जीवन के तीन सच्चे सिद्धांत

यह बहुत ज़रूरी है कि आपके जीवन के सिद्धांत नीति-नैतिकता और अपने आस-पास के लोगों के प्रति सम्मान पर टिके हों। दूसरों के लिए कुछ भी ऐसा न चाहें जो आप अपने लिए नहीं चाहेंगे।
जीवन के तीन सच्चे सिद्धांत

आखिरी अपडेट: 26 दिसम्बर, 2018

जीवन के सच्चे सिद्धांत कोई कानूनी कोड, पारिवारिक नियम या आपको खुश रहने के तरीकों पर यकीन दिलाने की कोशिश करने वाले आज के गुरु निर्धारित नहीं करते हैं।

जब थोड़ा-थोड़ा करके आप सीखते हैं कि सीमाएं कहां हैं, अपनी सम्मान और सह-अस्तित्व की भावना को विकसित करते हैं और वह जादू जो दूसरों के साथ मिल-जुलकर आपको जीवन का आनंद लेने की सहूलियत देता है, इन्हीं के बीच जीवन के नियम आपको अपना ज्ञान कराते हैं।

ऐसी कई चीजें हैं जिन्हें किताबों से नहीं सीखा जा सकता है: आप गलतियां करते हुए, ऑब्जरवेशन और अनुमान से, दूसरों के साथ परस्पर व्यवहार के बीच उनकी खोज करते हैं। आपको अंत में खुशी मिलती है, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि दर्द भी आप झेलते हैं।

मारियो बेनेडेटी ने अपनी एक कविता में फरमाया है, आप किसी भी चीज के बारे में शिकायत कर सकते हैं। तकलीफ़ इसलिए होती है क्योंकि हर गुलाब के साथ कांटा जुड़ा होता है और तूफ़ान किसी भी दिन आ सकता है।

यदि आपका फोकस “पीड़ित होने की चाह” पर है, तो इस बात की गारंटी है कि आप पीड़ित होंगे। लेकिन कई बार विनम्रता से भरा होना पर्याप्त होता है और इस तथ्य के लिए आभारी होना कि अभी तक आप जिन्दा हैं, भले ही गुलाब के साथ कांटे ही क्यों न हों। आखिरकार यही तो उस चीज का हिस्सा है जो ज़िन्दगी को खूबसूरत बनाती है।

इसलिए आपको यह समझने की जरूरत है कि आपकी रोजमर्रा की ज़िन्दगी का संतुलन आपके दृष्टिकोण और जीवन के उन नियमों में है जिनको आप कुछ ज्यादा खुश होने के लिए खुद पर लागू करते हैं।

आज जीवन के सच्चे सिद्धांत से जुड़े इन पहलुओं पर सोचने के लिए हम आपको प्रोत्साहित करते हैं, इस आशा के साथ कि यह आपकी मदद करेगा।

1. जीवन के सच्चे सिद्धांत: बिना मुखौटे के जीना

जीवन के सच्चे सिद्धांत: बिना मुखौटे के जीना

इन नियमों में पहला है, झूठे दिखावे से दूर रहने की कला सीखना। इसके बारे में सोचें तो आप देखेंगे, आपकी दुनिया पहले से ही झूठ से भरी हुई है। उनमें से कई तो उन छवियों के कारण हैं, जिनका इस्तेमाल मार्केटिंग इंडस्ट्री आपकी रोज की गतिविधियों पर असर डालने के लिए करती है।

  • विज्ञापन, फैशन और टेलीविजन की दुनिया उन झूठे मुखौटों पर टिकी है, बहुत से लोग जिन्हें ओढ़ने या जिनकी नकल करने के लिए करते हैं।
  • ऐसी कौन सी चीज है जो आपको अपने आस-पास के माहौल में अक्सर नज़र नहीं आती है? यह है प्रामाणिकता।

प्रामाणिकता वह विनम्र रवैया है जिसमें कोई मांग या इरादा नहीं होता है। आप जैसे हैं, बस वैसे ही खुद को व्यक्त करते हैं – यह ऐसी चीज नहीं है जिसमें ज्यादा लोग निवेश करते हों।

अपनी असलियत को छिपाने की ज़रूरत मनोवैज्ञानिक प्रक्रियाओं की पूरी एक श्रृंखला से संचालित होती है जिसे पहचान पाना ज़रूरी है:

