उम्र के 50वें पड़ाव में हैं, यह औरतों के जीवन का शानदार समय होता है

28 सितम्बर, 2018
बीते वर्षों को पीछे मुड़कर देखने की दहशत के बजाय 50 साल की उम्र में आपको आनंद और पूर्णता का एहसास होना चाहिए। जीवन के इस पड़ाव में आपको अपने आस-पास के लोगों से ख़ुशी मिलनी चाहिए।

हमारा समाज कई तरह के लोगों से बना है। कुछ ऐसे लोग भी हैं जो बस घिसी-पिटी और दकियानूसी सोच की बेड़ियों में जकड़े रह जाते हैं। ऐसे लोग औरतों के जीवन के मध्यकाल और उम्र के 50वें पड़ाव से जुड़ी जटिल समस्याओं के बारे में बात करते थकते नहीं हैं।

50 साल की उम्र औरतों के जीवन का वह समय है जब वे मेनोपाज से रूबरू होती हैं।

कम ही लोग समझते हैं कि उम्र चाहे कोई भी हो, उनकी सोच सकारात्मक और उत्साह से भरी होनी चाहिए। इसी तरह उम्र के 50वें पड़ाव में औरतों का जीवन का एक हसीन मोड़ हो सकता है।

वैसे यह बात है तो विडंबना भरी, लेकिन कई औरतें उम्र के 50वें पड़ाव को अधेड़ावस्था की किशोरावस्था मानती हैं। जबकि 50 बरस की उम्र जीवन का वह समय है, जब वे कई सारे हार्मोनल और व्यक्तिगत बदलावों से गुज़र रही होती हैं।

इन तमाम बदलावों को साफ़-सुथरी सोच और जोशीले दिल से स्वीकार किया जाना चाहिए।

उम्र के 50वें पड़ाव को गर्व से ओढ़ना सीखें, 20 वर्ष की बनने का प्रयास व्यर्थ है

आजकल लोग अपनी बढ़ती उम्र को स्वीकारने से कतराते हैं। आप उन्हें अक्सर कहते सुनेंगें, आजकल “40 की उम्र का होना 20 के बराबर है” और “50 की उम्र का मतलब अभी 25 ही है”। ऐसी बातें शायद आपको भी भ्रम में डालें।

  • 50 बरस की उम्र कभी 25 में नहीं बदलने वाली।
  • 50 बरस तक पहुँचते-पहुँचते आपने जीवन के बहुत से रूप देख लिए होंगे और उनसे बहुत कुछ सीख लिया होगा।

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अब तो आपको अपने अनुभवों पर गर्व और ख़ुशी महसूस होती होगी। फ़िर ऐसे में 20 बरस की बनने की क्यों सोचना?

  • अब तक आपके तजुर्बे आपको और भी सशक्त बना चुके होंगे।
  • जीवन के 50 बरसों का सफ़र आपको ज़्यादा मज़बूत और आकर्षक बना देता है।
  • आपको अपने अस्तित्व पर गर्व होता है।
  • इस उम्र तक आप चीज़ों को स्वीकारना सीख जाती हैं। इससे आपको असीम ख़ुशी और संतुष्टि का आभास होता है।

आप अपनी देख-रेख करेंगी, आकर्षक बनने का प्रयास करेंगी, जो कि एक अच्छी सोच है। पर 20 वर्ष की बनने का प्रयास व्यर्थ है। इससे आपको अंदरूनी ख़ुशी नहीं मिल सकती।

बेतुकी चाहतें या अपेक्षाएं केवल निराश ही करती हैं। इनसे बचने की कोशिश करें।

अपनी वास्तविक उम्र को स्वीकारना सीखें

उम्र के 50वें पड़ाव में होने वाले हार्मोनल परिवर्तन आपको डरा सकते हैं

इस मामले में लंदन यूनिवर्सिटी के किंग्स कॉलेज की एक समाजशास्त्री, करेन ग्लेज़र की बात दिलचस्प है। उन्होंने अपनी रिसर्च में तेजी से घट रही एक एक आम घटना का जिक्र किया है।

  • आजकाल महिलाएँ देर से माँ बन रहीं हैं। वे 50 बरस की होने को होती हैं और उस समय उनके बच्चे किशोरावस्था में प्रवेश कर ही रहे होते हैं।
  • महिलाएँ मेनोपाज से जुड़ी परेशानियों, जैसे असहजता, नीदं न आना, मूड स्विंग आदि से जूझ रही होती हैं और इसी समय बच्चे भी हार्मोनल बदलावों से गुज़र रहे होते हैं।
  • ऐसे में विचारों में मतभेद होने की सम्भावना बढ़ जाती है।
  • इस हालात से ताल-मेल बिठाना किसी चुनौती से कम नहीं होता।

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वैसे तो हर महिला कभी न कभी इस दौर से गुज़रती ही है, लेकिन 50 बरस की उम्र में इस दौर से गुज़रना और ज़्यादा कठिन होता है।

  • महिलाओं के अन्दर एस्ट्रोजन हॉर्मोन में कमी आती है, त्वचा में लोच खत्म होने लगती है, बाल ज़्यादा गिरने लगते हैं और थकान भी महसूस होनी शुरू हो जाती है।
  • रोजमर्रा का जीवन कठिन होता चला जाता है।
  • इसी समय एक माँ अपनी परेशानियों से निपटने के साथ-साथ बढ़ती उम्र के बच्चों के साथ भी जूझ रही होती है।

यही वजह है कि उम्र के 50वें पड़ाव की तुलना 25 वर्ष की उम्र से नहीं की जानी चाहिए।

जब आप 50 बरस की हो जाएँ, तो संशय कम होते जाते हैं

कई महिलाएँ 50 बरस की उम्र में अपने जीवन के एक और कठिन दौर से होकर गुज़रती हैं, वह है डिवोर्स।

बढ़ती उम्र कुछ चुनौतियाँ भी लाती है

  • आजकल अक्सर ऐसा देखने को मिल रहा है कि उम्र के 50वें पड़ाव में आकर महिलाएँ तलाक ले लेती हैं। वे या तो बिलकुल अकेली रह जाती हैं, या फ़िर बच्चों के साथ अकेले पड़ जाती हैं।
  • ऐसे में कई बार उन्हें आर्थिक तंगी से भी गुज़रना पड़ता है। परिस्तिथि चाहे जो भी हो, उन्हें डंटे रहना पड़ता है।
  • आपको कई बातों को लेकर शंका होने लगती है। आप समझ नहीं पाती, आप कौन हैं, आपको जीवन से क्या चाहिए। आप असुरक्षित महसूस करने लगती हैं।
  • इस समय आपको अपने मन की सुनकर आगे बढ़ना चाहिए और ख़ुद पर भरोसा रखना चाहिए।

इस उम्र में पहुँचकर आप अपनी प्राथमिकताओं का दोबारा आंकलन करती हैं

कुछ साल पहले तक आपके बच्चे और पति ही आपके जीवन का मुख्य हिस्सा थे। लेकिन 50 की उम्र में आप ख़ुद को भी महत्व देना शुरू कर देती हैं। 

आप हर चीज़ को संतुलित करने का प्रयास करती हैं और आपका आत्म-सम्मान बढ़ता है। आपकी उम्र चाहे जो भी हो, एक बात हमेशा याद रखें, “हर काम का सही समय आज और अभी है।”

इसलिए अपनी देखभाल करें।  दूसरों की ज़रूरतों को पूरा करते समय अपना ख़ुद का भी ख़याल रखें और हमेशा अपने सपनों को उड़ान देती रहें।

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