सोरायसिस का इलाज करने वाली थेरेपी और दवाएं

नवम्बर 11, 2019
अलग-अलग इलाजों और दवाओं के संयोजन से सोरायसिस के लक्षणों को कम किया जा सकता है।

सोरायसिस (Psoriasis) का इलाज करने वाले डॉक्टर हर मरीज का इलाज उसकी विशिष्ट स्थिति के हिसाब से करते हैं। चूंकि सोरायसिस कोई एक ही तरह की नहीं है, इसलिए इसके लक्षणों को कम करने के लिए कई अलग-अलग तरह के ट्रीटमेंट और इलाज हैं:

  • सूजन
  • लाल होना
  • पपड़ी उखड़ना
  • खुजली

कुल मिलाकर सोरायसिस के इलाज के तरीके हैं:

  • टॉपिकल थेरेपी
  • फोटोथेरेपी और फोटो केमोथेरेपी
  • सिंथेटिक ओरल मेडिसिन
  • बायोलॉजिकल थेरेपी

आज, हम उन सभी पर विस्तार से विचार करेंगे।

सोरायसिस का इलाज करने वाली टॉपिकल थेरेपी

सबसे पहले, टॉपिकल थेरेपी का इस्तेमाल ज्यादातर मामलों में सोरायसिस (छालरोग) के इलाज के लिए किया जाता है। इसमें बाहरी, लोकल क्रीम और लोशन लगाना शामिल हैं। क्रीम को घाव पर लगाया जाता है।

सोरायसिस के इलाज के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली टॉपिकल मेडिसिन में हैं:

  • सिंथेटिक विटामिन D
  • पारंपरिक कॉर्टिकोस्टेरॉइड
  • केराटोलाइटिक्स (keratolytics)
  • टॉपिकल रेटिनोइड्स
  • तारकोल

सिंथेटिक विटामिन D: कैल्सिट्रिऑल, कैलिपोट्रिओल या टैक्सेटिल

कुल मिलाकर इनमें सबसे असरदार कैलिपोट्रिओल (calcipotriol) है। इनकी क्लिनिकल रिएक्शन है पावर वाले स्टेरॉयड की तुलना में धीमी होती है। हालांकि, चूंकि उनका प्रोफ़ाइल सेफ है, इसलिए इसे लॉन्ग टर्म ट्रीटमेंट में बहुत उपयोगी माना जाता है।

इनका इस्तेमाल किसी टॉपिकल कॉर्टिकोस्टेरॉइड के साथ करने की सिफारिश की गई है। यह संयोजन उनमें से किसी से भी ज्यादा असरदार होता है।

सेफ होने के बावजूद विटामिन D सिंथेटिक्स का प्रतिकूल असर दिखाई पड़ता है: वे घाव वाले हिस्से में जलन पैदा कर सकते हैं। इस वजह से आपको इसे लगाने के बाद धूप से बचने की जरूरत होती है।

इसे भी पढ़ें : 5 टॉपिकल हर्बल सोरायसिस ट्रीटमेंट

सोरायसिस का इलाज : ट्रेडिशनल कॉर्टिकोस्टेरॉइड (corticosteroids)

सोरायसिस : ट्रेडिशनल कॉर्टिकोस्टेरॉइड (corticosteroids)

इस ग्रुप की दावायें मुख्य रूप से प्लेक को साफ करके और सूजन को कम करके असर करती हैं। इनका इस्तेमाललोइंटेंसिटी और नाजुक क्षेत्रों (चेहरे और जोड़ों के नीचे) पर किया जाता है।

शुरुआत में सबसे पावरफुल का इस्तेमाल करने की सिफारिश की जाती है। फिर सबसे कम इंटेंसिटी वाले ट्रीटमेंट का उपयोग करना जारी रखें। आप उन्हें सिंथेटिक विटामिन D जैसे दूसरे इलाजों के साथ भी जोड़ सकते हैं।

हालांकि आपको कॉर्टिकोस्टेरॉइड से सावधान रहने की जरूरत है। इसका कारण यह है कि इनका लोकल और सिस्टेमेटिक दोनों तरह से प्रतिकूल असर पड़ता है।

इसमें शामिल है:

