ट्राईजेमिनल न्युरॉल्जिया, दुनिया के सबसे खराब दर्द के बारे में 5 बातें

26 मई, 2018
ट्राईजेमिनल न्युरॉल्जिया में चेहरे की नसों में इलेक्ट्रिक शॉक के समान तीव्र पीड़ा होती है। यह ज्यादातर चेहरे के सिर्फ एक तरफ होता है। यह व्यक्ति को दुर्बल बना सकता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि इसका इलाज है।
 

कई तरह के दर्द होते हैं। हर एक के अपने खास लक्षण और तीव्रता होती है। लेकिन एक दर्द ऐसा होता है जिसे “दुनिया का सबसे खराब दर्द” मानते हैं: वह है ट्राईजेमिनल न्युरॉल्जिया।

आइये इस बीमारी के बारे में जानें।

सिर में नसों के 12 जोड़े होते हैं। जब इनमें से कोई एक नस का जोड़ा ठीक से काम नहीं करता है तो मरीज अक्षम हो जाता है। इसकी वजह से ट्राईजेमिनल न्युरॉल्जिया होता है।

यह बीमारी सदियों से चली आ रही है। आपको यह जानकर ताज्जुब होगा कि यह इतनी पुरानी है कि सबसे पहले कप्पाडोसिया के आरेटेयस ने दूसरी सदी में इसका विवरण दिया था।

एक दर्दनाक खिंचाव इसका लक्षण है। एक इलेक्ट्रिक शॉक महसूस होता है जो पूरे चेहरे में गाल की हड्डी से लेकर ठुड्डी तक फैलती हैं।

शरीर पर असर करने वाली सभी बातों के बारे में जानकारी होने से फायदा होता है। इसलिए हम आपको ट्राईजेमिनल न्युरॉल्जिया के 5 अहम लक्षणों के बारे में बताना चाहते हैं।

1. ट्राईजेमिनल न्युरॉल्जिया क्या है?

ट्राईजेमिनल न्युरॉल्जिया और सिरदर्द

ट्राईजेमिनल न्युरॉल्जिया एक तरह का चिरकालिक दर्द है जो एक खास नस की वजह से होता है। इस बीमारी का नाम इस नस से लिया गया है। पांचवी क्रेनियल नर्व इस परेशानी के लिए जिम्मेदार है। यह सिर की सबसे लम्बी नस है। यह बीमारी एक गंभीर खिंचाव के रूप में होती है। शुरू में यह खिंचाव दो सेकंड और एक मिनट के बीच हो सकती है। इसके दौरान मरीज स्तब्ध हो जाता है। इतनी तीव्र पीड़ा होती है कि वह न चबा सकता है और न बोल सकता है। जब बीमारी की शुरुआत होती है तो ये खिंचाव बहुत कम समय के लिए होते हैं। लेकिन बाद में जब बीमारी बढ़ जाती है तो खिंचाव का समय भी बढ़ जाता है।

जिस नर्व की हम बात कर रहे हैं उसकी तीन शाखायें होती हैं। वे आँखों, खोपड़ी, माथे और सिर के सामने के हिस्से में मौजूद होती हैं।

इसलिए जिन लोगों को ट्राईजेमिनल न्युरॉल्जिया होता है उनके जबड़े, गाल, होंठ, दांत और मसूड़ों में भी दर्द होता है।

 

एक रक्त वाहिका इसके लिए गुनहगार है!

सिर्फ एक रक्त वाहिका इस अवस्था और इसके साथ होने वाली पीड़ा की जड़ है। जिस जगह पर ट्राईजेमिनल नर्व ब्रेन स्टेम को छोड़ती है वहां पर यह वाहिका उसे दबाती है।

यह तब होता है जब इस नस को सुरक्षित रखने वाली परत घिस जाती है। यह समय के साथ हो सकता है या एक बीमारी की वजह से जो नस के माइलिन को क्षति पहुंचाती है।

ट्राईजेमिनल नर्व धीरे-धीरे क्षय होती जाती है जिसकी वजह से वह दिमाग को असामान्य संकेत भेजती है।

इसका नतीजा? सबसे तीव्र सिरदर्द जो कोई मनुष्य अनुभव कर सकता है।

2. लक्षण जिनके बारे में जागरूक रहना चाहिए

यह एकदम से होता है। यह बहुत कम समय के लिए होता है लेकिन इतना तीव्र होता है कि “इलेक्ट्रिक शॉक” जैसा लगता है। सबसे पहले तो पीड़ित व्यक्ति को पता भी नहीं चलता है कि क्या हो रहा है। वह इस बात पर ज्यादा गौर भी नहीं करता है क्योंकि दर्द इतनी जल्दी गायब हो जाता है।

धीरे-धीरे ये अटैक अक्सर होने लगते हैं। एक ऐसा समय आता है जब केवल चेहरे को छूने, चबाने, बोलने या दांत ब्रश करने से भी  यह अटैक शुरू हो जाता है।

यह दर्दनाक अटैक कुछ सेकंड से लेकर एक मिनट तक के लिए होता है।

कुछ लोगों को ये खिंचाव कई दिनों तक होते हैं। फिर अगले महीने गायब हो जाती हैं। बाकी लोग कई महीनों तक बार-बार खिंचाव से पीड़ित होते हैं।

दर्द गाल, जबड़ा, दांत, मसूड़े और होंठ में फैलता है। कभी-कभी ऊपर बताये गए कारणों की वजह से आँखों और माथे में भी दर्द होता है।

लेकिन ज्यादातर यह दर्द चेहरे के सिर्फ एक ओर होता है। सामान्य रूप से समय के साथ अटैक्स की संख्या और तीव्रता बढ़ती है।

3. ट्राईजेमिनल न्युरॉल्जिया किसको होता है?

