5 बुनियादी बातें अपने भीतर एक मजबूत मनोवैज्ञानिक इम्यून सिस्टम विकसित करने के लिए

मार्च 4, 2019
अपनी मनोवैज्ञानिक प्रतिरक्षा प्रणाली की हर दिन देखभाल करें। खुद को सकारात्मक विचारों, आत्म-सम्मान, नए लक्ष्यों और ऐसी रणनीतियों से समृद्ध करें जो आपका आत्मविश्वास बढ़ाएं।

अपने लेखों में, हम अक्सर आपसे इस बारे में चर्चा करते हैं कि वायरस, संक्रमण और कई किस्म की बीमारियों से निपटने के लिए हर दिन अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता (immune system) की देखभाल आप कैसे कर सकते हैं। अब अगर हम आपसे कहें कि हम सभी के पास एक मनोवैज्ञानिक इम्यून सिस्टम (psychological immune system) भी है, तो इसके बार में आप क्या करेंगे?

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में डैनियल गिल्बर्ट जैसे बिहेवियरल एंड हेल्थ एक्सपर्ट्स ने इस ओर इशारा किया है। हालाँकि, इस बारे में कुछ बातों को स्पष्ट कर देना अहम होगा।

आपकी मनोवैज्ञानिक प्रतिरक्षा प्रणाली रक्षातंत्र और रणनीतियों की पूरी श्रृंखला नियुक्त करती है जैसे कि यह इम्यून सेल्स हों। यह शरीर को तनाव, एंग्जायटी, डर और चिंताओं आदि से बचाने के लिए ऐसा करता है

बेशक, हम सभी जानते हैं, कि कुछ लोग जीवन की कठिनाइयों और समस्याओं को दूसरों की तुलना में बेहतर तरीके से हल करते हैं।

वास्तव में, वे जीवन की समस्याओं का सामना इतनी अच्छी तरह से करते हैं कि हम कभी-कभी हैरान हो जाते हैं: आप हमेशा आशावादी कैसे होते हैं और आप “बर्नआउट” क्यों नहीं होते?

हां, ऐसे लोग हैं जो स्वाभाविक रूप से ज्यादा लचीले होते हैं और मुश्किल हालात से बड़ी कुशलता से निपटते हैं। हालाँकि, आपको मालूम होना चाहिए कि हम सभी ऐसा करना सीख सकते हैं

ऐसा इसलिए है क्योंकि कुछ निश्चित मेकेनिज्म और रणनीतियाँ हैं जो हमें एक स्वस्थ, मजबूत और गरिमापूर्ण “मनोवैज्ञानिक” इम्यून सिस्टम विकसित करने में मदद कर सकती हैं

इसे ऐसे किया जा सकता है!

मनोवैज्ञानिक इम्यून सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए आसान स्ट्रेट्जी

हम सभी को खुश रहने का अधिकार है। हम सभी का दायित्व भी है कि हम अपना ख्याल रखें। यह एक ऐसी चीज है जिसके बारे में हमें शुरुआत से ही साफ़ रहना चाहिए।

हम अपनी सेहत के नियंत्रण में होते हैं। इसलिए, किसी भी मजबूत मनोवैज्ञानिक इम्यून सिस्टम को व्यक्तिगत जिम्मेदारी, निर्णय लेने की क्षमता और मजबूत इच्छाशक्ति पर निम्न रूप से टिका होना चाहिए।

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1. मजबूत आत्मसम्मान का होना स्वार्थपरता नहीं है

मनोवैज्ञानिक इम्यून सिस्टम : स्वार्थपरता

निश्चित रूप से, हम अक्सर अपनी भलाई को कुछ चीजों और यहां तक ​​कि कुछ लोगों से पहले रखने के लिए निहायत अनिच्छुक होते हैं।

रोजाना इसका अभ्यास करना थकाऊ और विनाशकारी है, और हमारी एनर्जी छीन लेता है और हमें अपनी पूर्णता से दूर ले जाता है।

खुद को उतना प्यार करने से न बिलकुल न डरें जितना आप चाहते हैं। आपको ऐसा करने से डरना नहीं चाहिए क्योंकि खुद से प्यार करना खुदगर्जी नहीं है। इसके बजाय, यह आपकी मनोवैज्ञानिक सेहत को बढ़ावा देने की रणनीति है।

