खुशी अपने भीतर से आती है: यह किसी की मोहताज नहीं

31 दिसम्बर, 2018
खुशी पाने के लिए आपका खुद को लेकर सहज और शांत होना सबसे महत्वपूर्ण है। जब आप अपनी वर्तमान अवस्था में सहज होते हैं, तब आप हर परिस्थिति में ख़ुशी खोज लेते हैं।

खुशियाँ आप कई तरह से पा सकते हैं। लेकिन यह निश्चित है, हमें खुशी का आभास अपने भीतर से होता है। यह किसी बाहरी साधन की मोहताज नहीं होती।

आप अकेलें हों या किसी चाहने वाले के साथ, आपको मिलने वाली हर तरह की खुशी एक खास सोर्स के माध्यम से आप तक पहुँचती है। इस सकारात्मक उर्जा का जादुई स्त्रोत आपका इमोशनल ब्रेन यानी भावनात्मक मस्तिष्क होता है। आपकी ख़ुशी में आपकी भावपूर्ण सोच का बहुत बड़ा हाथ होता है।

हम चाहेंगे, आप इस बात को स्पष्ट रूप से समझने का प्रयास करें। निस्संदेह किसी चाहने वाले के साथ होना एक बहुत ही खूबसूरत एहसास है। लेकिन कई बार दो प्यार करने वाले भी आपस में खुश नहीं रह पाते। अगर आप अपने बारे में अच्छा महसूस नहीं करते हैं, तो आपको कभी भी पूरी खुशी नहीं मिल पाएगी।

संतुलन और खुशी हमेशा अपने भीतर से आनी चाहिए। एक शांत दिल खुश रहना जानता है। चाहे आप अकेले हों या किसी के साथ, खुशी पाने के लिए आपके दिल का शान्त होना ज़रूरी है।

हम आज की चर्चा के इस विषय पर आपको अपनी विचारधारा सांझी करने के लिए आमंत्रित करते हैं।

खुशी भीतर से आती है,यह एक आंतरिक सफ़र है

अगर आप किताबों के गलियारों से गुज़र जाएँ, तो जगह-जगह आपको व्यक्तिगत खुशी के विषय पर ढेरों किताबें देखने को मिलेंगी। इन किताबों का मकसद खुशी ढूँढना, इसे तैयार करना सिखाना होता है।

यह निश्चित रूप से विडंबना ही है कि साधनों और तकनीक से लैस इस समाज में रहते हुए भी हम आज अकेलेपन और दुख का शिकार हैं।

वैसे तो हम सब अपने व्यक्तिगत जीवन में खुश रहने का प्रयास करते हैं। लेकिन कई बार हमारे मन में एक अप्रिय भावना घर कर बैठती है। हमे लगता है, हम कभी खुश नहीं रह सकते हैं।

क्या कुछ ऐसा है, जिसे पढ़ने से आपको आतंरिक खुशी पाने में मदद मिल सकती है?

हम आपको इस विषय पर लिखी गई एक अच्छी किताब- “यू कैन बी हैप्पी इन अलास्का” (You Can be Happy in Alaska) पढ़ने का सुझाव देंगे। यह किताब ज्ञानात्मक मनोविज्ञान (cognitive psychology) पर केन्द्रित है। इसमें तनाव, डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी जटिल परिस्थितियों से निपटने के मजेदार तरीके बताए गए हैं।

इंसान प्यार करने के लिए बना था, जबकि चीजें इस्तेमाल किये जाने के लिए। इस समय दुनिया भर में भारी अराजकता के कारणों में से एक यह है कि, चीजों से प्रेम किया जाने लगा है और इंसानों का उपयोग किया जाता है।

यू कैन बी हैप्पी इन अलास्का – राफेल संतान्द्रो

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अपने आज मे जीना सीखें

खुशी पाने के लिए अपने वर्तमान में बिना किसी डर के जीना

खुशी आखिकार डर का न होना है। 

भयमुक्त जीवन जीने के अपने कई फ़ायदे हैं। अपने जीवन से डर को हमेशा के लिए खत्म कर देना आपकी जिंदगी को नए आयाम दे सकता है। कोशिश करके इस किस्म के भय को अपने जीवन से निकालें:

