हेमिस्फेरेक्टॉमी और ऑपरेशन के बाद

हेमिस्फेरेक्टॉमी मुख्यतः छोटे बच्चों के मामले में की जाती है क्योंकि उनके मस्तिष्क में ज्यादा न्यूरोप्लास्टिसिटी होती है, इसलिए वे आसानी से ठीक हो जाते हैं। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए यह आर्टिकल पढ़ें।
हेमिस्फेरेक्टॉमी और ऑपरेशन के बाद

आखिरी अपडेट: 11 सितम्बर, 2019

हेमिस्फेरेक्टॉमी (hemispherectomy) एक सर्जिकल प्रोसिड्योर है जिससे कई किस्म के दौरे वाले रोगों का इलाज किया जाता है। आमतौर पर डॉक्टर यह विकल्प तब अपनाते हैं जब ये रोग दूसरे ट्रीटमेंट पर प्रतिक्रिया नहीं देते।

पहली हेमिस्फेरेक्टॉमी 1888 में एक कुत्ते पर की गयी थी। इंसान पर इस प्रोसिड्योर का पहला हवाला 1923 का मिलता है। 60 और 70 के दशक में ऐसे कई इंटरवेंशन ने अच्छे नतीजे नही दिए थे।

इन दिनों स्थिति बदल गई है। डॉक्टर अक्सर एक फंशनल हेमिस्फेरेक्टॉमी के बजाय एक एनाटोमिकल हेमिस्फेरेक्टॉमी का चुनाव करते हैं। यह ज्यादा सटीक और कम आक्रामक इन्टरवेंशन है। इसमें सफलता दर पहले के मुकाबले बहुत ज्यादा है।

इस पोस्ट में हम इस प्रोसिड्योर के अत्याधुनिक टेकनीक पर करीब से नज़र डालेंगे।

हेमिस्फेरेक्टॉमी (hemispherectomy) क्या है?

हेमिस्फेरेक्टॉमी (hemispherectomy) क्या है?

हेमिस्फेरेक्टॉमी (hemispherectomy) एक न्यूरोसर्जिकल प्रोसिड्योर है जिसमें एक सेरिब्रल हेमिस्फेयर को हटा दिया जाता है।

कभी-कभी सर्जन बाएं हेमिस्फेयर को हटा देता है। और कभी वे दायें हेमिस्फेयर को हटाते हैं। आम तौर पर बहुत ही खराब मामलों में ही डॉक्टर 5 से 10 साल की उम्र वाले बच्चों में यह प्रोसिड्योर करते हैं।

इस तरह का इंटरवेंशन मुख्य रूप से एक ऐंठन-रोधी इलाज (anti-convulsive treatment) है। हालाँकि यह न्यूरोलॉजिकल खामी वाले रोगियों और सिर की गंभीर चोटों मामलों में भी उपयोगी है।

ज्यादातर मामलों में पूरे सेरिब्रल हेमिस्फेयर को हटा दिया जाता है। हालांकि कभी-कभी इसका महज एक हिस्सा ही हटाया जाता है। इसे फंशनल हेमिस्फेरेक्टॉमी कहा जाता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर के क्षतिग्रस्त टिश्यू के छोटे हिस्से को छोड़ देने पर दौरे वापस लौट सकते हैं।

संकेत

आमतौर पर डॉक्टर ऐसे रोगियों के लिए हेमिस्फेरेक्टॉमी का संकेत दे सकते हैं जब रोगी को लगातार रोज दौरे आते हों और दूसरे कम इनवेसिव सर्जिकल ट्रीटमेंट पर वह कोई रिस्पांस नहीं दे रहा है।

डॉक्टर निम्नलिखित मामलों में इसकी सलाह देते हैं:

  • हीमोप्लेजिया (hemiplegia) से पीड़ित बच्चे। यह सिर्फ चार साल से ज्यादा उम्र के बच्चों के लिए है जो दौरे और/ या मानसिक गड़बड़ियों से पीड़ित हैं, और दो साल तक जांच करने के बाद रोगी ने किसी दवा के इलाज पर प्रतिक्रिया नहीं दी है।
  • स्टर्ज-वेबर सिंड्रोम (Sturge-Weber syndrome)। यह एक न्यूरोक्यूटेनियस गड़बड़ी है जिसमें ट्राइजेमिनल नर्व के क्षेत्र में चेहरे पर जन्मजात निशान देखा जाता है। कम उम्र में समस्या शुरू होने और इसे पूरे हेमिस्फेयर को चपेट में ले लेने पर डॉक्टर इस तरह की सर्जरी की सलाह दे सकते हैं।
  • रासमुसेन एन्सेफलाइटिस (Rasmussen’s encephalitis)। यह ब्रेन डिसऑर्डर क्रॉनिक और लगातार बढ़ती एन्सेफलाइटिस का कारण बनता है। शुरू में ही इन्टरवेंशन होना सबसे अच्छा है।
  • हेमिमेगालेंसेफली (Hemimegalencephaly-HME)। यह एक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल इन्फ्लेमेटरी रोग है जो गंभीर दौरे का कारण बनता है। इस रोग में सर्जरी ही बेस्ट ऑप्शन है, इस बात पर मेडिकल प्रोफेशनल अभी सहमत नहीं हैं।
  • कॉर्टिकल डेवलपमेंट विकृतियाँ

