स्किन टू स्किन कांटेक्ट : प्रसव के बाद जरूरी है

त्वचा से त्वचा का संपर्क मानव जाति के इतिहास में हमेशा रहा है। हालाँकि मेडिकलाइज चाइल्ड बर्थ के कारण इसकी उपेक्षा हो रही है। इस आर्टिकल में हम बताएंगे कि क्यों और इसके फायदे क्या हैं।
स्किन टू स्किन कांटेक्ट : प्रसव के बाद जरूरी है

आखिरी अपडेट: 12 जनवरी, 2021

स्किन टू स्किन कांटेक्ट जिसे कंगारू केयर भी कहा जाता है, प्रसव के तुरंत बाद किया जाना चाहिए। इसमें नवजात शिशु को मां के पेट या छाती पर रखा जाता है। डॉक्टर पहले से प्लेसेंटा को काटे बिना भी ऐसा कर सकते हैं।

दरअसल इस प्रैक्टिस को जन्म के कुछ दिनों बाद भी किया जा सकता है। इसके फायदे कई हैं, बच्चे की सेहत और माँ और बच्चे दोनों के लिए। इस लेख में हम आपको इस प्रैक्टिस के बारे में जानने योग्य तमाम बातों की व्याख्या करेंगे।

स्किन टू स्किन कांटेक्ट

जन्म के बाद माँ और बच्चे के बीच त्वचा से त्वचा का संपर्क कुछ ऐसा है जो मानवता ने पूरे इतिहास में किया है। यह लगभग अनजाने में किया जाता है, क्योंकि माँ अपने नवजात शिशु को अपना स्नेह देना चाहती है, उसकी रक्षा करना चाहती है।

बच्चे के जन्म के लिए प्रसव एक जटिल स्थिति है, क्योंकि यह उस शांति और आराम की स्थिति को ख़त्म करती है जो उन्होंने गर्भ के महीनों के दौरान अनुभव किया था। उनकी मां के साथ पहला संपर्क उन्हें शांति का अनुभव करा सकता है। इस तरह यह अभ्यास महत्वपूर्ण है।

हालांकि यह तकनीक कई मायनों में फायदेमंद है, और कई लोग इससे अनजान हैं। इस तरह यह सिर्फ प्रवृत्तिवश किया गया था। हालांकि, जबसे असिस्टेंट डिलीवरी, कभी-कभी जिसे “इंस्ट्रूमेंटल डिलीवरी” कहा जाता है, सामने आयी है, मेडिकल प्रोफेशनल ने इसे करना  बंद कर दिया।


जन्म के तुरंत बाद कांटेक्ट को प्रोत्साहित करना अहम है, क्योंकि इस टेकनीक के तुरंत फायदे होते हैं।

अपने बच्चे के साथस्किन टू स्किन कांटेक्ट की प्रैक्टिस कैसे करें

स्किन टू स्किन कांटेक्ट में नवजात शिशु को माँ की छाती या पेट पर रखना होता है। डॉक्टर आमतौर पर पहले प्लेसेंटा को काटे बिना ऐसा करते हैं। उन्हें बच्चे को माँ की नंगी छाती पर सीधा रखना चाहिए।

यह बच्चे के लिए भी आदर्श है कि वह माँ के निप्पल के संपर्क में आए। हालाँकि उन्हें इसे चूसने की जरूरत नहीं है। यह वेजाइनल डिलीवरी और सिजेरियन डिलीवरी (C-sections) दोनों मामलों में किया जाना चाहिए। एक्सपर्ट इस स्थिति को कम से कम एक घंटे तक करने की सलाह देते हैं।

दरअसल यह शिशु के जीवन के शुरुआती दिनों में भी किया जा सकता है। इस तरह प्रसव के ठीक बाद यह नहीं होना चाहिए। इस शांतिपूर्ण समय का आनंद लेने के लिए दिन में सही वक्त का पता लगाना आदर्श है।

मां को अपने ब्रेस्ट को पूरी तरह से एक्सपोज करना चाहिए और उस पर बच्चे को रखना चाहिए। इसके अलावा शरीर के टेम्परेचर में बदलाव से बचने के लिए मां को अपने और बच्चे दोनों को ब्लैंकेट से ढकना पड़ता है। याद रखें, शुरुआती उम्र में आसपास के वातावरण में ऑर्गन एडाप्शन सिस्टम अभी भी विकसित हो रही है।

