शरीर में क्यों रुकने लगता है अतिरिक्त पानी?

जुलाई 1, 2019
अपनी डाइट में सुधार और शारीरिक गतिविधियाँ बढ़ाना वाटर रिटेंशन को घटाने में मदद कर सकता है। नीचे इस आर्टिकल में इसके संभावित कारणों के बारे में पढ़िए।

शरीर में अतिरिक्त पानी या तरल का रुकना (Water retention) या फ्लूइड रिटेंशन (fluid retention) दुनिया भर में पुरुष और स्त्री दोनों को को प्रभावित करता है। यह जीवन के कई स्तरों पर हो सकता है। जो अंग इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं वे हैं पैर, टखने, हाथ और पेट।

मानव शरीर 70% तरल से बना होता है। हालाँकि अगर इस तरल का बहाव बना नहीं रहता और यह शरीर में सही ढंग से फ़ैल नहीं पाता, तो हम इसके कुछ परिणाम भुगतना शुरू कर देते हैं। फ्लूइड के नियंत्रण में किडनी सबसे अहम भूमिका निभाती है। किडनी के साथ होने वाली कोई भी समस्या वाटर रिटेंशन का कारण बन सकती है।

शरीर में अतिरिक्त पानी के जमाव का कारण (Causes of water retention)

शरीर में जलावरोधन या अतिरिक्त पानी का जमाव कई कारणों से हो सकता है। अक्सर कई लोग दिख जाते हैं जो इस समस्या से जूझ रहे होते हैं। इसके कारणों को पहचान पाना बहुत ज़रूरी है ताकि आप सही इलाज करवा पाएं और भविष्य में होने से रोक पायें।

वातावरण से जुड़े कारण

शरीर में अतिरिक्त पानी के जमाव का कारण

  • ज़रूरत से ज़्यादा गर्मी की वजह से रक्त-वाहिकाओं से तरल बाहर आ सकता है क्योंकि उसे टिश्यू पूरी तरह सोख भी नहीं पाते।
  • ऐसी नौकरी में रहने के दौरान जहाँ आप शायद एक ही स्थिति में काफी लम्बा समय गुज़ारते हैं, लम्बी यात्रा जहाँ आप लम्बे समय तक बैठे रहते हैं, वाटर रिटेंशन का कारण बन सकते है।

यह साफ़ है कि हम बाहर का तापमान बदल नहीं सकते। हम जो सलाह दे सकते हैं वह है, पानी पीने की मात्रा बढ़ाएं।

इसे भी आजमायें : 7 नेचुरल नुस्ख़े जो जल प्रतिधारण को कम करने में हैं लाजवाब

शरीर में अतिरिक्त पानी जमने के आदत से जुड़े कारण

शरीर में अतिरिक्त पानी जमने के आदत से जुड़े कारण

  • एक ऐसी डाइट जिसमें हद से ज्यादा नमक हो और बहुत ही कम प्रोटीन हो, इसके लक्षण पैदा करने का सबसे बढ़िया मेल हैं। सोडियम की अधिक मात्रा शरीर में पानी को रेगुलेट करने की प्रक्रिया को ही बदल देती है।
  • बहुत ही कम शारीरिक एक्टिविटी वाली लाइफस्टाइल भी शरीर में अतिरिक्त पानी के जमा होने के तरीके को प्रभावित करती है। हद से ज़्यादा सुस्त लोगों को यह परेशानी होने की सबसे ज़्यादा सम्भावना होती है। इसलिए शार्ट वॉक पर जाएं, अपने हाथ-पैरों को स्ट्रेच करें या एरोबिक एक्सरसाइज करते रहें। ये सब ही शरीर में लिक्विड की गतिविधि को बढ़ाने में मदद करेंगे।

हॉर्मोन से जुड़े कारण

  • पीरियड के साथ सामान्य रूप से लिक्विड रिटेंशन में बढ़ोत्तरी होती है। इस वजह से, महिलाओं को कई दिन पेट की सूजन के साथ गुज़ारने पड़ सकते हैं। आमतौर पर आप इसमें कुछ भी नहीं कर सकती पर यह स्थिति कुछ समय के लिए ही होती है।
  • प्रेग्नेंसी के दौरान हॉर्मोन से जुड़े कारणों की वजह से महिलाओं में फ्लूइड रिटेंशन हो जाता है। प्रेग्नेंट महिलाओं के पैर, हाथ और मुंह में सूजन रहना बड़ा ही सामान्य है। सबसे अच्छा तरीका है कि आप एक्टिव रहें। साथ ही, यह भी बहुत ज़रूरी है कि सामान्य से ज़्यादा पानी पिएं और नमक का सेवन घटा दें।

