लेप्टोस्पाइरोसिस के लक्षण क्या हैं?

17 अक्टूबर, 2020
ज़ूनिटोक रोग वे हैं जो जानवरों से मनुष्यों में फैलते हैं। इनमें से लेप्टोस्पाइरोसिस दुनिया में सबसे व्यापक रूप से फैला है। इस बीमारी में क्या होता है और लेप्टोस्पाइरोसिस के लक्षण क्या हैं?

ज़ूनिटोक रोग जानवरों से मनुष्यों में फैलते हैं। इनमें लेप्टोस्पाइरोसिस (Leptospirosis) दुनिया में सबसे व्यापक रूप से फैला है। आइये जानते हैं इस बीमारी में क्या होता है और लेप्टोस्पाइरोसिस के लक्षण क्या हैं?

कुछ बातें लेप्टोस्पाइरोसिस के बारे में

लेप्टोस्पाइरोसिस एक जूनोटिक बीमारी (zoonotic disease) है जो लेप्टोस्पाइरा (leptospira) नाम के बैक्टीरिया द्वारा संक्रमण के कारण होती है। Panamerican Health Organisation (OPS) द्वारा प्रकाशित जानकारी के अनुसार हर साल दुनिया भर में लगभग 500,000 मामले दर्ज किये जाते हैं।

इस बैक्टीरिया का एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलना बहुत सामान्य बात नहीं है। आम तौर पर संक्रमण तब होता है जब मनुष्य संक्रमित जानवरों के मूत्र के संपर्क में आता है या इसके द्वारा दूषित वातावरण के सम्पर्क में आता है।

लेप्टोस्पाइरोसिस की उत्पत्ति और इसके लक्षणों के बारे में ज्यादा जानने के लिए पढ़ते रहें।

लेप्टोस्पाइरोसिस के पैथोजेन

सबसे पहले तो उस माइक्रोऑर्गानिज्म को जानना जरूरी है जो इस बीमारी का कारण बनता है। हम लेप्टोस्पाइरोसिस इंटरोगैन्स (leptospira interrogans) नाम के बैक्टीरिया के बारे में बात कर रहे हैं जो कि स्पिरोकेट आर्डर में आता है।

दोनों छोरों पर हुक के आकार वाले फ्लैजिलम के साथ यह लंबा और मुड़ा हुआ होता है, और माइक्रोस्कोप के नीचे इसे देखकर कृमि का भ्रम होता है। हालांकि वे वास्तव में प्रोकैरियोटिक जीव हैं या दूसरे शब्दों में उनमें एक सेल ही होता है। इसलिए उनकी संरचनात्मक जटिलता एनेलीड (annelid) जीवों से कुछ कम है।

लेप्टोस्पाइरोसिस का कारण लेप्टोस्पाइरा नाम का बैक्टीरिया  है।

एक जटिल बायोलॉजिकल साइकल

जंगली स्तनधारी (mammals) जैसे कि बीवर, लोमड़ी और रैकून लेप्टोस्पाइरा बैक्टीरिया के मुख्य स्रोत हैं। इनका ट्रांसमिशन आसान होता है और यह तब होता है जब उसका कोई घाव या म्यूकस मेम्ब्रेन किसी संक्रमित जानवर के मूत्र के संपर्क में आता है।

इस तरह के संपर्क की संभावना बहुत कम हो सकती है। हालांकि ट्रॉपिकल देशों में शहरी चूहे संक्रमित जानवरों के संपर्क में आ सकते हैं, जो बाद में इसे मनुष्यों तक पहुंचाते हैं।

इसलिए मानव इस पैरासाइट बैक्टीरिया का एक्सीडेंटल होस्ट हो सकते हैं। दूसरे शब्दों में यह माइक्रोऑर्गानिज्म ह्युमन होस्ट में अपना विकास नहीं कर सकता है, लेकिन फिर भी बीमारी का कारण बन सकता है।

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लेप्टोस्पाइरोसिस की उत्पत्ति

जैसा कि हमने पहले ही बताया है, संक्रमित क्षेत्रों में लेप्टोस्पाइरोसिस के होने की संभावना अधिक होती है। क्योंकि यह मूत्र के माध्यम से फैलता है और चार हफ्ते से ज्यादा समय तक पानी या जमीन पर एक्टिव रह सकता है।