इस तरह यह संभावना है कि दोनों शांति की अवस्था में प्रवेश करेंगे। अब हम इसके कई फायदों पर टिप्पणी करने जा रहे हैं। हालांकि, यह मानना ​​तर्कसंगत है कि अंतरंगता की यह स्थिति तनाव को कम करती है। स्किन टू स्किन कांटेक्ट यहां तक ​​कि हमारे द्वारा बताये गए तापमान में उतार-चढ़ाव के मामले में भी मदद कर सकता है।

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इस टेकनीक के फायदे

हाल के वर्षों में कई वैज्ञानिकों ने स्किन टू स्किन कांटेक्ट के लाभों का अध्ययन किया है। कोक्रेन लाइब्रेरी में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार जन्म के समय माँ और बच्चे के बीच स्किन टू स्किन कांटेक्ट उनका रोना कम कर देता है और माँ और शिशु में सुधार होता है।

एक्सपर्ट का कहना है कि यह दोनों के बीच स्नेह बंधन को बढ़ाता है। उदाहरण के लिए माँ बच्चे के संकेतों को बेहतर ढंग से समझती है और संवाद ज्यादा संवेदनात्मक हो जाता है। इस तरह यह माँ बच्चे की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है।

दरअसल चिली के पोंटिफिकल कैथोलिक विश्वविद्यालय के एक समीक्षा लेख के अनुसार यह पोस्ट डिलीवरी डिप्रेशन की संभावना को कम करता है। इसी तरह ऐसा लगता है, प्रसव के बाद अस्पताल में कम दिन बिताने पड़ते हैं।

एक और फायदा जिसका हमने ऊपर जिक्र किया है, वह है बच्चे का टेम्परेचर रेगुलेशन। दूसरे शब्दों में यह शरीर के पर्याप्त होमोस्टैसिस को बनाए रखने में मदद करता है, जो नॉर्मल ग्रोथ के लिए जीवन के इस स्टेज में आवश्यक है।

अंत में एनफेरमरिया यूनिवर्सिटेरिया (अंग्रेजी में: यूनिवर्सिटी नर्सिंग) की स्टडी में कहा गया है कि जन्म के बाद महिलाओं और नवजात शिशुओं के बीच त्वचा के माध्यम से संपर्क करने से स्तनपान की ज्यादा शुरुआत हुई। यह भी टिप्पणी करता है कि यह उटेरिन इन्वोल्युशन है और यह संक्रमण के जोखिम को कम करता है, जिससे प्रसवोत्तर अवधि में महिलाओं द्वारा दवा का उपयोग कम हो जाता है।

त्वचा से त्वचा का संपर्क माँ और बच्चे के बीच की एक तकनीक है जो उनके स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाती है।

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जब भी संभव हो स्किन टू स्किन कांटेक्ट करें

बच्चे के जन्म के समय कंगारू देखभाल प्राकृतिक और सहज है। माँ और शिशु दोनों को इससे लाभ होता है। हालाँकि, यह सच है कि इसके नुकसान हैं।

Progresos de obstetricia y ginecología (अंग्रेजी में: प्रसूति और स्त्री रोग की प्रगति) में एक प्रकाशन बताता है कि, उस सटीक क्षण में, बच्चे के जीवन को खतरे में डालने वाली जटिलताएं भी हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, एक संपीड़न गर्म फ्लैश की संभावना। फिर भी, चिकित्सा टीमों की तैयारी में सुधार करके इस तकनीक को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

इसलिए, यदि आप एक बच्चा पैदा करने जा रहे हैं, तो इस तकनीक और इसे कैसे करें, इसके बारे में अधिक पढ़ने की कोशिश करें। इसके अलावा, जन्म के समय, अपने नवजात शिशु के साथ पहले संपर्क का आनंद लें। इस तरह, आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि बाहरी दुनिया के साथ यह पहला संपर्क आपके नवजात शिशु के लिए दर्दनाक नहीं है।

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