ऑस्टियोआर्थराइटिस से क्यों होता है घुटने में दर्द?

28 अगस्त, 2019
ऑस्टियोआर्थराइटिस शरीर में एक इन्फ्लेमेटरी यानी सूजन पैदा करने वाली प्रक्रिया शुरू कर देता है। यह घुटने में दर्द का कारण बनने के साथ-साथ घुटने के मूवमेंट में भी हस्तक्षेप कर सकता है। यह जानने के लिए आगे पढ़ें कि ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण घुटने में दर्द क्यों होता है।
 

ऑस्टियोआर्थराइटिस या आर्थ्रोसिस एक सिस्टेमिक, डिजेनेरेटिव बीमारी है जो किसी भी जॉइंट को प्रभावित कर सकती है। यह अक्सर हड्डियों के सिरों पर पाए जाने वाले प्रोटेक्टिव कार्टिलेज के क्षय टूटने में उभरता है। अगर यह घुटनों में हो, तो ऑस्टियोआर्थराइटिस घुटने के दर्द का कारण बन जाता है।

कई अलग-अलग स्थितियां और चोटें घुटने को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, ऑस्टियोआर्थराइटिस एक पुरानी बीमारी है जो इसे सबसे अधिक प्रभावित करती है। वास्तव में, इस बीमारी के सबसे आम रूपों में से एक को घुटने के पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस के रूप में जाना जाता है।

मध्यम आयु वर्ग के लोगों और वरिष्ठ नागरिकों में इसकी अभिव्यक्ति आम है। यह विकलांगता के मुख्य कारणों में से एक है।
दर्द से निपटने में मदद करने के लिए कई उपलब्ध चिकित्सा और उपचार हैं। हालांकि, अंतर्निहित प्रगतिशील प्रक्रिया के लिए कोई निश्चित इलाज नहीं है।

ऑस्टियोआर्थराइटिस घुटने में दर्द का कारण क्यों बनती है?

यह समझने के लिए कि पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस घुटने के दर्द का कारण बनता है, यह पता लगाना अहम है कि यह जॉइंट में क्या करता है।

इससे शरीर का कोई भी अंग प्रभावित हो सकता है, लेकिन कई मामलों में घुटने की हड्डियों को ढकने वाले कार्टिलेज के क्षय से नतीजे सामने आते हैं। आर्टिकुलर कार्टिलेज सॉफ्ट और फिसलन लिए होती है। उनका काम घुटने की हड्डियों के छोरों की हिफाजत करना और उन्हें कुशन करना है। जब वे क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, तो जॉइंट अपनी फ्लेक्सिबिलिटी और नॉर्मल ढंग से मूव करने की क्षमता खो देता है।

यह एक इन्फ्लेमेटरी प्रक्रिया शुरू करता है। इससे क्रॉनिक दर्द का एपिसोड शुरू होता है जो समय बीतने पर और बदतर हो जाता है। अगर समय के साथ इसकी प्रोग्रेस को धीमा करने के लिए इलाज नहीं अपनाया गया तो नॉर्मल ढंग से मूव करने में समस्या दिखाई देगी और वह ज्यादा गंभीर सिम्पटम का शिकार होगा।

 

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घुटने की ऑस्टियोआर्थराइटिस की किस्में

ऑस्टियोआर्थराइटिस घुटने के दर्द का कारण बनता है, जिसकी गंभीरता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह किस स्टेज में है। इस तरह जब एक मरीज की डायग्नोसिस की जाती है, तो डॉक्टर इस कंडीशन के टीन क्लासिफिकेशन को ध्यान में रखता है।

व्यक्ति घुटने की ऑस्टियोआर्थराइटिस के निम्न प्रकार का शिकार हो सकता है:

घुटने की हल्की ऑस्टियोआर्थराइटिस

इस प्रकार की ऑस्टियोआर्थराइटिस वाले मरीजों को असुविधा तब होती है, जब वह बहुत मशक्कत कर लेता है। इन रोगियों में घुटने की एक्स-रे में कोई स्पष्ट बदलाव नहीं दिखता है।

