डिस्लेक्सिया क्या है? इसके लक्षण और इलाज के बारे में जानें

28 मई, 2020
डिस्लेक्सिया क्या है? डिस्लेक्सिया एक ऐसी समस्या है, जिसे बचपन में आसानी से पहचाना जा सकता है। जिन बच्चों को यह समस्या है, उनमें नॉर्मल बौद्धिक क्षमता होती है, लेकिन उन्हें पढने में कठिनाई पेश आ सकती है।

डिस्लेक्सिया क्या है?

डिस्लेक्सिया को रीडिंग डिसऑर्डर के रूप में क्लासिफाई किया गया है। यह शब्दों को पहचानते समय सटीकता और तरलता की समस्याओं के रूप में देखी जाती है। दूसरे शब्दों में डिस्लेक्सिया के शिकार लोगों को लिखे हुए शब्दों को पढ़ने और उच्चारण करने में परेशानी होती है।

यह गड़बड़ी आमतौर पर लिखने और मैथमेटिकल रीजनिंग में कठिनाई के रूप में दिखती है।

यह बताना ज़रूरी है कि डिस्लेक्सिया से पीड़ित लोगों का बौद्धिक विकास नॉर्मल होता है। पढ़ने और लिखने की उनकी समस्याएं बौद्धिक कारणों से नहीं होती हैं।

यह किसे प्रभावित करता है?

डिस्लेक्सिया एक ऐसी बीमारी है, जिसके अधिकांश मामलों की डायग्नोसिस बचपन में हो जाती है। हालांकि बच्चों में इसकी डायग्नोसिस बहुत आसानी से हो सकती है पर यह एक ऐसी स्थिति है जो वयस्क अवस्था में भी बनी रहती है और इससे गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।


डेटा बताता  है कि डिस्लेक्सिया आबादी के 5 से 10 प्रतिशत लोगों को प्रभावित करती है। इसका मतलब है कि व्यावहारिक स्तर पर 25 बच्चों की प्राथमिक स्कूल कक्षा में कम से कम एक डिस्लेक्सिक होगा।

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डिस्लेक्सिया लोगों के जीवन को कैसे प्रभावित करती है?

पहली समस्याएं स्कूली शिक्षा के पहले कुछ सालों में देखी जाती हैं। पढ़ने और सीखने की कठिनाइयां इन बच्चों के लिए एक बड़ी बाधा बनती हैं। यह न केवल शैक्षणिक स्तर पर होता है, बल्कि यह उनके व्यक्तिगत विकास पर भी असर डालता है। आखिरकार यह उनके आत्म विश्वास को प्रभावित करता है।

कई मामलों में ये कठिनाइयाँ पढ़ने में अरुचि पैदा करती हैं। इसके परिणाम निम्न हैं:

  • अपर्याप्त या खराब शब्दावली
  • रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन की समस्या
  • कठिन ग्रंथों के बारे में समझ, और निष्कर्ष के मामले में आने वाली समस्याएं

डिस्लेक्सिया से पीड़ित लोग अधिकांश मामलों में अपनी सीमाओं के प्रति सचेत रहते हैं। ये लोग कम आत्मविश्वास, एंग्जायटी और यहां तक ​​कि डिप्रेशन से पीड़ित होते हैं।

डिस्लेक्सिया क्यों होता है?

इस प्रश्न का उत्तर हम स्टेप दर स्टेप देंगे।

1. हम शब्दों को कैसे पढ़ते या लिखते हैं?

जब यह समझाने की बात आती है कि हम कैसे पढ़ते हैं और लिखते हैं, तो सबसे स्वीकृत परिकल्पनान डुअल रूट मॉडल है। इस मॉडल के अनुसार एक शब्द लिखने के लिए हम:

  • अपनी याददाश्त से निकालते हैं, उस स्थिति में जब हमें शब्द पहले से पता हो। इसे “लेक्सिकल रूट” कहा जाता है। यह विज़ुअल स्पेलिंग लेक्सिकल स्टोर पर आधारित है। इसका मतलब है कि हम लिखित शब्द को जैसा देखते हैं, अपनी स्मृति में उसे संग्रहीत करते हैं। उदाहरण के लिए, हम “बाथरूम” शब्द लिखना सीखते हैं। अगली बार जब हम इसे लिखना चाहें तो इसे अपनी स्मृति से अपने “शब्दों के भंडार” से पुनः प्राप्त कर लेते हैं।
  • दूसरा विकल्प यह है कि शब्द को बनाने वाले स्वरों या फ़ोनिम (phonemes) को ग्राफिम (graphemes) में बदल लिया जाये। दूसरे शब्दों में ध्वनियों को ग्राफिक रिप्रेजेंटेटिव में बदल दें। यह वह विकल्प है जो नए शब्द लिखते समय इस्तेमाल होता है। बचपन के पहले वर्षों में हम फ़ोनिम को ग्राफिम में बदलने की जानकारी हासिल करते हैं। हम सीखते हैं कि अक्षर “B” एक ध्वनि से मेल खाता है, और यह कि अक्षर “S” दूसरे के साथ मेल खाता है। इसलिए हम उन शब्दों को लिखने में सक्षम हैं जो हमने पहले कभी नहीं सुने हैं। यह बहुत आसान है: हम शब्दों को बनाने वाली ध्वनियों को सीखते हैं और हम बस उनका प्रतिनिधित्व कराते हैं। यह सिद्धांत ब्रेन-इमेज टेस्टिंग की लेटेस्ट फाइंडिंग पर आधारित है, क्योंकि एनाटोमिकल बेस का अस्तित्व पहले ही स्थापित किया जा चुका है।

2. मस्तिष्क में क्या होता है?

