बातें जो एक डिटैच्ड रेटिना के बारे में आपको जाननी चाहिए

जून 27, 2019
भले ही बढ़ती उम्र डिटैच्ड रेटिना का कारण बन सकती है, लेकिन अपनी आँखों की देखभाल और नियमित जाँच से आप ऐसा होने से रोक सकते हैं। आज के इस लेख में इस विषय के बारे में और अधिक जानें।

डिटैच्ड रेटिना एक गंभीर स्थिति है जिसका जल्द से जल्द इलाज किया जाना चाहिए ताकि आप अपनी आँखों की दृष्टि से जुड़ी बेबदल समस्याओं से बच सकें।

यह समस्या तब खड़ी होता है जब रेटिना की बाहरी परत रेटिना के पिछले हिस्से से अलग हो जाती है।

अगर यह स्थिति होती है, तो तुरंत ही नेत्र रोग विशेषज्ञ से जांच करवाना जरूरी है।

डॉक्टर इस परेशानी को डायग्नोज़ कर आपको संभव इलाज दे सकते हैं और इस समस्या को ठीक कर सकते हैं।

डिटैच्ड रेटिना के कारण

अब जब हम यह जान चुके हैं कि यह समस्या किन कारणों से उत्पन्न होती है, तो चलिए इसको और गहराई से समझने की कोशिश करें।

इस समस्या के होने की मुख्य वजह की ओर ख़ास ध्यान दें और समझें कि आप कैसे ख़ुद को इस परिस्थिति में पड़ने से बचा सकते हैं।

1. बीमारी और परिवार का मेडिकल इतिहास

कई आंतरिक कारक हैं जो इस स्थिति की वजह बन सकते हैं। इनमें से सबसे आम एक व्यक्ति के परिवार का मेडिकल  इतिहास होता है।

यदि आपको या आपके परिवार में किसी सदस्य को यहाँ नीचे दी गई बीमारियों में से कोई भी परेशानी है, तो आपको एक नेत्र विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए:

  •  मधुमेह/डायबिटीज़
  •  मायोपिया/ निकट दृष्टि दोष
  • आर्टीरीओस्क्लरोसिस/ धमनी काठिन्य

ज़रूरी नहीं कि इन सभी बीमारियों का सीधा सम्बन्ध एक उखड़े रेटिना से हो, लेकिन ये अक्सर आपस में सम्बंधित होती हैं।

2. ट्रॉमा

हम सब इस बात को जानते हैं कि किसी भी तरह की आँख की चोट लगना कोई अच्छी बात नहीं है, लेकिन हम हमेशा इस बात को ले कर जागरूक नहीं होते हैं कि भविष्य में इन चोटों का हम पर क्या असर पड़ सकता है।

एक डिटैच्ड रेटिना कई ऐसे पुख्ता किस्से देखने को मिलें हैं जहाँ यह परिस्थिति आँखों को किसी तरह का झटका लगने से या लापरवाही के कारण पैदा हुई है।

किसी भी तरह का आंतरिक रक्तस्राव (internal hemorrhage) आंख के पीछे पर्याप्त दबाव बना कर रिसाव/ लीकेज के लिए ज़िम्मेदार हो सकता है जिससे रेटिना उखड़ सकता है।

यही परिस्थिति तब भी पैदा हो सकती है, जब आँख के उस हिस्से में ट्यूमर होता है, हालाँकि ऐसा एक दुर्लभ परिस्थिति में ही होता है।

डिटैच्ड रेटिना को कैसे पहचानें

इस स्थिति का पता लगाने का सबसे प्रभावी तरीका एक नेत्र रोग विशेषज्ञ से अपनी आंखों की नियमित जांच करवाना है।

  • इससे जुड़ी विशेष जांचें आमतौर पर हर 1 या 2 साल में उन लोगों के लिए की जाती है, जिन्हें आंखों की कोई समस्या नहीं है।
  • जिन लोगों को इस तरह की कोई भी परेशानी है, उन्हें डॉक्टर यह बताते हैं कि उन्हें कितनी जल्दी दोबारा आँखों की जांच करानी होगी।

फिर भी, उन संकेतों को पहचानना सीखें जिनसे आपको यह समझ आ सके कि आपको तुरंत ही अपनी आंखों की जांच करवानी चाहिए।

हो सकता है कि आपको स्पष्ट तौर पर एक डिटैच्ड रेटिना के सभी लक्षण न दिखें, लेकिन यदि आपको इससे जुड़ी कोई भी तकलीफ़ है, तो आपको एक नेत्र विशेषज्ञ से ज़रूर मिलना चाहिए।