घुटने की मॉडरेट ऑस्टियोआर्थराइटिस

इस मामले में घुटने के एक्स-रे में कुछ ध्यान देने योग्य बदलाव देखे जा सकते हैं। दर्द के एपिसोड लंबे समय तक रहने या मीडियम इंटेंसिटी वाली एक्सरसाइज करने के बाद उभरते हैं। इसके अलावा सिम्पटम एक साल में कई बार दिखाई देते हैं और फिर से उभरते हैं।

घुटने की गंभीर ऑस्टियोआर्थराइटिस

गंभीर हो जाने पर घुटने की ऑस्टियोआर्थराइटिस लंबे समय तक घुटने के दर्द का कारण बनता है, यहां तक ​​कि मामूली परिश्रम के बाद भी। आमतौर पर मरीज दिन के पहले 20 मिनट में जकड़न और दर्द महसूस करते हैं, पर समय बीतने पर लक्षण कम हो जाते हैं।

इस बिंदु पर सूजन वाले घुटने के साथ कई जॉइंट इफ्युजन एपिसोड होते हैं। इसलिए दर्द के एपिसोड कई बार होते हैं जो चलने-फिरने की क्षमता पर असर डालते हैं। इन मामलों में एक्स-रे में कार्टिलेज के क्षय होने के साफ़ संकेत देखे जा सकते हैं।

इसके लक्षण

ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षण कार्टिलेज की क्षय  के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। सामान्य तौर पर इसकी क्लिनिकल ​​अभिव्यक्तियाँ दर्द, सूजन और हिलने-डुलने में समस्या के रूप में सामने आती है।

 

सूजन ही वह वजह है जिससे ऑस्टियोआर्थराइटिस घुटने के दर्द का कारण बनती है। ऐसा तब होता है जब जॉइंट के भीतर अतिरिक्त साइनोवियल फ्लूइड जमा होता है। ऐसे में जॉइंट प्रभावित लिंब को सपोर्ट नहीं करता जैसे उसे करना चाहिए। इसलिए यह चलने-फिरने की क्षमता को सीमित करता है और व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता में कमी लाता है।

संक्षेप में इसके लक्षणों में शामिल हो सकते हैं:

  • दर्द जो सुबह तेज हो जाता है और घुटने की “वार्मिंग अप” के साथ धीरे-धीरे कम हो जाता है।
  • निष्क्रिय रहने के बाद स्टिफनेस का अहसास होता है।
  • घुटनों को मोड़ने के बाद लंबे समय तक दर्द (उदाहरण के लिए लंबे समय तक बैठने के बाद)।
  • गंभीर दर्द जो चलने-फिरने पर बिगड़ जाता है।

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शुरुआत में ही इसकी डायग्नोसिस क्यों महत्वपूर्ण है?

यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि सभी प्रकार की ऑस्टियोआर्थराइटिस समय गुजरने पर बिगड़ जाती है। इस तरह जितनी तेजी से मरीज की डायग्नोसिस हो, उतना ही बेहतर ढंग से रोग का इलाज होता है। डॉक्टर इस कंडीशन की पुष्टि करने के लिए एक्स-रे की सीरीज की सिफारिश कर सकते हैं।

ये टेस्ट कार्टिलेज की क्षति की मात्रा का पता लगा सकते हैं और यह भी कि क्यया घुटने की हड्डियों को अलग करने वाला जॉइंट स्पेस कम हो गया है।

एक बार ऑस्टियोआर्थराइटिस के स्टेज का पता लगा लेने पर डॉक्टर सुझाव दे सकते हैं:

  • लाइफस्टाइल में बदलाव (हेल्दी डाइट और कम इंटेंसिटी वाली फिजिकल एक्टिविटी)
  • फिजियोथेरेपी
  • वजन घटाने (अगर रोगी मोटापे से ग्रस्त है)
  • पेन किलर और एंटी इन्फ्लेमेटरी दवाएं
  • सर्जरी (आर्थोस्कोपी या जॉइंट ट्रांसप्लांट; सिर्फ गंभीर मामलों में)

संक्षेप में, ऑस्टियोआर्थराइटिस के घुटने में दर्द का कारण की वजह वह इन्फ्लेमेटरी प्रोसेस है जो आर्टिकुलर कार्टिलेज के नष्ट होने से होती है। यह लगातार बढ़ने वाली बीमारी है, इसलिए इसकी जल्द से जल्द डायग्नोसिस और इलाज कराना ज़रूरी है।

 
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