एक स्टडी के अनुसार "पति का होना" अर्थात 7 घंटे ज्यादा काम

08 जनवरी, 2019
 

इस आर्टिकल के शीर्षक ने बहुत से लोगों को नाराज कर दिया होगा। कुछ लोगों को लगता है, “किसी महिला के लिए ज्यादा या कम जिम्मेदारियां और घर का काम होने के लिए” पति का होना या न होना कोई सीधा कारण नहीं है।”

हम केवल असमानता की बात कर रहे हैं जो आज भी कई घरों में मौजूद हैं। यह ऐसा है जिसे मिशिगन यूनिवर्सिटी एक स्टडी में पता करना चाहती थी।

इसके नतीजे बहुत साफ़ और निर्णायक थे: आज भी, घरेलू काम के बड़े हिस्से की जिम्मेदारी महिलाओं की ही होती है

यह स्पष्ट करने की जरूरत है, कि हम यह बात व्यापक तौर पर नहीं कह सकते।

हम सभी ऐसे घरों के बारे में जानते हैं जहां स्थिति बिल्कुल विपरीत है। पुरुष लगभग हर चीज का ख्याल रखते हैं। वहीं पर ऐसे भी कुछ जोड़े हैं जिनके पास परिवार के प्रत्येक काम का बराबर वितरण है।

आइए इस दिलचस्प स्टडी से मिली जानकारी को देखें।

पति और पत्नी के बीच की लैंगिक असमानता

यह खबर बिल्कुल नयी नहीं है। वास्तव में मिशिगन विश्वविद्यालय ने सोशल रिसर्च संस्थान से पारिवारिक गतिशीलता पर एक डेटाबेस का उपयोग किया, जिसे 1968 से संकलित किया गया है।

इसका उद्देश्य यह स्टडी करना था कि कुछ दशकों में घरेलू कामों का वितरण कैसे बदला है।

इनके परिणाम रॉयटर्स एजेंसी द्वारा प्रकाशित किए गए थे, और इन्हें निम्नलिखित तरीके से संक्षेप में बताया जा सकता है।

काम के बंटवारे में गैरबराबरी

स्त्री के हाथ में पुरुष

बदलते समय में नई चेतना और कानूनी बदलाव जीवन और पारिवारिक कार्य में तालमेल बैठाने का प्रयास करते हैं। इसके बावजूद पुरुष तुलनात्मक रूप से ज्यादा वेतन लाना जारी रखते हैं।

  • ये महिलाएं हैं जो आम तौर पर खुद को बच्चों के पालन-पोषण और होमकेयर के लिए समर्पित कर देती हैं और अपने काम और पेशेवर जिम्मेदारियों को अस्थायी रूप से या निश्चित रूप से छोड़ देती हैं।

  • जब स्थितियां बराबर होती हैं, अर्थात जब दोनों पति-पत्नी बाहर काम करते हैं, तब भी महिलाएं घर पर काम करने और बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताने के लिए सप्ताह में अधिक घंटे समर्पित करती रहती हैं।

 
  • पीढ़ी दर पीढ़ी इसमें भिन्नता और अंतर हैं। 60 साल से अधिक उम्र की महिलाएं घर की देखभाल करते हुए सप्ताह में 28 घंटे तक समर्पित करती हैं

  • जिन महिलाओं के 3 बच्चे हैं वे भी अपने पतियों के मुकाबले बच्चों और घर पर ध्यान देने के लिए ज्यादा समय देती हैं।
  • बाकी महिलायें जिनके पति हैं, वे घरेलू कामों या अगर बच्चे हों तो उनकी देखभाल में औसतन हफ्ते में अपने पति या साथी के मुकाबले 7 घंटे ज्यादा समर्पित करती हैं

यह भी आश्चर्य की बात नहीं है कि अतीत में यह भेदभाव ज्यादा स्पष्ट था। उदाहरण के लिए, 1 9 76 में घरेलू कामों में महिलाएं औसतन 26 घंटे समर्पित करती थीं, जबकि पति केवल 6 घंटे ही समर्पित करते थे।

आश्रितों की देखभाल और घर के काम में असमानता

organic home management

यह सबसे प्रासंगिक तथ्यों में से एक है। कपल छोटे बच्चों की देखभाल और लालन-पालन की जिम्मेदारी को अच्छी तरह से आपस में बाँट सकते हैं।

लेकिन जब आश्रितों पर ध्यान देने की बात आती है, तो बुजुर्गों या अन्य परिवार के सदस्यों की शारीरिक अक्षमता के कारण सारी जिम्मेदारी महिला पर आ पड़ती है।

यहां हम देखते हैं, कैसे घर के निजी क्षेत्र में भी घरेलू काम के साथ-साथ परिवार के सदस्यों पर ध्यान देती हैं और देखभाल करती हैं।

तो आइए फिर से दोहरायें कि, प्रत्येक परिवार के अपने तौर-तरीके होते हैं, हजारों पुरुष हैं, साथी या पति के रूप में जो इस कार्य की ज़िम्मेदारी लेते हैं। हालांकि मिशिगन विश्वविद्यालय की इस स्टडी के अनुसार, इन असमानताओं को चिह्नित किया जाना जारी है।

चेतना बदलना और समानता के बारे में शिक्षित करना

हम उस समय से थोड़ा आगे बढ़ गए हैं जब हमारी दादी और मां यह समझते थे कि उनकी जिम्मेदारी घरेलू कार्य और घर की देखभाल करना है। 

हालांकि, ऐसी कुछ चीजें हैं जिन्हें हमें ध्यान में रखने की आवश्यकता है: प्रत्येक जोड़ा अपनी स्थिति और विशेष आवश्यकताओं के अनुसार अपने तालमेल तक पहुंचता है।

 
  • यदि दोनों सदस्य काम करते हैं तो घरेलू कार्य दोनों पक्षों की जिम्मेदारी होते हैं। समान स्थितियां, समान निवेश

  • यदि ऐसा कोई समझौता किया जाता है जिसमें एक पार्टी घर पर रहने और बच्चों की देखभाल करने का फैसला करती है, तो दूसरे पार्टनर को पैसे कमाने की इजाजत मिलती है अगर उनका काम और तनख़्वाह बेहतर है। यह एक सम्मानजनक निर्णय होता है।

  • इसलिए प्रामाणिक असमानता तब होती है जब दोनों भागीदारों के पास समान व्यक्तिगत स्थितियां होती हैं। ऐसे में केवल एक ही अपना समय देता है। दूसरा ज्यादा ध्यान नहीं देता, चीज़ों को हल्के में लेता है और सोचता है कि उसे ज्यादा कुछ करने की ज़रूरत नहीं है।

  • यह सही नहीं है। आपको अपनी सोच बदलने और जागरूकता लाने की आवश्यकता है। जिम्मेदारियों और अवसरों के बीच समानता लाने की आवश्यकता है

घर के काम और परिवार की देखभाल

यह केवल सही शिक्षा द्वारा हासिल किया जा सकता है जिसमें बच्चों को शुरुआती उम्र से पढ़ाया जाये कि हम सभी टीम का हिस्सा हैं। पुरुष और महिला के समान अधिकार हैं और हम सभी जरूरतों और दायित्वों वाले लोग हैं।

 
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