बेडसोर से कैसे बचें और उपचार करें

लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने के परिणामस्वरूप बेडसोर विकसित करने की संभावना वाले अतिसंवेदनशील रोगियों की पोजीशन को बार-बार बदलते रहना ज़रूरी है।
बेडसोर से कैसे बचें और उपचार करें

आखिरी अपडेट: 16 अप्रैल, 2019

बीमारी या ‌बुढ़ापे के कारण जब कोई लंबे समय तक बिस्तर पर पड़ा रहता है तब आमतौर पर बेडसोर बनना शुरू हो जाते हैं।

जब किसी खास स्थान पर त्वचा को अत्यधिक दबाव झेलना पड़ता है तब वहाँ की त्वचा पहले लाल होती है, फिर छाले पड़ते हैं और उसके बाद फफोले पड़ जाते हैं।

इस घटना को रोकने के लिए हम आपको यह लेख पढ़ने की सिफारिश करेंगे।

बेडसोर क्या हैं?

लंबे समय तक आराम की स्थिति में रहने वाले रोगी इस ‘दबाव अल्सर’ की पीड़ा से ग्रसित हो जाते हैं। ये जख्म  आगे चलकर बहुत दुखदायी हो सकते हैं और व्यक्ति चलने-फिरने में अक्षम हो सकता है।

शरीर की हड्डी वाली जगह के गद्दे और तकिए से लगातार घिसते रहने के कारण बेडसोर होते हैं।

त्वचा के दोनों के बीच ‌आ जाने के कारण रक्त संचालन ‌बाधित होता है, जो अतिक्षय का कारण है। अगर रोगी मूत्र संबंधी असंयम से ‌पीड़ित है तो बिस्तर के गीले पन के कारण भी ये हो सकते हैं।

सोए रहकर पड़ने वाले दबाव के कारण कमर की पिछली हड्डी को पिसते रहना अच्छा संयोजन नहीं है।

ये फोड़े प्रभावित त्वचा की परतों की मात्रा के अनुसार वर्गीकृत होते हैं। वे लाल‌ होने के बाद हडि्डयों पर‌ प्रभाव डालना शुरू करते हैं।

बेडसोर से पीड़ित व्यक्ति अगर अपनी स्थिति में बदलाव नहीं लाता तो इससे संक्रमण हो सकता है और अत्यधिक पीड़ा के कारण स्थिति गंभीर हो सकती है।

बेडसोर होने के पीछे खतरनाक कारकों में

  • बुढ़ापा
  • पूरी तरह गतिहीनता
  • मूत्र पर संयम न होना या मूत्राशय पर नियंत्रण न होना
  • कुपोषण या पानी की कमी (निर्जलीकरण)
  • बीमारियाँ जो ठीक होने में लंबा समय लेती हैं
  • मानसिक विकार (पागलपन, भ्रांति, भूलने की बीमारी)
  • दर्द निवारक दवाओं का प्रयोग

इस आलेख को देखें : ऑस्टियोअर्थराइटिस, ऑस्टियोपोरोसिस और अर्थराइटिस : तीनों में क्या अंतर हैं?

बेडसोर से कैसे बचें

यह समस्या बुजुर्ग रोगियों में बहुत आम है। दाई और देखभाल करने वाले के साथ ही परिवार के सदस्यों को ऐसे रोगियों का ध्यान रखना चाहिए कि ये अधिक विकसित न होने पाए।

बेडसोर से बचने की ‌कुछ सलाह

1. 2 से 3 घंटे के बाद बाद स्थिति बदलते रहें

रोगी की क्षमताओं को देखते हुए, यह जरूरी है कि उन्हें पलटते रहें ताकि रक्त का संचालन बना रहे और त्वचा के एक ही स्थान पर दबाव न पड़े। उदाहरण के लिए, तकिए का उपयोग पीठ को बाईं या दाईं ओर झुकाने के लिए किया जा सकता है।

2. चपेट में आने वाले स्थान का निरीक्षण

शरीर में ऐसे कई स्थान हैं जहाँ बेडसोर होने की संभावना अधिक रहती है : टखनों, कूल्हों, कमर के पीछे ‌की हड्डी, घुटने, कान और कंधे।अगर कहीं लालीपन दिखे, तो यह आवश्यक है कि फोड़े बनने से पहले तुरंत इसका इलाज करें।

3. शारीरिक स्वच्छता बनाए रखें

यहाँ तक कि अगर कोई हमेशा लेटे रहे तो पसीने से गंदगी फैल सकती है। बेडसोर होने के खतरे से बचने के लिए हर दिन पूरी तरह साफ सफाई के साथ स्नान आवश्यक है।

