वेजाइनल यीस्ट इंफेक्शन के बारे में आप क्या जानती हैं?

नवम्बर 25, 2019
कैंडिडा अल्बिकन्स की कॉलोनी के फैलने-फूलने में कई स्थितियां मददगार हो सकती हैं। वेजाइनल यीस्ट इंफेक्शन के बारे में ज्यादा जानने के लिए इसे पढ़ते रहें।

वेजाइनल यीस्ट इंफेक्शन के बारे में आप नहीं जानती होंगी कि यह कैंडिडा जीनस वाले एक फंगस के कारण होता है। इन संक्रमणों के लिए जिम्मेदार सबसे आम प्रजातियों में कैंडिडा अल्बिकन्स (Candida albicans) एक है।

यह फंगस आमतौर पर शरीर के विभिन्न अंगों जैसे त्वचा, मुंह, गैस्ट्रो इंटेंसटिनल ट्रैक्ट और योनि में पाया जाता है। हालाँकि, यह कुछ स्थानों पर कम मात्रा में पाया जाता है। अगर इनकी संख्या स्वस्थ पैमाने पर हो तो इससे संक्रमण नहीं होता है।

फिर भी कई परिस्थितियाँ कैंडिडा अल्बिकन्स की कॉलोनी में अत्यधिक बढ़ोतरी को बढ़ावा देती हैं। नतीजतन, अगर फंगस का ज्यादा ग्रोथ हो जाए तो एक महिला वेजाइनल यीस्ट इंफेक्शन हो सकती है।

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वेजाइनल यीस्ट इंफेक्शन के बारे में तमाम बातें

वेजाइनल यीस्ट इंफेक्शन के बारे में तमाम बातें

अनुमान है कि 75% महिलाएं जीवन में कम से कम एक बार वेजाइनल यीस्ट इंफेक्शन का शिकार होती हैं। इसका सही तरह से इलाज न करने पर यह आपके जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।

20 से 50% महिलाओं की योनि में कहीं कैंडिडा अल्बीकन्स होता है। इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें संक्रमण है।

योनि की एसिडिक पीएच, मजबूत इम्यून सिस्टम और वेजाइनल फ्लोरा की मौजूदगी के कारण योनि की स्थिति सामान्य होने पर अक्सर कैंडिडा के कोई लक्षण नहीं होते हैं। ये सभी फैक्टर फंगस को अत्यधिक प्रजनन करने से रोकने में मदद करते हैं।

इस फंगस की कालोनी बहुत ज्यादा बढ़ जाने पर महिला को वेजाइनल फ्लोरा में असंतुलन का अनुभव हो सकता है। इससे वेजाइनल यीस्ट इंफेक्शन हो सकता है।

क्या आप जानती हैं, वेजाइनल यीस्ट इंफेक्शन जीवन में किसी न किसी समय 75% महिलाओं को प्रभावित कर सकता है?

5% मामलों में संक्रमण बार-बार हो सकता है और साल में चार या ज्यादा बार हो सकता है। निस्संदेह यह एक महिला के जीवन की क्वालिटी पर असर डाल सकता है।

वल्वोवेजाइनल कैंडिडिआसिस के रिस्क फैक्टर

यीस्ट इंफेक्शन के कुछ रिस्क फैक्टर हैं:

  • डायबिटीज और ब्लड शुगर लेवल पर ठीक नियंत्रण न होना।
  • हाल ही मेंहुआ एंटीबायोटिक ट्रीटमेंट : एंटीबायोटिक्स फ्लोरा को असंतुलित करते हैं क्योंकि वे बैक्टीरिया को तो मारते हैं, लेकिन फंगस को नहीं।
  • हार्मोनल बदलाव।
  • बीमारी या इलाज के कारण इम्यूनोसप्रेशन।

दूसरी ओर, बहुत टाइट कपड़े पहनना या नहाने के बाद ज्यादा वक्त तक गीले सूट को छोड़कर रखना।

यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कुछ हाइजीन प्रोडक्ट योनि के प्राकृतिक पीएच को नुकसान पंहुचा सकते हैं और इसलिए इससे बचा जाना चाहिए। ऐसे प्रोडक्ट में कुछ साबुन और परफ्यूम शामिल हैं।

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लक्षण

  • यीस्ट इंफेक्शन के कारण वेजाइनल डिस्चार्ज में बदलाव, जलन, खुजली जैसे लक्षण हो सकते हैं। ये संकेत योनि के अंदर और बाहर दोनों को प्रभावित कर सकते हैं।
  • कई मामलों में पेशाब के दौरान दर्द और असुविधा या सेक्स के समय भी दर्द होता है। दूसरे लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जैसे कि वल्व में सूजन और लाली और एक लम्प युक्त, बिना गंध की सफ़ेद डिस्चार्ज।