प्रोसिड्योर की विशेषताएं

कुल मिलाकर हेमिस्फेरेक्टॉमी चार प्रकार की होती हैं।

वे चार किस्में हैं:

  1. एनाटोमिकल हेमिस्फेरेक्टोमी
  2. हेमिडेकॉर्टिकेशन
  3. फंक्शनल हेमिस्फेरेक्टॉमी
  4. संशोधित फंक्शनल हेमिस्फेरेक्टॉमी

आमतौर पर, डॉक्टर  इस प्रक्रिया में एनेस्थेसिया का इस्तेमाल करते हैं।

सर्जन रोगी के सिर को शेव करने और चीरा के लिए लाइनों को चिह्नित करते हुए शुरुआत करते हैं। फिर डॉक्टर ड्यूरा मैटर को एक्सपोज करने के लिए कट करते हैं। फिर वे ब्रेन तक पहुंचते हैं।

इसके बाद, वे ध्यान से उस क्षेत्र को चिह्नित करते हैं जिसे उन्हें हटाना है। अब वे ऐसा करते हैं और ब्लड वेसेल्स को सतर्क करते हैं। वे एक ड्रेनेज डिवाइस को वहाँ लगाते हैं। अंत में, वे ड्यूरा मेटर और स्कैल्प को अपनी जगह पर लगाते हैं और स्टेपल से चीरा बंद कर देते हैं।

हेमिस्फेरेक्टॉमी और ऑपरेशन के बाद

दुर्भाग्य से इस प्रक्रिया के बाद का पीरियड दर्दनाक होता है

आमतौर पर डॉक्टर 3 से 4 दिनों के लिए ड्रेनेज ट्यूब छोड़ देते हैं। फिर डॉक्टर रोगी का मूल्यांकन करता है और यह तय करता है कि उन्हें इसे हटा देना चाहिए या नहीं। इसे हटाने से पहले यह पता लगाने के लिए डायग्नोस्टिक टेस्ट करते हैं कि कहीं ब्लीडिंग या हैमरेज तो नहीं हो रही है।

मुख्य जटिलतायें हिमोडायनेमिक इंस्टेबिलिटी, हाइपोथर्मिया, और हाइपो या हाइपरकेलेमिया (hyperkalemia) हैं। अक्सर डॉक्टर बहुत अच्छी तरह से इस पर नियंत्रण और रोकथाम करते हैं।

ऑपरेशन के बाद वाले समय में दौरे भी एक गंभीर कॉम्प्लिकेशन है। लगभग आधे रोगियों में हाइड्रोसेफालास विकसित होता है। लगभग सभी रोगियों में असेप्टिक मैनिंजाइटिस विकसित होता है।

इस बात के प्रमाण हैं कि कुछ जटिलताएँ कुछ देर से प्रकट हो सकती हैं।

फिर भी मृत्यु दर काफी कम है और 4% से 6% के बीच है।

हेमिस्फेरेक्टॉमी के बाद 70% और 85% रोगियों में दौरे बंद हो जाते हैं। लगभग 10-20% में जीवन की गुणवत्ता में काफी सुधार देखा जाता है।

यह आपकी रुचि हो सकती है ...
मेनिन्जाइटिस के 6 लक्षण जिन्हें अभिभावकों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए
स्वास्थ्य की ओर
इसमें पढ़ें स्वास्थ्य की ओर
मेनिन्जाइटिस के 6 लक्षण जिन्हें अभिभावकों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए

चूंकि छोटे बच्चों को कई तरीकों से मेनिन्जाइटिस हो सकता है, इसलिए किसी भी तरह के लक्षणों के उभरने पर बच्चे के रीढ़ की हड्डी की जाँच कराई जानी बहुत ज़र...



  • Obrador Alcalde, S. (1951). Hemisferectomía en el tratamiento de las convulsiones de la hemiplejía infantil por hemiatrofía cerebral. Arquivos de Neuro-Psiquiatria, 9(3), 191-197.
  • Alcalá-Cerra, G., Paternina-Caicedo, Á., Díaz-Becerra, C., & Gutiérrez-Paternina, J. J. (2013). Control de las crisis epilépticas con la hemisferectomía cerebral en adultos: revisión sistemática y metaanálisis con datos de pacientes individuales. Neurocirugía.
  • Meneses, M. S. de, Kondageski, C., Santos, H. N. L. dos, Kowacs, P. A., Coelho, G. C., Gadens, G., … Simão, C. (2012). The usefulness of neuronavigation in functional hemispherectomy. Journal of Epilepsy and Clinical Neurophysiology.