अपने गद्दों और तकियों को कीटाणुमुक्त और स्वच्छ रखने के तरीके सीखें

मई 22, 2018
हम सभी की प्राथमिकता होती है कि हमारा घर कीटाणु रहित और स्वच्छ रहे। हालांकि यह हमेशा इतना आसान नहीं होता। इसलिए आइये इस लेख में अपने गद्दों और तकियों को साफ़ और स्वच्छ रखने के तरीके सीखें।

हम सभी की प्राथमिकता होती है, हमारा घर कीटाणुओं से मुक्त और स्वच्छ रहे। हालांकि यह हमेशा इतना आसान नहीं होता। वजह यह है कि घर की सफ़ाई करते समय कुछ ऐसी जगहें होती हैं, जिन्हें हम अनदेखा कर देते हैं। ऐसी जगहें भी होती हैं, जिन्हें साफ़ करने का हमें ख़याल ही नहीं आता। यह आम तौर पर आपके गद्दों और तकियों की स्वच्छता के मामले में लागू होता है।

समस्या यह है कि हम उस जगह की बात कर रहे हैं जहाँ पर हम आराम करते हैं। इसकी स्वच्छता का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।हालांकि चादर और कवर सेगद्दों और तकियों की सुरक्षा तो होती है, फिर भी यह जरूरी है कि आप इनको साफ़ रखने के बेहतरीन तरीके सीखें।

गद्दों और तकियों की सफाई को अनदेखा करेंगे तो अस्थमा या एलर्जी जैसे सांस की नली के रोग ज्यादा बिगड़ सकते हैं। इसके अलावा खुद इनका अपना रंग-रूप भी खराब दिखेगा।
इसके साथ ही घर में अगर धूल की मात्रा बढ़ जाए, तो यह आपकी नींद की गुणवक्ता पर भी गहरा असर डालती है। इसका कारण यह है कि ये तमाम समस्याएं सूक्ष्म कीटाणुओं के धूल में मौजूद होने से होती हैं। ये सांस लेने में रुकावट उत्पन्न कर सकते हैं।

इसके लिए कई वैकल्पिक रसायन मौजूद हैं। फिर भी स्वास्थ्य की दृष्टि से अपने गद्दों और तकियों को प्राकृतिक तरीकों से ही साफ़ करना ज्यादा उपयुक्त रहता है।

जो तरीके हमारे शरीर पर कम दुष्प्रभाव डालते हैं, वे ही हमारे लिए स्वास्थ्यवर्धक होते हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि इन तरीकों को किस प्रकार आजमायें!

गद्दों को किस प्रकार साफ़ और स्वच्छ रखें
गद्दों और तकियों की सफाई

सबसे पहले तो हम सलाह देंगे कि जागने के तुरंत बाद ही अपना बिस्तर ना समेटें

आप सोच रहे होंगे क्यों? क्योंकि जागने के तुरंत बाद जब हम बिस्तर समेटने का फैसला करते हैं तो हम गद्दों में समाये हुए धूल-कणों को भी चादरों के साथ समेट लेते हैं।

इसलिए, सबसे बेहतर यह है कि गद्दों को खुली हवा में सांस लेने दें और उन्हें कुछ देर के लिए सूरज की रोशनी में नहाने भी दें। सूरज की रोशनी सूक्ष्म कीटाणुओं की सबसे बड़ी दुश्मन होती है। इस तरह से जब तक आप बिस्तर समेटने के लिए वापस आएंगे, उनमें से कुछ कीटाणु नष्ट हो चुके होंगे।

यदि आप अधिक असरदार समाधान की तलाश में हैं तो बस गद्दों को एक दिन के लिए सूरज की रोशनी में बाहर छोड़ दें।

हो सकता है, इन्हें कीटाणु-मुक्त रखने के लिए हमें ज्यादा असरदार चीज़ों की ज़रूरत पड़े। ऐसे में हम बेकिंग सोडा और दूसरे कीटाणुनाशक तेलों के उपयोग का सुझाव देंगे।