वेजाइनल यीस्ट इंफेक्शन की पहचान कैसे करें

वेजाइनल यीस्ट इंफेक्शन के लक्षण गुप्तांगों में दूसरे संक्रमण की तरह हो सकते हैं। आप वेजाइनल डिस्चार्ज की टेक्स्चर और गंध से वेजाइनल यीस्ट इंफेक्शन को पहचान करने में सक्षम हो सकती हैं।

दूसरे योनि संक्रमण महिलाओं में अपेक्षाकृत आम हैं। योनि स्राव के गाढ़ेपन और गंध से उन्हें पहचाना जा सकता है। इनमें से कुछ संक्रमण हैं:

बैक्टीरियल वेजिनोसिस (Bacterial vaginosis)

यह संक्रमण गार्डेनरेला वेजिनेलिस (Gardnerella vaginalis), प्रीवोटेला (, Prevotella) और बैक्टेरॉइड्स (Bacteroides) जैसी बैक्टीरिया प्रजातियों के कारण वेजाइना के माइक्रोबायोटा में बदलाव के कारण होता है।

बैक्टीरियल वेजिनोसिस गर्भावस्था के दौरान और साथ ही उन महिलाओं में आम है जो इंट्रा यूटराइन डिवाइस (आईयूडी) का उपयोग करती हैं या जो तनाव या हार्मोन के बदलाव से पीड़ित हैं।

बैक्टीरियल वेजिनोसिस में अक्सर एक ख़ास तरह का योनि स्राव होता है। इसमें बहुत तेज, मछली जैसी गंध और सफेद या भूरा, चिपचिपा स्राव होता है।

ट्राइकोमोनिएसिस (trichomoniasis)

यह संक्रमण ट्राइकोमोनास वेजाइनलिस (Trichomonas vaginalis) के कारण होता है और यह सेक्सुअली ट्रांसमिटेड संक्रमण (एसटीआई) है। जो महिलाएं इस स्थिति से पीड़ित हैं, उनमें बहुत ही असामान्य और दुर्गंध वाला योनि स्राव होता है। इसकी बनावट झागदार, पारदर्शी, सफेद, पीले या हरे रंग की होती है।

वेजाइनल यीस्ट इंफेक्शन का इलाज

इस विशेष स्थिति के लिए अंग पर लेप वाले और खाई जाने वाली, दोनों तरह की दवाएं हैं। ट्रॉपिकल ट्रीटमेंट में 2% क्लोट्रिमेज़ोल के साथ वेजाइनल क्रीम लगाने या 100 और 500 मिलीग्राम क्लोट्रिमेज़ोल वेजाइनल सपोजिटरी शामिल है।

इसके अलावा प्रोबायोटिक्स का विशिष्ट संयोजन वेजाइनल यीस्ट इंफेक्शन को रोकने या उसके इलाज में सहायक हो सकता है। आप इन एंटीबायोटिक दवाओं के ओरल या वेजाइनल वर्जन का उपयोग कर सकती हैं।

एंटीफंगल गोलियां हैं जिन्हें आप मुंह से ले सकती हैं। सबसे आम फ्लुकोनाज़ोल और इट्राकोनाज़ोल हैं। हालाँकि, इन दवाओं के साइड इफेक्ट हो सकते हैं जैसे कि नॉजिया, उल्टी या दस्त। इसके अलावा, वे लिवर फंक्शन को प्रभावित कर सकते हैं।

यीस्ट इंफेक्शन के बारे में अधिक जानें : स्वच्छता और रोकथाम

वेजाइनल यीस्ट इंफेक्शन को रोकने में मदद के लिए आप निम्नलिखित हाइजेनिक कदम उठा सकते हैं:

  • एंटीबायोटिक्स लेते समय प्रोबायोटिक्स जरूर लें।
  • उचित इंटिमेट हाइजीन अपनाएँ। नमी से बचें और अंग को अच्छी तरह से सूखा रखें।
  • हमेशा जननांग और गुदा क्षेत्र को आगे से पीछे तक साफ करें।
  • सैनिटरी नैपकिन (पैड) और टैम्पोन को अक्सर बदलें। अगर आपको पहले से यीस्ट इंफेक्शन है तो टैम्पोन का उपयोग न करें।
  • सूती अंडरवियर पहनें।

अगर आप इस समय वेजाइनल यीस्ट इंफेक्शन का इलाज करा रही हैं, तो संभोग के दौरान रोकथाम के अतिरिक्त उपाय करें। यह भी सिफारिश की जाती है कि अपने सेक्सुअल पार्टनर का भी इस संक्रमण के लिए इलाज कराएं।

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