  • त्वचा की मोटाई में कमी
  • मेलेनिन निषेध के कारण त्वचा का हल्का होना
  • रोसेसीफॉर्म डर्मेटाइटिस (Rosaceiforme dermatitis)
  • चोट

इसके अलावा सिस्टेमिक प्रभाव बार-बार नहीं होते हैं, लेकिन होने पर बेहद गंभीर होते हैं। इनमें हाइपोथैलेमिक-पिट्यूटरी एक्सिस और कुशिंग सिंड्रोम हैं।

उनसे बचने के लिए यह सिफारिश की जाती है कि आप रोज अधिकतम दो बार लगाएं। हालाँकि ध्यान रखें कि अगर आप इलाज बंद कर देंगे तो यह दुबारा लौट आएगा।

केराटोलिटिक्स (Keratolytics): एसिटाइलसैलिसिलिक एसिड (एस्पिरिन)

एसिटाइलसैलिसिलिक एसिड परतदार प्लेक को समाप्त करता है। इसके अलावा यह आपके टिशू के रीजेनरेशन को बढ़ाता है और दवाओं का असर भी।

इस वजह से यह एक कॉम्प्लिमेंटरी ट्रीटमेंट है।

टॉपिकल रेटिनोइड्स (Topical retinoids)

ये विटामिन A के सिंथेटिक एनालॉग्स हैं। टाज़रोटीन (Tazarotene) सोरायसिस के इलाज के लिए उपलब्ध एकमात्र विकल्प है। इसका उपयोग कॉर्टिकोस्टेरॉइड के साथ किया जाता है।

दुर्भाग्य से, यह त्वचा की जलन का कारण बनता है (इसे अपने चेहरे पर या जॉइंट के नीचे लगाने से बचें)। इसके अलावा, सभी सिंथेटिक विटामिन A की तरह यह सहज और टेराटोजेनिक है। इस वजह से गर्भवती महिलाओं को इसे नहीं लेना चाहिए।

सोरायसिस का इलाज करने के लिए कोलतार (Tars)

यह सोरायसिस का सबसे पुराना इलाज है। इनमें कॉल पिच का बेस होता  हैं। यह बीच-बीच में जॉइंट के नीचे उपयोग किया जाता है। हालांकि, कभी-कभी यह लोगों को अपनी गंध के कारण परेशान करता है और बड़ी आसानी से कपड़े पर लग जाता है।

इसके अलावा, यह आसान है। इस वजह से, आपको इसे लगाने के बाद धूप से बचने की जरूरत होती है।

इसे भी पढ़ें : सोरायसिस क्या है, यह कितने तरह की होती है?

सोरायसिस के लिए फोटो-थेरेपी और फोटो केमोथेरेपी

इन ट्रीटमेंट का इस्तेमाल तब किया जाता है जब रोगी ट्रॉपिकल थेरेपी के लिए अच्छी तरह से रिस्पांस नहीं करता है। अगर प्लेक बहुत ज्यादा है तो उनका इस्तेमाल भी किया जाता है।

  • फोटोथेरेपी: यूवीबी किरणों (ये सबसे प्रभावी और कम से कम जलाने वाली वाइड स्पेक्ट्रम रे हैं) का उपयोग टाज़रोटीन, सिंथेटिक विटामिन D या सिस्टेमिक ट्रीटमेंट के साथ किया जाता है।
  • फोटोकैमोथेरेपी: इसे PUVA भी कहा जाता है। इसमें सोरालेन की एक ट्रॉपिकल या ओरल डोज देने के बाद UVA रेडिएशन दी जाती है। ये एक फोटोसेंसिटाइज़र के रूप में कार्य करते हैं। यह उन रोगियों के लिए एक विकल्प है जिन्हें UVB से सही नतीजे नहीं मिलते हैं। क्योंकि PUVA में ज्यादा दक्षता और एक लंबे समय तक चलने वाला प्रभाव है। हालाँकि, यह बेसिलोमा (सेलुलर कार्सिनोमा) और मेलानोमा से जुड़ा हुआ है।
सोरायसिस : ट्रेसिंथेटिक ओरल दवाएं

