इस कैंसर मुक्त गाँव का रहस्य क्या है?

11 अक्टूबर, 2018
इस कैंसर मुक्त गाँव के निवासी लैरॉन सिड्रोम से ग्रस्त हैं। लैरॉन सिड्रोम कोशिका विभाजन (cellular division) में कमी ला देता है। यह उन्हे कैंसर के खिलाफ इम्यूनिटी देता है।
 

इसमें कोई भी संदेह नहीं, आज एक समाज के रूप में, हमारे लिए कैंसर सबसे बड़ी चिंताओं में से एक है। विज्ञान और चिकित्सा ने इसकी प्रक्रिया को सुलझाने के प्रयास किए हैं। केवल इसे रोकने के लिए नहीं, बल्कि इसके शिकार मरीजों को ज्यादा ट्रीटमेंट के विकल्प देने के लिए।

यदि हम आपसे कहें, एक ऐसा जन समुदाय है, बल्कि एक विशेष “प्रकार” का व्यक्ति है, जिसके लिए कैंसर शब्द कोई भी चुनौती पेश नहीं करता। इस पर शायद आपको विश्वास नहीं होगा।

फिर भी, यह सच है। आज के इस लेकः में इस ख़ूबसूरत और ख़ास जगह के बारे में जानने के लिए आपको अपने साथ जोड़ना चाहेंगे। यह जगह इक्वैडोर के लोजा में मौजूद वैली ऑफ विलाकाम्बा है, यह कैंसर मुक्त गाँव है।

कैंसर मुक्त गाँव

इस अविश्वसनीय जगह के बारे में कुछ ज्यादा जानने के लिए आपको एक विशेष जेनेटिक कंडीशन के बारे में बताना ज़रूरी है। इसे लैरॉन सिंड्रोम (Laron syndrome) कहते हैं।

लैरॉन सिंड्रोम एक विरल, वंशागत रोग है जो विकास में कमी का कारण बन जाता है। इसके अतिरिक्त, यह जेनेटिक लक्षण (trait) कैंसर और डायबिटीज के खिलाफ भी 100% इम्यूनिटी देता है।

आइए, विस्तार से इसके बारे में जानें।

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पूरी दुनिया में लैरॉन सिंड्रोम से ग्रस्त 350 लोग

सबसे पहले, लैरॉन सिंड्रोम की खोज 1950 के दशक के शुरुआती दौर में इजरायल के एक डॉक्टर स्वी लैरॉन ने की थी। रोगियों के एक समूह में उनकी दिलचस्पी थी। ये लोग देश के एक छोटे से गाँव में रहते थे, जो कैंसर मुक्त गाँव था। गाँव वालों का कद बहुत छोटा था।

कैंसर मुक्त गाँव के लोगों की शारीरिक अवस्था कुल मिलाकर बहुत अच्छी थी। वे जो भी चाहते, खा सकते थे और उन्हें कभी भी डायबिटीज नहीं होता था। उनके पूर्वजों में से किसी को भी कभी भी कैंसर नहीं हुआ था।

30 साल से ज्यादा समय तक रिसर्च करने के बाद 2001 में डॉक्टर लैरॉन ने इन विचित्र सिंड्रोम की प्रक्रिया के बारे मे अपनी रिसर्च रिपोर्ट प्रकाशित की। मोटे तौर पर, ये  मुख्य चीजें हैं जो उन्हें मिली थीं :

  • लैरॉन सिंड्रोम ने दुनिया भर में 350 व्यक्तियों को प्रभावित किया है। उनमें से अधिकांश इक्वैडॉर के लोजा में कैंसर मुक्त गाँव वैली ऑफ विलाकाम्बा में रहते हैं। बाकी लोग इजरायल में और कुछ भूमध्यसागरीय देशों में रहते हैं।
  • जो व्यक्ति इस जेनेटिक अवस्था के शिकार हैं, वे शारीरिक कद-काठी में बहुत छोटे होते हैं। वे बिरले ही तीन फीट से अधिक लंबे हैं।
 
  • अपने छोटे कद के अलावा उनमें मुखाकृति विशेषतायें भी समान हैं।
  • इस सिंड्रोम की जड़ उनमें ग्रोथ हॉर्मोन्स की कमी है।