  • आत्मविश्वास की कमी और इस बात का डर कि यदि आप लोगों को अपनी असलियत दिखाते हैं, तो आपको स्वीकार नहीं किया जाएगा।
  • मान्यता प्राप्त करने की ज़रूरत। दिखावे और झूठ आपको यकीन दिलाते हैं कि सोसाइटी आपको इसी रूप में स्वीकार करेगी।
  • झूठ एक ऐसी पहचान को छिपाना चाहता है, जिस पर ध्यान दिया जाना चाहिए (अगर आप मुझे एक दयालु व्यक्ति के रूप में देखेंगे तो मुझे आपका भरोसा मिल जाएगा और इसी के साथ आपसे मुझे कुछ हासिल होगा)।

2. जीवन के सच्चे सिद्धांत : निर्भरता के बिना प्यार

जीवन के सच्चे सिद्धांत : निर्भरता के बिना प्यार

एक और आयाम जिसका ज्यादातर लोग जीवन भर अहसास करते हैं, वह यह है कि निर्भरता पर आधारित प्यार कोई मायने नहीं रखता।

बहुत कम ही ऐसे आयाम हैं जिनमें इतनी अभिव्यक्ति, आज़ादी, प्रामाणिकता और चरित्र की ज़रूरत होती है, जितनी कि प्यार में।

  • यदि आपके रिश्ते की विशिष्टता अपने पार्टनर पर आपकी निर्भरता है, इस हद तक कि खुद को गलाकर आप उसकी छाया मात्र रह गए हैं, तो यह धीरे-धीरे आपको कमजोर करके फ्रस्ट्रेशन में ले जाएगी।
  • प्रेम में निर्भरता दुःख पैदा करती है और अंत में डिप्रेशन आ जाता है।
  • जीवन के कुछ ही नियम इतनी समझदारी वाले हैं जितने कि वे जो आपको पहले खुद से प्यार करने की सलाह देते हैं।
  • लेकिन आज की सोसाइटी और अपने परिवार में भी हमें लगातार याद दिलाया जाता है कि प्यार में सबकुछ करने लायक है। यदि आप सचमुच किसी से प्यार करते हैं तो आख़िरी साँस तक आप इसमें अपना सबकुछ लगा देंगे।
  • यह सच है, प्रेम कई प्रकार का होता है। लेकिन जो आप कभी नहीं कर सकते, वह है, अपने सच्चे अस्तित्व को छोड़ देना। भले ही वह आपका बच्चा हो या पार्टनर।

सबसे पहले, ऐसा इसलिए है क्योंकि खुद को “समर्पित” करने का मतलब जिन्हें हम प्यार करते हैं उन्हें अपना सर्वश्रेष्ठ दे देना नहीं है। कम आत्मविश्वास वाले व्यक्ति में कुछ हद तक जीवन शक्ति और मानसिक व भावनात्मक एनर्जी की कमी होती है।

प्रेम के निर्माता बनिए, परवश या दब्बू नहीं। एक स्वस्थ रिलेशनशिप के आर्किटेक्ट बनें, कोई आश्रित नहीं।

3. जीवन के सच्चे सिद्धांत: बिना आक्रामक हुए बोलें

जीवन के सच्चे सिद्धांत: बिना आक्रामक हुए बोलें

एरिक बर्ने “लेनदेन संबंधी विश्लेषण” के पिता थे।

यह मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण हमें सिखाता है कि जो लोग हमें शिक्षा देते और रोज हमारे साथ इंटरैक्ट करते हैं हम उनके साथ अपने भावनात्मक और सामाजिक आदान-प्रदान के आधार पर भी अपनी पहचान और आत्मविश्वास का निर्माण करते हैं।

  • जब आप अपने शब्दों में छिपे हुए अपमान, व्यंग्य या घृणा घोल देते हैं, तो वे एरिक बर्ने के शब्दों में नेगेटिव इमोशन वाले ‘स्पर्श’ बन जाते हैं।
  • भाषा के जरिये किया गया यह ‘स्पर्श’ किसी आघात या शारीरिक आक्रमण से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है। यह निजता का उल्लंघन है जिसे लोग कभी-कभी अनजाने में भी करते हैं।
  • ऐसे लोग हैं जो बात करने के बजाय चिल्लाते हैं। कई लोग हैं जो घृणा करने के आदी हैं। वे खिल्ली उड़ाते हैं और सोचते हैं कि उनके शब्द मजाकिया हैं, लेकिन वे इससे सिर्फ नुकसान कर डालते हैं।

अपने बोलने के ढंग और स्वर के बारे में सावधान रहना और समझदारी से शब्दों को चुनना अहम होता है ताकि आपका भावनात्मक स्पर्श हमेशा पॉजिटिव हो।

इस तरह आप अपने सह-अस्तित्व और दूसरों के प्रति सम्मान जनक रुख को बढ़ावा देते हैं।