आम तौर पर इसका मतलब है कि मस्तिष्क के उन अंगों के बीच संबंध क्षीण हो गया है जो भाषा से जुड़े हैं।

3. मस्तिष्क के कौन से क्षेत्र भाषा से जुड़े हैं?

पहला, ब्रोका का क्षेत्र (Broca’s area)। यह प्रमुख गोलार्ध पर ललाट क्षेत्र में पाया जा सकता है। अधिकांश आबादी के लिए इसका मतलब बाईं ओर है। हालांकि यह बाएं हाथ वाले लोगों में दाईं ओर पाया गया है। आम तौर पर यह शब्दों की अभिव्यक्ति, नामांकन और खामोशी से पढ़ने के लिए जिम्मेदार होता है।

दूसरा, वर्निक क्षेत्र (Wernicke area) है। यह प्रमुख गोलार्ध के पार्श्विका के टेम्पोरल लोब और पैरिएटल लोब के बीच पाया जाता है। इसके प्रमुख कार्यों में है बोले जाने वाले शब्दों को पहचानना है। इसके अलावा, यह वह क्षेत्र है जहां शब्द बनाने वाले अनुक्रम संग्रहीत होते हैं।

अंत में, पार्श्विका और पश्चकपाल से संबंधित एक क्षेत्र मौजूद है जिसका काम शब्दों का निर्माण है।

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डिस्लेक्सिया कितने तरह की है?

  • फोनोलिसिक डिस्लेक्सिया (Phonologic dyslexia)। इस प्रकार के डिस्लेक्सिया वाले लोग विजुअल रूट का उपयोग करते हैं। इसका मतलब है, वे शब्दों को ‘विजुअली’ पढ़ते हैं। इस तरह वे आसानी से उन शब्दों को पढ़ सकते हैं जिन्हें वे पहले से जानते हैं, लेकिन उन शब्दों को पढ़ना असंभव है जिन्हें वे नहीं जानते हैं।
  • सतही (विजुअल) डिस्लेक्सिया (Superficial dyslexia)। इस तरह के डिस्लेक्सिया वाले लोग फोनोलॉजिक रूट का उपयोग करते हैं। वे शब्दांश दर शब्दांश पढ़ते हैं। इस वजह से जब ऐसे शब्द आते हैं जिनके लिखित रूप से उनका उच्चारण अलग होता है, तो उनके लिए मुश्किल पेश आती है।
  • डीप या मिक्स्ड डिस्लेक्सिया। यह डिस्लेक्सिया का सबसे गंभीर मामला है, जिसमें दोनों रूट प्रभावित होते हैं। परिणाम शब्दों को पढ़ने, कई ऑर्थोग्राफ़िक त्रुटियों और यहां तक ​​कि विभिन्न शब्दों के अर्थों को भ्रमित करने के साथ महत्वपूर्ण कठिनाइयों के रूप में आता है।

इलाज

डिस्लेक्सिया के लिए इलाज बेहद महत्वपूर्ण है। वास्तव में, यह दिखाया गया है कि पुनर्वास ट्रीटमेंट बच्चों पर बहुत अधिक प्रभाव डालते हैं।

इसके इलाज में आम तौर पर शामिल हैं:

  • स्पेसलाइज़ शिक्षकों के साथ मजबूत सम्बन्ध
  • स्पीच थेरेपी से इलाज
  • स्टडी टेकनीक की निगरानी
  • कक्षा में जो सीखा गया था, उसे दुरुस्त करने के लिए एक्सरसाइज

डिस्लेक्सिया के इलाज के लिए काम करते समय फैमिली सपोर्ट भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह न केवल इन बच्चों को उनके शैक्षणिक और व्यक्तिगत जीवन में तरक्की करने के लिए प्रेरित करने के लिए ज़रूरी है बल्कि यह शैक्षणिक सुदृढीकरण गतिविधियों पर जोर देने के लिए भी आवश्यक है। फिर उनकी स्केटडी टेकनीक में बहुत सुधार होता है, खासकर पढ़ने-लिखने के मामले में।


यह महत्वपूर्ण है कि बच्चों को ऐसी गतिविधियों में शरीक किया जाए जो उनके मूड को बेहतर बनाने के लिए, उनके आत्मविश्वास (खेल, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी आदि) में मदद करें। यदि बच्चे को एंग्जायटी या डिप्रेशन की बड़ी समस्याएं हैं, तो आपको डॉक्टर की सहायता लेनी चाहिए।