  • हमेशा सुगंधहीन साबुन का प्रयोग करें और रगड़े बिना प्रयोग करें।
  • सूखा रखना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि नमी तेजी से लालीपन की प्रक्रिया को बढ़ाती है।

4. दबाव वाले स्थान को कम करें

बेडसोर : घुटने के नीचे तकिया रखें

तकिए या पुनर्वास और केयर शॉप से प्राप्त विशेष चीजों का उपयोग करके शरीर के उन स्थानों को गद्दे, सोफा या व्हीलचेयर के घर्षण से बचना संभव है।

  • उदाहरण के लिए, जब दोनों टांगें एक-दूसरे पर दबाव डाले तब दोनों घुटनों के बीच एक‌ तकिया रखा जा सकता है
  • एक छोटी सी तकिया या कोई और‌ चीज से यह काम लिया जा सकता है।

5. रोगी को खिलाएँ और हाइड्रेट करें

व्यक्ति की आवश्यकता अनुकूल संतुलित आहार उसके स्वास्थ्य में सुधार और तमाम पोषक तत्व प्रदान करने के लिए जरूरी है।

पानी, चाय और सूप के साथ-साथ तरल पदार्थों के सेवन को बढ़ाने में मदद करने के लिए जेलो की सलाह दी जाती है

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6. एड़ियों पर दबाव डालने से बचें

टांगों के नीचे एक तकिया रखें ताकि पैर लटकते रहें। हमेशा इस बात का ख्याल रखें कि चादर या कंबल से पैरों की उंगलियों में घर्षण न हो।

इस स्थिति के बाद, जितना संभव हो लिनेन को ढीला छोड़ दें

7. मालिश

रक्त संचालन बढ़ाने और मांसपेशियों को सुन्न होने से रोकने के लिए दिन में दो से तीन बार मालिश करना बहुत जरूरी है

किसी खास मलहम या क्रीम का उपयोग करना उचित है।

कभी भी हड्डीदार उभरे हुए स्थान पर मालिश न करें, यहाँ अधिक दबाव पड़ सकता है। इस स्थान की त्वचा बहुत पतली होती है।

8. कपड़े और चादर बदलते रहें

रोगी ‌ने उपयुक्त कपड़े पहने हैं या नहीं इसका भी ख्याल रखें।

  • यह न तो अधिक तंग होना चाहिए और न अधिक ढीला। तंग हो तो त्वचा को सांस लेने की अनुमति नहीं देता और ढीला हो तो लिपट कर किसी खास स्थान पर‌ दबाव डाल सकता है।
  • कपड़े में बटन और जीप नहीं होने चाहिए और न ही मोटी सिलाई हो।
  • चादर के लिए यह ध्यान रखें कि इसे समय-समय पर बदल देना बहुत महत्वपूर्ण है। सबसे बढ़कर, नमी और मैलापन से बचाव करें।

9. व्यायाम

अगर रोगी चलने-फिरने में अक्षम है, तो जिम्मेदारी के साथ किसी को उनके पैर, बांह, गर्दन आदि के व्यायाम करवाने में मदद करनी चाहिए।

ये गति रक्त संचालन को सुधारेगी और लंबे समय तक बिस्तर पड़े रहने के दबाव से भी बचाएगी।

हल्के बेडसोर के इलाज के लिए प्राकृतिक उपचार

केवल मामूली बेडसोर के मामले में ही घरेलू औषधियों से उपचार होना चाहिए। उनमें से कुछ आपके काम आए:

1. एलोवेरा

आप इसे क्रीम के रूप में खरीद सकते हैं या तना से इसे सीधे काट कर इसके भीतर से जेल निकाल लें। एलोवेरा त्वचा को ठंडक पहुंचाता है, खून के बहाव को तेज करता है, संक्रमण से बचाता है और तत्काल राहत देता है।

2. मैग्नीशियम दूध

यह दूध किसी मेडिकल की दुकान में मिल सकता है। यह त्वचा की लालिमा और सूजन को कम करने में मदद करता है। दिन में तीन बार रूई में भिगोकर प्रयोग किया जाना चाहिए।

3. शहद

इसमें मौजूद जीवाणुरोधी गुणों के लिए धन्यवाद, शहद हाल में उभरे फोड़े के लिए मददगार है। यह त्वचा को हाइड्रेट भी करता है।

हल्की मात्रा में शहद से लेप करने के बाद पट्टी बांध लें।

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