7 कारण जो गर्भाशय के कैंसर के जिम्मेदार हो सकते हैं

हालांकि ओवेरियन यानी गर्भाशय के कैंसर के साथ इसका कोई सीधा संबंध अभी नहीं मिला है, फिर भी गलत खानपान के साथ एक निष्क्रिय जीवनशैली शरीर में जहरीले तत्वों को जन्म दे सकती है। इससे ट्यूमर सेल्स के उत्पादन में बढ़ोतरी हो सकती है।
7 कारण जो गर्भाशय के कैंसर के जिम्मेदार हो सकते हैं

आखिरी अपडेट: 21 मई, 2018

आज हर जगह महिलायें गर्भाशय के कैंसर का शिकार हो रही हैं। यह गर्भाशय में सेल्स की सामान्य वृद्धि के कारण होता है। बड़े हुए सेल्स ट्यूमर बनाते हैं, जो घातक हो जाता है। गर्भाशय के कैंसर का पता लगाने और कुछ मामलों में इसका इलाज करने में आधुनिक चिकित्सा सक्षम है। इसके बावजूद, यह 30 से 59 साल की उम्र में महिलाओं की मौत का चौथा प्रमुख कारण है

गर्भाशय के कैंसर के अधिकांश मामलों को सीधे ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) से जोड़ा जाता है। हालांकि इसके दूसरे कारणों का भी अध्ययन किया गया है। इनसे बहुत से लोग अनजान हैं। यहाँ हम उन 7 कारकों की बात करेंगे जो गर्भाशय के कैंसर के विकास से जुड़े हुए हैं।

1. गर्भाशय के कैंसर से जुड़ा ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV)

गर्भाशय के कैंसर से जुड़ा ह्यूमन पैपिलोलामा वायरस

पहले के घावों का 98% जो गर्भाशय के कैंसर में विकसित होता है, कुछ प्रकार के ह्यूमन पैपिलोमा वायरस से जुड़ा हुआ है। पुरुष इस वायरस के वाहक होते हैं। यौन संबंधों के दौरान अनजाने ही इन्हें वे महिलाओं तक पहुंचाते हैं।

इस संक्रमण को रोकने के लिए अब तक मौजूद सबसे प्रभावी तरीकों में टीकाकरण एक है। यह दवा तीन खुराकों में 9 और 45 की उम्र के बीच दी जाती है।

2. कम उम्र में सेक्स और गर्भाशय के कैंसर का सम्बन्ध

कम उम्र में यौन सक्रियता किसी महिला के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। क्योंकि गर्भाशय तब पूरी तरह से विकसित नहीं होता। इससे यह दूसरी बीमारियों के अलावा वायरस के लिए भी ज्यादा सेंसेटिव होता है।

इस तरह के जोखिम और इसके दूसरे नतीजों को पहचानने में यौन शिक्षा अहम हो सकती है। यह गर्भाशय के कैंसर के साथ उन बातों की ओर से सजग कर सकती है जो किसी महिला के स्वास्थ्य पर असर डालती हों।

3. धूम्रपान

 

धूम्रपान और गर्भाशय का कैंसर

धूम्रपान फेफड़े के कैंसर का प्रमुख कारण है| यह दूसरे प्रकार के ट्यूमर को जन्म देने में भी प्रभावशाली भूमिका निभाता है।

जिनका तम्बाकू से कोई संपर्क नहीं है, उनके मुकाबले रोज धूम्रपान करने वाली महिलाओं में गर्भाशय के कैंसर का जोखिम चार गुना ज्यादा बढ़ जाता है।

तंबाकू में हानिकारक तत्व होते हैं। ये कैंसरग्रस्त सेल्स की अनियंत्रित ग्रोथ में तेजी लाते हैं।

4. गर्भ निरोधकों का लंबे समय तक उपयोग

यद्यपि ओरल गर्भ निरोधकों में किए गए सभी प्रगति के कारण जोखिम कम हो रहे हैं, हालांकि उन्हें 5 साल से अधिक समय तक उपयोग करने से इस प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। कृपया ध्यान दें कि यह केवल एक छोटी सी संभावना है, यह मुख्यतः HPV के कारण होता है।

5. आरामपरस्त लाइफस्टाइल 
गर्भाशय के कैंसर से जुड़ा निष्क्रिय जीवन

मोटापे की शिकार निष्क्रिय जीवन जीने वाली कई महिलायें बाद में इस बीमारी से ग्रस्त होते देखी गयी हैं।

आरामपरस्त ज़िन्दगी आपकी देह में रक्त संचार की समस्याओं को जन्म देती है। इससे संक्रमण का जोखिम बढ़ता है।

इसके अलावा, अतिरिक्त फैट और टॉक्सिन ट्यूमर सेल्स की ग्रोथ में सहायता करते हैं। इससे चीजें और भी बदतर होती हैं।

6. क्लैमाइडिया का संक्रमण

क्लैमाइडिया एक आम बैक्टीरिया है। यह मादा प्रजनन तंत्र को संक्रमित कर सकता है। यह यौन संपर्क के दौरान फैल सकता है| बांझपन का यह एक कारण होता है, क्योंकि संक्रमण से पेल्विक क्षेत्र बढ़ जाता है। इससे प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है।

क्लैमाइडिया के संक्रमण से मुक्त महिलाओं के मुकाबले संक्रमंणग्रस्त महिलाओं में गर्भाशय के कैंसर का जोखिम बहुत ज्यादा पाया गया है।

इसके संक्रमण के ज्यादातर मामलों में कोई निर्णायक लक्षण नहीं देखा जाता| आम तौर पर एक पैल्विक टेस्ट से इस संक्रमण का पता लगाया जाता है।

7. गर्भाशय के कैंसर की फैमिली हिस्ट्री

गर्भाशय के कैंसर की फैमिली हिस्ट्री

अन्य प्रकार के कैंसर के अलावा इस रोग के आनुवांशिक कारण हो सकते हैं। गर्भाशय के कैंसर की फैमिली हिस्ट्री वाली महिलाओं में इस बीमारी के विकसित होने की संभावना दो से तीन गुना ज्यादा होती है।

कई विशेषज्ञों का मानना है कि परिवारों में गर्भाशय के कैंसर की वंशानुगत प्रवृत्ति इम्यून सिस्टम को एचपीवी से लड़ने में कम सक्षम कर देती है। नियमित टेस्ट कराते रहना इस रोग को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है। शुरू में ही पहचान के लिए योनि स्मीयर (पैप स्मीयर) और HPV टेस्ट महत्वपूर्ण हैं।




यह पाठ केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए प्रदान किया जाता है और किसी पेशेवर के साथ परामर्श की जगह नहीं लेता है। संदेह होने पर, अपने विशेषज्ञ से परामर्श करें।