  • काले धब्बे/ ब्लैक स्पॉट्स: यह उम्र के साथ होना एक सामान्य बात है। आपको कुछ फ्लोटर्स (floaters) दिखने शुरू होंगें, लेकिन कुछ भी असामन्य होने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएँ।
  • फ्लोटर्स दिखना रेटिना में मौजूद छोटे क्रेटर (craters) के कारण होता है। लेकिन अगर आपको ये धब्बे अचानक तेजी से बढ़ते दिखें, तो आपको इनके बारे में गंभीरता से सोचने की ज़रुरत है।
  • रोशनी की कोंध लगना: ऐसा आँखों में तरल पदार्थ होने की वजह से होता है। लोग अपनी आंखों के कोनों में लगातार और रुक-रुक कर रोशनी की कोंध या चमक का उठना महसूस करते हैं।
  • डार्क शैडो: यदि रेटिना में किसी तरह की चोट लगी है, तो आप अच्छी तरह से नहीं देख पाएंगे। ऐसे में आपकी आँखों के सामने काला घना अँधेरा सा रहेगा और आपको साफ़ दिखने में दिक्कत महसूस होगी।
  • धुंधली दृष्टि: यदि आपको ठीक तरह से देखने में दिक्कत होती है और बहुत पास या दूर की चीज़ें साफ़ नहीं दिखतीं।

 रेटिना के उखड़ने को कैसे रोका जा सकता है?

आँखों की और समस्याओं की तरह, एक उखड़े रेटिना का कोई इलाज नहीं है। इसे केवल व्यक्तिगत देख-रेख से ही रोका जा सकता है।

इसे रोकने का सबसे अच्छा तरीका इसके बारे में सही जानकारी होना है। यदि आपको इसके कोई भी लक्षण समझ आते हैं तो तुरंत ही डॉक्टर से सलाह लें।

कोशिश करें और अपने सर या आँखों के पास झटका न लगने दें।

बागवानी करते समय, खेलते समय, निर्माण/कंस्ट्रक्शन से जुड़ा कोई काम करते समय या फ़िर कोई भी ऐसा काम करते समय जब आपकी आँखों को चोट लगने का डर हो, तब आँखों की सुरक्षा के प्रति ज़्यादा सजग रहें।

 उखड़े रेटिना के संभव इलाज

आजकल उखड़े रेटिना का इलाज दो तरह से किया जाता है। दोनों ही समय लोकल एनेस्थीसिया देकर सर्जरी करी जाती है और इसमें बहुत कम ख़तरा होता है।

एक तरीका है जिसमें सर्जरी में लेज़र का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें दरारों यानी फिशर को लेज़र की सहयता से जला दिया जाता है। इस तरह से आपके रेटिना पर एक सील सी बन जाती है।

दूसरा तरीका क्रायोसोड है। यह पहले तरीके के समान है, लेकिन यह लीक को बंद कर देता है।

इन दोनों तरह के ऑपरेशन के बारे में सुन कर ऐसा लग सकता है कि इनमें बहुत बड़ी प्रक्रिया को पूरा किया जाता होगा, लेकिन ये दोनों ही सामन्य से ऑपरेशन हैं और इनसे आपकी दृष्टि को किसी तरह का ख़तरा नहीं होता है।

एक बार ऑपरेशन हो जाने के बाद, दृष्टि में काफी सुधार होता है और 6 महीनों में रेटिना पूरी तरह से स्वस्थ्य हो जाता है।

ये ऑपरेशन केवल तभी असफ़ल होते हैं, जब या तो बीमारी का पता बहुत देर से लगे या किसी व्यक्ति ने पहले भी इन इलाजों को अपनाया हो लेकिन उसकी समस्या में कोई सुधार न हुआ हो।

इसलिए आँखों की नियमित जांच होते रहना बेहद ज़रूरी होता है।

हम समझ सकते हैं कि अपने शरीर की देखभाल करना आपका समय तो लेता ही है और साथ में महंगा भी होता है , लेकिन इस बारे में ध्यान न देने से आपकी लाइफ की क्वालिटी पर असर पड़ता है।

ये बात तब और भी ज़्यादा सच हो जाती है जब सवाल आपकी आँखों का हो। याद रखिए कि आपकी आँखें आपके जीवन के हर पहलू में बहुत ही एहम भूमिका निभाती हैं।

  • Lecleire-Collet, A., Muraine, M., Menard, J. F., & Brasseur, G. (2005). Predictive visual outcome after macula-off retinal detachment surgery using optical coherence tomography. Retina. https://doi.org/10.1097/00006982-200501000-00006
  • Campochiaro, P. A., Gaskin, H. C., & Vinores, S. A. (1987). Retinal Cryopexy Stimulates Traction Retinal Detachment Formation in the Presence of an Ocular Wound. Archives of Ophthalmology. https://doi.org/10.1001/archopht.1987.01060110113043