2. पॉजिटिव सोचें: इसमें कुछ भी खर्च नहीं होता है

पॉजिटिव सोचने का मतलब यह नहीं है कि आप अंधे आत्मविश्वास के भंवर में घिर जाएँ या खुद को यथार्थवादी होने से रोकें।

पॉजिटिव सोचने का अर्थ है अपनी क्षमताओं का पता लगाना ताकि आप उन पर विश्वास कर सकें। दूसरे शब्दों में, इस तरह की सोच हमें खुद को यह बताने में समर्थ बनाती है कि हम कई चीजों में सक्षम हैं, कि हम अच्छी चीजों के लायक हैं और हम अपने लक्ष्यों तक पहुंचने में कामयाब होंगे।

जो कोई भी पराजयवाद के आगे आत्मसमर्पण करता है वह एक कमजोर मनोवैज्ञानिक इम्यून सिस्टम विकसित कर लेता है। इसका परिणाम असहायता, अस्वीकृति, बुरे मूड में होना और यह विश्वास करना है कि अपने जीवन की डोर आपके हाथ में नहीं है।

3. जीवन को अर्थ दें

मनोवैज्ञानिक इम्यून सिस्टम : जीवन को अर्थ दें

जीवन का सिर्फ कोई एक ही अर्थ नहीं है। वास्तव में, हम इसे विभिन्न तरीकों से देख सकते हैं। सब कुछ उस अर्थ पर निर्भर करता है जो हम इसे देना चाहते हैं।

इस अर्थ को खोजना बहुत महत्वपूर्ण है। क्योंकि यही हमारा मार्गदर्शन करेगा। अनिवार्य रूप से, यह दैनिक प्रेरणा के रूप में काम करेगा।

आप वर्कप्लेस में सफल होना चाहते हैं। स्वतंत्र महसूस कर सकते हैं। शायद अपने बच्चों को सबसे अच्छा देना चाहते हैं। अपने साथी के साथ एक आरामदायक और शांत जीवन जीने की इच्छा रखते हैं।

इसके बारे में सोचें और जीवन को अपना अर्थ दें।

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4. तटस्थता का अभ्यास करें

तटस्थता का अभ्यास करने का मतलब यह नहीं है कि आप अपने आपको हर चीज और हर किसी से दूर रखें। इसके बजाय, तटस्थता का मतलब है कि हमें किसी भी चीज़ या किसी पर भी निर्भर नहीं होना चाहिए और न ही अपनी भलाई के बारे में भूलना चाहिए।

डिटैचमेंट यह समझना है कि कुछ भी हमारा नहीं है और न ही हम किसी के हैं।

हमारा दायित्व सभी की भलाई और खुशी को बढ़ावा देना है, अपनी और दूसरों की।

5. समझें कि आपके जीवन में प्रायोरिटी क्या है और क्या बाद में है

मनोवैज्ञानिक इम्यून सिस्टम : प्रायोरिटी

यह याद रखें कि दूसरे आपके बारे में जो सोचते हैं, वह सेकेंडरी है। आप अपने बारे में जो सोचते हैं वह प्रायोरिटी है। दूसरों को आपसे क्या उम्मीद है, यह महत्वपूर्ण नहीं है। ज़रूरी चीज यह है जो आप खुद से उम्मीद करते हैं। आपको इस बात की परवाह नहीं करनी चाहिए कि खुश रहने के लिए आपको दूसरे लोगों को क्या कहना चाहिए। आपको अपने पास जो कमी महसूस होती है, वह महत्वपूर्ण है।

हम जानते हैं कि आप पहले से ही इन महत्वपूर्ण बातों से परिचित होंगे। हालाँकि, आपको यह भी समझना होगा कि यदि इनमें से कोई भी रणनीति नाकाम हो, तो दूसरी भी फेल हो जायेंगी।

इस कारण यह है कि जब आपमें आत्मविश्वास की कमी हो तो यह आपको अस्वस्थ कर देता है, और दूसरों से जोड़ देता है। आप उनसे अपनी निजी खालीपन को भरने और अपनी कमजोरियों को मजबूत बना देने की उम्मीद लगा बैठते हैं।

यह ठीक नहीं है। हर दिन अपनी मनोवैज्ञानिक इम्यून सिस्टम का ख्याल रखें त्मक विचारों। अपने को पॉजिटिव सोच, गरिमा, नए लक्ष्यों और उन रणनीतियों से भरना शुरू करें जो आपके आत्मविश्वास में सुधार लायें।

चित्र : केल्सी बेकेट के सौजन्य से