बच्चों में चोकिंग : क्या करना चाहिए और इसे कैसे रोकें

11 अप्रैल, 2020
बच्चों में चोकिंग या गला घुटना एक आम एक्सीडेंट है जो कभी-कभी मौत का कारण बन सकती है। इसलिए इसका सबसे अच्छा विकल्प इसे रोकना ही है, ख़ासकर उस समय जब बच्चे खेलते हुए खाना खाते हैं।
 

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अनुमान लगाया गया है कि बच्चों में चोकिंग सबसे आम गैर-प्राकृतिक दुर्घटनाओं में से एक है। यह बचपन और बुढ़ापे दोनों उम्र में मौत की तीसरा प्रधान वजह है। इसलिए रोकथाम और इस स्थिति में क्या किया जाना चाहिए, दोनों पर ध्यान देना ज़रूरी है।

बच्चों में चोकिंग की रोकथाम और इससे बचाव करना ही सबसे अच्छा विकल्प है। चूंकि यह मृत्यु का कारण बन सकती है, इसलिए इसके लिए जिम्मेदार रिस्क फैक्टर को दूर करना ही सबसे अच्छा है – खास कर चार महीने की उम्र से।

अगर आप इस दुर्घटना से बच नहीं सकते तो आपको मालूम होना चाहिए कि गंभीर परिणाम होने पर क्या करना चाहिए। कुछ सरल फर्स्ट एड ट्रीटमेंट आपके बच्चे का जीवन बचा सकते हैं। इसलिए आपको उनके बारे में जानकर रखना चाहिए।

बच्चों में चोकिंग

ज्यादा सटीक तरीके से कहें तो बच्चों में चोकिंग या गला घुटना किसी बाहरी वस्तु से साँस नली में आने वाली रुकावट है। सबसे बुरे मामलों में वायुमार्ग पूरी तरह से बंद हो जाता है। इससे हवा फेफड़ों तक नहीं पहुंचती और मौत हो जाती है।

इनमें से अधिकांश समस्याएं तीन साल से कम उम्र के बच्चों में होती हैं। सबसे ज्यादा मामले 6 से 12 महीने के बच्चों में देखे जाते हैं। ज्यादातर मामलों में बच्चे का गला खाने से बंद होता हैं, जो अक्सर नट्स या हार्ड कैंडी से होता है।

दूसरे ऐसे खतरनाक खाद्य पदार्थ मांस और सॉसेज हैं, साथ ही बोन और मछली की हड्डियां भी हैं। उनकी बनावट और आकार के कारण, सॉसेज जोखिम भरे होते हैं। आम तौर पर बच्चे के मुंह में फिट होने वाली कोई भी ठोस वस्तु खतरनाक होती है।

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बच्चों में घुटन होना एक खतरनाक स्थिति है जो साँस नली के लिए खतरा बनती है और कुछ मामलों में अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत पड़ सकती है।

रोकथाम के उपाय

बच्चों में चोकिंग के अप्रत्याशित नतीजे हो सकते हैं। इसलिए दुर्घटना को रोकना ही सबसे अच्छा है। पहली बात जिस पर आपको सोचना चाहिए, वह यह है कि इनमें से ज्यादातर मामले तब होते हैं जब बच्चा खाता या खेल रहा होता है। इस तरह ऐसी एक्टिविटी के दौरान बच्चों पर निगरानी रखना ज़रूरी होता है।

 

यहाँ दूसरे रोकथाम के उपाय हैं:

