने के लिए लीवर का स्वस्थ होना बहुत ज़रूरी होता है।

इन लोगों को यह बीमारी होने का ज़्यादा खतरा रहता है:

  • अधेड़ उम्र की महिलाएं
  • मोटापे से ग्रस्त लोग
  • डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल से पीड़ित रोगी
  • कुछ आहार-संबंधी आदतों वाले लोग
  • शराब की लत वाले लोग

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फैटी लीवर रोग के लक्षण (Signs of fatty liver disease)

फैटी लीवर रोग के लक्षण

बदकिस्मती से, ज़्यादातर मामलों में हेपाटिक स्टिअटोसिस के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। दूसरे शब्दों में, उपयुक्त जांच होने तक इस बीमारी का पता लगाना मुश्किल होता है। फैटी लीवर रोग की डायग्नोसिस तीन प्रकार के टेस्ट से किया जा सकता है:

  • ब्लड टेस्ट (इससे ट्रांसएमिनेज़ लेवल का पता चलता है)
  • लीवर सोनोग्राम (सोनोग्राम में लीवर जितना बड़ा और चमकीला दिखता है, इस बीमारी के होने की संभावना भी उतनी ही ज़्यादा होती है)
  • बायोप्सी (रोग के फैलाव का पता लगाने के लिए)

कुछ रोगियों में लक्षणों या विशिष्ट स्वास्थ्य-संबंधी समस्याओं से भी हेपाटिक स्टिअटोसिस का पता लगाया जा सकता है:

1. पेट दर्द (Abdominal pain)

पेट के बीच वाले या ऊपरी हिस्से में होने वाली बेचैनी या “चुभन” का एहसास। यह दर्द किसी गतिविधि या अन्य कार्य की वजह से नहीं होता। यह दर्द खाना खाने के बाद उठ सकता है क्योंकि पेट चौड़ा होकर फूले हुए लीवर से टकराने लगता है।

2. पेट में सूजन (Abdominal swelling)

फैटी लीवर रोग के कारण होने वाली पेट में सूजन
आसाईटीस (Ascites) हेपाटिक रोगों के कारण होता है व इसमें विसरल (visceral) और पैरीएटल पेरिटोनियम (parietal peritoneum) के बीच द्रव्य जमा हो जाता है। इस समस्या के लक्षण पेट का बढ़ना, बदहज़मी, पीठ के निचले हिस्से में दर्द और सांस लेने में कठिनाई होते हैं। इससे टखनों में सूजन भी हो सकती है।

3. बदहज़मी (Indigestion)

आपके कुछ भी खाने से (भले ही वह कितना भी पौष्टिक या कम मात्रा में क्यों न हो) आपका पेट ख़राब हो जाता है या आपका जी मिचलाने लगता है या आपको गैस हो जाती है तो आपके लीवर में कोई समस्या हो सकती है। फैटी लीवर रोग से ग्रस्त लोग अक्सर डॉक्टर के पास यही सोचकर जाते हैं कि उन्हें बदहज़मी हो गई है, जबकि असल में उसका कारण हेपाटिक स्टिअटोसिस होता है।

4. थकान (Fatigue)

फैटी लीवर रोग के कारण होने वाली थकान
मेटाबोलिज्म के साथ तालमेल बिठाकर काम न कर पाने के कारण लीवर धीमा पड़ जाता है। ऐसा तब होता है जब कोई महत्त्वपूर्ण अंग किसी समस्या से जूझ रहा होता है। खुद को उस अवस्था से बचाने की कोशिश में शरीर कम खून पंप करना शुरू कर देता है।

ऐसे में हमें अकारण थकान, एकाग्रता-संबंधी समस्याएं, भ्रम, थकावट या ऊर्जा की कमी हो सकती है। इस समस्या से ग्रस्त व्यक्ति का अपनी मनपसंद गतिविधियों में भाग लेने के बजाय कई घंटों तक सोने का मन भी कर सकता है।

5. गहरे रंग का पेशाब आना (Dark urine)

