क्रॉनिक विक्टिमाइज़ेशन: हमेशा शिकायत करने वाले लोग

26 सितम्बर, 2018
क्रॉनिक विक्टिमाइज़ेशन की मानसिकता में वास्तविकता का एक बिगड़ा हुआ रूप दिखाई देता है। इससे ग्रस्त व्यक्ति को अपने हर दुःख का दोष मढ़ने के लिए कोई न कोई मिल ही जाता है।

अपने जीवन में हम सभी ने कभी न कभी किसी पीड़ित की भूमिका निभाई है। लेकिन इस पीड़ित मानसिकता के आपके व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाने पर क्या होता है? आप निरंतर शिकायत करते रहते हैं और क्रॉनिक विक्टिमाइज़ेशन की मानसिकता के शिकार हो जाते हैं।

क्रॉनिक विक्टिमाइज़ेशन व निराशावाद

खुद को पीड़ित के रूप में देखने वाला व्यक्ति हमेशा दुख और निराशावाद में डूबा रहता है। उसकी ज़िन्दगी में अँधेरा ही अँधेरा होता है। उसे लगता है, उसके साथ केवल बुरा ही होगा, उसकी बुरी किस्मत कभी भी उसका पीछा नहीं छोड़ेगी।

लेकिन यह बात सच से कोसों दूर होती है – क्रॉनिक विक्टिमाइज़ेशन वाली मानसिकता वास्तविकता का एक विकृत रूप जो होती है।

क्रॉनिक विक्टिमाइज़ेशन से ग्रस्त इंसान कैसा होता है

हर बात व हर इंसान के बारे में हमेशा शिकायत करते रहने वाले व्यक्ति का जीवन को देखने का नज़रिया विकृत होता है। उसके इस नज़रिये के पीछे उसके निराशावादी रवैये और उसकी इस सोच का हाथ होता है कि उसके साथ सबकुछ बुरा ही होगा।

शायद अब आप भी इस सोच में पड़ गए होंगे कि कहीं आपकी मानसिकता भी कहीं क्रॉनिक विक्टिम की तो नहीं। क्रॉनिक विक्टिमाइज़ेशन वाली मानसिकता को पनपने में कुछ वक़्त लगता है। वह कोई सोच नहीं, बल्कि ज़िन्दगी के प्रति एक रवैया है।

बुरे या दुख भरे समय से गुज़रने मात्र से ही आप कोई क्रॉनिक विक्टिम नहीं हो जाते

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निराशावादी लोगों और क्रॉनिक विक्टिम लोगों की ख़ुराक नकारात्मक भावनाएं व ख्याल होते हैं। इससे भी बुरी बात यह है कि वे अपनी बुरी किस्मत का ठीकरा दूसरों के सिर तो फोड़ते ही हैं, उपेक्षा, आक्रामकता, असहिष्णुता और यहाँ तक कि हिंसात्मक रवैया भी अपना लेते हैं।

क्रॉनिक विक्टिमाइज़ेशन मनोदशा की विशेषताएं

अगर आप अभी भी नहीं समझ पा रहे कि आप कोई क्रॉनिक विक्टिम हैं या नहीं, या फिर आपके आसपास कोई इस परेशानी से पीड़ित है या नहीं, तो आइए इस तरह के व्यक्तित्व की सबसे आम विशेषताओं पर एक नज़र डालते हैं।

वास्तविकता का एक विकृत रूप

क्रॉनिक विक्टिमाइज़ेशन से ग्रस्त लोगों को लगता है कि उनके साथ होने वाली हर दुर्घटना के लिए कोई और ज़िम्मेदार है। अपनी इसी सोच की वजह से वे कभी भी अपनी हरकतों की ज़िम्मेदारी न लेकर सारा का सारा दोष दूसरों के सिर मढ़ देते हैं।

सच्चाई के प्रति एक विकृत दृष्टिकोण वाली यह समस्या उन्हें और भी मायूस कर देती है। उन्हें लगने लगता है कि अपनी वर्तमान हालत को बदलने की शक्ति या क्षमता उनमें नहीं है।

