उम्र की फ़िक्र न करें, व्यक्तिगत विकास पर ध्यान दें

दिसम्बर 16, 2018

विकसित होने की चिंता करने के बदले हम कुछ और कर बैठते हैं। हमारे लिए कुछ हो जाए, कुछ बदल जाए। हम इसी का इंतजार करते हुए अपने दिन बिताते हैं। सिर्फ वर्तमान का आनंद लेने की चिंता कीजिए। हमारे पास केवल इसी की गारंटी है।

अगर हम कहें कि हम बूढ़े होने से चिंतित नहीं हैं तो हम खुद से झूठ बोल रहे हैं। मोटे तौर पर यह समाज की एक सोच है। यह हमारे लिए कुछ बेचैनी पैदा करती है। यह, आंशिक रूप से, धोखे में डालने वाले विज्ञापनों का नतीजा है। वे हमसे कहते हैं कि हमे हमेशा जवान बने रहना चाहिए। मगर, असलियत में, व्यक्तिगत विकास सबसे अहम चीज है।

हम अपने रूप पर ज्यादा फोकस करते हैं लेकिन भूल जाते हैं कि हमारे अंदर क्या है।

वर्ष हमें भारी नहीं लगने चाहिए। उन्हें हमारे लिए खुशियाँ लानी चाहिए। अपना जन्मदिन मनाने के मतलब है कि आप एक वर्ष बूढ़े हो गए हैं। क्या आपने कभी इसका हिसाब किया है कि आप कितने विकसित हुए हैं? आप पहले जैसे वही व्यक्ति नहीं रह गए हैं।

व्यक्तिगत विकास पर ध्यान दें

चिंताओं के साथ न जियें
विकसित होने की चिंता

विज्ञापन, टेलीविजन, और दूसरे संवाद माध्यम, बूढ़े होने के डर के तले हमें कुचलने की कोशिश करते हैं। इस डर का स्रोत केवल ये ही नहीं हैं। जिस तरह से हम अपना जीवन जीते हैं उसका इस डर को पालने के साथ बहुत कुछ लेना-देना है।

डर वहाँ से नहीं आता, जहाँ हम अभी हैं। इसका एक उदाहरण यहाँ है। कई वर्ष पहले, किसी महिला को जवान रहते हुए अपने बच्चे होने की जरूरत हुई। यह उस समय को कम कर देता जिसमें वह जवानी के कुछ मजे ले सकती थी। जवान रहते हुए उसे शादी भी करनी थी, नहीं तो कोई भी उससे शादी नहीं करता।

यह वे विचार हैं जो अधिकतर, अतीत में रहते थे। मगर, एक तरह से, वे बदल गए हैं।

क्या आपके पास खुद के लिए समय है? हमें अपना खयाल रखने के लिए समय की जरूरत है। हमारा काम हमे वह समय त्यागने के लिए मजबूर करता है। यह समय हमें अपने दिमाग के विकसित होने की चिंता करने के लिए है। यह समय जंगलों में हाइकिंग करने के लिए, या किसी बढ़िया किताब का आनंद लेने के लिए है।

अपने बचपन से ही, हम अनगिनत एक्स्ट्रा करिकुलर क्लासों का हिस्सा बने रहते हैं। ये हमें जल्द ही जीवन के पाठ सिखाने में मदद करते हैं जिससे हम अपने जीवन में दूर तक आगे जा सकें।

विकसित होने की चिंता

समय गुजरने के बावजूद, इसमें से कुछ भी नहीं बदलता। रोजाना के काम-काज असल काम बन जाते हैं। एक्स्ट्रा करिकुलर क्लास ओवरटाइम हो जाते हैं।

अंत में, समय गुजर जाता है, हमने इसका आनंद नहीं लिया है। तनाव भरे दिन बीतते हैं। सब-कुछ पूरा करने या कल शुरु करने की चिंता हमारे दिमाग पर बोझ बनी रहती है।

क्या आपने वर्तमान का आनंद लेना बंद कर दिया है?

