रेडिकुलोपैथी: कारण, लक्षण और इलाज

18 अप्रैल, 2020
अगर आपको लगता है, आपको रेडिकुलोपैथी है, तो डॉक्टर के पास जाना ही उचित है। सही ट्रीटमेंट का चुनाए करने के लिए सही डायग्नोसिस ज़रूरी होती है। यहाँ जाने कि इसके क्या कारण हो सकते हैं और उन लक्षणों को भी जो आपको इसे पहचानने में मदद करते हैं!
 

आपने “रेडिकुलोपैथी” शब्द को सुना होगा, लेकिन यह नहीं जानते कि इसका क्या मतलब है। इसे समझने के लिएपहले रीढ़ या स्पाइन के बारे में थोड़ा जान लेना चाहिए।

वर्टिब्रल कॉलम का निर्माण वर्टिब्र या कशेरुका से होता है, जो हड्डियों से बनी संरचना है, और जो बदले में हड्डियों की सुरक्षा करती है और आपको स्वतंत्र रूप से हिलने-डुलने की सहूलियत देती है। वर्टिब्रा में हर तरफ छेद होते हैं, जिनसे शरीर के विभिन्न हिस्सों में जाने वाली नसें बाहर निकलती हैं।

वर्टिब्रा से निकलने वाले नर्व के हिस्से को “नर्व रूट” कहते हैं। रेडिकुलोपैथी (radiculopathy) दरसल नर्व कम्प्रेशन है, ठीक इसी नर्व रूट में। इसका क्या कारण होता है? इसकी क्लिनिकल ​​अभिव्यक्तियाँ क्या हैं? इस आर्टिकल में हम इन सवालों के जवाब देंगे और आपको मौजूदा इलाज की जानकारी देंगे।

रेडिकुलोपैथी के कारण (The causes of radiculopathy)

रेडिकुलोपैथी के कारण

रेडिकुलोपैथी के कारण बताना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका इलाज इसी बात पर निर्भर करता है।

रेडिकुलोपैथी के कारण हो सकते हैं:

  • इंटरवर्टेब्रल डिस्क समस्याएं (Intervertebral disc problems)
  • ऑयस्टियोफाइट (osteophytes)
  • इस क्षेत्र में लिगामेंट का मोटा होना
  • स्पोंडिलोलिस्थीसिस (Spondylolisthesis)
  • रेडिएशन
  • डायबिटीज
  • इस एरिया में ट्यूमर
  • गंभीर स्कोलियोसिस (scoliosis)
  • शूल रोग (Meningeal disease)

इनमें से कोई भी स्थिति नर्व जहाँ से गुजरती है उस स्पेस में कमी ला सकती है और इसे कॉम्प्रेस करती है।

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लक्षण

यह समस्या नर्व रूट में होती है, इलिए लक्षण आमतौर पर शरीर के उस हिस्से में प्रकट होते हैं जो प्रभावित नर्व से जुड़े हैं। आम तौर पर निम्नलिखित का संयोजन होते हैं:

  • दर्द – इस मामले में, “नर्व रूट में दर्द”
  • मांसपेशियों की कमजोरी या मांसपेशियों को नियंत्रित करने में कठिनाई
 
  • इस अंग में दर्द के प्रति संवेदन शीलता में बढ़ोतरी (hyperalgesia)
  • सुन्न होना और सिहरन (Numbness, tingling)

इन लक्षणों का स्थान रेडिकुलोपैथी की जगह पर निर्भर करता है:

सर्वाइकल रेडिकुलोपैथी (Cervical radiculopathy)

यह सर्वाइकल स्पाइन से मेल खाती है। इस क्षेत्र की नसें गर्दन और बाजुओं की मांसपेशियों और त्वचा की संवेदनशीलता को नियंत्रित करती हैं। सर्वाइकल रेडिकुलोपैथी में रोगी अक्सर हाथ, कंधे या गर्दन में इसके लक्षण महसूस करता है।