क्रॉनिक विक्टिमाइज़ेशन और उससे उत्पन्न होने वाली समस्याएं

उन्हें शिकायत करने की आदत-सी हो जाती है

किसी क्रॉनिक विक्टिम के लिए शिकायतें और दुखड़े ईंधन जैसे होते हैं। प्रत्येक शिकायत के साथ वे  दूसरों का ध्यान आकर्षित कर उनके ध्यान का केंद्र बन जाते हैं। इससे वे खुद को महत्त्वपूर्ण महसूस करते हैं।

सबसे बुरी बात तो यह है कि इस अनचाही स्थिति से निकलने के लिए न ही वे कभी कोई मदद मांगते हैं और न ही खुद अपनी मदद करते हैं। उन्हें तो बस शिकायत करना ही अच्छा लगता है।

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लक्ष्य: दोष मढ़ना

सभी पीड़ित किसी न किसी बलि के बकरे की तलाश में होते हैं, जिसके सिर पर वे उन परेशानियों का ठीकरा फोड़ सकें जिनके लिए वे स्वयं कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेना चाहते। उन्हें लगता है, हर कोई स्वार्थी होता है व अपने आसपास के लोगों का इस्तेमाल करता है।

अपनी इस मनगढ़ंत बात की सच्चाई को समझना तो दूर, वे उसका लुत्फ़ उठाने लगते हैं।

आत्मालोचना की कमी

अब तक यह साफ़ हो चुका है कि क्रॉनिक विक्टिमाइज़ेशन से ग्रस्त व्यक्ति का अपने प्रति भी कोई अच्छा दृष्टिकोण नहीं हो सकता है। उसे अपने अंदर कोई नुक्स, या फिर कहीं किसी सुधार की कोई आवश्यकता नहीं दिखाई देती।

बुरी बातें, नकारात्मक ऊर्जा आदि दूसरों की देन होती हैं – इनपर उसका कोई बस नहीं होता। वह तो बस किन्हीं बेकाबू शक्तियों द्वारा सताया गया कोई बेचारा होता है।

चालबाज़ी और इमोशनल ब्लैकमेल

परिस्थितियों और लोगों को अपने फायदे के अनुसार ढाल लेने में क्रॉनिक विक्टिम को महारत हासिल होती है। उन्हें पता होता है कि स्वयं को पीड़ित के रूप में प्रदर्शित कर वे बात को अपने पक्ष में घुमा सकते हैं।

इसलिए इस बात से सावधान रहना ज़रूरी है कि किसी परिस्थिति में खुद को और भी बड़ा पीड़ित दिखाने के लिए कोई निराशावादी व्यक्ति इमोशनल ब्लैकमेल करता हैअपना महत्त्व स्थापित करने के लिए वह न सिर्फ़ अपने दुःख का इस्तेमाल कर दूसरों को दोषी ठहराता है बल्कि अपने इस बुरे रवैये का अंदर ही अंदर आनंद भी लेता है।

क्रॉनिक विक्टिमाइज़ेशन मानसिकता के हाथों की कठपुतली न बनें

ऐसे लोगों के नकारात्मक विचारों से ग्रस्त होने से बचने के लिए आपको उनसे निपटकर उनके प्रभाव को बेअसर करना आना चाहिए। आप मानें या न मानें, कोई क्रॉनिक विक्टिम अपनी ज़हरीली सोच से आपको दूषित कर देने का माद्दा रखता है।

अगर किसी ऐसे इंसान से पीछा छुड़ाने का मौका आपको मिले तो उसे गंवाएं नहीं!

खुद को किसी शहीद की तरह दिखाने की उनकी कोशिश से उत्पन्न होने वाली विकृत वास्तविकता के वजह से आपको उनकी शिकायत और आलोचना से अपनी ख़ुशी की धज्जियाँ उड़ाने की कोई ज़रूरत नहीं है।