सामग्री
• 2 चम्मच बेकिंग सोडा (20 ग्राम)
• 2 बूँदें:
– अजवाइन का तेल
– टी-ट्री तेल
– लैवेंडर का तेल

कैसे धुलाई करें
गद्दों की सफाई

• सबसे पहले बेकिंग सोडा को सभी तेलों के साथ मिलाएं।
• फिर एक स्प्रेयर की सहायता से पूरे मिश्रण को गद्दों की सतह पर छिड़कें। इसे 2 घंटे तक अपना काम करने दें।
• दो घंटों के बाद गद्दों पर वैक्यूम क्लीनर चलायें ताकि उनसे मिश्रण के अतिरिक्त कण निकल जाएँ।

इस प्रक्रिया में धुलाई के बाद आपके गद्दे एकदम नए जैसे लगने लगेंगे। आप नींद के दौरान आसानी से सांस ले सकेंगे। यह आपकी इस शिकायत को ख़त्म कर देगा कि, “नींद पूरी करने के बाद भी सुबह उठने पर मुझे थकान महसूस होती है।”

यदि यही आपकी समस्या का कारण था तो अब आपको निश्चित ही बेहतर नींद आने वाली है।

आसानी से तकियों को साफ़ करें

अब हम आपको आसानी से अपने तकियों को साफ़ करने के कई तरीके बताएँगे। इस स्थिति में हमारे पास वाशिंग मशीन होने की वजह से काम आसान हो जायेगा।
इसके साथ ही हम आपको पर्यावरण की दृष्टि से स्वस्थ समाधानों के बारे में सिखायेंगे।

बेकिंग सोडा और विनेगर
बेकिंग सोडा और विनेगर

आप एक खुशबूदार डिटर्जेंट का भी उपयोग कर सकते हैं। लेकिन हम नीचे दी गयी विधि का ही सुझाव देंगे। इससे आप अपने घर की हवा को दूषित करने वाले कृत्रिम रसायनों के प्रभाव से बचा पाएंगे।

रात के समय में पर्यावरण में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्राओं में काफ़ी अंतर आ जाता है। इस वजह से यह जरूरी है कि हम हवादार कमरों में रहें और हवा की गुणवत्ता का पूरा ख़याल रखें।

सामग्री
• आधा कप बेकिंग सोडा (50 ग्राम)
• एक चम्मच सफ़ेद विनेगर (10 मिली लीटर)

कैसे धुलाई करें

• आपको केवल तकियों को इस मिश्रण के साथ वाशिंग मशीन में डालना है। इस प्रकार आप इसे आसानी से साफ़ कर सकते हैं।
• जितना संभव हो सके तकियों को बार-बार निचोड़ें।
तकियों को धूप में सुखाएं। इससे उनमें ज़रा भी नमी और सूक्ष्म कीटाणु नहीं बच पायेंगे।

इन आसान उपायों से आप अपने गद्दों और तकियों को आसानी से साफ़ और स्वच्छ रख सकते हैं। इसमें ना तो आपकी अधिक मेहनत लगेगी, और ना ही ज्यादा पैसा खर्च होगा। इन सबके साथ ही ये प्रक्रियाएं वातावरण को भी प्रभावित नहीं करती।

हमेशा याद रखें कि हमारी पृथ्वी का अस्तित्व हमें हंसने, प्रियजनों को गले लगाने, नृत्य में झूमने और जिंदा रहने का अवसर देता है। इसलिए यह हमसे बहुत सम्मान पूर्ण व्यवहार की माँग करता है।

हम आपको अपनी व्यक्तिगत देखभाल और अपने घर की देखभाल के लिए पर्यावरण के अनुकूल दूसरे मुमकिन प्राकृतिक उपायों की ख़ोज के लिए आमंत्रित करते हैं।

  • Rivas, C., & Mota, M. (2000). Bacterias anaerobias. In TEMAS DE BACTERIOLOGÍA Y VIROLOGÍA MÉDICA.