6 ट्रेवलर्स डिजीज के बारे में जानें

21 सितम्बर, 2020
ट्रॉपिकल यानी उष्णकटिबंधीय देशों के होने वाली कई स्थानीय बीमारियाँ अब ट्रेवलर्स डिजीज के रूप में फैल रहे हैं। इसकी वजह यह है कि अब बहुत से लोग ट्रेवल करते हैं।

दूसरे देशों की यात्रा करने पर खासकर ट्रॉपिकल देशों की, आपको बीमारियों का रिस्क ज्यादा रहता है। इसलिए आपको ट्रेवलर्स डिजीज से बचने के लिए वैक्सीनेशन करानी चाहिए और डोक्टर से पूर्व सलाह के आधार पर एहतियात के उपायों को ध्यान में रखना चाहिए।

इन बीमारियों में से ज्यादातर मामूली हैं, जैसे कि डायरिया या श्वसन संक्रमण। इसलिए हम आमतौर पर उन्हें हल्के में लेते हैं। हालांकि जब संक्रमित यात्री अपने देशों में लौटते हैं, तो लोकल ट्रांसमिशन के रिस्क के कारण पब्लिक  हेल्थ के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।

6 ट्रेवलर्स डिजीज

लोगों में अपने देश से बाहर जाकर बीमारियाँ पकड़ना आम बात है। जोखिम सिर्फ यह नहीं है कि वे घर लौटने पर पीड़ित होते हैं, बल्कि यह कि वे बीमारियों को फैला सकते हैं। इसलिए मेडिकल प्रोफेशनल उन्हें “इम्पोर्टेड इन्फेक्शस रोग” कहते हैं।

इंटरनेशनल ट्रेवल अब आम है। इसलिए संक्रामक रोग भी बहुत बढ़ गए हैं। इनमें सबसे आम इंटेसटिनल, श्वसन और स्किन से जुड़े रोग हैं।

आइए कुछ सबसे आम रोगों पर नज़र डालें।

ट्रेवलर्स डायरिया

यह सबसे आम ट्रेवलर्स डिजीज है। वैसे तो यह आमतौर पर मामूली होता है, पर उन लोगों के लिए असुविधाजनक हो सकता है जो छुट्टियों में इससे पीड़ित होते हैं। इसके जिम्मेदार सबसे आम रोगाणु हैं:

  • एंटरोटॉक्सिजेनिक एस्चेरिचिया कोलाई (Enterotoxigenic Escherichia coli –ETEC).)। यह इस रोग का सबसे प्रमुख पैथोजेन है। हालांकि कोक्सीडियन पेरासाईट भी अब बहुत आम हो रहे हैं। इसके अलावा, रोटावायरस (rotavirus) और नोरोवायरस (norovirus) जैसे वायरस भी इसका कारण बन सकते हैं।
  • कैम्पिलोबैक्टर जेजुनी (Campylobacter jejuni) और ई. कोलाई इन खाद्य जनित बीमारियों के मुख्य कारण हैं। कच्चे या अधपके मांस और पोल्ट्री खाने से जोखिम बढ़ जाता है।
  • साल्मोनेला : यह जीवाणु टाइफाइड बुखार, पैराटाइफॉइड बुखार और खाद्य जनित बीमारियों का कारण बनता है।
  • शिगेला (Shigella) एक एनी रोगजनक बैक्टीरिया है जो दूषित भोजन खाने से फैलता है।

मलेरिया

हालाँकि यह एक ऐसी बीमारी है जिसका उन्मूलन वर्षों पहले कर दिया गया था फिर भी यह कई ट्रॉपिकल और  सबट्रॉपिकल देशों को प्रभावित करती है, और ट्रेवलर्स डिजीज  के रूप में जोखिम पैदा करती है। ग्लोबल मलेरिया एक्शन प्लान के अनुसार यह हर साल 35 और 50 करोड़ संक्रमण और 1० लाख लोगों की मृत्यु का कारण बनती है।

इस कारण मलेरिया का विकसित देशों में तेजी से आयात हो रहा है क्योंकि यहाँ के बहुत से लोग ट्रॉपिकल देशों की यात्रा करते हैं। प्लास्मोडियम फैल्सीपेरम पेरासाईट का ट्रांसमिशन स्थानिक नागरिकों के बीच हुआ करता था। हालांकि, आजकल यह बहुत आम है।

मच्छर मलेरिया सहित कई ट्रेवलर्स डिजीज के वेक्टर हैं।

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डेंगू फीवर

डेंगू फीवर का कारण फ्लैविविरिडे फैमिली (Flaviviridae) का डेंगू वायरस है। दरअसल यह मादा एडीज मच्छरों के माध्यम से फैलता है। हालाँकि एक्सपर्ट इसे उष्णकटिबंधीय देशों की एक स्थानिक बीमारी मानते हैं, पर यह वैश्वीकरण और वायु परिवहन के कारण दुनिया भर में फ़ैल गया है।

यह बीमारी हल्के बुखार से लेकर डेंगू हेमोरेजिक फीवर के साथ उभर सकती है।

इसका टीका है। हालांकि वैक्सीन के साथ समस्या यह है कि वायरस के चार सीरोटाइप हैं। इससे इसका इम्युनाइजेशन तैयार करना मुश्किल होता है।