सिंथेटिक ओरल दवाएं

यदि अन्य इलाज काम नहीं करते हैं तो सिस्टेमिक इलाज की सिफारिश की जाती है। यह ट्रीटमेंट इन पर आधारित है:

  • प्रतिरक्षादमनकारी (Immunosuppressants)
  • रेटिनोइड (retinoids)

प्रतिरक्षादमनकारी (Immunosuppressants)

इन दवाओं में से जिसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है, वह है मेथोट्रेक्सेट (methotrexate)। इस मामले में, रोगी को इसके गंभीर प्रतिकूल प्रभावों के कारण निगरानी  में रखना चाहिए। इस दवा से इलाज के बाद आपको तीन महीने तक गर्भवती होने से भी बचना चाहिए। यह महिलाओं और पुरुषों दोनों पर लागू होता है।

एक और इम्यूनोसप्रेसेन्ट का उपयोग किया जाता है जो कि ओरल सिक्लोसोरपिन है। यह मेथोट्रेक्सेट के रूप में अधिक से अधिक असर देता है। हालाँकि, यह नेफ्रोटॉक्सिक है और है ब्लड प्रेशर का कारण बनता है। इस वजह से इसे लेने वाले रोगियों की मॉनीटरिंग की जरूरत होती है।

इसके सिफारिश शार्ट टर्म इलाज के लिए ही की जाती है।

रेटिनॉइड (retinoids)

एक एट्रिटिन नामक विटामिन ए सिंथेटिक एनालॉग को पुष्ठीय छालरोग वाले रोगियों के लिए एक विकल्प के रूप में माना जा सकता है जो इम्यूनोसप्रेस्ड हैं और इम्यूनोसप्रेसेन्ट दवा का उपयोग नहीं कर सकते हैं।

इसे UVB या PUVA के साथ जोड़ा जा सकता है। हालाँकि, यह साइक्लोस्पोरिन की तुलना में कम प्रभावी है। इसके अलावा, यह उपचार के 2 साल बाद तक अपनी टेराटोजीनिटी को बनाए रखता है।

सोरायसिस का इलाज करने वाली बायोलॉजिकल थेरेपी

यह सिर्फ उन रोगियों पर इस्तेमाल किया जाता है जो पीयूवीए (PUVA) और सिस्टेमिक ओरल थेरेपी के लिए इन्टॉलरेंट होते हैं।

प्रतिकूल प्रभावों को नियंत्रित करने के लिए उपयोग की जाने वाली दवाओं की निगरानी की जरूरत होती है। क्योंकि अभी भी वे लॉन्ग टर्म ट्रीटमेंट के लिए सेफ नहीं माने जाते हैं।

  • Alfonso-Valdés María Elena. Inmunopatogenia de la psoriasis. Impacto en las manifestaciones clínicas y el tratamiento de la enfermedad. Rev Cubana Hematol Inmunol Hemoter  [Internet]. 2012  Dic [citado  2018  Dic  16] ;  28( 4 ): 357-373. Disponible en: http://scielo.sld.cu/scielo.php?script=sci_arttext&pid=S0864-02892012000400005&lng=es.
  • Batista Romagosa, M, Soriano González, BI, Bergues Cabrales, LE. Tratamiento de pacientes con psoriasis vulgar mediante campo electromagnético de extremada baja frecuencia. MEDISAN [Internet]. 2012;16(9):1399-1407. Recuperado de: https://www.redalyc.org/articulo.oa?id=368445223010
  • Giraldo Sierra Carolina, Velásquez Lopera Margarita María. Psoriasis: revisión del tema con énfasis en la inmunopatogénesis. Iatreia  [Internet]. 2009  Sep [cited  2018  Dec  16] ;  22( 3 ): 272-283. Available from: http://www.scielo.org.co/scielo.php?script=sci_arttext&pid=S0121-07932009000300008&lng=en.
  • MOLL LEE NORMAN. Psoriasis. Rev. chil. pediatr.  [Internet]. 1947  Abr [citado  2018  Dic  16] ;  18( 4 ): 267-276. Disponible en: https://scielo.conicyt.cl/scielo.php?script=sci_arttext&pid=S0370-41061947000400003&lng=es.  http://dx.doi.org/10.4067/S0370-41061947000400003.