प्लांटर फेशियाइटिस : लक्षण, कारण और ट्रीटमेंट

18 नवम्बर, 2019
प्लांटर फेशियाइटिस पैर के तलवे में प्लांटर फेशिया की सूजन है, जिससे एड़ी में दर्द होने लगता है। इस आर्टिकल में इस स्थिति के बारे में ज्यादा जानकारी लें।

प्लांटर फेशियाइटिस अक्सर बहुत से लोगों की परेशानी का कारण बन जाती है। आइये इस आर्टिकल में इससे निजात पाने की जानकारी लीजिये।

प्लांटर फेशियाइटिस क्या है?

प्लांटर फेशियाइटिस पैर के तलवे में प्लांटर फेशिया की सूजन है। प्लांटर फेशिया एक लिगामेंट जो एड़ी की हड्डी को प्रॉक्सिमल फैलेंजेज से जोड़ती है और हर स्टेप के साथ रबर बैंड की तरह फैलती और सिकुड़ती है

भारी प्रेशर और प्रतिरोध झेलने के कारण प्लांटर फेशिया (plantar fascia) एक बहुत व्यापक, मोटी टिशू है। इस लिगामेंट में सूजन होने से एड़ी में दर्द होता है। यह इस अंग में दर्द की सबसे अहम वजह है।

इस समस्या का सबसे ज्यादा जोखिम एथलीट को होता है, खासकर जो एमेच्योर हैं। वैसे तो यह किसी को भी हो सकता है। इसलिए इसके लक्षण, कारण और इलाज के बारे में ज्यादा अहम है। जानने के लिए पढ़ते रहें!

रिस्क फैक्टर

  • रेपिटेटिव मोशन वाले स्पोर्ट्स
  • ओवर प्रोनेशन
  • आर्थराइटिस या डायबिटीज जैसी स्थितियां
  • अनफिट जूते
  • सपाट पैर
  • ज्यादा उम्र
  • मोटापा
  • हार्मोनल बदलाव

यह कंडीशन कैसी दिखती है?

प्लांटर फेशिया का ज्यादा उपयोग टिशू में सूक्ष्म आघात का कारण बनता है। बार-बार होने वाले छोटे आघात लिगामेंट में सूजन पैदा करते हैं, जिससे एड़ी में दर्द होता है। दूसरे शब्दों में, यह एक क्रोनिक समस्या है, क्योंकि यह रातोंरात दिखाई नहीं पड़ती है, बल्कि बार-बार चोट लगने के कारण उभरती है।

पांव की मांसपेशियों का गलत तरीके से बहुत ज्यादा इस्तेमाल करना, उन पर बहुत दबाव पैदा कर सकता है और इस स्थिति का कारण बन सकता है। पहले तो आप इसे नोटिस नहीं करेंगे लेकिन थोड़ी देर बाद दर्द आपको महसूस कराएगा कि कहीं कुछ गड़बड़ है।

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प्लांटर फेशियाइटिस के कारण

प्लांटर फेशिया में कई कारणों से चोट लग सकती है; इसके कई कारण हैं। इनमें पर्यावरण, पॉस्चर और आनुवांशिक कारण हो सकते हैं। इसके अलावा, ऐसे कारण भी हैं जो हालत को बदतर कर सकते हैं। उदाहरण के लिए गलत जूते का इस्तेमाल करना, खराब पॉस्चर, इस अंग का अधिक उपयोग, संबंधित मांसपेशियों में जकड़न और ओवरप्रोनेशन अदि।

रेपिटेटिव फिजिकल एक्टिविटी

अत्यधिक एक्सरसाइज प्लांटर फेशियाइटिस का मुख्य कारण है। लंबे समय तक चलने या कूदने जैसी शारीरिक गतिविधि लिगामेंट पर ज्यादा दबाव डालती है। लिगामेंट इतना दबाव नहीं ले पाते और टूट-फूट का शिकार होते हैं।

इसके अलावा, एक्सरसाइज प्लान में धीरे-धीरे बदलाव करने की बजाय इसे अचानक करने से ऐसी समस्या हो सकती है। रनर, फुटबॉल प्लेयर और बैडमिंटन या टेनिस खेलने वाले लोगों में इसका जोखिम सबसे अधिक होता है। डांसर और जिमनास्ट भी इससे पीड़ित हो सकते हैं।

पैर की एनाटोमी

कई संरचनाएं हैं जो प्लांटर फेशिया को ओवरलोड करने में भूमिका निभाती हैं। अकिलीज़ टेंडन वह लिगामेंट है जो गैस्ट्रोनेमियस मसल्स यानी काफ और सोलियस मसल्स को एड़ी की हड्डी से जोड़ती है।