उदाहरण के लिए सर्वाइकल रेडिकुलोपैथी में कुछ उंगलियों में दर्द और कमजोरी हो सकती है।

थोरैसिक रेडिकुलोपैथी (Thoracic radiculopathy)

इसका सम्बन्ध  थोरेसिक स्पाइन से है। ये नसें छाती और पसलियों की मांसपेशियों और त्वचा की संवेदनशीलता को नियंत्रित करती हैं। कभी-कभी डॉक्टरों को इसमें हर्पिस जोस्टर का भ्रम हो जाता है। यह सबसे कम आम है।

लंबर रेडिकुलोपैथी (Lumbar radiculopathy)

यह लम्बर स्पाइन से जुड़ी है। इस क्षेत्र की नसें नितंबों और कूल्हों से लेकर पैरों तक की मांसपेशियों और त्वचा की संवेदनशीलता को नियंत्रित करती हैं। इसलिए मरीज़ अपने निचले हिस्से, कूल्हों, पैरों और पैरों में लम्बर रेडिकुलोपैथी के लक्षणों का अनुभव करते हैं।

सबसे गंभीर मामलों में स्फिंक्टर कंट्रोल गड़बड़ हो जाता है। अगर कम्प्रेशन सायटिक नर्व के बाहरी क्षेत्र में हो तो सबसे आम लक्षण पैर के निचले हिस्से से पैर के तलवों तक दर्द के रूप में दिखता है। इसे कटिस्नायुशूल (sciatica) कहते हैं।

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इलाज

रेडिकुलोपैथी वाले कुछ रोगियों के लिए फिजियोथेरेपी और व्यायाम पर्याप्त हो सकते हैं। हालांकि कुछ मामलों में दवा और दूसरे इन्टरवेंशन ज़रूरी होते हैं।

डॉक्टरों को नर्व कम्प्रेशन के कारण को दुरुस्त करने की दिशा में अपना इलाज शुरू करना चाहिए, क्योंकि अगर नर्व फिर से ठीक से काम करना शुरू कर दे तो लक्षण गायब हो जाएंगे।

 

रेडिकुलोपैथी वाले अधिकांश मरीज फिजिकल थेरेपी और व्यायाम के प्रति अच्छी प्रतिक्रिया देते हैं। हालांकि कुछ मामलों में रोगियों को दर्द बढ़ जाने पर दवा की ज़रूरत होती है।

लक्षणों के शुरू होने से लेकर समस्या ख़त्म होने तक का समय अलग-अलग रोगियों में अलग हो सकता है, क्योंकि यह दो बातों पर निर्भर करता है:

  • लक्षणों की गंभीरता। अगर रोगी को बहुत दर्द हो रहा है, तो सबसे पहले डॉक्टर इसे कम करना चाहेंगे और फिर कारण का इलाज करने के लिए आगे बढ़ेंगे।
  • नर्व कम्प्रेशन का कारण। फ्रैक्चर या ट्यूमर को सर्जिकल एप्रोच की ज़रूरत हो सकती है। इसके अलावा समस्या हल होने का वक्त बदलता रहता है। दूसरी ओर, डॉक्टर एक अच्छी एक्सरसाइज रूटीन से डिस्क प्रॉब्लम का इलाज कर सकते हैं।

दो लोगों के लक्षण एक होने पर भी उन्हें बहुत अलग इलाज की ज़रूरत हो सकती है। इसलिए मेडिकल डायग्नोसिस ज़रूरी है। जितनी जल्दी कारण तय हो जाए इलाज उतना ही कामयाब होगा।

अगर आपको लगे कि आप रेडिकुलोपैथी से पीड़ित हैं, तो डॉक्टर से मिलें जिससे वे आपका सही मूल्यांकन कर सकें और ट्रीटमेंट प्लान के बारे में फैसला कर सकें।