ग्लाइसेमिक इंडेक्स की गणना कैसे करें

जनवरी 23, 2020
ग्लाइसेमिक इंडेक्स मधुमेह रोगियों के लिए उपयोगी है, लेकिन उन लोगों के लिए भी जो हाइपोग्लाइसीमिया के शिकार हैं। इसे कैसे मापा जाता है? इस आर्टिकल में हम इस बारे में बात करेंगे।

ग्लाइसेमिक इंडेक्स एक पैरामीटर है जिसे हाल के वर्षों में अहमियत मिली है, खासकर डायबिटीज रोगियों के लिए। यह पैरामीटर खाद्य पदार्थों की ब्लड शुगर लेवल बढ़ाने की क्षमता को मापता है। ब्लड शुगर खून में ग्लूकोज की मात्रा होती है, जो खाद्य पदार्थों में मौजूद कार्बोहाइड्रेट के पाचन के बाद रहती है।

जिस स्पीड से खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर को बढ़ाते हैं उसके आधार पर उन्हें क्लासिफाई करने के लिए ग्लाइसेमिक इंडेक्स को करीब 30 साल पहले बनाया गया था। हालाँकि इसकी उपयोगिता डायबिटीज रोगियों तक सीमित नहीं है। इस लेख में हम आपको इसके बारे में जानने लायक सभी ज़रूरी बातों पर रोशनी डालेंगे।

ग्लाइसेमिक इंडेक्स क्या है?

ग्लाइसेमिक इंडेक्स क्या है?

ग्लाइसेमिक इंडेक्स एक पैरामीटर है जो ब्लोद्द शुगर लेवल को बढ़ाने वाली भोजन की क्षमता को मापता है।

ग्लाइसेमिक इंडेक्स को ठीक से समझने के लिए पहले डायबिटीज के बारे में बात करना जरूरी है। डायबिटीज एक बीमारी है जो रक्त शर्करा के स्तर को प्रभावित करती है। क्योंकि इस मामले में शरीर इंसुलिन का उत्पादन नहीं करता है या इसका सही इस्तेमाल नहीं कर पाता है। इंसुलिन का काम सेल्स में ग्लूकोज के घुसने की अनुमति देना है।

ऐसा होने पर समय के साथ अतिरिक्त ब्लड शुगर से शरीर को भारी नुकसान हो सकता है। कई अध्ययन डायबिटीज को दिल, आंख और किडनी की बीमारियों से जोड़ते हैं।

इस समस्या के कारण ग्लाइसेमिक इंडेक्स बनाया गया। यह खाद्य पदार्थों को खाने के बाद शरीर में ब्लड शुगर लेवल को मापने की सहूलियत देता है। इस तरह लोगों के लिए उनकी सेहत के अनुसार सबसे उपयुक्त खाद्य पदार्थों का चुनाव करना संभव हो गया।

उदाहरण के लिए डायबिटिक आदमी को कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले भोजन की ज़रूरत होती है। हालांकि जब कोई व्यक्ति हाइपोग्लाइसीमिया (संभवतः कम ब्लड शुगर वाली जानलेवा स्थिति) से पीड़ित होता है, तो उन्हें हाई इंडेक्स वाले दूसरे तरह के खाद्य की ज़रूरत होती है।

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ग्लाइसेमिक इंडेक्स की कैसे मापें

हम कह सकते हैं कि यह इंडेक्स इस बात की नंबरों में अभिव्यक्ति है जो बताता है कि कोई खाना खाने के बाद ब्लड शुगर कैसे बदलता है। दरअसल यह एक साधारण लैब टेस्ट है। आजकल कई कैलकुलेटर आपको खाद्य पदार्थों के ग्लाइसेमिक इंडेक्स को जानने की सहूलियत देते हैं।

यह उस रेट को निर्धारित करता है जिस पर कार्बोहाइड्रेट खों  में ग्लूकोज के रूप में बहता है। इसे 0 से 110 के स्केल पर मापा जाता है। इस प्रकार:

  • 0 से 55 तक एक निम्न इंडेक्स है।
  • 56 और 69 के बीच औसत वैल्यू है।
  • 70 से 110 तक हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स है।

इसलिए हाई वैल्यू होने पर ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ जाएगा। डायबिटीज रोगियों को ग्लूकोज में इस उछाल से बचने की कोशिश करनी चाहिए। इसलिए इस इंडेक्स को ध्यान में रखते हुए फ़ूड प्लान बनाना उनके लिए फायदेमंद होगा है।

यह कैसे बदलता है

खाद्य पदार्थों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स ऐसे फैक्टर पर निर्भर करता है जैसे कि रेसिपी या सेवन के आधार पर। उदाहरण के लिए प्राकृतिक अवस्था में मिलने वाले फलों के मुकाबले जूस का ग्लाइसेमिक इंडेक्स ऊँचा होता है।

जैसा कि हमने ऊपर बताया, यह पैरामीटर लोगों को उनके फ़ूड प्लान की योजना बनाने में मदद कर सकता है। हालांकि कई दूसरे प्रभावशाली फैक्टर भी हैं, जैसे ग्लाइसेमिक लोड। इसलिए डाइट शुरू करने से पहले एक्सपर्ट से सलाह लेना ज़रूरी है।

इसके अलावा एक ही खाद्य का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कुछ पहलुओं के अनुसार बदलता रहता है। उदाहरण के लिए फल या सब्जियों के मामले में वे जितने ज्ययादा पके होंगे उनका यह पैरामीटर ऊँचा होगा। इसी तरह रेसिपी और सेवन करने के तरीके भी इस इंडेक्स को प्रभावित करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि रोटी सेंकने का तरीका भी इस इंडेक्स पर असर डाल सकता है।

भोजन कैसे पकाया जाता है यह इसकी इंडेक्स रेटिंग निर्धारित कर सकती है। पास्ता पकाए जाने में दिए जाने वाले वक्त के आधार यह इंडेक्स कम या ज्यादा हो सकता है।

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निष्कर्ष

ग्लाइसेमिक इंडेक्स कुछ स्थितियों में एक उपयोगी पैरामीटर है, जैसे कि डायबिटीज रोगियों के लिए। यह अपने खून में शुगर के उछाल को खाद्य पदार्थों के साथ अपेक्षाकृत तालमेल बिठाने की सहूलियत देता है

कुल मिलाकर सबसे ज्यादा सिफारिश किये जाने वाले खाद्य पदार्थों में बीन्स, सब्जियां और अधिकांश फल शामिल हैं। फाइबर खाने के ग्लाइसेमिक इंडेक्स को कम करता है।

दूसरी ओर यह लोगों को यह जानने में मदद कर सकता है कि हाइपोग्लाइसीमिया से पीड़ित किसी व्यक्ति की मदद कैसे की जाए। इस मामले में हाई इंडेक्स वाले भोजन चुनने से उन लोगों को मदद मिलेगी जो इस स्थिति से पीड़ित हैं।

हालाँकि निर्णय लेने से पहले डॉक्टर या न्यूट्रीशन एक्सपर्ट से सलाह लेना सबसे अच्छा है, जो आपकी डाइट को प्रभावित करेगा।

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