  • अकेलेपन का डर
  • आपको लोग वैसे नहीं चाहेंगे जैसा आप सोचते हैं
  • निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त न कर पाने का डर
  • दूसरों की उम्मीदों पर खरे न उतर पाने का डर
  • चीजों के बदल जाने का डर
  • लोग या चीज़ों को खोने का डर

आंतरिक ख़ुशी पाने के लिए आपको सबसे पहले अपने डर को समझ कर उससे उबरना होगा। 

ऐसा करने का सबसे अच्छा तरीका है, अपने आत्मविश्वास को मज़बूत करना। आपको लोगों और चीज़ों के प्रति अपना मोह कम करना चाहिए।

धीरे-धीरे कदम बढ़ाना सीखें

जीवन के सफ़र में अपने क़दमों को धीरे-धीरे बढ़ाने का अर्थ बिना किसी को साथ लिए अकेले चलते चलना नहीं है। जीवन में परिवार, दोस्तों और अपने करीबियों के साथ से बढ़कर कुछ नहीं है।

लेकिन यदि आपके साथ चलने वाला व्यक्ति आपको आपकी कमियाँ और दोष गिनाता रहेगा तो आप ख़ुशी पाने से वंचित रह जाएँगे।

  • अपने क़दमों को धीरे-धीरे बढ़ाने का मतलब है हर उस चीज़ को छोड़ कर आगे बढ़ने का प्रयास करना जिससे आपके आत्म सम्मान और आपको ठेस पहुँचती हो। 
  • एक आज़ाद सोच को पंख देने के लिए अपनी प्राथमिकताओं को समझना महत्वपूर्ण है।
  • केवल उस चीज़ को प्राथमिकता दें जो आपके जीवन में महत्व रखती हो।

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खुशी पाने के लिए ख़ुद से प्यार करना बेहद ज़रूरी है

ख़ुद अपने आपसे प्रेम करना एक ऐसा रास्ता है जिस पर जीवन भर चलना चाहिए। आप इस बात को बखूबी जानते हैं कि खुशी का दौर आता और जाता रहता है।

  • अपना आंतरिक संतुलन बनाए रखना सबसे ज़रूरी होता है।
  • आतंरिक रूप से संतुलित होने पर आपकी भावना और विचारधारा साथ-साथ चलते हैं।
  • अपनी खुशी बनाए रखने के लिए खुद से प्रेम करना सबसे अहम है।
  • आप अपनी मानसिक और भावनात्मक विचारधारा को एक साथ ले कर आगे बढ़ सकते हैं।
  • जब आप अपने आपसे प्रेम करते हैं, तो किसी और के बंधन में नहीं बंधते हैं। आप ख़ुद से जुड़ जाते हैं।
  • याद रखें, दूसरों को यह नसीहत देने का अधिकार नहीं है कि आपको कब खुश रहना चाहिए और कब नहीं।
  • हमेशा अपनी खुशी और चैन को प्राथमिकता देनी चाहिए। इन्हें पाने के लिए हर विपरीत स्थिति का डंटकर सामना करें।

जब आप अपनी पहचान को लेकर खुश होते हैं, जीवन के सभी डर को खत्म करते हैं और आज़ादी से अपने सपनों को पूरा करने के लिए आगे बढ़ते हैं, तभी आपको आतंरिक ख़ुशी का आभास होता है।

इस सोच को विकसित करने से आपको आतंरिक खुशी मिल सकती है।

  • Steimer, T. (2002). The biology of fear-and anxiety-related behaviors. Dialogues in clinical neuroscience, 4(3), 231.
  • Post, S. G. (2005). Altruism, happiness, and health: It’s good to be good. International journal of behavioral medicine, 12(2), 66-77.