अकिलीज़ टेंडन के पीछे आने से एड़ी की हड्डी पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे प्लांटर फेशियाइटिस पर भी दबाव बढ़ जाता है। इसका मतलब यह है कि आपके अकिलीज़ की स्ट्रेचिंग नहीं करने से फेशियाइटिस हो सकता है क्योंकि यह आपके पैर पर बहुत ज्यादा दबाव डालता है

आपके शरीर की बनावट में ध्यान रखने वाली एक और बात फुट स्ट्राइक है। दूसरे शब्दों में इसका मतलब यह है की आपका पैर जमीन को कैसे छूता है। उदाहरण के लिए सपाट पैर वाले लोगों में प्लांटर फेशिया को ज्यादा खींचने का रुझान होता है। इससे इस टिशू पर ज्यादा दबाव पड़ने के कारण टूट-फूट का खतरा बढ़ जाता है।

संबंधित स्थितियां

अर्थराइटिस और डायबिटीज को प्लांटर फैशियाइटिस के लिए रिस्क फैक्टर माना जाता है, क्योंकि इन दोनों से ही टेंडन में सूजन हो सकती है। ज्यादा उम्र के लोग इन दो स्थितियों में से एक के कारण यह दर्द झेलते हैं।

इसलिए अगर आप इनमें से किसी भी स्थिति से पीड़ित हैं तो हमेशा अपने डॉक्टर को बताएं। आपका इलाज इस बात पर निर्भर करेगा कि यह स्थिति कहीं दूसरी बीमारी का नतीजा तो नहीं है।

जूते की टाइप

अक्सर लोग ऐसे जूते पहनते हैं जो सही नहीं होते। कई बार जूते की सोल पैर को सपोर्ट नहीं करती या जूता आपके वजन को ठीक ढंग से वितरित नहीं कर पाता है। लगातार इन जूतों के इस्तेमाल से प्लांटर फेशियाइटिस की सूजन होती है। इसलिए अगर आप ऐसी स्थिति से पीड़ित हैं, तो ऊंची हील वाले जूते से इंकार कीजिये।

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दर्द के लक्षण

  • सुबह ज्यादा बदतर स्थिति
  • क्रोनिक
  • दर्द या जलन
  • धीरे-धीरे बढ़ना

दर्द सुबह में बढ़ जाता है क्योंकि पैर रात भर तना रहता है। दिन में जैसे-जैसे इसकी स्ट्रेचिंग होती है, और टिशू वार्म आप करता है, दर्द कम हो जाता है। कुछ मामलों में दर्द असहनीय हो जाता है और यहां तक ​​कि हड्डियों पर भी असर डालता है, जिससे पैर की उंगलियों को हिलाने में बहुत तकलीफ होती है।

प्लांटर फेशियाइटिस में अक्सर कोई अस्थि-स्कंध जुड़ा होता है, हालांकि यह एक निर्धारक कारण नहीं है। प्लांटर फेशियाइटिस को लम्बे समय तक छोड़कर रखने या ठीक तरीके से इलाज न कराने से व्यक्ति अपने चलने में बदलाव देख सकता है। नतीजतन इससे घुटनों, पीठ या गर्दन में तकलीफ हो सकती है।

प्लांटर फेशियाइटिस का इलाज

  • फिजिकल थेरेपी
  • एनएसएआईडी
  • सही जूते
  • कोर्टिकोस्टेराइड (Corticosteroids)
  • ऑर्थोटिक्स
  • फंक्शनल टेप
  • ब्रेसिज़

इलाज के वक्त व्यायाम से आराम करना प्रमुख चीज है। बाहर काम करने से हालत बिगड़ सकती है। हालांकि, पूरे दिन पैरों की मांसपेशियों को स्ट्रेचिंग करानी चाहिए। यह सच है, क्योंकि इसमें जकड़न होने से रिकवरी में ज्यादा समय लगेगा।

आख़िरी विकल्पों में शॉकवेव थेरेपी और सर्जरी आती हैं, हालांकि ये सिर्फ गंभीर, क्रोनिक प्लांटर फेशियाइटिस के मामले में ही की जाती है। मरीजों में रिकवरी का समय अलग-अलग होता है। अंत में, अगर आपको इन लक्षणों में से कोई दिखाई दे तो अपने लिए सबसे अच्छा इलाज तय करने के लिए अपने डॉक्टर से बात करें।

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