ट्राईजेमिनल न्युरॉल्जिया के कारण दर्द

यह बीमारी ज्यादातर 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को होती है। लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि कम उम्र वाले लोग भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।

 

यह समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा व्यापक है और अक्सर वंशागत होती है।

4. इसे जांचने के लिए कौनसे टेस्ट करते हैं?

इस बीमारी का सही निदान करना जरूरी होता है ताकि डॉक्टर इसे दूसरी बीमारियों, जैसे कि माइग्रेन से अलग पहचान सकें। इसका निदान 3 अहम कारकों के आधार पर किया जाता है:

  • किस प्रकार का दर्द है – अगर बहुत कम समय के लिए दर्द होता है तो यह बात पक्की है कि यह ट्राईजेमिनल न्युरॉल्जिया है।
  • कहाँ पर दर्द है – चेहरे के कौन से हिस्सों में दर्द होता है इससे पता चल सकता है कि यह ट्राईजेमिनल न्युरॉल्जिया है या नहीं। यह इस बीमारी को पहचानने की बुनियादी पहली स्टेप है।
  • किस बात की वजह से दर्द शुरू होता है – अक्सर इस प्रकार का दर्द गालों को हल्का सा छेड़ने या फिर चबाने और बोलने से शुरू होता है।

एक बार जब आप अपने डॉक्टर को इन सब प्रश्नों का उत्तर दे देंगे तो एक स्पेशलिस्ट ये टेस्ट्स करेगा:

  • न्यूरोलॉजिकल टेस्ट
  • एमआरआइ स्कैन

5. ट्राईजेमिनल न्युरॉल्जिया का इलाज कैसे करते हैं?

ट्राईजेमिनल न्युरॉल्जिया का उपचार

औषधीय उपचार

चाहें कुछ भी हो आपका डॉक्टर आपको सबसे प्रभावशाली इलाज के बारे में बता सकता है। इस मामले में साधारण सूजनरोधी या दर्द कम करने वाली दवाइयां फायदा नहीं करेंगी।

  • ऐसे में निरोधी दवाइयों का उपयोग किया जाता है जो इस समस्या को उत्पन्न करने वाले तंत्रिका तंत्र के हिस्से को ब्लॉक कर देती हैं।
  • अगर लगातार दर्द होता है तो ट्राईसाइक्लिक एंटी डिप्रेसेंट्स भी काम आ सकती हैं।

सर्जिकल तरीका

अगर ऊपर बताई गयी दवाइयों का असर नहीं होता है तो डॉक्टर सर्जिकल तरीका अपना सकते हैं।

इसके उपचार के लिए कई तरह की साधारण प्रक्रियायें या जटिल ऑपरेशन किये जा सकते हैं। कुछ तकनीकें जो इस्तेमाल की जाती हैं:

  • राइज़ोटोमी – इस प्रक्रिया में दर्द के असामान्य संकेतों को ब्लॉक करने के लिए खास नर्व फाइबर्स को लक्षित करके नष्ट किया जाता है।
 
  • बलून कम्प्रेशन – यह एक सरल तकनीक है जिसे बहुत जल्दी किया जा सकता है। इसमें सर्जन्स एक प्रवेशिका अंदर डालते हैं और उसमें से एक बलून डालते हैं। यह बलून ट्राईजेमिनल नर्व को दबाता है ताकि वह हद से ज्यादा उत्तेजित न हो और दर्द न हो।
  • ग्लिसरॉल इंजेक्शन – ये एक और तकनीक है जिसमें दर्दनाक “इलेक्ट्रिक शॉक्स” से बचने के लिए ट्राईजेमिनल नर्व के फाइबर्स को अलग कर दिया जाता है।

आखिर में अगर इनमें से कोई भी तरकीब काम नहीं करती है तो माइक्रोवैस्क्युलर डिकम्प्रेशन किया जाता है। यह बहुत ही नाजुक हस्तक्षेप है। लेकिन यह सबसे ज्यादा प्रभावशाली विकल्प है। इसकी खूबी यह है कि इसे करने के बाद फिर कभी ट्राईजेमिनल न्युरॉल्जिया नहीं होता है। इसलिए जबकि यह “दुनिया का सबसे खराब दर्द” है इसे हमेशा के लिए झेलना जरूरी नहीं है। इसका इलाज मौजूद है।

चाहें कुछ भी हो जाये आपको अपना धैर्य नहीं खोना चाहिए। अच्छे डॉक्टर से सलाह लें और अलग-अलग विकल्पों को आजमायें जब तक आपको अपने जीवन की गुणवत्ता बनाये रखने का सबसे अच्छा उपाय न मिल जाये।

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