हालांकि ग्रोथ हॉर्मोन या GH, उनमें सामान्य मात्रा में ही निर्मित होते हैं लेकिन एक दूसरा हॉर्मोन, IGF-1 का अभाव, जिसका इन्सुलिन के साथ नजदीकी सम्बन्ध है, GH को पूरे शरीर में समान रूप से काम करने में बाधा मिलती है।

यह सिंड्रोम केवल तभी विकसित हो सकता है जब माता और पिता, दोनों में यह जीन मौजूद हो।

लैरॉन सिंड्रोम – कैंसर या डायबिटीज नहीं

इस जेनेटिक कंडीशन वाले व्यक्ति सामान्य जीवन बिताते हैं। अपने छोटे कद के अलावा वे किसी भी बीमारी या शारीरिक समस्या का अनुभव नहीं करते।

इसका प्रभाव इतना शक्तिशाली है कि डॉक्टर चकित रह जाते हैं। इन लोगों में से बहुतों का आहार बहुत अच्छा नहीं। वे ज्यादा मात्रा में चर्बी खाते हैं तथा तले हुए और मीठा भोजन खाते हैं। फिर भी उन्हें कभी भी डायबिटीज या कैंसर नहीं होता।

कैंसर मुक्त गाँव और लैरॉन सिंड्रोम

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जब से लैरॉन सिंड्रोम की खोज हुई है, कैंसर मुक्त गाँव में एक भी व्यक्ति में इस रोग की डायग्नोसिस नहीं हुई है। इसके कारण निम्नलिखित हो सकते हैं:

  • सभी चीजों का समाधान लीवर और उस हॉर्मोन में है जो ग्रोथ हॉर्मोन के रिलीज को धीमा कर देता है।
  • IGF-1 केवल बच्चों के विकसित होने के लिए ही जरूरी नहीं है। जब आप वयस्क हो जाते हैं, तब यह कोशिका-विभाजन को उकसाना जारी रखता है। यह संभावित रूप से कैंसर का फैलना आसान बनाता है।
  • लैरॉन सिंड्रोम वाले व्यक्ति इन्सुलिन के लिए ज्यादा संवेदनशील होते हैं। इससे उन्हें डायबिटीज और मेटाबोलिज्म से संबंधित दूसरी समस्याओं को धीमा करने में सहूलियत मिलती है।
  • इन लोगों को सबसे बड़ी समस्या बचपन में होती है, क्योंकि उन्हें जिस तरह विकसित होना चाहिए, वे नहीं होते।
  • फिर भी, जब वे वयस्क हो जाते हैं, तब IGF हॉर्मोन के निर्माण में कमी हमारे आज के समाज के सबसे प्रचलित रोगों : कैंसर और डायबिटीज के विरुद्ध सबसे अच्छी सुरक्षा देती है।
 
विज्ञान के लिए चुनौती, और लैरॉन सिंड्रोम वालों के लिए आशा

हालांकि उन्हें कैंसर या डायबिटीज कभी भी नहीं होगा, लैरॉन सिंड्रोम वाले लोगों के जीवन असल में बहुत खुशियों से भरे नहीं हैं।

इतिहासकारों का मानना है, वे स्पैनिश गड़ेरिया यहूदियों के वंशज हो सकते हैं। इन्होंने सोलहवीं सदी में ईसाई धर्म में धर्मांतरण किया और दक्षिण अमेरिका में बस गए।

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फिलहाल, विज्ञान कैंसर के हमले को धीमा करने और किसी क्रांतिकारी दवा का निर्माण करने के लिए इस हॉर्मोन की प्रक्रिया सुलझाने की कोशिश कर रहा है।

अब तक ये प्रयोग केवल प्रयोगशालाओं में किए जा रहे हैं।

कैंसर मुक्त गाँव और लैरॉन सिंड्रोम का सम्बन्ध

लैऱॉन सिंड्रोम वालों के लिए एक नई आशा है। जब किसी बच्चे में इसकी डायग्नोसिस की जाती है तब उन्हें IGF-1 हॉर्मोंन को सिंथेटिक रूप में खरीदने का एक विकल्प होता है। समस्या है इसकी कीमत सालाना लगभग $20,000 है।

कम लोग ही इस कीमत को चुका सकते हैं। आशा की जाती है, इस कैंसर मुक्त गाँव के लोगों के लिए और कैंसर के इलाज के लिए भविष्य उज्ज्वल है।

 
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