मूत्र से हमें कई समस्याओं या रोगों का पता चल सकता है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यह तरल विषैले तत्वों और मल को शरीर से बाहर ले जाने का काम करता है। फैटी लीवर रोग के मामलों में हमारा मूत्र सामान्य से ज़्यादा गहरे रंग का हो जाता है व उसका रंग पूरे दिन हल्का नहीं होता (आमतौर पर पेशाब सुबह गहरे रंग का होता है व दिन बीतने के साथ-साथ हल्के रंग का होता जाता है)।

हमारे मल में भी कुछ बदलाव आ सकते हैं: वह सामान्य से ज़्यादा सफ़ेद या मिट्टी जैसा व ज़्यादा दुर्गंध वाला हो सकता है।

6. त्वचा में बदलाव (Skin changes)

फैटी लीवर रोग के कारण आपकी त्वचा में बदलाव भी आ सकते हैं

पीलिया हेपाटिक स्टिअटोसिस का एक लक्षण होता है। इस बीमारी में टिशू में बिलीरुबिन की अत्यधिक मात्रा के जमा हो जाने के कारण त्वचा व म्यूकस पीले पड़ जाते हैं। लाल रक्त कोशिकाओं का खात्मा या पित्ताशय में आई जटिलताएं इसका कारण हो सकती हैं

फैटी लीवर रोग से अन्य त्वचा-संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं, जैसे: गर्दन और बगलों का फीका पड़ना, चेहरे की रक्त-वाहिकाओं में दरारें पड़ जाना, हथेली का लाल पड़ना या पीठ, छाती या कंधे वाली जगह में स्पाइडर वेंस का हो जाना। नाखूनों के नीचे सफ़ेद धब्बे भी दिखाई दे सकते हैं।

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आहार और फैटी लीवर रोग (Diet and fatty liver)

फैटी लीवर रोग का निदान हो जाने के बाद अगला कदम एक सही इलाज शुरू करना होता है। आपके डॉक्टर द्वारा दी गई दवा के साथ-साथ आपको कम फैट वाले आहार का सेवन व व्यायाम करना चाहिए। हमारे आपको ये सुझाव हैं:

1. परिष्कृत खान-पान (refined foods) का सेवन कम करें

रिफाइंड खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें

इस खाद्य समूह में आटा और सफ़ेद चीनी शामिल हैं। इन दोनों की जगह होल ग्रेन्स और संपूर्ण खाद्य पदार्थों का सेवन करें।

2. मेडिटरेनीयन आहार (Mediterranean diet) अपनाएँ

मेडिटरेनीयन आहार सबसे पौष्टिक आहारों में से एक होता है क्योंकि वह कम फैट वाले खान-पान, या सेहत के लिए अच्छे फैट वाले खाद्य पदार्थों पर आधारित होता है। उदहारण के लिए, इस प्रकार की जीवन शैली में जैतून का तेल एक अहम भूमिका निभाता है।

3. शराब पीने से बचें

शराब पीने से फैटी लीवर रोग हो सकता है

शराब लीवर के सबसे बड़े दुश्मनों में से एक होती है। शराब का हद से जयादा सेवन करने से न सिर्फ़ स्टेआटोसिस बल्कि सिरोसिस भी हो सकता है।

4. कुछ दवाओं से बचें

अपने डॉक्टर से पूछकर पता करें कि वे कौन-कौनसी दवाइयां हैं, जिन्सें आपकी स्थिति बिगड़ सकती है। यह संभव है कि आपका डॉक्टर आपको पेनकिलर्स, एस्ट्रोजन और सूजनरोधी दवाओं से परहेज़ करने की सलाह दे।

5. एक्सरसाइज

कसरत करने से आपके फैटी लीवर रोग में सुधार आ सकता है

बेहतर महसूस करने व अपने हेपाटिक सिस्टम से सही ढंग से काम करवाने के लिए कसरत एक शानदार तरीका होता है। आप पार्क में सैर पर जा सकते हैं, अपने कुत्ते को वॉक पर ले जा सकते हैं, साइकिल चला सकते हैं या तैराकी करने जा सकते हैं; अपनी मनपसंद एक्सरसाइज़ चुनकर उसे हफ्ते में कम से कम तीन बारे करें।