  • उनके कॉम्प्लीमेंटरी फ़ूड को सुरक्षित रखें और कुछ खाद्य पदार्थों से बचें। पांच साल से कम उम्र के बच्चों की पहुंच के दायरे में नट्स और चेरी या प्लम जैसे फल नहीं होने चाहिए।
  • छोटी वस्तुओं और खिलौने। बच्चों की पहुंच के दायरे में  छोटी ठोस वस्तुओं, जैसे बैटरी या मार्बल्स को नहीं छोड़ना चाहिए। गुब्बारे और इसी तरह के खिलौनों के मामले में  विशेष रूप से सावधान रहें, क्योंकि वे ऐसी सामग्रियों से बने होते हैं जो आसानी से अन्दर चले जाते हैं और साँस नली को बंद कर सकते हैं।
  • फीडिंग के तरीके। बच्चों को मेज पर खाना चाहिए लेट कर नहीं। साथ ही, उन्हें दौड़ते या खेलते समय खाना नहीं खिलाना चाहिए। आपको उन्हें ठीक से चबाना भी सिखाना चाहिए।
  • नेकलेस से बचें। बच्चों को कभी भी हार नहीं पहनना चाहिए, चाहे वे गेंद या छोटी वस्तुओं से ही क्यों न बने हों।

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बच्चों में चोकिंग के मामले में क्या करना है

बच्चों में चोकिंग के मामले में क्या करना है

चोकिंग के मामले में हेम्लिच मेन्यूवर मदद कर सकती है।

हेम्लिच मेन्यूवर बच्चों में चोकिंग के लिए एक उपयुक्त और आवश्यक तरीका है। रोकथाम के उपाय करने पर भी बच्चे में चोकिंग हो जाए तो सबसे पहले आपको जो करना चाहिए, वह है शांत रहना। इससे आप तेजी से हालात का मुआयना कर सकते हैं और समझ सकते हैं कि आपको क्या करना है। जब बच्चे का गला घुट रहा हो तो सबसे पहले वे खांसते हैं, बात करते हैं या रोते हैं।

बच्चा खाँसे तो उसे ऐसा करने देना और इसके लिए प्रोत्साहित करना सबसे अच्छा है। कभी-कभी अनुचित हस्तक्षेप बाहरी वस्तु को और भीतर कर देती है, जिसका अर्थ है उसे निकालना और मुश्किल होगा। आपको बच्चे की पीठ थपथपाने, पेट को दबाने या उन्हें पीने के लिए कुछ देने से बचना होगा। जब खांसने से वह वस्तु न निकले तो आपको इमरजेंसी सर्विस को कॉल करना चाहिए और उनके पहुँचने से पहले ये काम करना चाहिए:

 
  • सबसे पहले उन्हें पैरों पर खडा करें और उनका सिर झुकायें
  • उनकी कांख के नीचे से अपना एक हाथ डालकर उनकी छाती को थाम ले
  • अपने दूसरे हाथ से उनकी पीठ के उपरी हिस्से में ठीक कन्धों की ब्लेड के बीचोंबीच मारें। आपको अपनी हथेली का इस्तेमाल करना चाहिए और पांच बार से ज्यादा नहीं थपथपाना चाहिए।

हेम्लिच मेन्यूवर

बच्चा अगर उस वस्तु को फिर भी न उगले तो आपको लगातार पांच बार हेम्लिच मेन्यूवर ट्रिक करनी चाहिए। इन बातों का आपको पालन करना है:

  • आपको बच्चे के पीछे जाना है और अपनी बाहें उनकी कमर के चारों ओर लपेटनी है।
  • अपने एक हाथ से एक मुट्ठी बनाएं और अपने अंगूठे के पोर को उनकी नाभि के ऊपर पेट के गड्ढे पर रखें।
  • दूसरे हाथ से उस मुट्ठी को ढँकें और अंदर की ओर और ऊपर की ओर धकेलें।
  • यदि बच्चा बेहोश है, तो आपको 30 बार उनकी छाती को दबाना चाहिए। फिर उसकी मुंह से दो बार सांस लें, और ऐसा करते वक्त उसकी नाक को दबा दें जिससे उस पल उसकी नाक बंद रहे। मदद आने तक ऐसा करते रहें। इस टेकनीक में बहुत सावधानी बरतें।
 

Fernández Martín, F. (2013). Escuchemos el lenguaje del niño: normalidad versus signos de alerta. Pediatría atención primaria, 15, 117-126.