जीका वायरस (Zika virus)

ट्रेवल ने जीका के तेजी से फैलने में योगदान दिया, जिसने एक गंभीर पब्लिक हेल्थ क्राइसिस पैदा किया है।

यह एडीज मच्छर के काटने से फैलता है, जो डेंगू बुखार को फैलाता है। जब एक स्वस्थ मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति को काटता है, तो वायरस मच्छर से उस व्यक्ति में चला जाता है।

यौन संपर्क को वायरस के संक्रमण और उसके फैलने के आम तरीकों के रूप में भी अध्ययन किया गया है। दरअसल वायरस संक्रमित व्यक्ति के सेमिनल फ्लूइड में मौजूद होता है। यह गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत खतरनाक है, क्योंकि उनमें माइक्रोसेफली पीड़ित बच्चे हो सकते हैं।

चूंकि यह यात्रियों की होने वाली बीमारी भी है, संक्रमित व्यक्ति यात्रा करते हुए वायरस को विभिन्न क्षेत्रों में फैला सकता है। ऐसे मामले भी हैं जिनमें संक्रमित मच्छरों ने लगेज के साथ पर्यटक के साथ यात्रा की।

चिकनगुनिया

यह बीमारी संक्रमित व्यक्ति में गंभीर आर्थ्राल्जिया का कारण बनती है। इसके अन्य लक्षण डेंगू बुखार और जीका से मिलते जुलते हैं।

हालाँकि डेंगू बुखार जीका की तरह गर्भावस्था के दौरान मां से बच्चे में जा सकता है, यह यौन संपर्क के माध्यम से अर्जित नहीं किया जा सकता। चिकनगुनिया बहुत तेज बुखार और जोड़ों के दर्द का कारण बनता है। यह इसे जीका फीवर से अलग करता है।

टाइगर मस्किटो (Aedes albopictus) इस ट्रेवलर्स डिजीज को फैलाता है। वास्तव में हर साल कई देशों में इसकी डायग्नोसिस की जाती है, खासकर आप्रवासियों में।

क्रीमियन कांगो रक्तस्रावी बुखार (CCHF)

अब तक, हमने कीट-जनित ट्रेवलर्स डिजीज के उदाहरण देखे हैं। इन सिंड्रोमों का सामान्य नाम वायरल रक्तस्रावी बुखार (वीएचएफ) है। इसके अलावा उनके लक्षण स्पर्शोन्मुख संक्रमण से लेकर घातक मामलों तक होते हैं।

क्रीमियन कांगो रक्तस्रावी बुखार (CCHF) एक VHF है जो टिक के काटने से फैलता है। इस संक्रमण के कारण इबोला की तुलना में ज्यादा तेज बुखार और अधिक रक्तस्राव होता है, जिसके लिए कोई एंटीवायरल ट्रीटमेंट नहीं है।

स्वास्थ्य कर्मियों को इससे खतरा है, क्योंकि वे नोसोकोमियल ट्रांसमिशन के अलावा संक्रमित रोगियों का इलाज करते हैं। हालाँकि यह अफ्रीका में आम है, पर इसका विस्तार ट्रेवलर्स डिजीज के प्रसार से जुड़ा है।


लगेज एक देश से दूसरे देश में रोग को पहुंचा सकता है।

यहां और अधिक जानकारी प्राप्त करें: गले में संक्रमण से राहत के लिए चार नुस्ख़े

 रोकथाम के कुछ उपाय

जैसा कि आपने देखा है, यात्रा पर निकलने से पहले आपको कुछ चिकित्सीय विचारों को ध्यान में रखना चाहिए। आजकल लोगों में ट्रेवलर्स डिजीज को लेकर काफी चिंता है क्योंकि लोग हर दिन अधिक से अधिक यात्रा कर रहे हैं।

बुनियादी उपाय करके हम अपने देश में और हमारे वातावरण में लोगों को इन रोगजनकों के संक्रमण और भविष्य के संचरण को रोक सकते हैं। इन सिफारिशों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • यात्रा से पहले चिकित्सा सलाह लें। यह ज्यादा जोखिम वाले लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जैसे कि पुरानी बीमारी से पीड़ित, बुजुर्ग, बच्चे और गर्भवती महिलाएं।
  • गंतव्य देश के सुरक्षा उपाय निर्देश साथ ले जाएं।
  • यात्रा करने वाले सभी परिवार के सदस्यों के टीकाकरण प्रोग्राम की समीक्षा करें।
  • स्व-उपचार रणनीतियों का पालन करें। इन सबसे ऊपर, अपने आपको कीड़ों से बचाने के उपाय अपनाएं।
  • आपको विशेष रूप से खाद्य सुरक्षा और पेयजल पर ध्यान देना चाहिए।

यहाँ हमने कुछ सबसे आम बीमारियों का उल्लेख किया है जिन्हें आप यात्रा में पीड़ित हो सकते हैं। पर इनकी संख्या इससे कहीं जयादा है। उदाहरण के लिए एवियन फ्लू, इन्फ्लूएंजा ए, सार्स, इबोला और डिप्थीरिया।

कोई फर्क नहीं पड़ता कि बीमारी क्या है, पर इसकी कुंजी ऊपर दिए गए सुझावों का पालन करना है और उचित चिकित्सा प्राप्त करना है।

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