प्लाज्मा ट्रांसफ्यूजन क्या है?

प्लाज्मा दान करना एक आसान काम है जो विभिन्न रोगों के इलाज में मदद करता है। आप इसे कैसे कर सकते हैं? प्लाज्मा ट्रांसफ्यूजन से किसे फायदा होता है? हम यहां इस बारे में बताएँगे।
प्लाज्मा ट्रांसफ्यूजन क्या है?

आखिरी अपडेट: 15 जनवरी, 2021

हाल के वर्षों में प्लाज्मा ट्रांसफ्यूजन बहुत पॉपुलर हो गए हैं। प्लाज्मा क्या है? यह थोड़ा पीला तरल है, जिसमें ब्लड सेल्स नहीं  होती।

प्लाज्मा हमारे खून की कुल मात्रा का लगभग 55% है। दूसरा हिस्सा रेड ब्लड सेल्स, सफेद रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स जैसी कोशिकाओं से बना है। इस तरल में एल्ब्यूमिन जैसे कई प्रोटीन होते हैं, जो शरीर में बहुत महत्वपूर्ण काम करते हैं।

हालाँकि बहुत से लोग महसूस नहीं करते हैं, लेकिन प्लाज्मा ट्रांसफ्यूजन कई पैथोलोजी का इलाज कर सकता है, जैसे ब्लीडिंग या जलन। इस आर्टिकल में हम यह बताना चाहते हैं कि यह प्रक्रिया क्या है और रक्त दान करना इतना अहम क्यों है।

ब्लड प्लाज्मा क्या है?

जैसा कि हमने पहले ही जिक्र किया है, प्लाज्मा खून का तरल हिस्सा है, जो ब्लड सेल्स  के साथ मिलकर लाल और सफेद और प्लेटलेट्स दोनों को बनाता है। जब इन दो हिस्सों को अलग किया जाता है, तो प्लाज्मा एक पारदर्शी तरल की तरह दिखता है।

प्लाज्मा लगभग 90% पानी से बना होता है। हालांकि इसकी बाकी संरचना प्रोटीन और मिनरल साल्ट का मिश्रण होती है जो शरीर के ठीक से कामकाज के लिए जरूरी हैं।

सबसे पहले इसमें इम्युनोग्लोबुलिन होते हैं, जो इम्यून सिस्टम का हिस्सा हैं और आपको संक्रमण से बचाने में मदद करते है। इसके अलावा, एल्बुमिन भी है, जो वह अणु है जो कुछ पदार्थों को टिशू तक पहुंचाने के लिए जिम्मेदार है।

उसी तरह यह ध्यान रखना अहम है कि प्लाज्मा में कोगुलेशन फैक्टर भी होते हैं। यह वह है जो शरीर में कहीं रक्तस्राव होने पर रक्त का थक्का जमने में मदद करता है।

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प्लाज्मा ट्रांसफ्यूजन कैसे काम करता है?

प्लाज्मा ट्रांसफ्यूजन बहुत सरल प्रक्रियाएं हैं। सबसे पहले एक डोनर चाहिए। यदि आप डोनेट करना चाहते हैं, तो यह एक परोपकारी और निस्वार्थ काम है। यहां नर्स ब्लड डोनर से खून लेगी जिसमें आमतौर पर 30 से 45 मिनट के बीच लगता है।

रक्त लेने के बाद ब्लड सेल्स प्लाज्मा से अलग हो जाती हैं। फिर वे तरल को प्रीजर्व और स्टोर करते हैं। जब सिर्फ प्लाज्मा डोनर की बात आती है, तो इसे प्लास्मफेरेसिस कहा जाता है।

इसमें परवर्ती वाला ब्लड डोनेशन से अलग होता है जिसमें निकाली गयी सेल्स को वापस खून में पहुंचा दिया जाता है, और वे सिर्फ प्लाज्मा को रखते हैं। इसके अलावा रिकवरी भी जल्दी होती है और आप हर पंद्रह दिनों में डोनेशन कर सकते हैं।

इसके अलावा यह ध्यान रखना अहम है कि प्लाज्मा डोनेट करने के लिए डोनर और रिसीवर का ब्लड टाइप समान होना चाहिए। ऐसा इसलिए है, क्योंकि प्लाज्मा में वे प्रोटीन होते हैं जो शरीर को दान किए गए खून को रिजेक्ट कर सकते हैं।

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प्लाज्मा ट्रांसफ्यूजन किसके लिये है?

प्लाज्मा ट्रांसफ्यूजन किसके लिये है?

डॉक्टरों को प्लाज्मा ट्रांसफ्यूजन करने के कई कारण हैं। उदाहरण के लिए जब कोई जलने या गंभीर दुर्घटना का शिकार होता है, तो प्लाज्मा ट्रांसफ्यूजन खून की खोई हुई मात्रा वापस पाने में मदद करता है।

इसके अलावा, चूंकि प्लाज्मा में क्लॉटिंग फैक्टर होते हैं, इसलिए यह तकनीक ज्यादा तेज़ी से ब्लीडिंग को रोकना संभव बनाती है। दरअसल यह उन लोगों में विशेष रूप से उपयोगी है जो हिमोफिलिया जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं।

इसके अलावा यह लीवर ट्रांसप्लान्टेशन में उपयोग किया जाता है। हालांकि ऐसी तकनीकें विकसित की गई हैं, जिनमें सभी प्लाज्मा को शुरू करने के बजाय, वे केवल उन मॉलिक्यूल का उपयोग करते हैं जिनकी उन्हें जरूरत होती है। उन्हें ब्लड प्रोड्यूस कहा जाता है।

उदाहरण के लिए हीमोफिलिया वाले किसी व्यक्ति के लिए थक्का जमाने वाला फैक्टर जिसकी व्यक्ति को पहले से ही जरूरत होती है। यद्यपि प्लाज्मा ट्रांसफ्यूजन एक सुरक्षित टेकनीक है, लेकिन इसमें कमियां हैं।

हमें यह ध्यान रखने की जरूरत है कि प्लाज्मा ट्रांसफ्यूजन प्रक्रियाएं हैं जो कई जिंदगियां बचा सकती हैं। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि हम सभी यह जान लें कि एक साधारण डोनेशन से हम कई लोगों की मदद कर सकते हैं।