अमेरिका की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित जानकारी के अनुसार लोग दूषित मूत्र वाले पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से इस बीमारी को ग्रहण कर सकते हैं। साथ ही संक्रमित जानवरों के साथ सीधे संपर्क का रिस्क फैक्टर होता है।

एक बार जब बैक्टीरिया हमारे म्यूकस मेम्ब्रेन या सतही घावों के माध्यम से हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, तो यह शरीर के विभिन्न हिस्सों में क्षणिक रूप से बढ़ने लगता है। अंत में यह लिवर और किडनी में निश्चित रूप से अपना घर बनाता है।

क्लिनिकल लक्षण और लेप्टोस्पाइरोसिस के लक्षण

इस बीमारी का इन्क्यूबेशन पीरियड सात और बारह दिनों के बीच होती है। इस पहले स्टेज के दौरान लेप्टोस्पाइरोसिस के लक्षण आम सर्दी-जुकाम के समान हैं। संक्रमण की गंभीरता और बैक्टीरिया के सीरोटाइप के आधार पर बीमारी ज्यादा गंभीर लक्षणों के साथ आगे बढ़ सकती है।

लेप्टोस्पायइरोसिस के अधिक गंभीर लक्षणों में निम्नलिखित बातें शामिल हो सकती हैं:

  • गर्दन में कठोरता
  • किडनी खराब होना
  • पीलिया (Jaundice)
  • सांस लेने मे तकलीफ

बीमारी हर मामले की गंभीरता के आधार पर कुछ दिनों और कुछ हफ्तों के बीच कहीं से भी हो सकती है। हालाँकि यह जानना आपको सुकून दे सकता है कि इस डायग्नोसिस वाले अधिकांश रोगी पहले स्टेज से आगे नहीं जाते हैं।

इन मामलों में लेप्टोस्पाइरोसिस के लक्षण हल्के होते हैं। वास्तव में कुछ मामले पूरी तरह से लक्षण विहीन होते हैं।

कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोग, बुजुर्ग और दूसरी बीमारियों वाले लोग इसके प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं। क्योंकि बैक्टीरिया को प्रजनन करने की अधिक आजादी होती है, जिससे इसे खत्म करना मुश्किल हो जाता है।

रिस्क फैक्टर

आप स्वयं से पूछ सकते हैं कि इस बीमारी के लिए कौन से ग्रुप सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं। आपके प्रश्न का उत्तर देने के लिए कम आय वाले देशों में संक्रमित पानी के संपर्क में रहने वाले समुदायों को सबसे अधिक खतरा है।

  • एक संक्रमित जंगली जानवर का साधारण कार्य जो पानी के कुएं में पेशाब करता है, लेप्टोस्पायरोसिस एंडेमिक पैदा करने के लिए पर्याप्त है। दूसरे शब्दों में, उच्च संख्या के मामले अक्सर एक ही छोटे भौगोलिक क्षेत्र में स्थित होते हैं।
  • बाढ़ भी इस बैक्टीरिया के प्रसार को बढ़ावा दे सकती है क्योंकि यह पानी के मिश्रण का उत्पादन करता है

इस संक्रमण के पहले चरण में लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण आम सर्दी-जुकाम के समान हैं।

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क्या मुझे लेप्टोस्पाइरोसिस के लक्षणों की फ़िक्र करनी चाहिए?

सिद्धांत रूप में, आपको लेप्टोस्पायरोसिस के बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। यह सच है कि यह जूनोटिक बीमारी बहुत व्यापक है और विकासशील देशों के साथ-साथ विकसित देशों को भी प्रभावित करती है। हालाँकि, यह उन उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अधिक है जहाँ पानी की आपूर्ति पर नियंत्रण की कमी है।

व्यक्तिगत स्तर पर, जो लोग अधिक जोखिम में हैं, उनमें वे लोग शामिल हैं जो जंगली जानवरों, किसानों, आदि के पशुधन के साथ काम करते हैं, हालांकि, सावधानियों की एक श्रृंखला का अभ्यास करके, वे खुद को संक्रमण से बचा सकते हैं। आखिरकार, श्लेष्म झिल्ली के संपर्क में आने या दूषित पानी पीने से बैक्टीरिया गंदे हाथों के बिना शरीर में प्रवेश नहीं कर सकता है।

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