भविष्य हमारा वर्तमान है

आज और अभी का अस्तित्व समाप्त हो गया है। हम सिर्फ अपेक्षाओं और करने के लिए चीजों से भरे कल की चिंता करते हैं। कभी-कभी यह चीजें नहीं होतीं।

हमें उन चीजों को टालने की जरूरत है जिन्हें हम पसंद करते हैं ताकि हम अपनी जिम्मेदारियों का खयाल रख सकें। हम कई बार उस काम से खुद को थका डालते हैं जिसे हम नहीं टाल सकते। कभी-कभी हम खुद को काम में डुबा देते हैं।

आप समय को धीरे-धीरे कैसे बिता सकते हैं? जब आप बच्चे थे, तब वर्तमान के पल का मजा लेते थे। आप कल के बारे में नहीं सोचते थे। आप सिर्फ अभी और यहाँ के बारे में सोचते थे। विकसित होना और सीखना जरूरी था।

आप की पाँचों इंद्रियाँ वर्तमान पर फोकस्ड रहती थीं। आप हरेक अनुभूति को नोटिस करते थे। हर मिनट आप निरंतर चकित रहते थे।

विकसित होने की चिंता

शायद समस्या यह है: हमारे लिए कुछ भी नया नहीं है। हमने कुछ उबाऊ रूटीन ले लिया है, जो हमें धीमा पड़ने से रोकते हैं। वे हमें आराम करने से भी रोकते हैं।

फिर भी, कहने का मतलब यह नहीं है कि जिसे आप करना चाहते हैं उसका त्याग कर दें। यह भी नहीं, कि आप वे जिम्मेदारियाँ छोड़ दें जिन्हें कोई भी दूसरा नहीं संभालेगा।

हम कह रहे हैं कि आपको अनुभव करने, विकसित होने की चिंता करने और सीखने की जरूरत है। 

अनुभव करें, प्रयोग करें, जियें और विकसित होने की चिंता करें

अतीत या भविष्य के बारे में मत सोचिए। आप जब बच्चे थे तब जो करते थे, वही कीजिए। यहाँ और अब पर फोकस कीजिए। अगर आप यह करेंगे तो भूल जाएँगे कि कोई कल भी है। आज के लिए सब-कुछ लगा देंगे।

नाराजगी में ज्यादा वक्त जाया मत कीजिए और आप बेहतर महसूस करेंगे। आप देखेंगे कि काम पर भी आपकी प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है। हर चीज का मजा लेने के लिए खुद पर जबरदस्ती भी करनी पड़े, तो कीजिए। इसके बारे में सोचिए कि आसपास आपको क्या अनुभव होता है और सांस लीजिए।  

अगर आप नौकरी छोड़ते हुए अपने जीवन की कायापलट करना चाहते हैं, तो कीजिए। आप अपना मन रखना चाहते हैं, तो रखिए।

हमारे पास आज है, कल के बारे में कोई भी नहीं जानता। क्या आप अपने जीवन को भरपूर जीने का मौका खो देंगे?

हम जीवन जीना भूल जाते हैं। रूटीन हमारे कम्फोर्ट जोन का एक हिस्सा है। यह रूटीन हमारी अनुभूतियों और भावनाओं को निरस्त करना शुरू कर देता है। हम धुंधला जीवन जीना शुरू कर देते हैं।

विकसित होने की चिंता

यह हमें विकसित होने की चिंता में मदद नहीं करेगा। यह हमें और भी भरपूर जिंदगी जीने में मदद नहीं करेगा। इसके विपरीत, यह हमें सुपरफीशियल बना देता है।

यदि आप बूढ़े होने की चिंता में डूबे रहते हैं, तो रुक जाइए। एक मिनट के लिए सोचिए। आप दिन-ब-दिन जीवन कैसे जीते हैं, इसके बारे में सोचिए। समय धीरे बीतता है या जल्दी, हमारे मन में सिर्फ यही रहता है। जब हम किसी चीज में आनंद लेते हैं, तो समय बहुत जल्दी बीत जाता है।

आप जो कुछ भी करते हैं, हर उस चीज को आंकना सीखिए

क्योंकि डर, विकसित होने की चिंता, या अपने कुशल-मंगल की व्यग्रता हमे कोई चीज समझाते हैं। वह चीज है, जिसे हम एक दिन होते देखना चाहते हैं : बेहतर बनना, विकसित होना…..