दूसरी बीमारियां हो सकती हैं शरीर में अतिरिक्त पानी जमने का कारण

दूसरी बीमारियां हो सकती हैं शरीर में अतिरिक्त पानी जमने का कारण

  • सिरोसिस के कारण लिवर के ज़रिये पानी का सर्कुलेशन मुश्किल हो जाता है। इस वजह से पेट और शरीर के निचले भागों में अतिरिक्त पानी जमा हो जाता है।
  • किडनी से जुड़ी और साथ ही साथ दिल से जुड़ी समस्यायें कुछ अंगों में इडिमा (oedemas) का कारण बन जाती हैं क्योंकि फ्लूइड खुल कर बह नहीं पाता।

जैसा कि हमनें ऊपर समझाया, किडनी ही मूत्र के ज़रिये पानी के बाहर निकलनेकी प्रक्रियाओं को कंट्रोल करती है। अगर इस प्रक्रिया में बदलाव आ जाये, तो फ्लूइड किसी दूसरे अंग में फंसा रह जायेगा। इसलिए इस मामले में किसी प्रोफेशनल से राय लेना बहुत ज़रूरी है जो इसका इलाज कर सके। दवाइयों के साथ-साथ, आराम पाने के लिए कोई ड्यूरेटिक या फिर विशेष खाने की चीज़ों पर आधारित डाइट ले सकते हैं।

इसे भी जानें : 4 स्वादिष्ट किडनी डिटॉक्स रेसिपी

दवाओं के साइड-इफ़ेक्ट से भी शरीर में जम सकता है अतिरिक्त पानी

कर्टिकॉइड (Corticoid) पर आधारित दवाइयाँ, सूजन कम करने वाली दवाइयाँ, या मधुमेह जैसी बीमारी का इलाज करने वाली दवाइयां साइड- इफ़ेक्ट के तौर पर फ्लूइड रिटेंशन कर सकती हैं।

शरीर में अतिरिक्त पानी जमने की इस दशा को सुधारने के लिए यह ज़रूरी है संतुलित डाइट लें जिसमें सही मात्रा में प्रोटीन हो। साथ ही आप खाने में नमक का इस्तेमाल कम कर दें। आपको सर्कुलेशन बढ़ाने के लिए हर दिन टहलने की कोशिश करनी चाहिए।  इसके अलावा, एक अच्छा सुझाव यह है कि हर घंटे अपनी कुर्सी से उठकर अपनी टांगों को स्ट्रेच करें।

कई कंपनियों में कर्मचारियों के लिए हर दिन कुछ मिनट एक्सरसाइज के लिए उपलब्ध कराये गए हैं। हर दिन एक निश्चित समय पर वे ऑफिस छोड़कर 15 मिनट अपने शरीर को समर्पित करते हैं।

जब बात आती है आराम की, तो यह बहुत ज़रूरी है कि पूरी तरह से स्वस्थ होने के लिए पर्याप्त वक्त निकालें। अपने पैरों के नीचे कुशन रखें ताकि खून ज़्यादा आसानी से बह सके।

आदतों को बदलने से भी ज़्यादा ज़रूरी यह है कि डॉक्टर से जाकर से जाकर मिलें। वाटर रिटेंशन के कारणों की जानकारी जितनी जल्दी होगी उतना ही जल्दी वे आपको सही इलाज भी बता पाएंगे।

  • Crabtree, Brenda, Zajarías, Alejandro, Portal, Cynthia, Téllez, Natalia, Halabe, José, de la Llata-Romero, Manuel, Urrusti-Sanz, Juan, Aguirre-García, Jesús, & Sánchez-Ramírez, Roberto. (2004). Varón de 44 años de edad con edema periférico, ascitis y fatiga. Gaceta médica de México140(1), 77-79. Recuperado en 10 de febrero de 2019, de http://www.scielo.org.mx/scielo.php?script=sci_arttext&;pid=S0016-38132004000100013&lng=es&tlng=es.
  • Martínez-Castelao, A., Górriz, J. L., Sola, E., Morillas, C., Jover, A., Coronel, F., … & Álvaro, F. D. (2012). A propósito de las discrepancias entre documentos de consenso, guías de práctica clínica y normativa legal en el tratamiento de la diabetes tipo 2. Nefrología (Madrid)32(4), 419-426.
  • Valer, P., & Ruiz del Árbol, L. (2004). Ascitis. Revista Española de Enfermedades Digestivas96(9), 667-667.